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Friday, May 7, 2021
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किसान आंदोलन : राकेश टिकैत को जान से मारने की धमकी , मामला दर्ज

New Delhi: तीनों कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे आंदोलन का नेतृत्व करने वाले भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत को एक युवक ने फोन पर जान से मारने की धमकी दी है. जानकारी के अनुसार आरोपी...

आज रेल रोकेंगे किसान!

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के विरोध में पिछले 84 दिन से आंदोलन कर रहे किसान संगठन गुरुवार को देश भर में रेल रोकेंगे।

रेल रोको आंदोलन’ 18 फरवरी को होगा : राकेश टिकैत

भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने आज कहा कि 'रेल रोको आंदोलन' कल दोपहर 12 बजे से शाम चार बजे तक होगा।

बॉर्डर पर लगे बैरिकेड के पास टिकैत ने जमीन पर बैठकर खाया खाना

कृषि कानूनों पर दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी है। पुलिस की तरफ से बॉर्डर को पूरी तरह सील कर दिया गया है।

सरकार अपनी बात पर अड़ी रही तो 15 मिनट में बाहर आ जाएंगे : राकेश टिकैत

दिल्ली के विज्ञान भवन में किसानों के प्रतिनिधियों और सरकार के मंत्रियों के बीच नौवें दौर की बातचीत शुरू होने से पहले भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि अगर सरकार अपनी बात पर अड़ी रही तो 15 मिनट बाद बाहर आ जाएंगे।

किसान आंदोलन का दायरा बढ़ा

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली की सीमा पर चल रहे किसान आंदोलन का दायरा बढ़ता जा रहा है। राजस्थान के कई इलाकों से लेकर पंजाब के अंदर और हरियाणा के कुछ इलाकों में भी किसानों का आंदोलन तेज हो गया है।

नई चिट्ठी, दोहराई बाते!

देश के कई राज्यों के किसान दिल्ली की कड़ाके की ठंड में दिल्ली की सीमा पर 29 दिन से प्रदर्शन कर रहे हैं और केंद्र सरकार उनकी मांगें सुनने की बजाय उनको चिट्ठी लिख रही है।

ठोस प्रस्ताव के बगैर वार्ता नहीं

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों ने सरकार पर टालमटोल का रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए अपना रुख सख्त कर लिया है।

बदलाव नहीं कानूनों की वापसी हो

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों का विरोध में 27 दिन से दिल्ली की सीमा पर और देश के कई हिस्सों में आंदोलन कर रहे किसान सरकार से वार्ता के बारे में बुधवार को फैसला करेंगे।

खुद्दार किसान और अय्यार सरकार!

एक तरफ अपने खून-पसीने से धरती का सीना चीर कर अनाज उपजाने वाले खुद्दार और मेहनतकश किसान हैं तो दूसरी ओर बाबू देवकीनंदन खत्री के उपन्यास ‘चंद्रकांता संतति’ के अय्यारों की तरह की सरकार है।
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