बॉर्डर पर लगे बैरिकेड के पास टिकैत ने जमीन पर बैठकर खाया खाना

कृषि कानूनों पर दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी है। पुलिस की तरफ से बॉर्डर को पूरी तरह सील कर दिया गया है।

सरकार अपनी बात पर अड़ी रही तो 15 मिनट में बाहर आ जाएंगे : राकेश टिकैत

दिल्ली के विज्ञान भवन में किसानों के प्रतिनिधियों और सरकार के मंत्रियों के बीच नौवें दौर की बातचीत शुरू होने से पहले भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि अगर सरकार अपनी बात पर अड़ी रही तो 15 मिनट बाद बाहर आ जाएंगे।

किसान आंदोलन का दायरा बढ़ा

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली की सीमा पर चल रहे किसान आंदोलन का दायरा बढ़ता जा रहा है। राजस्थान के कई इलाकों से लेकर पंजाब के अंदर और हरियाणा के कुछ इलाकों में भी किसानों का आंदोलन तेज हो गया है।

नई चिट्ठी, दोहराई बाते!

देश के कई राज्यों के किसान दिल्ली की कड़ाके की ठंड में दिल्ली की सीमा पर 29 दिन से प्रदर्शन कर रहे हैं और केंद्र सरकार उनकी मांगें सुनने की बजाय उनको चिट्ठी लिख रही है।

ठोस प्रस्ताव के बगैर वार्ता नहीं

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों ने सरकार पर टालमटोल का रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए अपना रुख सख्त कर लिया है।

बदलाव नहीं कानूनों की वापसी हो

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों का विरोध में 27 दिन से दिल्ली की सीमा पर और देश के कई हिस्सों में आंदोलन कर रहे किसान सरकार से वार्ता के बारे में बुधवार को फैसला करेंगे।

खुद्दार किसान और अय्यार सरकार!

एक तरफ अपने खून-पसीने से धरती का सीना चीर कर अनाज उपजाने वाले खुद्दार और मेहनतकश किसान हैं तो दूसरी ओर बाबू देवकीनंदन खत्री के उपन्यास ‘चंद्रकांता संतति’ के अय्यारों की तरह की सरकार है।

किसानों की भूख हड़ताल शुरू

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के विरोध में किसानों ने क्रमिक भूख हड़ताल शुरू कर दी है। दिल्ली की सीमा पर जहां-जहां किसान आंदोलन कर रहे हैं वहां 11-11 किसानों की टीम भूख हड़ताल पर बैठी।

मानों ‘ब्रेन डेड’ अवस्था और जीवन!

इस पृथ्वी पर भारत वह दास्तां है, जहां लोग लूट, गुलामी में होते हुए भी उसकी सुध में जीते हुए नहीं हैं। वजह गुलामी-लूट के चौदह सौ साल के झटकों से बनी ब्रेन डेड याकि मृत मष्तिष्क अवस्था है।

अब थाली बजवाएंगे किसान

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों ने अगले रविवार को रेडियो पर प्रसारित होने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम के विरोध का ऐलान किया है।

सरकार से चाहिए समाधान

दिल्ली और आसपास के इलाकों में पारा तीन डिग्री तक गिर जाने के बावजूद दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर खुले आसमान के नीचे 24 दिन से प्रदर्शन कर रहे किसानों ने कहा है कि जब तक सरकार तीनों कृषि कानूनों को वापस नहीं लेती है वे अपने घर वापस नहीं लौटने वाले हैं।

किसानों को नए कानूनों का फायदा: मोदी

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन के 24 दिन हो गए हैं। एक तरफ केंद्र सरकार उनसे कह रही है कि बातचीत से समाधान निकालना है तो दूसरी ओर प्रधानमंत्री लगभग रोज इन कानूनों के फायदे समझा रहे हैं।

बस, किसी तरह लौटे किसान!

यही केंद्र सरकार का फिलहाल नंबर एक मिशन है लेकिन बिना कृषि बिल को वापिस लिए या रद्द किए। सरकार को 20 जनवरी तक हर हाल में दिल्ली-हरियाणा सीमा से किसानों की भीड़ खत्म करानी है।

पंजाबी किसान शहीदी मिजाज का!

हां, पंजाब के सिक्ख किसानों का इन शहीदी महिना है। इसी महिने सिक्खों के दसवें गुरू के दो बेटे दिल्ली दरबार के औरंगजेब से लड़ते हुए शहीद हुए थे और दो बेटे सरहिंद में दीवाल में चीने गए।

किसानों की ‘अमीरी’ देखी नहीं जा रही!

प्रचार हो रहा है कि ये कैसे किसान हैं, जो जिंस की पैंट-जैकेट पहनते हैं, पिज्जा खाते हैं, मसाज कराते हैं, बड़ी गाड़ियों से आते हैं और ट्रैक्टर पर डीजे बजा कर डांस करते हैं।

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