समाज में ब्राह्मण ही नेतृत्वकारी, प्रगतिशील!

पता नहीं इस समय यह लिखना चाहिए कि नहीं! समय बहुत खराब है। मगर फिर सोचा कि जब समय को खुद यह कहानी कहनी पड़ रही हो तब आप उसे लिपिबद्ध करने की जिम्मेदारी से कैसे मुंह चुरा सकते हैं?