क्या यूपी के ब्राह्मण ऐसे सधेंगे?

भाजपा में चर्चा है कि उत्तर प्रदेश के ब्राह्मण नाराज हैं। यह आज की चर्चा नहीं है। योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही इसकी चर्चा शुरू हो गई थी और उसके बाद कुछ घटनाएं भी ऐसी हुईं, जिनसे इस बात को बल मिला। योगी के पूरे कार्यकाल में ब्राह्मणों पर अत्याचार की चर्चा रही, ब्राह्मण अधिकारियों को किनारे किए जाने की खबरें आईं, जिसका अंत नतीजा यह है कि ब्राह्मण नाराज है और चोटी खोल ली है कि किसी तरह से योगी को हराना है। उसी चर्चा में यह बात शामिल है कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह प्रदेश के ब्राह्मणों को साधने का प्रयास कर रहे हैं। यह भी पढ़ें: यूपी से ही दिल्ली का हिंदू पीएम अब देखें कि यूपी के ब्राह्मणों को कैसे साधने का प्रयास हो रहा है? कांग्रेस पार्टी के नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद को भाजपा में शामिल कराया गया। इसका ऐसा प्रचार किया गया, जैसे ब्राह्मणों के सर्वोच्च नेता ने भाजपा का दामन थाम लिया और अब ब्राह्मण भाजपा के सिवा किसी को वोट नहीं देंगे। जितिन प्रसाद को शामिल कराने से पहले अमित शाह उनसे मिले और उसके बाद मीडिया में यह नैरेटिव बनवाया गया कि भाजपा के… Continue reading क्या यूपी के ब्राह्मण ऐसे सधेंगे?

योगी का इरादा, सही या जोखिम भरा?

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोच-समझ कर जोखिम लेते दिख रहे हैं। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से अगर सचमुच उनका टकराव है और वे शीर्ष नेतृत्व की इच्छा के विपरीत अपने चेहरे पर चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं लेकिन यह कैलकुलेटेड रिस्क है। वे राजनीतिक और चुनावी पहल अपने हाथ में रखना चाहते हैं और अपने चुने हुए मैदान पर अपने नियमों और शर्तों के साथ लड़ना चाहते हैं। यह अच्छी सोच है। हर महत्वाकांक्षी और साहसी नेता अपनी भविष्य की योजनाओं पर इसी तरह से अमल करता है। अगर भाजपा की ही राजनीति के संदर्भ में देखें तो कह सकते हैं कि 20 साल पुराना इतिहास दोहरा रहा है। कोई 20 साल पहले इसी तरह का टकराव गुजरात के तब के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी के तब के सर्वोच्च नेता, प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के बीच दिखा था। तब वाजपेयी ने मोदी को राजधर्म निभाने की सलाह दी थी और मोदी ने इस पर ध्यान देने की कोई जरूरत नहीं समझी थी। हालांकि बाद में उन्होंने इस्तीफे का प्रस्ताव दिया, लेकिन वह एक दिखावा था, प्रधानमंत्री पद की गरिमा के लिए फेस सेविंग था। यह भी पढ़ें: गलती मानने में कोई बुराई नहीं! तब नरेंद्र मोदी… Continue reading योगी का इरादा, सही या जोखिम भरा?

योगी और ब्राह्मण नाराजगी

नई परिस्थितियों में बीजेपी और संघ के लिए सामाजिक समीकरण साधना मुश्किल हो रहे हैं। योगी का अपने आप में एक ब्रांड बन जाना संघ परिवार के लिए न उगलते न निगलते वाली स्थिति बन गया है। … यहां समर्थ जातियों की प्रबल राजनीतिक प्रतिद्वद्विता से निपटने में भाजपा को पसीने आ रहे हैं। यह भी पढ़ें: परिवार है तो कांग्रेस की आत्मा है! भारतीय राजनीति से आप जाति को नहीं हटा सकते। जब तक कि जाति ही खत्म न हो जाए। जाति मतलब समर्थ- असमर्थ जातियों का प्रबल राजनीतिक जाति बोध। भाजपा या संघ ने पिछड़ी जाति के नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाया कहीं कोई विरोध या समस्या नहीं हुई क्योंकि मोदी पिछड़ों में भी कमजोर जाति से आते थे। इसी तरह नंबर दो अमित शाह को बनाया। उसमें भी कोई समस्या नहीं आई। क्योंकि शाह एक छोटे समुदाय जैन समाज से थे। शिवराज सिंह चौहान 15 साल से मुख्यमंत्री हैं, चौथी बार भी बनने में सफल हो गए। अब थोड़ी बहुत समस्या आई है, मगर वह भी उनके स्वयं के कारण नहीं बल्कि उनके पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश की वजह से। क्या हुआ उत्तर प्रदेश में? उत्तर प्रदेश में भाजपा और संघ का नया प्रयोग बड़े खतरनाक मोड़… Continue reading योगी और ब्राह्मण नाराजगी

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