विरोध से बेपरवाह सरकार

देशभर में विरोध के बीच विवादित नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) 10 जनवरी से लागू हो गया। यानी सरकार ने विरोध प्रदर्शनों की कोई परवाह नहीं की। इसका यह भी मतलब हुआ कि सरकार सीएए समेत सभी मामलों में अपने नैरेटिव को लेकर आगे बढ़ने पर अड़ी हुई है। उसकी किसी संवाद या सहमति बनाने में कोई दिलचस्पी नहीं है। वरना, वह इतने बड़े विरोध के बाद वह जरूर विरोध कर रहे समूहों की शिकायत दूर करने की कोशिश करती। मगर केंद्र सरकार ने बीते शुक्रवार को नागरिकता कानून की अधिसूचना जारी कर दी। नागरिकता संशोधन विधेयक 10 दिसंबर को लोकसभा और उसके एक दिन बाद राज्यसभा में पारित हुआ था। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद 12 दिसंबर को यह कानून बन गया। इसके तहत 31 दिसंबर 2014 तक पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में प्रताड़ना का शिकार हो रहे हिंदू, ईसाई, सिख, बौद्ध, पारसी और यहूदी अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान है। गृह मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस कानून के नियमों को तय करने का काम अभी बाकी है। इस कानून की कट ऑफ डेट 31 दिसंबर 2014 निर्धारित की गई है। इसके तहत आवेदकों को उपयुक्त दस्तावेजों के साथ यह सिद्ध करना होगा… Continue reading विरोध से बेपरवाह सरकार

भाजपा का भस्मासुरी कानून

नागरिकता संशोधन कानून लगभग वैसी ही भूल है, जैसी मोदी सरकार ने नोटबंदी की भयंकर भूल की थी। इन दोनों कामों के करने के पीछे भावना तो बहुत अच्छी रही लेकिन इनके दुष्परिणाम भयावह हुए हैं। नोटबंदी से सारा काला धन सफेद हो गया। काले धनवालों ने उल्टे उस्तरे से सरकार की मुंडाई कर दी। सैकड़ों लोगों ने अपनी जान से हाथ धोए और 30 हजार करोड़ रु. नए नोट छापने में बर्बाद हुए। लेकिन नोटबंदी ने भाजपा सरकार का ज्यादा नुकसान नहीं किया, क्योंकि लोगों को पक्का विश्वास था कि वह देश के भले के लिए की गई थी लेकिन नागरिकता संशोधन कानून मोदी सरकार और भाजपा की जड़ों को मट्ठा पिला सकता है। यह कानून भाजपा के लिए कहीं भस्मासुरी सिद्ध न हो जाए। इस कानून का मूल उद्देश्य तो बहुत अच्छा है कि पड़ौसी मुस्लिम देशों के शरणार्थियों को भारत की नागरिकता दी जाए लेकिन उसका आधार सिर्फ धार्मिक उत्पीड़न हो, यह बात भारत के मिजाज से मेल नहीं खाती। उत्पीड़न किसी भी तरह का हो, और वे उत्पीड़ित सिर्फ तीन पड़ौसी मुस्लिम देशों के ही क्यों, किसी भी पड़ौसी देश के हों, भारत के द्वार उनके लिए खुले होने चाहिए। हर व्यक्ति के गुण-दोष परख कर ही… Continue reading भाजपा का भस्मासुरी कानून

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