नागरिकता कानून से भी फायदा नहीं

सुशांत कुमार–  झारखंड में भारतीय जनता पार्टी प्रतिष्ठा बचाने में कामयाब रही पर सत्ता से थोड़ी दूर ठहर गई। जो नतीजे आए उससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, मुख्यमंत्री रघुवर दास की प्रतिष्ठा भी बच गई है। पर सबसे अहम बात यह है कि नागरिकता कानून का चुनावी महत्व साबित नहीं हो सका। असल में भारतीय जनता पार्टी ने झारखंड में नागरिकता कानून को ही मुद्दा बनाया था, कम से कम आखिरी तीन चरणों में। इससे पहले लोकसभा चुनाव के बाद महाराष्ट्र और हरियाणा में भाजपा ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का मुद्दा उठाया था और तीन तलाक कानून पर भी वोट मांगा था। लेकिन ये दोनों मुद्दे चल नहीं पाए थे। इनसे भाजपा को बहुत फायदा नहीं हो पाया था। तभी झारखंड चुनाव से ठीक पहले उठाए गए नागरिकता कानून के मुद्दे की परीक्षा झारखंड के चुनाव में होने वाली थी। नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने झारखंड के चुनाव में पूरी तरह से अपने को झोंका था और हर सभा में नागरिकता कानून और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर का मुद्दा उठाया था। कश्मीर और राम मंदिर का मुद्दा भी दोनों के भाषणों में प्रमुखता से उठाया गया। ध्यान रहे नागरिकता संशोधन बिल लोकसभा में नौ… Continue reading नागरिकता कानून से भी फायदा नहीं

यह संविधान ताक पर रखना

इस्लामी देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में प्रताड़ित हिन्दू, जैन, सिख, ईसाई, बौद्ध और पारसियों को भारत में शरण देने तथा नागरिकता प्रदान करने के लिए लागू किए गए नागरिकता संशोधन कानून 2019 के विरोध में राजनीतिक दलों और मुस्लिम संगठनों ने संविधान को भी ताक पर रख दिया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने तो असम में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) लागू करने से पहले ही होहल्ला मचाना शुरु कर दिया था। अपने नेताओं को असम में अशांति फैलाने के लिए भेजा। इतना ही नहीं ममता बनर्जी ने तो नागरिकता संशोधन कानून पर जनमत संग्रह कराने के लिए विदेशी हस्तक्षेप को भी आमंत्रण दे दिया। ममता ने कहा था कि संयुक्त राष्ट्र नागरिकता संशोधन कानून पर जनमत संग्रह कराए। यह अलग बात है कि संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने एंटोनियो गुतेरस ने ममता की मांग को नकारते हुए कहा कि केवल राष्ट्रीय सरकार के अनुरोध पर ही जनमत संग्रह कराया जाता है। अपनी मांग खारिज होने पर ममता बनर्जी ने भी बयान पर पलटी मार ली। अब वे कह रही है कि उन्होंने तो ओपिनियन पोल कराने की बात कही थी। ममता के पलटी मारने के बाद संसद और बाहर अपने अनाप-शनाप… Continue reading यह संविधान ताक पर रखना

नागरिकताः मोदी थोड़ी हिम्मत करें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज रामलीला मैदान में जो भाषण दिया, यदि वे उसकी भावना पर ठीक से अमल करें तो आज देश में जो उपद्रव हो रहा है वह बंद हो जाएगा। वह होता ही नहीं। आज भी वह बंद हो सकता है, बशर्ते कि वे नागरिकता संशोधन विधेयक को अपने भाषण के अनुरुप बना लें।उन्होंने कहा कि हम देश की किसी भी जाति, मजहब, संप्रदाय और वर्ग के विरुद्ध नहीं हैं। हमने दिल्ली की सैकड़ों कालोनियां वैध कीं, करोड़ों लोगों को गैस कनेक्शन दिए और सार्वजनिक हित के जितने भी काम किए, क्या कभी उससे उसकी जाति या धर्म पूछा ? इसमें शक नहीं कि यह बात ठीक है लेकिन क्या भारत की कोई सरकार जाति या धर्म के आधार पर भेदभाव करे तो उसका कुर्सी पर टिके रहना असंभव नहीं हो जाएगा? यह जो नागरिकता संशोधन कानून सरकार ने बनाया है, इसका दोष यही है कि इसमें धार्मिक आधार पर स्पष्ट भेदभाव है। यह तो बहुत अच्छा है कि कुछ पड़ौसी मुस्लिम देशों के हिंदू, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध और पारसी लोगों को, यदि वे उत्पीड़ित हैं तो उन्हें शरण देने की घोषणा भारत सरकार ने की है।ऐसा करके सरकार ने गांधी, नेहरु, मनमोहनसिंह और अशोक गहलौत… Continue reading नागरिकताः मोदी थोड़ी हिम्मत करें

क्या झुक रही है सरकार?

इस बीच सरकार और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी आम-जन के आक्रोश को शांत करने के लिए कुछ कदम उठा रही हैं। 19 दिसंबर को केंद्र सरकार ने अखबारों में नागरिकता संशोधन अधिनियम के बारे में कथित गलत सूचना पर बड़े बड़े विज्ञापन निकाले। 20 दिसंबर को सरकार की तरफ से एक ऐसा बयान आया, जिस से लगा कि सरकार कम से कम नागरिकों के रजिस्टर को लेकर थोड़ी नरम हो रही है। गृह राज्य मंत्री जीके रेड्डी ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर यह रजिस्टर बनाने की अभी कोई योजना नहीं है। सरकार की नरमी का एक और संकेत असम से भी आया, जहां मुख्यमंत्री सर्बानंदा सोनोवाल ने प्रदर्शनकारियों को बातचीत के लिए आमंत्रण दिया। भाजपा के 12 विधायकों के उनसे मिलने की भी खबर आई। विधायकों ने उनसे कहा कि वे इस संकट को समाप्त करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मनाएं। एक मीडिया हाउस की खबर के मुताबिक कर्नाटक सरकार ने एनआरसी लागू ना करने का फैसला किया है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार पहले ही ऐसा एलान कर चुके हैं। पश्चिम बंगाल और केरल जैसी विपक्षी सरकारें एनआरसी और नागरिकता संशोधन कानून के मामले में ऐसा इरादा पहले ही जता चुकी हैं। राजस्थान और छत्तीसगढ़ के… Continue reading क्या झुक रही है सरकार?

देखो, बूझो भावी भारत की फोटो!

पता नहीं नरेंद्र मोदी-अमित शाह, भाजपा, संघ ने गुजरे सप्ताह भावी भारत की तस्वीरों को बूझा या नहीं? हां, पांच-दस-बीस साल बाद भारत के जिलों, शहरों में वहीं लगातार हुआ करेगा जैसा हाल में दिल्ली, लखनऊ, मुंबई, कोलकाता, आदि उन दर्जनों जगह दिखा है, जहां नमाजी टोपी- दाढ़ी याकि वह विशेष पहनावे वाली आबादी है, जिसका संकेत देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक जनसभा में कहा था कि नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करने वालों को उनके पहनावे से जानो। तभी संभव है कि गुरुवार की तस्वीरों में खास पहनावे की भीड़ देख मोदी-शाह मन ही मन उछले हों कि वाह, मुसलमान अब सड़कों पर है तो हमारे हिंदू वोट और पक्के। बन रहा है 2024 में जीत का पक्का रोडमैप! बावजूद इसके संभव है कि मोदी-शाह-योगी के दिमाग में भी ख्याल आया हो कि ऐसा यदि भारत में नियमितता से होने लगा, विरोध-प्रदर्शनों ने यदि कश्मीर घाटी वाली दशा को भारत के महानगरों में लाइव बनवा दिया तो आगे क्या होगा? दिल्ली में मंगलवार-बुधवार को जो हुआ और जामिया नगर सीलमपुर, जाफराबाद आदि में पत्थरबाजी, उपद्रव, पुलिस ठुकाई की श्रीनगर जैसी जो तस्वीरें बनीं तो सोचना जरूरी है कि दिल्ली के तुर्कमान गेट के अंदर की पुरानी दिल्ली… Continue reading देखो, बूझो भावी भारत की फोटो!

नागरिकता कानून और संघवाद का संकट

शशांक राय– प्रधानमंत्री बनने के बाद से नरेंद्र मोदी ने सबसे ज्यादा बार सहकारी संघवाद का जिक्र किया होगा। जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री होते थे तब भी वे देश के संघीय ढांचे को लेकर सबसे ज्यादा चिंतित रहते थे। तब की मनमोहन सिंह की सरकार जब भी कोई नई नीति लाती थी तो नरेंद्र मोदी उसे भारत के संघीय ढांचे की कसौटी पर कसते थे। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने इसी कसौटी पर जीएसटी से लेकर एनसीटीसी तक की व्यवस्था का विरोध किया था। वे उस समय के तमाम विपक्षी मुख्यमंत्रियों को एकजुट करते थे और केंद्र के ऊपर दबाव बनाते थे। पर अफसोस की बात है कि जब से वे खुद प्रधानमंत्री बने हैं तब से यह संघीय ढांचा ही सबसे ज्यादा चुनौतियां झेल रहा है। अभी केंद्र सरकार ने नागरिकता कानून को संशोधित किया है। यह केंद्र के अधिकार का विषय था और संसद में केंद्र सरकार के पास बहुमत का आंकड़ा है। इसलिए उसने संशोधन बिल पास करा कर नागरिकता कानून को बदल दिया। अब एक एक करके राज्यों की सरकारों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। पहले पश्चिम बंगाल सरकार ने कहा कि वह इस कानून को लागू नहीं करेगी। इसके बाद केरल सरकार ने… Continue reading नागरिकता कानून और संघवाद का संकट

मुस्लिमों को मोदी ने दिया भरोसा

नई दिल्ली। संशोधित नागरिकता कानून पर देश भर में चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार चुप्पी तोड़ी। उन्होंने देश भर के मुसलमानों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि उनको किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि एनआरसी का कोई प्रस्ताव अभी सरकार के सामने नहीं है और न इस पर कोई चर्चा हुई है। मोदी ने प्रदर्शन कर रहे नौजवानों से कहा कि वे उनका जितना विरोध करना चाहें, करें पर सरकारी संपत्ति को नुकसान न पहुंचाएं और गरीब आदमी का ऑटो न चलाएं। उन्होंने कांग्रेस पर भी निशाना साधा और कहा कि मुस्लिम देशों से मिल रहे समर्थन की वजह से कांग्रेस परेशान है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा- नागरिकता कानून से कोई प्रभावित नहीं हो रहा है। उन्होंने विरोध करने वालों को शहरी नक्सली बताते हुए कहा- कुछ अर्बन नक्सल झूठ फैला रहे हैं। आप लोग पढ़े-लिखे हो, पहले इसे पढ़ तो लो। इस कानून से किसी भी मुस्लिम को डिटेंशन सेंटर में नहीं रहना होगा। भारत में डिटेंशन सेंटर हैं कहां? ये लोग झूठ बोल कर देश को गुमराह कर रहे हैं। आप लोग इनके बहकावे में न आओ। दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित… Continue reading मुस्लिमों को मोदी ने दिया भरोसा

मुसलमानों से नाइंसाफी नहीं: गडकरी

नागपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को नई दिल्ली में भाजपा की रैली में नागरिकता कानून को लेकर देश के मुसलमानों को भरोसा दिलाया तो केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने नागपुर में एक रैली में उसी अंदाज में मुसलमानों को भरोसा दिलाया। गडकरी ने शनिवार को हुई रैली में कहा कि नागरिकता कानून भारत के मुसलमानों के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि नया कानून लाकर एनडीए सरकार मुसलमानों के साथ कोई नाइंसाफी नहीं कर रही है। गडकरी ने कांग्रेस पर वोट बैंक की राजनीति के लिए दुष्प्रचार करने का भी आरोप लगाया। नागरिकता कानून के समर्थन में निकाली गई रैली को संबोधित करते हुए गडकरी ने मुसलमानों को भरोसा दिलाया। इस रैली का आयोजन एक स्थानीय संगठन ने किया, जिसे भाजपा और राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ का समर्थन प्राप्त है। गडकरी ने कहा- अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के धार्मिक अल्पसंख्यकों को इंसाफ देने के लिए सरकार द्वारा लिया गया यह फैसला भारत के मुसलमानों के खिलाफ नहीं है। हम मुसलमानों को देश से बाहर भेजने की बात नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की एकमात्र चिंता देश में रह रहे विदेशी घुसपैठियों की है। मंत्री ने कहा कि मुसलमानों को समझना चाहिए कि कांग्रेस उनके विकास में मदद… Continue reading मुसलमानों से नाइंसाफी नहीं: गडकरी

इस आंदोलन से मोदी-शाह के मजे!

उन्नीस जनवरी को नागरिकता कानून के खिलाफ उत्तर प्रदेश के शहरों, देश के विभिन्न महानगरों में जो विरोध, प्रदर्शन, आंदोलन हुआ वह विपक्ष के लिए आत्मघाती है। बतौर प्रमाण उस शाम योगी आदित्यनाथ का हुंकारा था कि उपद्रवियों को देख लेंगे। उनके चेहरे वीडियो में रिकार्डेड हैं। जो नुकसान हुआ है वह उनसे वसूलेंगे। मतलब मुख्यमंत्री के चेहरे पर घबराहट, परेशानी, कानून-व्यवस्था बिगड़ने का गम नहीं था, पुलिस पर गुस्सा नहीं था, बल्कि उपद्रवियों को मजा चखाने का निश्चय था। अब यह बताने की जरूरत नहीं है कि लखनऊ या संभल जैसे शहरों में उस दिन जो उपद्रव हुआ तो भीड़ का इलाका और चेहरे कौन थे? और ध्यान रहे योगी की तरह टीवी पर ऐसे असम के मुख्यमंत्री सोनोवाल ने कड़ा रूख नहीं दर्शाया जबकि असम में हिंसा भी हुई, लोग भी मरे, भाजपा विधायकों-मंत्रियों के घर पत्थर फेंके गए और कई इलाकों में सब कुछ ठप्प है! सो, नागरिकता कानून पर अखाड़ा सज गया है। एक तरफ सेकुलर, उसका झंडाबरदबार विपक्ष और मुसलमान है तो दूसरी और वे मोदी-शाह-योगी हैं, जिनसे हिंदू घरों में मैसेज गया है कि देखो-देखो विरोध-प्रदर्शन करने वालों के चेहरों को, उनके पहनावे को। ये मुसलमान हैं, जिहादी, अलगाववादी-माओवादी हैं। जाहिर है जो है… Continue reading इस आंदोलन से मोदी-शाह के मजे!

और लोड करें