देश के हाई कोर्ट्स को सलाम

देश की उच्च न्यायपालिका में लोगों के कम होते भरोसे की मजबूत होती धारणा के बीच देश की उच्च अदालतों ने रोशनी की किरण दिखाई है। दिल्ली से लेकर मद्रास हाई कोर्ट और इलाहाबाद से लेकर गुजरात हाई कोर्ट तक ने कमाल किया है। कोरोना वायरस के संक्रमण के दौर में जब देश की सर्वोच्च अदालत तक इस धारणा के साथ काम कर रही है कि सरकार के प्रशासकीय कामकाज में न्यायिक दखल नहीं होना चाहिए, ऐसे समय में हाई कोर्ट्स ने रास्ता दिखाया है। कम से कम चार हाई कोर्ट्स ने राज्य सरकारों को जिम्मेदार बनाने वाली टिप्पणियां की हैं। हालांकि उनके भी आदेश नहीं आए हैं, जिससे कहा जाए कि अब नजीर बनेगी। लेकिन मौजूदा समय में किसी जज का राज्य सरकारों के कामकाज पर तीखी मौखिक टिप्पणी भी बहुत बड़ी बात है और दिल्ली हाई कोर्ट ने तो सीधे केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा किया और मद्रास हाई कोर्ट ने संवैधानिक संस्था होने के नाम पर पवित्र गाय बने केंद्रीय चुनाव आयोग को उसकी गलतियों के लिए आईना दिखाया। ध्यान रहे पिछले साल कोरोना वायरस की पहली लहर के समय जब प्रवासी मजदूर पलायन कर रहे थे और देश की छह हाई कोर्ट्स ने केंद्र से… Continue reading देश के हाई कोर्ट्स को सलाम

चुनाव आयोग को क्या हो गया है?

केंद्रीय चुनाव आयोग के लिए कोरोना वायरस की महामारी के बीच पांच राज्यों में चुनाव कराना और उसमें भी खास कर पश्चिम बंगाल में आठ चरण में चुनाव कराना बहुत शर्मिंदगी का कारण बना है। पार्टियों ने आयोग पर पक्षपात का या केंद्र सरकार से मिले होने का जो आरोप लगाया वह अपनी जगह है, अदालतों की फटकार अलग पड़ी। इसके बावजूद ऐसा नहीं लग रहा है कि चुनाव आयोग कोई भी फैसला करने में अपने दिमाग का इस्तेमाल कर रहा है। पहले पता नहीं किस मजबूरी या किस दबाव में बंगाल में आठ चरण में चुनाव कराया और चुनाव के बीच कोरोना विस्फोट के बावजूद पता नहीं किस दबाव में बचे हुए तीन-चार चरणों का चुनाव एक साथ कराने का फैसला नहीं किया, लेकिन अब वोटों की गिनती के लिए भी जो नियम बनाए जा रहे हैं वे समझ से परे हैं। मद्रास हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग को फटकार लगाते हुए कहा कि कोरोना की दूसरी लहर के लिए आयोग जिम्मेदार है और यह सवाल भी किया क्यों नहीं आयोग के अधिकारियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा चलाया जाए। हाई कोर्ट ने वोटों की गिनती के दिए कोविड प्रोटोकॉल सख्ती से लागू करने को कहा तो आयोग ने… Continue reading चुनाव आयोग को क्या हो गया है?

मतदान के दिन रैलियों पर रोक हो

वैसे तो चुनाव से जुड़े अनेक नियम और आचार संहिता के अनेक मुद्दे हैं, जिनमें बदलाव की सख्त जरूरत है लेकिन मतदान के दिन बड़े नेताओं के रैली करने का मुद्दा ऐसा है, जिस पर तत्काल रोक लगनी चाहिए। मतदान के दिन होने वाली रैलियां, रोड शो और चुनाव प्रचार वोटिंग को तो प्रभावित करता ही है साथ स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव की संभावना को भी कम करता है। इसके अलावा मतदान के दिन होने वाली रैलियों से हिंसा फैलने की संभावना अन्य दिनों के मुकाबले ज्यादा होती है। पहले भी कई चरण में मतदान होते थे लेकिन मतदान को प्रभावित करने के लिए वोटिंग के दिन रैलियां करने का चलन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुरू किया। जिस दिन मतदान होता है उस दिन वे अगले चरण के मतदान वाले किसी क्षेत्र में रैली करने पहुंच जाते हैं। जैसे शनिवार यानी 17 अप्रैल को पश्चिम बंगाल में पांचवें चरण का मतदान चल रहा था और उस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने दो चुनावी रैलियों को संबोधित किया। इससे पहले भी तीन चरण के मतदान के दिन उन्होंने रैली की और एक चरण के मतदान के दिन बांग्लादेश में भाषण आदि दिए। उसका भी एक मकसद मतदान को ही प्रभावित करना था।… Continue reading मतदान के दिन रैलियों पर रोक हो

रैली, रोड शो रोके चुनाव आयोग

केंद्रीय चुनाव आयोग को देश में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों का तत्काल संज्ञान लेना चाहिए। अगर आयोग को खुद नहीं दिख रहा है तो उसे सोशल मीडिया में बन रहे मजाक को ही पढ़ना चाहिए तो समझ में आएगा कि इस समय आयोग कितनी बड़ी भूल कर रहा है।

अधिकृत सूचना के आधार पर वैधानिक कार्रवाई होगी : शिवराज

मध्यप्रदेश की पूर्ववर्ती कमलनाथ सरकार के कार्यकाल के दौरान रुपयों के बड़े पैमाने पर कथित लेनदेन संबंधी मामले में केंद्रीय निर्वाचन आयोग की ओर से संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई संबंधी पत्र

पार्टियों के सुझाव पर तय होगी बिहार विधानसभा चुनाव की तारीख

बिहार में कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की तीन सदस्यीय टीम आज राज्य के दौरे पर है, उधर राज्य में चुनाव

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