Chaturmas 2023

  • विष्णु का योग निद्रा का चातुर्मास

    मान्यता है कि चातुर्मास की अवधि के दौरान किसी भी जीवन रूप को मारने से संतों को नुकसान हो सकता है। तदनुसार वे अपने आंदोलनों को प्रतिबंधित करते हैं। इस काल में भूमि शयन, ब्रह्म बेला में उठकर स्नानादि कार्य से निवृत हो ईश्वरभक्ति, वेदपाठ, भजन- कीर्तन, मौन व्रत पालन, एक समय भोजन आदि कार्य शुभ माने गये हैं। विवाह संस्कार, जातकर्म संस्कार, गृह प्रवेश आदि सभी मंगल कार्य पूर्णतः निषेध माने गये हैं। पौराणिक मान्यतानुसार चौमासा में किये गये शुभ कार्य का फल प्राप्त नहीं होता है। 30 जून- चातुर्मास प्रारम्भ भारतीय पंचांग के अनुसार आषाढ़ शुक्ल एकादशी से...