घोंसले का सत्य जानें,  भावना में उड़ें नहीं!

बुढ़ी अम्माओं का धरना-2: उड़ना यों आजादी का सुख है और विरोध-प्रदर्शन लोकतंत्र की जिंदादिली। बावजूद इसके भ्रम, झूठ और बिना दिशा के उड़ना भटकना है। जीवन की, जमीन के घोंसले की हकीकत से कोसों दूर होना है। जरा शाहीन बाग (याकि आम मुस्लिम घर का मनोभाव) से रिपोर्ट हुए इन वाक्यों पर गौर करें- कोई भी सरकार अब मुसलमानों के लिए नहीं है। इस उम्र में मैंने लड़ने का फैसला लिया। मैं बहुत कुछ देख चुकी हूं। उन्होंने हमें बांट दिया है। अब शाहीन ने परवाज (उड़ना) की है। हिना ने मोबाइल पर एक मैसेज भेजा- हम लोग यहां पर डटे हुए हैं। जब तक हम लोगों की मांगें पूरी नहीं हो जातीं, हम लोग यहीं रहेंगे। 75 साल की नूर-उन-निसां कहती हैं- मेरा दिल अब सख़्त हो चुका है। अब आप मुझे गोली मार सकते हो। मैं नहीं डर रही हूं। छतरपुर से अपनी दो साल की बेटी के साथ प्रदर्शन में हिस्सा लेने आई मुबीना ने बताया कि उन्हें जब भी समय मिलता है, वे देश और अपनी संस्कृति बचाने के लिए यहां आ जाती हैं। सोचें, पर्दे में रहने वाली औरतों का यह जज्बा! जाहिर है मुस्लिम मनोभाव में जीवन-मरण का संकट बना है। आर-पार के… Continue reading घोंसले का सत्य जानें, भावना में उड़ें नहीं!

नागरिकता मुद्दे पर जनता मोदी के साथ

सोनिया गांधी पूरी तरह छोटे मोटे विपक्षी दलों पर निर्भर हो गई हैं। वे समझती हैं कि जैसे यूपीए बना कर उन्होने 2004 में वाजपेयी सरकार को अपदस्थ करने में कामयाबी पाई थी तरह कभी न कभी मोदी को अपदस्थ कर देंगीं। लेकिन काठ की हांडी बार बार नहीं चढती। कांग्रेस की हालत तब इतनी खराब नहीं हुई थी जितनी अब है। राहुल गांधी की हमलावर राजनीति के बावजूद उस की स्थिति में मई 2019 में कोई सुधार क्यों नहीं हुआ, सीटें भले ही आठ बढ़ गई , लेकिन अखिल भारतीय वोट में 1.03 प्रतिशत की गिरावट हुई। कांग्रेस भले ही अब राफेल सौदे में तथाकथित घोटाले का नाम नहीं लेती , मोदी को चोर भी नहीं कहती पर वह यह मानने को तैयार नहीं कि कांग्रेस को झूठ बोलने का नुक्सान हुआ| अगर वह यह मान लेती तो भविष्य में झूठ के सहारे राजनीति करने से परहेज करती। वह जिन वामपंथी और क्षेत्रीय दलों के बूते नकारात्मक राजनीति कर रही हैं 2019 के चुनावों में उन का भी सात प्रतिशत वोट भाजपा खा गई। कांग्रेस अभी तक विश्लेष्ण करने को तैयार ही नहीं है कि जनता उस से इतनी नाराज क्यों है? इसका कारण सिर्फ यूपीए सरकार का भ्रष्टाचार… Continue reading नागरिकता मुद्दे पर जनता मोदी के साथ

विरोध से बेपरवाह सरकार

देशभर में विरोध के बीच विवादित नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) 10 जनवरी से लागू हो गया। यानी सरकार ने विरोध प्रदर्शनों की कोई परवाह नहीं की। इसका यह भी मतलब हुआ कि सरकार सीएए समेत सभी मामलों में अपने नैरेटिव को लेकर आगे बढ़ने पर अड़ी हुई है। उसकी किसी संवाद या सहमति बनाने में कोई दिलचस्पी नहीं है। वरना, वह इतने बड़े विरोध के बाद वह जरूर विरोध कर रहे समूहों की शिकायत दूर करने की कोशिश करती। मगर केंद्र सरकार ने बीते शुक्रवार को नागरिकता कानून की अधिसूचना जारी कर दी। नागरिकता संशोधन विधेयक 10 दिसंबर को लोकसभा और उसके एक दिन बाद राज्यसभा में पारित हुआ था। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद 12 दिसंबर को यह कानून बन गया। इसके तहत 31 दिसंबर 2014 तक पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में प्रताड़ना का शिकार हो रहे हिंदू, ईसाई, सिख, बौद्ध, पारसी और यहूदी अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान है। गृह मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस कानून के नियमों को तय करने का काम अभी बाकी है। इस कानून की कट ऑफ डेट 31 दिसंबर 2014 निर्धारित की गई है। इसके तहत आवेदकों को उपयुक्त दस्तावेजों के साथ यह सिद्ध करना होगा… Continue reading विरोध से बेपरवाह सरकार

भाजपा का भस्मासुरी कानून

नागरिकता संशोधन कानून लगभग वैसी ही भूल है, जैसी मोदी सरकार ने नोटबंदी की भयंकर भूल की थी। इन दोनों कामों के करने के पीछे भावना तो बहुत अच्छी रही लेकिन इनके दुष्परिणाम भयावह हुए हैं। नोटबंदी से सारा काला धन सफेद हो गया। काले धनवालों ने उल्टे उस्तरे से सरकार की मुंडाई कर दी। सैकड़ों लोगों ने अपनी जान से हाथ धोए और 30 हजार करोड़ रु. नए नोट छापने में बर्बाद हुए। लेकिन नोटबंदी ने भाजपा सरकार का ज्यादा नुकसान नहीं किया, क्योंकि लोगों को पक्का विश्वास था कि वह देश के भले के लिए की गई थी लेकिन नागरिकता संशोधन कानून मोदी सरकार और भाजपा की जड़ों को मट्ठा पिला सकता है। यह कानून भाजपा के लिए कहीं भस्मासुरी सिद्ध न हो जाए। इस कानून का मूल उद्देश्य तो बहुत अच्छा है कि पड़ौसी मुस्लिम देशों के शरणार्थियों को भारत की नागरिकता दी जाए लेकिन उसका आधार सिर्फ धार्मिक उत्पीड़न हो, यह बात भारत के मिजाज से मेल नहीं खाती। उत्पीड़न किसी भी तरह का हो, और वे उत्पीड़ित सिर्फ तीन पड़ौसी मुस्लिम देशों के ही क्यों, किसी भी पड़ौसी देश के हों, भारत के द्वार उनके लिए खुले होने चाहिए। हर व्यक्ति के गुण-दोष परख कर ही… Continue reading भाजपा का भस्मासुरी कानून

असम गण परिषद भी विरोध में उतरी

नई दिल्ली। अब तक नागरिकता कानून में संशोधन के मसले पर केंद्र सरकार का साथ दे रही उसकी सहयोगी पार्टी असम गण परिषद भी अब इसके विरोध में उतर आई है। इससे पूर्वोत्तर में जारी हिंसक प्रदर्शनों के बीच भाजपा को बड़ा झटका लगा है। असम गण परिषद ने नागरिकता कानून के विरोध में पूर्वोत्तर में चल रहे आंदोलनों का समर्थन करने का ऐलान किया है। असम गण परिषद ने वरिष्ठ नेताओं की एक बैठक के बाद यह फैसला किया है। पार्टी ने यह भी कहा है कि वो नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेगी। इस मुद्दे पर असम गण परिषद की एक टीम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मिलेगी। गौरतलब है कि असम गण परिषद भाजपा के नेतृत्व वाली असम सरकार का भी हिस्सा है और राज्य की कैबिनेट में उसके तीन मंत्री भी हैं। इससे पहले असम गण परिषद ने संसद में नागरिकता संशोधन बिल का समर्थन किया था। उसके बाद पार्टी में ही इसका विरोध शुरू हो गया था और पार्टी दो हिस्सों में बंट गई थी। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। बहरहाल, अगप से पहले ऑल असम… Continue reading असम गण परिषद भी विरोध में उतरी

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