राहुल मिसाल बनाने में नाकाम रहे

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी देश के इकलौते बड़े नेता हैं, जिन्होंने कोरोना महामारी के खतरे को पूरी गंभीरता से समझा था। उन्होंने पिछले साल जनवरी से ही प्रधानमंत्री और सरकार को आगाह करना शुरू कर दिया था। इसलिए उनसे उम्मीद की जा रही थी कि वे बाकी नेताओं से हट कर अलग मिसाल कायम करेंगे। लेकिन उन्होंने यह मौका गंवा दिया। वे पश्चिम बंगाल में पहले चार चरण के चुनाव में प्रचार के लिए नहीं गए थे। इसलिए जब कोरोना वायरस के केसेज बढ़ने लगे तो वे प्रचार में जाने से मना कर सकते थे। वे अपनी पार्टी वर्चुअल चुनावी रैली के लिए कह सकते थे। उनका यह कदम कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच प्रधानमंत्री और गृह मंत्री सहित बाकी केंद्रीय मंत्रियों, राज्य की मुख्यमंत्री और सत्तारूढ़ दल के नेताओं को शर्मिंदा करने वाली बात होती। पर राहुल ने यह मौका गंवा दिया। उन्होंने आखिरी चुनावी रैली चार अप्रैल को की थी, जिस दिन तीन राज्यों- केरल, तमिलनाडु और पुड्डुचेरी की सभी सीटों पर और एक राज्य असम में आखिरी चरण की सीटों पर प्रचार खत्म हुआ। उसके बाद से राहुल 10 दिन तक घर बैठे रहे और 14 अप्रैल को प्रचार के लिए पश्चिम बंगाल गए।… Continue reading राहुल मिसाल बनाने में नाकाम रहे

बंगाल के रण में उतरे राहुल

पश्चिम बंगाल के चार चरण के मतदान तक प्रचार से दूर रहे कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी आखिरकार प्रचार में उतरे।

क्या राहुल, प्रियंका करेंगे बंगाल में प्रचार ?

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार में उतरेंगे। प्रियंका ने असम और केरल में प्रचार किया था…

राजनीतिक चंदे के बारे में जानना लोक हित है

सूचना के अधिकार के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं या सामाजिक सरोकार वाले दूसरे सामाजिक कार्यकर्ताओं या न्यायिक सेवाओं के लोगों को सूचना आयोग में नियुक्त करने की बजाय रिटायर सरकारी बाबुओं को सूचना आयोग में बैठाने की सरकार की रणनीति खूब काम आ रही है।

तमिलनाडु में कितने गठबंधन बनेंगे?

तमिलनाडु में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में कमाल की राजनीति होगी। इतने गठबंधन बनेंगे कि सारे पुराने रिकार्ड टूट जाएंगे।

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