आपात्काल से भी बड़ा आफतकाल

कोरोना महामारी ने इतना विकराल रुप धारण कर लिया है कि सर्वोच्च न्यायालय को वह काम करना पड़ गया है, जो किसी भी लोकतांत्रिक देश में संसद को करना होता है। सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को आदेश दिया है कि वह उसे एक राष्ट्रीय नीति तुरंत बनाकर दे, जो कोरोना से लड़ सके। मरीज़ों को ऑक्सीजन, इंजेक्शन, दवाइयाँ आदि समय पर उपलब्ध करवाने की वह व्यवस्था करे। न्यायपालिका को यह क्यों करना पड़ा ? इसीलिए कि लाखों लोग रोज़ बीमार पड़ रहे हैं और हजारों लोगों की जान जा रही है। रोगियों को न दवा मिल रही है, न ऑक्सीजन मिल रही है, न पलंग मिल रहे हैं। इनके अभाव में बेबस लोग दम तोड़ रहे हैं। टीवी चैनलों पर श्मशान घाटों और कब्रिस्तानों में लगी लाशों की भीड़ को देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। कोरोना की दवाइयों, इंजेक्शनों और अस्पताल के पलंगों के लिए जो कालाबाजारी चल रही है, वह मानवता के माथे पर कलंक का टीका है। अभी तक एक भी कालाबाजारी को चौराहे पर सरे-आम नहीं लटकाया गया है। क्या हमारी सरकार और हमारी अदालत के लिए यह शर्म की बात नहीं है? होना तो यह चाहिए कि इस आपात्काल में, जो भारत का आफतकाल… Continue reading आपात्काल से भी बड़ा आफतकाल

जबलपुर में पांच मरीजों की मौत

जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर भी ऑक्सीजन की कमी से पांच मरीजों की मौत हो गई। जबलपुर में पिछले आठ दिन में दूसरी बार ऐसी घटना हुई है। जिले के उखरी रोड पर स्थित गैलेक्सी अस्पताल में गुरुवार रात पांच कोविड मरीजों की ऑक्सीजन नहीं मिलने की वजह से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि ऑक्सीजन सप्लाई बंद होने पर जिस समय मरीज तड़प रहे थे उस समय ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर और स्टाफ अस्पताल छोड़ कर भाग गए। घटना की सूचना मिलने के तुरंत बाद पुलिस ने मौके पर पहुंच कर आनन-फानन में मोर्चा संभाला। तत्काल कुछ सिलेंडर की व्यवस्था कराई गई, लेकिन दो मरीजों की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है। इस पूरे घटना से नाराज परिजनों ने जम कर हंगामा किया। गैलेक्सी अस्पताल में कुल 65 कोविड संक्रमित भर्ती थे। इसमें 31 ऑक्सीजन पर थे और आईसीयू में ICU में कुल 34 मरीज भर्ती थे।

मार्च तब-अब व भारत सत्य!

मानों देश कीड़े-मकौड़े, भेड़-बकरियों का है जो सुनने को मिलता है लोग मर कहा रहे है? वायरस है कहा? भारत की खोपड़ी में यह सत्य जगह पाता ही नहीं कि यदि एक करोड लोग संक्रमित हो बीमार हुए तो इतनों के परिवार किस संत्रास में गुजरे। कितना पैसा बरबाद हुआ और डेढ़ लाख लोगों की वायरस मौत के अनुभव की पीड़ा क्या होती है?  

सरकार भी तो सावधानी बरते!

प्रधानमंत्री ने सात मार्च को कोलकाता के परेड ग्राउंड मैदान में बड़ी सभा की थी और उन्होंने खुद कहा था कि उन्होंने इतना बड़ा जन समूह पहले नहीं देखा। उस रैली की तस्वीरें और वीडियो अब भी हर जगह उपलब्ध है।

महामारी से भी कोई सबक नहीं

दुनिया भर के देशों ने वायरस की महामारी से सबक लेकर अपने यहां स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार किया। मेडिकल कॉलेज और अस्पताल बनवाने शुरू किए।

इस बार क्षेत्रीय लहर

महाराष्ट्र और पंजाब के अलावा गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु, दिल्ली, मध्य प्रदेश आदि राज्यों में फिर से कोरोना फैल रहा है। ये राज्य पहले भी ज्यादा प्रभावित रहे थे।

today corona case in india : कोविड के नए मामलों में रिकार्ड बढ़ोतरी, 40 हजार से ज्यादा संक्रमित

महाराष्ट्र के अलावा सात राज्यों में 24 घंटे में एक-एक हजार से ज्यादा संक्रमित। शुक्रवार को 180 मौत।

भोपाल, इंदौर, जबलपुर में लॉकडाउन!

कोरोना वायरस की महामारी रोकने के लिए लगाए गए पहले लॉकडाउन के एक साल बाद फिर पाबंदियों का दौर लौट आया है। देश के कई राज्यों में स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए गए हैं।

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