कोरोनाः तालाबंदी हल नहीं है

कोरोना महामारी इतना विकराल रुप आजकल धारण करती जा रही है कि उसने सारे देश में दहशत का माहौल खड़ा कर दिया है। भारत-पाकिस्तान युद्धों के समय भी इतना डर पैदा नहीं हुआ था, जैसा कि आजकल हो रहा है। प्रधानमंत्री को राष्ट्र के नाम संबोधन देना पड़ा है। उन्हें बताना पड़ा है कि सरकार इस महामारी से लड़ने के लिए क्या-क्या कर रही है। आॅक्सीजन, इंजेक्शन, पलंगों, दवाइयों की कमी को कैसे दूर किया जाएगा। विरोधी नेताओं ने सरकार पर लापरवाही और बेफिक्री के आरोप लगाए हैं। लेकिन उन्हीं नेताअेां को कोरोना ने दबोच लिया है। कोरोना किसी की जाति, हैसियत, मजहब, प्रांत आदि का भेद-भाव नहीं कर रहा है। सभी टीके के लिए दौड़े चले जा रहे हैं। रक्षा मंत्री राजनाथसिंह ने फौज से भी अपील की है कि वह त्रस्त लोगों की मदद करे। लेकिन यहां बड़ा सवाल यह है कि रोज़ लाखों नए लोगों में यह महामारी क्यों फैल रही है और इसका मुकाबला कैसे किया जाए ? इसका सीधा-सादा जवाब यह है कि लोगों में असवाधानी बहुत बढ़ गई थी। दिल्ली, मुंबई, कलकत्ता, पुणें जैसे शहरों को छोड़ दें तो छोटे शहरों, कस्बों और गांवों में आपको लोग बिना मुखपट्टी लगाए घूमते हुए मिल जाएंगे।… Continue reading कोरोनाः तालाबंदी हल नहीं है

दस राज्यों में संकट गहरा, 1,320 लोगों की मौत हुई

नई दिल्ली। कोरोना वायरस के संक्रमितों की संख्या परे देश में तेजी से बढ़ रही है और उसी अनुपात में मरने वालों की संख्या भी बढ़ रही है। लेकिन देश के 10 राज्यों का संकट बहुत गहरा है और इन राज्यों की वजह से ही देश में कोरोना की हालत बेकाबू दिख रही है। देश में हर दिन मिल रहे नए संक्रमितों में 10 राज्यों का हिस्सा 78 फीसदी से ज्यादा है। देश में सर्वाधिक संक्रमित महाराष्ट्र के अलावा उत्तर प्रदेश, दिल्ली, केरल, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, कर्नाटक और गुजरात ये 10 राज्य हैं, जहां 78 फीसदी से ज्यादा नए केसेज मिल रहे हैं। इन राज्यों में कोरोना की स्थिति बेकाबू हो गई है। सर्वाधिक संक्रमित इन 10 राज्यों में से पांच राज्यों- दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में लॉकडाउन लगा हुआ है फिर भी हालात काबू में नहीं आ रहे हैं। मंगलवार को खबर लिखे जाने तक पूरे देश में दो लाख 21 हजार से ज्यादा नए केसेज आए थे, जिसके बाद संक्रमितों की संख्या एक करोड़ 55 लाख, 28 हजार से ज्यादा हो गई और एक्टिव मरीजों की संख्या 21 लाख 18 हजार से ज्यादा हो गई। खबर लिखे जाने तक राजधानी दिल्ली, कर्नाटक, छत्तीसगढ़… Continue reading दस राज्यों में संकट गहरा, 1,320 लोगों की मौत हुई

दुनिया सचमुच देख रही हमें!

दुनिया भर के देशों ने कोरोना वायरस के संक्रमण को जब गंभीरता से लिया, उसके तीन-चार महीने बाद भारत में इस बारे में गंभीरता से विचार शुरू हुआ।

गैर जिम्मेदारी का भी इतिहास लिखा जाएगा

कोरोना महामारी का जब इतिहास लिखा जाएगा तो उसमें भारतीय नेतृत्व की गैर जिम्मेदारी इतिहास का काला अध्याय होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर केंद्र सरकार के दर्जनों मंत्रियों और राज्यों के मुख्यमंत्रियों तक का इतिहास एक ही तरह से दर्ज होगा। इसके एकाध अपवाद हो सकते हैं लेकिन कोरोना महामारी से लड़ने में भारत की असलियत गैर जिम्मेदारी, लापरवाही और मानवता के प्रति अपराध करने वाली है। भारत के 138 करोड़ लोगों को भगवान भरोसे छोड़ना ही कोरोना के खिलाफ लड़ाई की भारत की हकीकत है। महामारी शुरू होने के पहले से या भारत में महामारी के प्रति अटेंशन बनने के पहले से राहुल गांधी एकमात्र नेता था, जिन्होंने इस खतरे को समझा था और सरकार को आगाह करना शुरू किया था लेकिन अफसोस की बात है कि उन्होंने भी चुनाव प्रचार में कोई जिम्मेदारी नहीं दिखाई। राहुल गांधी भी केरल, तमिलनाडु और असम में बड़ी चुनावी रैलियां करते रहे, जहां चुनाव खत्म होने के बाद से कोरोना वायरस के केसेज में 12 गुना तक की बढ़ोतरी हुई है। जब महामारी की दूसरी लहर पीक की तरफ बढ़ रही थी तब भी राहुल गांधी ने पश्चिम बंगाल जाकर बड़ी रैली की। फिर उनमें और नरेंद्र मोदी में क्या फर्क… Continue reading गैर जिम्मेदारी का भी इतिहास लिखा जाएगा

उफ! वायरस में कुंभ

कोरोना की भयावह महामारी के बीच कुंभ मेले का आयोजन कौन सी समझदारी कही जा सकती है? शुरू में इतनी समझदारी दिखाई गई कि कुंभ मेले की अवधि घटा दी गई। लेकिन एक महीने में ही इस बात का ख्याल नहीं रखा गया कि लाखों की संख्या में लोग अगर कुंभ मेले में आते हैं या गंगा में डुबकी लगाने पहुंचते हैं तो कैसे कोरोना प्रोटोकॉल का पालन होगा, सोशल डिस्टेसिंग का पालन कैसे होगा या सबकी टेस्टिंग कैसे होगी? उलटे राज्य के मुख्यमंत्री ने लाखों की संख्या में लोगों के मेले में हिस्सा लेने की अपील की। यहां तक कहा कि गंगा में डुबकी लगाने से कोरोना खत्म हो जाएगा। देश के लगभग सभी नेता न कम या ज्यादा मात्रा में लापरवाही दिखाई, गैर जिम्मेदारी का परिचय दिया, जिसका नतीजा है कि भारत आज ऐसी बदहाल और दयनीय स्थिति में खड़ा है। चुनाव प्रचार या कुंभ मेले के आयोजन की लापरवाहियों के अलावा केंद्र और राज्यों की सरकारों ने कोरोना वायरस की महामारी के पूरे एक साल में जिस गैर जिम्मेदारी का परिचय दिया वह भी देश की बदहाली का एक कारण है। पूरे साल में कहीं भी स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास के लिए कुछ नहीं किया गया। वायरस… Continue reading उफ! वायरस में कुंभ

भारत के सिंहकर्मा नमो और रोम का चूं-चूं नीरो

पिछले सात बरस में राजधर्म का एक नया व्याकरण रच-बस रहा है। हम देख रहे हैं कि सत्तासीन होने और सिंहासन पर बने रहने के लिए अनसुनी-योग का जो जितना गहन अभ्यास कर लेगा, वह अपनी कामयाबी का उतना ही ऊंचा परचम लहराएगा। साढ़े चार साल से भारत में आर्थिक-हाहाकार हो रहा है। पिछले एक साल से महामारी-त्राहिमाम मचा हुआ है। लेकिन हमारे नीरो का मन झूले पर झूलने को मचल रहा है। उनका मन मोर से खेलने को फुदक रहा है। उनका मन ‘ओए, ओए’ की तान लगाने को ललक रहा है। बढ़ती बेरोज़गारी से हमारे नीरो की पेशानी पर सिलवटें नहीं पड़ीं। बढ़ती महंगाई से हमारे नीरो ने अपनी ठोड़ी नहीं खुजलाई। सरहदी आपदाओं को हमारा नीरो अवसर में बदलने की नाकाम जुगत भिड़ाता रहा। विश्व-राजनय में भारत के मखौल को वह लाल कालीन के नीचे खिसकाता रहा। कोरोना महामारी के पहले चरण में हमारे नीरो ने देष के के गले में ताली-थाली-दीये-मोमबत्ती की माला डाल दी। महामारी के दूसरे चरण में वे हम से श्मशान में उत्सव मनाने को कह रहे हैं। सरकार ने हमें हमारे हाल पर छोड़ दिया है। और, हमारा धैर्य धन्य है कि हम ने ख़ुद को अपने नसीब पर छोड़ दिया है।… Continue reading भारत के सिंहकर्मा नमो और रोम का चूं-चूं नीरो

महाराष्ट्र में शुरू हुआ महाकर्फ्यू

नई दिल्ली। देश में कोरोना वायरस से सर्वाधिक संक्रमित महाराष्ट्र में बुधवार को रात आठ बजे से लॉकडाउन की तरह का कर्फ्यू चालू हो गया है। एक मई की सुबह सात बजे तक यह महाकर्फ्यू लगा रहेगा। इसे लॉकडाउन नहीं कहा जा रहा है लेकिन इस दौरान लगाई गई पाबंदियां लॉकडाउन की तरह ही हैं। इसे ब्रेक द चेन का नाम दिया गया है। ध्यान रहे महाराष्ट्र में एक दिन में 60 हजार से ज्यादा केसेज आ रहे हैं। महाराष्ट्र अगर देश होता तो हर दिन मिलने वाले संक्रमितों की संख्या के लिहाज यह चौथे नंबर पर होता। दुनिया में मिल रहे कोरोना मरीजों में आठ फीसदी मरीज अकेले महाराष्ट्र में मिल रहे हैं। मध्य प्रदेश में भी कोरोना से हालत बहुत बिगड़ गए हैं। लगभग हर शहर के अस्पताल बेड और ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहे हैं। राज्य के 52 में से 23 जिलों में लॉकडाउन लागू कर दिया गया है। बढ़ते कोरोना संक्रमण के चलते 10वीं-12वीं की बोर्ड परीक्षाएं एक महीने टाल दी गई हैं। ये परीक्षाएं 30 अप्रैल से शुरू होनी थी। इस बीच राज्य में ऑक्सीजन संकट को लेकर भोपाल के मिंटो हॉल के सामने कांग्रेस के जीतू पटवारी सहित तीन विधायक धरने पर बैठे।… Continue reading महाराष्ट्र में शुरू हुआ महाकर्फ्यू

दिल्ली, यूपी, में रिकार्ड संक्रमण

नई दिल्ली। देश में सर्वाधिक संक्रमित महाराष्ट्र के अलावा देश के तीन और राज्यों में 24 घंटे में मिले संक्रमितों की संख्या 10 हजार से ऊपर पहुंच गई है। महामारी शुरू होने के बाद पहली बार राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक दिन में 10 हजार से ज्यादा मरीज मिले हैं। उत्तर प्रदेश में तो एक दिन में मिले मरीजों की संख्या 15 हजार से ऊपर पहुंच गई है। कर्नाटक में भी रविवार को 10 हजार से ज्यादा मरीज मिले। छत्तीसगढ़ में पिछले चार दिन से लगातार 10 हजार से ज्यादा मरीज मिल रहे हैं। इन चार राज्यों में संक्रमण की वजह से हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं। राजस्थान में पहली बार 24 घंटे के अंदर पांच हजार से ज्यादा केस मिले हैं। मध्य प्रदेश, गुजरात और पंजाब में भी हालात तेजी से खराब हो रहे हैं। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, गोवा जैसे छोटे राज्यों में भी बड़ी संख्या में मरीज मिल रहे हैं। ध्यान रहे पहली लहर में ज्यादातर छोटे राज्यों में हालात संभले हुए थे। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में रविवार को 10,774 नए मरीज मिले और 5,158 लोग इलाज से ठीक हुए। दिल्ली में 24 घंटे में 48 लोगों की मौत हुई। उत्तर प्रदेश में पहली बार… Continue reading दिल्ली, यूपी, में रिकार्ड संक्रमण

हर राज्य में कोरोना का कहर

नई दिल्ली। कोरोना वायरस की दूसरी लहर अब 10 राज्यों से निकल कर पूरे देश में फैल गई है। मार्च के महीने में कोरोना का कहर सिर्फ 10 राज्यों में दिख रहा था। लेकिन अब देश के लगभग सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में संक्रमण की दूसरी लहर ने जोर पकड़ लिया है। दक्षिण भारत के पांचों राज्यों में संक्रमितों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। शनिवार को केरल में 24 घंटे में छह हजार से ज्यादा संक्रमित मिले तो कर्नाटक में सात हजार और तमिलनाडु में छह हजार के करीब संक्रमित मिले। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भी तेजी से संक्रमण बढ़ रहा है। पूर्वोत्तर के राज्यों में पश्चिम बंगाल में चार हजार से ज्यादा संक्रमित मिले हैं तो ओड़िशा में भी 13 सौ से ज्यादा संक्रमित मिले हैं। उत्तर प्रदेश में पहली बार 12 हजार से ज्यादा संक्रमित मिले हैं तो बिहार में भी संक्रमितों की संख्या साढ़े तीन हजार से ऊपर पहुंच गई है। पहली लहर में कोरोना के कहर से बचे रहे छत्तीसगढ़ में 11 हजार से ज्यादा नए केसेज मिले हैं तो हिमाचल प्रदेश, गोवा, पुड्डुचेरी आदि राज्यों में भी संक्रमण में तेजी से इजाफा हो रहा है। कोरोना वायरस से सर्वाधिक संक्रमित… Continue reading हर राज्य में कोरोना का कहर

महाराष्ट्र में लॉकडाउन पर विचार

मुंबई। कोरोना वायरस से पूरे देश में सर्वाधिक संक्रमित महाराष्ट्र में एक बार फिर पूरी तरह से लॉकडाउन लगाने पर विचार किया गया है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने इस पर विचार के लिए सभी पार्टियों की एक वर्चुअल बैठक की है, जिसमें उन्होंने बहुत साफ शब्दों में कहा कि लॉकडाउन लगाने के अलावा कोई और रास्ता नहीं है। अगले दो दिन में सरकार इस पर फैसला करेगी। गौरतलब है कि महाराष्ट्र में हर दिन 60 हजार के करीब नए केसेज आ रहे हैं। इसे देखते हुए राज्य में शनिवार से ही सप्ताहांत का कर्फ्यू शुरू हुआ और कई जगह रात का कर्फ्यू भी लगाया गया था, लेकिन उससे कोई खास फायदा नहीं हुआ है। तभी पूरी तरह से लॉकडाउन लगाने के मसले पर आम राय बनाने के लिए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने शनिवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए हुई इस बैठक में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के अलावा नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फड़नवीस, प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत दादा पाटिल, भाजपा नेता प्रवीण दरेकर, महाराष्ट्र सरकार के मंत्री अशोक चव्हाण, बाला साहेब थोराट, गृह मंत्री दिलीप वालसे पाटिल, कांग्रेस नेता विजय वडेटीवार, स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे भी मौजूद थे। वर्चुअल बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह लॉकडाउन… Continue reading महाराष्ट्र में लॉकडाउन पर विचार

कोरोना: भारत में तब-अब

क्या फर्क है संक्रमण-लॉकडाउन के पिछले कोहराल और अब के कोहराम में? जवाब है कोई गुणात्मक परिवर्तन नहीं। वायरस के आगे भारत पहले भी झूठ में जीता हुआ था और अब भी है। भारत की भीड़ पहले भी वायरस को नकारते हुए थी और आज भी है। लोग तब भी भगवान भरोसे थे अब भी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संकट में तब भी अवसर बनाते हुए थे अब भी अवसर तलाशते हुए है। तब भी टेस्टिंग-ट्रेसिंग-आईसोलेशन-चिकित्सा पर फोकस दिखावे का था अब भी है। भारत तब भी ढिढ़ोरा बनाए हुए था कि सब काबू में है। वायरस खत्म होता हुआ है। भारत विजयी है और महामारी दूसरे देशों के लिए आफत है लेकिन हमारे लिए नहीं। वह सब  प्रोपेगेंडा आज भी है। भारत ने आंकड़ों, टेस्ट-ट्रैस-संक्रमण-ईलाज में जितना झूठ बनाया-चलाया वह सन् 2020 की इतिहास में यह दास्ता लिखाए हुए होगा कि वैश्विक महामारी के वक्त जब मोदी राज था तो लोगों की जान के साथ कैसे खेला गया?21वी सदी में भी भारत के हिंदू कैसे अंधविश्वासों, ताली-थाली-दीये के टोटको, और अवैज्ञानिकता में राजा के दिवाने थे। यह भी पढ़ें: झूठ से झूमे रहेगा वायरस तभी वैक्सीन, टीके से पहले की संक्रमण वेव और टीका आने के बाद की दूसरी… Continue reading कोरोना: भारत में तब-अब

झूठ से झूमे रहेगा वायरस

भारत में ऐसा सोचने, कहने वाले असंख्य लोग है जो कहते है अमेरिका, योरोप में इतने लोग मर गए तो उस नाते भारत विश्व गुरू है। भारत में कोरोना काबू में रहा। बाकि देश संर्घष करते हुएहै जबकि भारत विजेता! हमें क्या बचना बल्कि हम दुनिया को बचातो हुए!हमने टीका बनाया। सबके टीका लग जाएगा तो वायरस खत्म!वायरस को हरा देने की हमारी लड़ाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बेमिसाल कामयाबी! यह भी पढ़ें: कोरोना: भारत में तब-अब भक्तों के, मुंगेरीलालों के मुंह में घी शकर। ईश्वर करें इनका महामारी के आगे यह महामृत्युंजय जाप सफल हो। लेकिन अपना मानना है कि इन बातों से ही कोरोना वायरस को भारत में जड़े जमाने का गजब मौका मिला है। भारत ने महामारी की लड़ाई में एक साल गंवाया। दुनिया के देशों ने महामारी की विपदा में चिकित्सा खर्च बढ़ाया। ब्रिटेन ने नेशनल हेल्थ सर्विस में बजट उड़ेल दिया। नए अस्पताल., चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार हुआ लेकिन भारत में क्या हुआ? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार, प्रदेश सरकारों को यह सूझा ही नहीं कि भारत की आबादी इतनी बड़ी है कि वायरस यदि सर्वत्र पहुंचा तो संक्रमण काल सालों लंबा चलेगा  और उस नाते दीर्घकालीन जरूरत में संक्रमण ईलाज का उपजिला-तहसील स्तर… Continue reading झूठ से झूमे रहेगा वायरस

सरकार ने धोखा दिया

कोरोना वायरस की महामारी का एक कटु सच यह है कि भारत में सरकार ने लोगों के साथ धोखा किया। सरकार ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई। सरकार को कोरोना से मुकाबला करने के लिए एक साल से ज्यादा का समय मिला फिर भी वहीं ढाक के तीन पात वाली स्थिति है। केसेज बढ़ते ही एक बार फिर अस्पतालों में बेड्स की कमी होने लगी है। पीएम केयर्स फंड के पैसे से जो असली-नकली वेंटिलेटर खरीदे गए थे वे छह महीने से भी कम समय में खराब होने लगे हैं। कई राज्यों में ऑक्सीजन के सिलिंडर की कमी होने लगी है। एक बार फिर रेमेडिसिवीर दवा की काला बाजारी शुरू हो गई है। गुजरात, महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में एक बेड पर कोरोना के दो-दो मरीजों का इलाज होने की खबरें और तस्वीरें भी आई हैं। एंबुलेंस की कमी की वजह से गोद में बच्चा लिए और ऑक्सीजन का सिलिंडर घसीटते अस्पताल पहुंचने वालों की तस्वीरें आने लगी हैं। अस्पताल में बेड नहीं मिलने पर कोरोना मरीज के अनशन शुरू करने और वहीं दम तोड़ देने की खबरें भी आने लगी हैं। यह सब जनता के साथ धोखे का नतीजा है। यह भी पढ़ें: कोरोना: भारत में तब-अब अगर सरकार ने… Continue reading सरकार ने धोखा दिया

10 लाख से ज्यादा एक्टिव केस

नई दिल्ली। कोरोना वायरस की दूसरी लहर धीरे धीरे पहली लहर के पीक तक पहुंच गई है। हर दिन आने वाले नए संक्रमितों की संख्या के मामले में तो पहली लहर के पीक के मुकाबले डेढ़ गुना केस रोजाना आ रहे हैं। इसके साथ ही एक्टिव केसेज की संख्या भी 10 लाख का आंकड़ा पार कर गई है। शुक्रवार को देश में एक्टिव केसेज की संख्या 10 लाख 30 हजार से ज्यादा हो गई। शुक्रवार को देर रात तक देश में एक लाख 31 हजार 146 नए केसेज आए थे और एक्टिव केसेज की संख्या 10 लाख 30 हजार 634 हो गई थी। देर रात तक छत्तीसगढ़, असम, झारखंड सहित कुछ राज्यों के आंकड़े अपडेट नहीं हुए थे। छत्तीसगढ़ में रोज 10 हजार केस आ रहे हैं। इस लिहाज से इन राज्यों के आंकड़े आने के बाद एक दिन के संक्रमितों की संख्या एक लाख 40 हजार से ज्यादा हो जाएगी, जो एक नया रिकार्ड होगा। शुक्रवार देर रात तक देश भर में 662 लोगों की मौत हुई थी। कोरोना वायरस से सर्वाधिक संक्रमित राज्य महाराष्ट्र में शुक्रवार को 24 घंटे में कोरोना वायरस के 58,993 नए केसेज आए हैं, जिसके बाद राज्य में कुल संक्रमितों की संख्या 32 लाख… Continue reading 10 लाख से ज्यादा एक्टिव केस

विशेष संपादकीय : कोरोना के केसेज बढ़ने का श्रेय किसको?

देश में कोरोना वायरस के केसेज का हर दिन नया रिकार्ड बन रहा है। पहली लहर जब पीक पर पहुंची थी तो पिछले साल 17 सितंबर को 97 हजार केस आए थे। दूसरी लहर में सात अप्रैल को एक लाख 26 हजार नए केस मिले। पिछले साल 17 सितंबर के बाद जब केसेज कम होने लगे तो सोशल मीडिया से लेकर मुख्यधारा की मीडिया तक में यह बताया जाने लगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से कोरोना के केस कम हो गए हैं। भाजपा के नेताओं ने तो प्रचार किया कि मोदीजी ने देश के लोगों को बचा लिया, वरना सब कुछ नष्ट हो जाता। अमेरिका और दूसरे विकसित देशों में कोरोना केसेज के हवाले से मोदीजी को देश बचाने का श्रेय दिया गया। लॉकडाउन से देश की आर्थिकी के गर्त में जाने की हकीकत पर भी इस बात के पर्दा डाला गया कि मोदीजी ने लोगों की जान बचा दी। इसे भी पढ़ें :  कोरोना | कई राज्यों में नई पाबंदियां अब एक बार फिर कोरोना वायरस के केसेज बढ़ने लगे हैं। पहले के पीक के मुकाबले बहुत ज्यादा बढ़ोतरी हो गई है तो इसका ठीकरा किसके सर फूटेगा? क्या मोदीजी को श्रेय देने वाला मीडिया इसके लिए… Continue reading विशेष संपादकीय : कोरोना के केसेज बढ़ने का श्रेय किसको?

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