कोरोनाः आशा की किरणें

भारत जबसे आजाद हुआ है, कोरोना-जैसा संकट उस पर कभी नहीं आया। इस संकट ने राजा-रंक, करोड़पति-कौड़ीपति, औरत-मर्द, शहरी-ग्रामीण, डाक्टर-मरीज़– किसी को नहीं छोड़ा। सबको यह निगल गया। श्मशानों और कब्रिस्तानों में लाशों के इतने ढेर देश में पहले किसी ने नहीं देखे। भारत में यों तो बीमारियों, दुर्घटनाओं और वृद्धावस्था के कारण मरने वालों की संख्या 25 हजार रोज़ की है। उसमें यदि चार-पांच हजार ज्यादा जुड़ जाएं तो यह दुखद तो है लेकिन कोई भूकंप-जैसे बात नहीं है लेकिन सरकारी आंकड़ों पर हर प्रांत में सवाल उठ रहे हैं। ये भी पढ़ें: मलेरकोटलाः एक बेमिसाल मिसाल देश में ऐसे लोग अब मिलना मुश्किल है, जिनका कोई न कोई रिश्तेदार या मित्र कोरोना का शिकार न हुआ हो। यों तो भारत के दो प्रतिशत लोगों को यह बीमारी हुई है लेकिन सौ प्रतिशत लोग इससे डर गए हैं। इस डर ने भी कोरोना को बढ़ा दिया है। मृतकों की संख्या अब भी रोजाना 4 हजार के आस-पास है लेकिन मरीजों की संख्या तेजी से घट रही है। संक्रमण घट रहा है और संक्रमित बड़ी संख्या में ठीक हो रहे हैं। ये भी पढ़ें: पोस्टरबाजों की हास्यास्पद गिरफ्तारी यदि यही रफ्तार अगले एक-दो हफ्ते चलती रही तो आशा है कि… Continue reading कोरोनाः आशा की किरणें

Corona संक्रमण की दर घट रही है, दिल्ली में संक्रमण दर 36 फीसदी से घट 6 फीसदी

नई दिल्ली। देश में कोराना वायरस की संक्रमण दर कम होने का सिलसिला जारी है। हर दिन संक्रमण की दर में औसतन एक फीसदी से ज्यादा की कमी आ रही है। पिछले एक हफ्ते में 19 फीसदी से ऊपर पहुंचने के बाद अब संक्रमण की दर घट कर 13 फीसदी पर आ गई है। देश के सर्वाधिक प्रभावित राज्यों में से एक दिल्ली में संक्रमण की दर घट कर छह फीसदी से नीचे आ गई है, जो 22 अप्रैल को 36 फीसदी पहुंच गई थी। संक्रमण दर में कमी आने का एक कारण लॉकडाउन है तो दूसरा कारण यह बताया जा रहा है कि लगातार टेस्टिंग बढ़ाने से कोरोना को काबू करने में आसानी हुई है। भारत में 18 मई को 20 लाख आठ हजार लोगों का कोरोना टेस्ट हुआ। दुनिया के किसी देश ने एक दिन में इतने लोगों की टेस्टिंग नहीं की है। संक्रमण दर में कमी की वजह से ही रिकार्ड संख्या में टेस्टिंग के बावजूद मरीजों की संख्या में लगातार कमी हो रही है और एक्टिव केसेज भी लगातार कम हो रहे हैं। मंगलवार को एक दिन में एक लाख 27 हजार एक्टिव केस कम हुए। यह सिलसिला पिछले कई दिनों से चल रहा है कि… Continue reading Corona संक्रमण की दर घट रही है, दिल्ली में संक्रमण दर 36 फीसदी से घट 6 फीसदी

Corona update चार हजार से ज्यादा मौतें, ज्यादातर राज्यों में मौतों की बढ़ती संख्या

नई दिल्ली। देश में कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या लगातार कम हो रही है, एक्टिव केसेज भी कम हो रहे हैं और संक्रमण की दर भी कम हो रही है। भारत सरकार ने मंगलवार को फीलगुड फैक्टर बताते हुए कहा कि देश में सिर्फ 1.8 फीसदी आबादी ही संक्रमित हुई है। साथ ही सरकार ने बताया कि संक्रमण दर कम होकर 14 फीसदी हो गई है और अब देश के आठ राज्यों में ही एक लाख से ज्यादा एक्टिव केस हैं। इसके बावजूद यह हकीकत है कि मौतों की संख्या कम नहीं हो रही है। कोरोना वायरस के संक्रमण से मरने वालों की संख्या लगातार चार हजार से ऊपर बनी हुई है। मंगलवार को खबर लिखे जाने तक 4,218 लोगों की मौत हुई। कोरोना से ज्यादा संक्रमित राज्यों में से एक-दो को छोड़ कर ज्यादातर राज्यों में मौतों की संख्या कम नहीं हो रही है। कर्नाटक में सोमवार को 467 लोगों की मौत हुई, जबकि मंगलवार को यह बढ़ कर 525 हो गई। महाराष्ट्र में रिकार्ड संख्या में 1,291 लोगों की मौत हुई। पंजाब में 231 लोगों की मौत हुई तो छोटे-छोटे राज्यों में भी रिकार्ड संख्या में मौतें दर्ज की गईं। उत्तराखंड में 98, जम्मू कश्मीर में 71,… Continue reading Corona update चार हजार से ज्यादा मौतें, ज्यादातर राज्यों में मौतों की बढ़ती संख्या

लॉकडाउन ही भारत का अकेला तरीका!

हां, इसके अलावा भारत के पास दूसरा कोई तरीका नहीं है। लेकिन इस तरीके से भारत में संक्रमण कभी खत्म नहीं होगा। वायरस दबेगा, रूकेगा मगर मरेगा नहीं। तभी भारत लगातार (सन् 2022-23 में भी) सौ जूते-सौ प्याज खाने, बेइंतहां रोगी-बेइंतहां मौतों का वैश्विक रिकार्ड बनाएगा। भूल जाएं कि भारत में संक्रमण खत्म करने का फिलहाल कोई औजार है। भारत देश के पास वायरस पूर्व के सहज जीवन में लौटाने का न तरीका है, न साधन है और न समझ। बस, बार-बार लॉकडाउन और बार-बार अनलॉक में ही 140 करोड़ लोगों को सन् 2021, सन् 2022-23 के अगले दो-ढाई साल काटने हैं। दुनिया में सबके बाद (यहां अर्थ विकसित-बड़े-प्रमुख विकासशील देशों का) भारत सामान्य होगा। तब तक सांस बनवाए रखने का एकमेव तरीका बार-बार लॉकडाउन है। हमें जान लेना चाहिए कि कोविड-19 वायरस को बेकाबू होने से तभी रोका जा सकता है जब लोगों की आवाजाही, मेल-मुलाकात पर ताला लगे। लोगों का परस्पर संपर्क न्यूनतम हो। सब लोग घर में बैठें। वायरस को घर-घर ताला मिलेगा तभी संक्रमण थमेगा व मरीज और मौत संख्या घटेगी। यह भी पढ़ें: मेरे तो गिरधर गोपाल (मोदी), दूसरा न कोई! जाहिर है लॉकडाउन से भारत में वायरस वैसे खत्म नहीं हो सकता है जैसे… Continue reading लॉकडाउन ही भारत का अकेला तरीका!

सारी गफलतें एक बराबर!

राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के सर संघचालक मोहन भागवत ने कोरोना वायरस की दूसरी लहर को  लेकर एक छायावादी टिप्पणी में कहा है कि ‘पहली लहर जाने के बाद हम सब जरा गफलत में आ गए। क्या जनता, क्या शासन, क्या प्रशासन। डॉक्टर लोग इशारा दे रहे थे। फिर भी थोड़ी गफलत में आ गए। इसलिए ये संकट खड़ा हुआ’। सवाल है कि क्या ‘जनता, शासन और प्रशासन’ सबकी गफलतें एक बराबर हैं? या प्रशासन और उससे भी ऊपर शासन की गफलत को ज्यादा बड़ा और कुछ हद तक अक्षम्य माना जाना चाहिए? जनता के लिए तो हमारे नीतिश्लोकों में कहा गया है- महाजनो येन गतः स पंथा। इसका मतलब है कि महाजन यानी समाज के अग्रणी लोग जिस रास्ते से जाएं जनता को उसी रास्ते जाना चाहिए। सो, जनता की लापरवाही या गफलत तो महाजन यानी अग्रणी लोगों को देख कर हुई। जब देश के प्रधानमंत्री ने कोरोना के खिलाफ जंग मे जीत का ऐलान कर दिया, जब प्रधानमंत्री और गृह मंत्री बड़ी बड़ी चुनावी रैलियां करने लगे, धर्मगुरुओं ने कुंभ की तैयारियां शुरू कर दीं, प्रशासन ने सिनेमा हॉल से लेकर होटल, रेस्तरां, बार सब कुछ खोल दिए तो फिर जनता की गफलत का क्या मतलब! जनता तो वही… Continue reading सारी गफलतें एक बराबर!

संक्रमण घटा पर मौतें बढ़ीं, लगभग हर राज्य की यह स्थिति

नई दिल्ली। देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर में एक अजीब परिघटना देखने को मिल रही है। देश के ज्यादातर राज्यों में कोरोना वायरस के संक्रमण के केसेज कम होने लगे हैं और संक्रमण की दर भी कम हो रही है लेकिन मरने वालों की संख्या में कमी नहीं हो रही है। यह लगभग देश के हर राज्य की स्थिति है। जिन राज्यों में संक्रमण के केसेज रिकार्ड रफ्तार से कम हो रहे हैं वहां भी मरने वालों की संख्या नहीं घट रही है। महाराष्ट्र में रविवार को संक्रमितों की संख्या 32 हजार पहुंच गई पर मरने वालों की संख्या बढ़ कर शनिवार को 960 के मुकाबले बढ़ कर 974 हो गई। इसी तरह उत्तर प्रदेश में केसेज घट कर 10 हजार हो गए पर मरने वालों की संख्या शनिवार के 281 के मुकाबले बढ़ कर 311 हो गई। कर्नाटक में रविवार को शनिवार के मुकाबले 10 हजार केस कम मिले पर मरने वालों की संख्या 349 से बढ़ कर 403 हो गई। राजस्थान में रविवार को नए केसेज की संख्या शनिवार के मुकाबले चार हजार कम रही पर मरने वालों की संख्या कम होने की बजाय बढ़ गई। इसी तरह पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, उत्तराखंड आदि राज्यों में… Continue reading संक्रमण घटा पर मौतें बढ़ीं, लगभग हर राज्य की यह स्थिति

कोरोना का तीसरा हमला ?

अमेरिका-जैसे कुछ देशों में लोग मुखपट्टी लगाए बिना इस मस्ती में घूम रहे हैं, जैसे कि कोरोना की महामारी खत्म हो चुकी है। उन्होंने दो टीके क्या लगवा लिये, वे सोचते हैं कि अब उन्हें कोई खतरा नहीं है लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टी.ए. ग्रेब्रोसिस ने सारी दुनिया को अभी से चेता दिया है। उनका कहना है कि यह दूसरा साल, कोविड-19 का, पिछले साल से भी ज्यादा खतरनाक हो सकता है। उसने तो सिर्फ एक खतरा बताया है। वह यह कि कोरोना की इस महामारी के सिर पर अब एक नया सींग उग आया है। वह है- बी.1.617.2. यह बहुत तेजी से फैलता है। यह तो फैल ही सकता है लेकिन मुझे यह डर भी लगता है कि भारत की तरह अफ्रीका ओर एशिया के गांवों में यह नया संक्रमण फैल गया तो क्या होगा ? हमारे गांवों में रहनेवाले करोड़ों लोग भगवान भरोसे हो जाएंगे। न उनके पास दवा है, न डाॅक्टर है और न ही अस्पताल। उनके पास इतने पैसे भी नहीं हैं कि वे शहरों में आकर अपना इलाज करवा सकें। इस समय भारत में 18 करोड़ से ज्यादा लोगों को कोरोना का टीका लग चुका है, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है लेकिन… Continue reading कोरोना का तीसरा हमला ?

प्रतिदिन 4 हजार मौतें या 25 हजार या….?

सन् इक्कीस की मई में भारत झूठ में नरक है। दुनिया का ‘मानवीय संकट’ है! इस संकट का एक पहलू लोगों का मरना है! इसका भी भयावह-नरसंहारक रूप लावारिश, गुमनाम मौत है। नदियों में लाशे बह रही है, श्मशान में कतार में अर्थियां है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार लाउडस्पीकर से जिंदा जीव को सुना रहे है कि रोते-रोते हंसना सीखों!….यह पोजिटिवीटी बनाओं कि तुम तो जिंदा हो! उफ! घिन और नीचता वाला यह नैरेटिव! … लेकिन हम सदा-सर्वदा ऐसे ही मरते है। सन् 1918-19-20 में हिंदू ऐसे ही करोडों की तादाद में मरे थे। तब साहित्यकार सुर्यकांत निराला ने इलाहाबाद में अपने गांव में अपने परिजनो की एक के बाद एक मौतों और गंगा किनारे की दशा में लिखा था – लाशे ही लाशे! .. पर वे भी न समझ पाएं, न गिनती कर पाएं, न लिख पाएं कि मृतकों की कितनी संख्या! न अंग्रेज सरकार की गिनती, न गंगा किनारे हिंदू मठो-मंदिरों के धर्माचार्यों द्वारा बहती अर्थियों की चिंता और न जनता को सुध कि कितने लाख-करोड मर रहे है। वह वक्त हूबहू 2021 में अपने को दोहराता हुआ। … बस एक फर्क.. तब अंग्रेज हिंदुओं को यह बहलाते हुए नहीं थे कि महामारी में भी… Continue reading प्रतिदिन 4 हजार मौतें या 25 हजार या….?

खैर, खून, खांसी छिपती नहीं है

रहीम का एक दोहा है- खैर, खून, खांसी, खुशी, बैर, प्रीति, मदपान। रहिमन दाबै न दबै जानत सकल जहान। यानी सात चीजें ऐसी हैं, जिन्हें कितना भी छिपाया जा, छिप नहीं सकती हैं। इनमें एक चीज खून यानी मौत है। कोरोना वायरस की महामारी में भी यही हो रहा है। सरकारें कितनी भी कोशिश कर रही हैं पर मौत के आंकड़े छिप नहीं पा रहे हैं। किसी न किसी तरह से सच जाहिर हो जा रहा है। असल में जिन लोगों के परिजनों का निधन हो रहा है वे तो सरकार का लिहाज करके झूठ नहीं बोल सकते या चुप नहीं रह सकते हैं। सो, कहीं मरने वालों के परिजन पोल पट्टी खोल रहे हैं, कहीं गंगा में बहती लाशें या जमीन फाड़ कर घाटों पर निकल गई लाशें पोल खोल रही हैं, कहीं श्मशान से उठता धुआं तो कहीं चिता सजाने के लिए खरीदी जा रही लकड़ी पोल खोल रही है। कुल मिला कर किसी न किसी तरह से पोल खुल जा रही है। असली संख्या भले सामने न आए लेकिन यह पता चल रहा है कि हर जगह मौतें बेहिसाब हो रही हैं। गुजरात के चार अखबारों- दिव्य भास्कर, गुजरात समाचार, सौराष्ट्र समाचार और संदेश ने कोरोना से… Continue reading खैर, खून, खांसी छिपती नहीं है

लॉकडाउन का असर दिखना शुरू, संक्रमितों की संख्या और एक्टिव केसेज में कमी

नई दिल्ली। देश के अनेक राज्यों में लगाए गए पूर्ण लॉकडाउन और कुछ राज्यों में लागू आंशिक लॉकडाउन का असर अब दिखना शुरू हो गया है। कोरोना वायरस की तीसरी लहर का कहर भी थमता दिख रहा है। शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन संक्रमितों की संख्या में कमी हुई और एक्टिव केसेज में भी कमी आई। एक्टिव केसेज की संख्या साढ़े 37 लाख से घट कर 36 लाख 90 हजार हो गई है। सर्वाधिक संक्रमित राज्य महाराष्ट्र में एक्टिव केसेज की संख्या छह लाख से घट कर पांच लाख 17 हजार हो गई है। राजधानी दिल्ली में भी 99 हजार से घट कर 71 हजार एक्टिव केस रह गए हैं। पिछले हफ्ते देश के 13 राज्यों में एक लाख से ज्यादा एक्टिव केस थे, जबकि शुक्रवार को इनकी संख्या 11 हो गई। शुक्रवार को खबर लिखे जाने तक देश में दो लाख 95 हजार से कुछ ज्यादा केसेज आए थे और 3,222 लोगों की मौत हुई थी। देर रात तक छत्तीसगढ़, पंजाब, झारखंड और असम सहित पूर्वोत्तर के कई राज्यों के आंकड़े अपडेट नहीं हुए थे। इनके आंकड़े आने के बाद संक्रमितों की संख्या में और बढ़ोतरी होगी। इससे पहले गुरुवार को तीन लाख 43 हजार नए संक्रमित मिले थे।… Continue reading लॉकडाउन का असर दिखना शुरू, संक्रमितों की संख्या और एक्टिव केसेज में कमी

परदे से बाहर आए सरकार

ऐसा लग रहा है जैसे कोरोना वायरस की महामारी के बीच भारत सरकार सात परदों के पीछे छिप कर बैठ गई है। अभी पिछले महीने तक तो भाजपा और भारत सरकार ने पश्चिम बंगाल में कारपेट बॉम्बिंग की हुई थी। दर्जनों मंत्री, सैकड़ों विधायक, सांसद और हजारों नेता प्रचार कर रहे थे। बंगाल के गली-कूचों में भाजपा के देश भर के नेताओं की भरमार थी। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने दिल्ली से कोलकाता की उड़ान का रिकार्ड बनाया। अब अचानक सब गायब हैं। पिछले 12 दिन से केंद्रीय गृह मंत्री के बारे में कुछ पता नहीं है कि वे क्या कर रहे हैं, जबकि उनका मंत्रालय कोरोना महामारी से मुकाबले का नोडल मंत्रालय है। क्या कायदे से ऐसा नहीं होना चाहिए कि बंगाल चुनाव खत्म होते ही पूरी पार्टी उतनी ही ताकत से कोरोना से लड़ने में उतरती और सड़क पर वैसे ही काम करती दिखती, जैसे बंगाल में कर रही थी? पर इसके उलट ऐसा लग रहा है कि सरकार अब भी बंगाल में ही काम करती दिख रही है। केंद्रीय मंत्री बंगाल जा रहे हैं, केंद्रीय टीम बंगाल जा रही है, गवर्नर कूचबिहार जाने पर अड़े हैं और ये सब लोग कोरोना के हालात देखने नहीं जा रहे… Continue reading परदे से बाहर आए सरकार

सत्य बोलो गत है!

‘राम नाम सत्य है’ के बाद वाली लाइन है ‘सत्य बोलो गत है’! भारत में राम से ज्यादा राम के नाम की महत्ता बताई जाती है फिर भी राम का नाम सत्य तभी माना जाता है, जब हिंदू लोग शव लेकर श्मशान जा रहे होते हैं। अपने यहां मुहावरे में कभी भी ‘राम नाम सत्य’ कहने का मतलब सत्यानाश माना जाता है। सो, कह सकते हैं कि अभी देश का राम नाम सत्य हो रहा है और सत्य बोलने में ही गत है। पर मुश्किल यह है कि जो हिंदू राम नाम सत्य है बोलते हुए श्मशान जाते हैं वे लौटते ही राम का नाम भी भूल जाते हैं और सत्य का संधान करना भी भूल जाते हैं। उन्हें यह समझ में नहीं आता है कि सत्य में ही गत है। यानी आत्मा की सद्गति तभी संभव है, जब सत्य का संधान हो! तभी आज जब देश का राम नाम सत्य हो रहा है तब भी सत्य से ही सद्गति संभव है। सत्य के संधान से ही इस सत्यानाश का मुकाबला हो सकता है। पर अफसोस की बात है कि देश की सरकार, हिंदू धर्म-संस्कृति की रक्षा का सर्वाधिकार रखने वाला राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ और स्वंयभू धर्मगुरू सब सत्य स्वीकार… Continue reading सत्य बोलो गत है!

यह टीका-टिप्पणी का वक्त नहीं

कोरोना के टीके को लेकर भारत में कितनी जबर्दस्त टीका-टिप्पणी चल रही है। नेता लोग सरकारी बंगलों में पड़े-पड़े एक-दूसरे पर बयान-वाणों की वर्षा कर रहे हैं। हमारे दब्बू और डरपोक नेता मैदान में आकर न तो मरीजों की सेवा कर रहे हैं और न ही भूखों को भोजन करवा रहे हैं। हमारे साधु-संत, पंडित-पुरोहित और मौलवी-पादरी ज़रा हिम्मत करें तो हमारे लाखों मंदिरों, मस्जिदों, गुरुद्वारों, गिरजों, आर्य-भवनों में करोड़ों मरीज़ों के इलाज का इंतजाम हो सकता है। कितनी शर्म की बात है कि सैकड़ों लाशों के ढेर नदियों में तैर रहे हैं, श्मशानों और कब्रिस्तानों में लाइनें लगी हुई हैं और प्राणवायु के अभाव में दर्जनों लोग अस्पताल में रोज ही दम तोड़ रहे हैं। गैर-सरकारी अस्पताल अपनी चांदी कूट रहे हैं। गरीब और मध्यम-वर्ग के लोग अपनी जमीन, घर और जेवर बेच-बेचकर अपने रिश्तेदारों की जान बचाने की कोशिश कर रहे हैं। सैकड़ों लोग नकली इंजेक्शन, नकली सिलेंडर और नकली दवाइयां धड़ल्ले से बेच रहे हैं। वे कालाबाजारी कर रहे हैं। वे हत्या के अपराधी हैं लेकिन भारत की शासन-व्यवस्था और न्याय-व्यवस्था उन पर कितनी मेहरबान है कि उन्हें थाने या जेल में बिठाकर मुफ्त में खाना खिला रही है और कोरोना की महामारी से उनकी रक्षा कर… Continue reading यह टीका-टिप्पणी का वक्त नहीं

कलियुगी वज्रमूर्खता, गधेड़ापन!

मेरे तो गिरधर गोपाल (मोदी) दूसरा न कोई-3: तो इक्कीसवीं सदी के सन् इक्कीस में भारत-हिंदू पड़ाव का क्या कलियुगी अर्थ हुआ? भाग्य में लिखा है सो ऐसा हो रहा है! ईश्वर की इच्छा है जो ऐसा है। प्रभु इच्छा। ताली थाली बजा कर, दीया जला कर प्रभु से प्रार्थना करनी है, वायरस भगाना है। यज्ञ करो, सुबह-शाम सूर्य को अर्पण दो, ताप वायरस को भस्म कर देगा। वैसे भी मोदीजी हैं। कलियुग के कल्कि रक्षक अवतार हैं तो भला वायरस कहां टिकेगा। …कुछ करोड बीमार हो रहे है, कुछ लाख मर रहे है तो क्या, इतने करोड ठिक भी तो है और देखों मोदीजी का कमाल… बीमार ठिक हो रहे है!…लोग मर नहीं रहे…बाकि जगह तो कितने मर गए। आज फंला का प्रवचन सुनों.. चित्त को शांत करों।… पोजिटिवटी अनलिमिटेड…विश्वास रखों सूरज फिर उदय होगा! … इस तरह अमेरिका, यूरोप याकि दुनिया के सभ्य और सतयुगी जीवन जी रहे लोग नहीं सोचते। क्योंकि वे कलियुगी होने, कलियुग बनाने वाली वज्रमूर्खता, गधेड़ापन लिए हुए नहीं हैं। वे वैसे ही जीते हैं, जैसे सतयुग में हिंदू जीते हुए थे। मतलब मूर्ति के आगे अपने को अर्पित करते हुए नहीं, बल्कि सत्य समझते, सत्य से जीते हुए इस उपासना के साथ कि-… Continue reading कलियुगी वज्रमूर्खता, गधेड़ापन!

दूसरी लहर में बढ़ी मौतें

नई दिल्ली। कोरोना वायरस की महामारी की दूसरी लहर में दुनिया भर के देशों में ज्यादा मौतें हुईं। हर देश में पहली लहर के मुकाबले दूसरी लहर में ज्यादा लोग मरे। लेकिन दूसरे देशों के मुकाबले भारत में दूसरी लहर में ज्यादा मौतें हो रही हैं। सर्वाधिक मौतों वाले अमेरिका और ब्राजील में भी दूसरी लहर में मौतों की संख्या पहली लहर के मुकाबले दोगुनी हुई पर भारत में यह संख्या तीन गुनी हो गई। भारत में पहली लहर में एक दिन में सबसे ज्यादा मौत 13 सौ के करीब हुई थी, जबकि दूसरी लहर में कई दिन चार हजार से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। पिछले दो हफ्ते में भारत में 50 हजार से ज्यादा मौतें हुई हैं। पिछले दो हफ्ते में दो दिन को छोड़ कर हर दिन साढ़े तीन हजार से ज्यादा मौतें हुईं। देश में अब तक कुल दो करोड़ 36 लाख 80 हजार से ज्यादा संक्रमित हुए हैं और दो लाख 58 हजार के करीब लोगों की मौत हो चुकी है। बुधवार को खबर लिखे जाने तक देश में तीन लाख 37 हजार से कुछ ज्यादा केसेज आए थे और 3,567 लोगों की मौत हुई थी। देर रात तक छत्तीसगढ़, झारखंड और असम सहित पूर्वोत्तर… Continue reading दूसरी लहर में बढ़ी मौतें

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