कोवैक्सीन को अभी मंजूरी नहीं

कोरोना वायरस रोकने की भारत की स्वदेशी वैक्सीन कोवैक्सीन को विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्लुएचओ की बैठक में एक बार फिर मंजूरी नहीं मिली।

कोवैक्सीन को डब्लुएचओ की मंजूरी!

भारत की स्वदेशी कोरोना वैक्सीन कोवैक्सीन को विश्व स्वास्थ्य संगठन की मंजूरी मिल सकती है। डब्लुएचओ की मंगलवार को होने वाली अहम बैठक में इसे मंजूरी दिए जाने की संभावना है।

Supreme Court ने ‘Covishield’ और ‘Covaccine’ के इस्तेमाल के रोक से किया इनकार, जुर्माना भी ठोंका…

कोर्ट ने कहा कि इन दोनों वैक्सीन पर किसी तरह का संदेह न किया जाए. न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ…

बच्चों को लग सकेगी भारत में बनी कोवैक्सीन, कब लगेगी और क्या है आपातकालीन उपयोग प्राधिकरण जानें

एसईसी (विषय विशेषज्ञ समिति) ने 2 से 18 वर्ष की आयु के बच्चों में इस्तेमाल होने वाले टीके को अधिकृत करने की सिफारिश की है। इस सिफारिश की डीजीसीआई द्वारा समीक्षा की जाएगी।

देश में 2 से 18 साल वाले बच्चों और किशोरों को भी लगेगी कोरोना वैक्सीन, लेनी होगी दो-दो डोज

भारत बायोटेक और ICMR ने मिलकर इस ‘कोवैक्सीन’ को बनाया है। कोरोना के विरूद्ध ‘कोवैक्सीन’ क्लीनिकल ट्रायल्स में 78 प्रतिशत तक कारगर साबित हुई है। बच्चों को भी बड़ों की तरह कोवैक्सीन के दो टीके लगाए…

कोरोना रोक नहीं सकते, फिर क्या करें?

पूरी दुनिया में व्यापक वैक्सीनेशन के बाद यह लगभग तय हो गया है कि किसी भी वैक्सीन से कोरोना वायरस के संक्रमण को रोका नहीं जा सकता है। वैक्सीन लगाए होने के बावजूद वायरस लोगों को संक्रमित कर रहा है।

महामारी में ऐसी बेरहमी!

कहा यह गया था कि महामारी के दौरान सरकार सबके हित का ख्याल रखेगी। उस दौरान किसी के साथ जोर-जबर्दस्ती ना हो, इसे ध्यान में रखा जाएगा।

कोरोना से राहत नहीं

डब्लूएचओ के अधिकारियों ने कहा है कि कोरोना वायरस महामारी को नियंत्रित करने के प्रयासों के परिणामों अब तक निराशाजनक हैँ।

कोविशील्ड वैक्सीन की दोनों खुराकों के बीच की अवधि हो सकती है कम, जानें किस उम्र के लोगों के लिए होगा यह फैसला

केंद्र सरकार बहुत जल्द ही एक बार फिर से कोविशील्ड वैक्सीन की दोनों डोज के बीच समयांतराल को कम कर सकती है। लेकिन ये सभी आयुवर्ग के लोगों के लिए नहीं होगा। बल्कि ऐसा सिर्फ 45 साल और उससे अधिक की आयु के लोगों के लिए होगा।

अगले महीने संभव बच्चों की वैक्सीन

कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिए चल रही वैक्सीनेशन अभियान के बीच अच्छी खबर है। अगले महीने यानी अगस्त में बच्चों की वैक्सीन आ सकती है।

भारत का जुलाई के अंत तक 50 करोड़ से अधिक टीकाकरण का लक्ष्य था लेकिन भारत बायोटेक के कारण रहेगा अधूरा

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Good News : बच्चों के लिए कोरोना की वैक्सीन को सितंबर तक मिलेगी हरी झंडी- डॉ. रणदीप गुलेरिया

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वैक्सीनेशन हुआ कोविशील्ड का और वैक्सीन प्रमाण पत्र पर कोवैक्सीन का नाम, जानें क्या है पूरा मामला..

कोरोना वैक्सीन लगवाने वालों के लिए कोविन पोर्टल पर नई समस्या आ खड़ी हुई है। वैसे तो कोई ना कोई समस्या रहती ही है। मामला हरियाणा से सामने आया है। जहां एक महिला ने कोविन ऐप से कोरोना वैक्सीन का रजिस्ट्रेशन करवाया। तय डेट पर महिला वैक्सीन लगाने सेंटर पहुंची तो टीकाकरण ( vaccination vs certificate ) केंद्र पर महिला को स्वास्थ्य कर्मियों की ओर से कोविशील्ड की डोज लगाई गई। लेकिन उस महिला को कोविन पोर्टल के माध्यम से कोवैक्सीन के टीकाकरण का सर्टिफिकेट भेज दिया गया। इस पूरे मामले की शिकायत महिला ने स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज से भी की है। also read: चमत्कार.. कोविशील्ड वैक्सीन लगवाने से बेरंग से रंगीन हुई एक बुजुर्ग महिला की जिंदगी वैक्सीन लगी कोविशील्ड की और सर्टिफिकेट मिला कोवैक्सीन का ( vaccination vs certificate ) हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को किए ट्वीट में शिकायतकर्ता टिमसी दुआ ने लिखा कि रजिस्ट्रेशन करवाने के बाद वैक्सीनेशन के लिए 4 जुलाई को उनका नंबर आया था। स्वास्थ्य कर्मियों ने बताया कि उन्हें पहली डोज़ कोविशील्ड वैक्सीन की लगाई जा रही है। ( vaccination vs certificate ) टिमसी ने शिकायत में लिखा कि वैक्सीन लगने के बाद उन्हें कोविन पोर्टल पर… Continue reading वैक्सीनेशन हुआ कोविशील्ड का और वैक्सीन प्रमाण पत्र पर कोवैक्सीन का नाम, जानें क्या है पूरा मामला..

कोवैक्सीन सबसे महंगी क्यों है?

भारत की स्वदेशी कंपनी भारत बायोटेक की कोवैक्सीन सबसे महंगी क्यों है? यह लाख टके का सवाल है। बाकी वैक्सीन के मुकाबले इसकी कीमत बहुत ज्यादा है। ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की जिस कोवीशील्ड वैक्सीन का उत्पादन सीरम इंस्टीच्यूट में हो रहा है उसके मुकाबले कोवैक्सीन की कीमत लगभग दोगुनी है। कोवीशील्ड की एक डोज 780 रुपए की है तो कोवैक्सीन की एक डोज की कीमत 1,430 रुपए है। लगातार विवादों में रही इस कंपनी की वैक्सीन के असर को लेकर भी अभी तक संदेह हैं और इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्लुएचओ की मंजूरी भी नहीं है। हाल ही में इसे अमेरिका ने मंजूरी देने से इनकार किया है। इसकी कीमत का मामला इसलिए भी रहस्यमय है क्योंकि इस वैक्सीन की रिसर्च में भी भारत सरकार की एजेंसियां शामिल थीं। इंडियन कौंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च यानी आईसीएमआर के साथ मिल कर कंपनी ने यह वैक्सीन तैयार की है। पिछले दिनों इसको पेटेंट से मुक्त करने और कुछ दूसरी कंपनियों को भी इसका उत्पादन करने देने का फैसला भी हुआ। इसके बावजूद इसकी कीमत कम नहीं हुई है। कायदे से इसकी कीमत कोवीशील्ड और रूसी वैक्सीन स्पुतनिक से कम होनी चाहिए लेकिन इसकी कीमत उनसे ज्यादा है और भारत सरकार इसकी ज्यादा कीमत… Continue reading कोवैक्सीन सबसे महंगी क्यों है?

Covaxin Vaccine: कोवैक्सीन में बछड़े के सीरम का अब विवाद

नई दिल्ली। भारत की स्वदेशी कंपनी भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। आरोप लग रहे हैं कि वैक्सीन में गाय के नवजात बछड़े का सीरम इस्तेमाल किया जाता है। कंपनी ने इस आरोप को खारिज किया है। भारत बायोटेक ने बुधवार को बताया कि लोगों को जो वैक्सीन की डोज लगाई जा रही है, उस फाइनल डोज में बछड़े का सीरम इस्तेमाल नहीं किया गया है। भारत बायोटेक ने बताया कि नवजात बछड़े के सीरम का इस्तेमाल वायरल वैक्सीन बनाने में इस्तेमाल किया गया। इसका इस्तेमाल सेल्स की ग्रोथ के लिए किया गया पर कोरोना वायरस के लिए इसका इस्तेमाल नहीं किया गया और न ही इसे फाइनल फॉर्मूलेशन में इस्तेमाल किया गया। कंपनी ने कहा कि अंतिम उत्पाद तैयार करने में इसका इस्तेमाल नहीं किया गया। कंपनी के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी सफाई दी। मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि सोशल मीडिया पर कोवैक्सीन के बारे में गलत जानकारी शेयर की जा रही है। पोस्ट में तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है। सरकार ने कहा- नवजात बछड़े के सीरम का उपयोग सिर्फ वेरोसेल्स को तैयार करने में किया जाता है, जो बाद में अपने आप ही नष्ट हो… Continue reading Covaxin Vaccine: कोवैक्सीन में बछड़े के सीरम का अब विवाद

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