वैज्ञानिक सवाल, खुफिया जांच!

रिपब्लिकन पार्टी पर डॉनल्ड ट्रंप की जारी पकड़ और देश में दक्षिणपंथी एजेंडे के हावी रहने के बीच बाइडेन जो चाहते हैं, वो करने के बजाय वह कर रहे हैं, जो ट्रंप समर्थकों का प्रभाव कम करने के लिए वे जरूरी समझते हैँ। यही संकेत कोरोना वायरस की उत्पत्ति की जांच कराने के उनके फैसले से मिला है। गुजरते दिनों के साथ ये धारणा गहराती जा रही है कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की विदेश नीति घरेलू दबाव में तय हो रही है। रिपब्लिकन पार्टी पर पूर्व राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की जारी पकड़ और देश में दक्षिणपंथी एजेंडे के हावी रहने के बीच बाइडेन जो चाहते हैं, वो करने के बजाय वह कर रहे हैं, जो ट्रंप समर्थकों का प्रभाव कम करने के लिए वे जरूरी समझते हैँ। बाइडेन जब राष्ट्रपति बने, तो उन्होंने ये जांच बंद करवा दी कि क्या कोरोना वायरस को चीन ने प्रयोगशाला में तैयार किया। अब उन्होंने ये जांच फिर शुरू करवाने का एलान किया है। वजह बनी एक अखबार में ऐसा शक जताते हुए छपी रिपोर्ट, जिसको लेकर रिपब्लिकन पार्टी ने वितंडा खड़ा कर दिया। तो राष्ट्रपति बाइडेन ने खुफिया एजेंसियों से कहा है कि वे कोरोना वायरस की उत्पत्ति की जांच को लेकर… Continue reading वैज्ञानिक सवाल, खुफिया जांच!

वुहान की लैब में वायरस बने होने के नए सबूत

नई दिल्ली। चीन के शहर वुहान की लैब में कोरोना वायरस के बने होने को लेकर हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। अमेरिका में मीडिया में रिपोर्ट सामने आने और राष्ट्रपति जो बाइडेन के तीन महीने में इसकी जांच करके रिपोर्ट देने के आदेश के बाद अब नया खुलासा ब्रिटेन और नार्वे के वैज्ञानिकों ने किया है। ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि कोरोना वायरस चीन की वुहान लैब से ही निकला और इसके प्राकृतिक तौर पर चमगादड़ों से फैलने के सबूत नहीं हैं। इस नए दावे से चीन की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने देश की खुफिया एजेंसियों से 90 दिन में इस बारे में रिपोर्ट तलब की है। इस बीच ब्रिटिश वैज्ञानिकों के खुलासे ने चीन पर शक और बढ़ा दिए हैं। ब्रिटेन के प्रोफेसर एंगस डेल्गलिश और नॉर्वे के डॉक्टर बर्गर सोरेनसेन ने यह नई स्टडी की है। इसके मुताबिक, सार्स-सीओवी-2 वायरस वास्तव में चीन के वुहान लैब से ही रिसर्च के दौरान लीक हुआ। जब यह गलती हो गई तो रिवर्स इंजीनियरिंग वर्जन के जरिए इसे छिपाने की कोशिश की गई। ब्रिटेन और नार्वे के वैज्ञानिकों का कहना है कि चीनी वैज्ञानिक दुनिया को यह दिखाना… Continue reading वुहान की लैब में वायरस बने होने के नए सबूत

लॉकडाउन ही भारत का अकेला तरीका!

हां, इसके अलावा भारत के पास दूसरा कोई तरीका नहीं है। लेकिन इस तरीके से भारत में संक्रमण कभी खत्म नहीं होगा। वायरस दबेगा, रूकेगा मगर मरेगा नहीं। तभी भारत लगातार (सन् 2022-23 में भी) सौ जूते-सौ प्याज खाने, बेइंतहां रोगी-बेइंतहां मौतों का वैश्विक रिकार्ड बनाएगा। भूल जाएं कि भारत में संक्रमण खत्म करने का फिलहाल कोई औजार है। भारत देश के पास वायरस पूर्व के सहज जीवन में लौटाने का न तरीका है, न साधन है और न समझ। बस, बार-बार लॉकडाउन और बार-बार अनलॉक में ही 140 करोड़ लोगों को सन् 2021, सन् 2022-23 के अगले दो-ढाई साल काटने हैं। दुनिया में सबके बाद (यहां अर्थ विकसित-बड़े-प्रमुख विकासशील देशों का) भारत सामान्य होगा। तब तक सांस बनवाए रखने का एकमेव तरीका बार-बार लॉकडाउन है। हमें जान लेना चाहिए कि कोविड-19 वायरस को बेकाबू होने से तभी रोका जा सकता है जब लोगों की आवाजाही, मेल-मुलाकात पर ताला लगे। लोगों का परस्पर संपर्क न्यूनतम हो। सब लोग घर में बैठें। वायरस को घर-घर ताला मिलेगा तभी संक्रमण थमेगा व मरीज और मौत संख्या घटेगी। यह भी पढ़ें: मेरे तो गिरधर गोपाल (मोदी), दूसरा न कोई! जाहिर है लॉकडाउन से भारत में वायरस वैसे खत्म नहीं हो सकता है जैसे… Continue reading लॉकडाउन ही भारत का अकेला तरीका!

अस्पताल मानों खत्म या बंद तो..

हमेशा देखा हैं कि कोई जब बीमार होता है तो लोग उसे लेकर अस्पताल भागते हैं। मगर इन दिनों आप कहां भगेंगे? प्राइवेट अस्पतालों के एक्जीक्यूटिव बाहर ही खड़े हैं और वहीं से लोगों को लौटा रहे हैं। अगर वे साठ-सत्तर लाख की या करोड़ से ऊपर की गाड़ियों में लाए गए मरीजों को बाहर से ही लौटा रहे हैं तो दूसरी गाड़ियों की क्या बिसात? मतलब यह कि केवल पैसे से सब कुछ मिलना इन दिनों थोड़ा मुश्किल हो गया है। पैसे के अलावा आजकल आपको आज भारी पहुंच की भी जरूरत पड़ेगी। और अस्पताल में आपका प्रवेश किसी भी तरीके से हुआ हो, इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि आपके साथ फीस का न्याय भी होगा। दूसरी तरफ, सरकारी अस्पताल आपको आने से नहीं रोक रहे, लेकिन वहां लंबी कतार है। पता नहीं कितने घंटे या कितने दिनों में आपका नंबर आएगा? वहां के डॉक्टर, नर्स या दूसरे कर्मचारी आपसे बस इतना कहेंगे कि जगह नहीं है, हम क्या करें? बस आप स्ट्रेचर पर लेटे लाइन में लगे रहिए और इंतजार कीजिए। मगर इससे क्या होगा, आप इमरजेंसी वार्ड तक में नहीं पहुंच पाएंगे। पहुंच भी गए तो बेड के अकाल के कारण भर्ती नहीं किए जा… Continue reading अस्पताल मानों खत्म या बंद तो..

कोरोना से लड़ें युद्ध स्तर पर

विदेशों से मिल रही जबर्दस्त मदद के बावजूद कोरोना मरीजों का जो हाल भारत में हो रहा है, उसने सारे देश को ऐसे हिलाकर रख दिया है, जैसे कि किसी युद्ध ने भी नहीं हिलाया था। लोग यह समझ नहीं पा रहे हैं कि हजारों ऑक्सीजन-यंत्र और हजारों टन ऑक्सीजन के जहाजों से भारत पहुंचने के बाद भी कई अस्पतालों में मरीज क्यों मर रहे हैं ? उन्हें ऑक्सीजन क्यों नहीं मिल रही है ? जो लापरवाही हमने बंगाल में चुनाव के दौरान देखी और कुंभ के मेले ने जैसे कोरोना को गांव-गांव तक पहुंचा दिया, उसे हम अभी भूल भी जाएं तो कम से कम इतना इंतजाम तो अभी तक हो जाना चाहिए था कि करोड़ों लोगों को टीका लग जाता। लेकिन अभी तक मुश्किल से तीन करोड़ लोगों को पूरे दो टीके लगे हैं। उन्हें भी 20-25 दिन बाद पूर्ण सुरक्षित माना जाएगा। यदि डाॅक्टरों और नर्सों की कमी है तो देश की फौज और पुलिस कब काम आएगी ? यदि हमारे 20 लाख फौजी और पुलिस के जवान भिड़ा दिए जाएं तो वे कोरोना मरीजों को क्यों नहीं सम्हाल सकते हैं ? फौज के पास तो अपने अस्पतालों और डाक्टरों की भरमार है। ऑक्सीजन सिलेंडरों को ढोने… Continue reading कोरोना से लड़ें युद्ध स्तर पर

क्या लिखूं, सब तो साल पहले लिखा

भारत मौत का कुंआ बना है! ऐसा कोई सैकेंड वेव, थर्ड, फोर्थ वेव से नहीं है जो है वह नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार की अंतहीन मूर्खताओं से है। इन मूर्खताओं में ब्रेक कभी नहीं था जो समझदार-सभ्य देशों की तरह यह सोचे कि वायरस रूक गया, फिर फैला, फिर रूका फिर फैला। भारत में वायरस लगातार फैलता हुआ है और यह कहीं सन् 1918 के स्पेनिश फ्लू जैसी महामारी की मौतों का मंजर न बने, इसके लक्षण पहले दिन से इसलिए दीवाल पर लिखे हुए थे क्योंकि नरेंद्र मोदी ने अपनी बुद्धी के घमंड में अकेले फैसले लिए। इनसे भारत मौत का कुंआ बनेगा, दुनिया का अछूत देश बनेगा, अगले तीन-चार भारत लगातार बरबाद होना है, यहमैंने इतना लिखा था कि अब तो बरबादी ही बरबादी है।  तो क्यों न आज गौर करें मेरे लिखे कॉलम के शीर्षक- पंक्तियों पर गौर रहें – वायरस वैश्विक व लापरवाह भारत!-‘भारत राष्ट्र-राज्य सावधान-सतर्क नहीं है। भारत को क्या सुध है कि ईरान, इटली, दक्षिण कोरिया, चीन के साथ हमारी आवाजाही खत्म करना जरूरी है या नहीं? (28 फरवरी 2020) यह भी पढ़ें:वायरस हुआ वैश्विक व लापरवाह भारत! मोदीजी विश्राम कीजिए, बुद्धी, हार्वड को मौका दीजिए!-वायरस से लड़ाई के मौजूदा सिनेरियों में भारत… Continue reading क्या लिखूं, सब तो साल पहले लिखा

सुई की नोक बराबर काम नहीं

दुर्भाग्य की बात है जो भारत में कोरोना वायरस की आपदा को अवसर बनाया गया और फिर आपदा के बीच उत्सव मनाया गया। जिससे जहां भी संभव हुआ उसने वहां कोरोना और दूसरी बीमारी के मरीजों को लूटना शुरू कर दिया। कोरोना की टेस्टिंग से लेकर अस्पतालों में इलाज तक हर जगह अभूतपूर्व लूट मची। वह लूट अभी तक जारी है। इसके बाद प्रधानमंत्री ने आपदा में उत्सव का ऐलान किया। उन्होंने पहले ताली-थाली बजवाई थी और बाद में दीये जलवाए थे। इस बार उत्सव में उन्होंने टीका उत्सव मनवाया है। लेकिन हकीकत यह है कि चार दिन के टीका उत्सव के दौरान कई राज्यों में टीकाकरण की रफ्तार कम हो गई क्योंकि वैक्सीन की डोज उपलब्ध नहीं थी। सोचें, देश में कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने वाले टीके ज्यादा से ज्यादा संख्या में बनें इसके लिए पूरे साल सरकार ने कुछ नहीं किया। दो निजी कंपनियों ने जैसे तैसे और बिना सरकारी मदद के अपने यहां टीका बनवाया तो प्रधानमंत्री ने जाकर उनकी लैब का ऐसा मुआयना किया, जैसे खुद अपनी देख-रेख में वैक्सीन बनवा रहे हों। उसके बाद केंद्र सरकार ने वैक्सीनेशन की पूरी प्रक्रिया को केंद्रीकृत किए रखा, जिसकी वजह से कई तरह की समस्याएं हुई हैं।… Continue reading सुई की नोक बराबर काम नहीं

कुछ भी नया नहीं हो रहा है

कोरोना वायरस की महामारी में जो कुछ हो रहा है उससे अनेक लोग हैरान हो रहे हैं, जैसे यह कुछ नया हो रहा है। इसमें कुछ भी नया नहीं हो रहा है। यह भारत की सनातन कथा है। हमेशा ऐसा ही होता रहा है। भारत में शासक कभी भी इतने दूरदर्शी नहीं हुए कि वे खतरे को समय रहते भांप लें और उससे निपटने के उपाय करें। चाहे बाहरी आक्रमण का मामला हो या बीमारी और महामारी का मामला हो, सब में भारत के शासकों की ऐसी ही प्रतिक्रिया रही है। जब तक खतरा एकदम सिर पर नहीं आ जाता है तब तक भारत के शासक न तो कोई तैयारी करते हैं और न कोई प्रतिक्रिया देते हैं। सामरिक मामलों के विशेषज्ञ ब्रह्म चैलानी ने इसे ‘पानीपत सिंड्रोम’ का नाम दिया है। यानी खतरा जब तक पानीपत नहीं पहुंचेगा तब तक दिल्ली का शासक उस पर प्रतिक्रिया नहीं देगा। जैसे चीन ने भारत की जमीन कब्जा कर ली लेकिन जब तक दुनिया ने बताया नहीं या यह दिखा नहीं कि चीन भारत की सीमा में घुस कर बैठा है, तब तक भारत की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई थी। वैसे ही जब तक महामारी भारत में आकर एक… Continue reading कुछ भी नया नहीं हो रहा है

आपात्काल से भी बड़ा आफतकाल

कोरोना महामारी ने इतना विकराल रुप धारण कर लिया है कि सर्वोच्च न्यायालय को वह काम करना पड़ गया है, जो किसी भी लोकतांत्रिक देश में संसद को करना होता है। सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को आदेश दिया है कि वह उसे एक राष्ट्रीय नीति तुरंत बनाकर दे, जो कोरोना से लड़ सके। मरीज़ों को ऑक्सीजन, इंजेक्शन, दवाइयाँ आदि समय पर उपलब्ध करवाने की वह व्यवस्था करे। न्यायपालिका को यह क्यों करना पड़ा ? इसीलिए कि लाखों लोग रोज़ बीमार पड़ रहे हैं और हजारों लोगों की जान जा रही है। रोगियों को न दवा मिल रही है, न ऑक्सीजन मिल रही है, न पलंग मिल रहे हैं। इनके अभाव में बेबस लोग दम तोड़ रहे हैं। टीवी चैनलों पर श्मशान घाटों और कब्रिस्तानों में लगी लाशों की भीड़ को देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। कोरोना की दवाइयों, इंजेक्शनों और अस्पताल के पलंगों के लिए जो कालाबाजारी चल रही है, वह मानवता के माथे पर कलंक का टीका है। अभी तक एक भी कालाबाजारी को चौराहे पर सरे-आम नहीं लटकाया गया है। क्या हमारी सरकार और हमारी अदालत के लिए यह शर्म की बात नहीं है? होना तो यह चाहिए कि इस आपात्काल में, जो भारत का आफतकाल… Continue reading आपात्काल से भी बड़ा आफतकाल

जबलपुर में पांच मरीजों की मौत

जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर भी ऑक्सीजन की कमी से पांच मरीजों की मौत हो गई। जबलपुर में पिछले आठ दिन में दूसरी बार ऐसी घटना हुई है। जिले के उखरी रोड पर स्थित गैलेक्सी अस्पताल में गुरुवार रात पांच कोविड मरीजों की ऑक्सीजन नहीं मिलने की वजह से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि ऑक्सीजन सप्लाई बंद होने पर जिस समय मरीज तड़प रहे थे उस समय ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर और स्टाफ अस्पताल छोड़ कर भाग गए। घटना की सूचना मिलने के तुरंत बाद पुलिस ने मौके पर पहुंच कर आनन-फानन में मोर्चा संभाला। तत्काल कुछ सिलेंडर की व्यवस्था कराई गई, लेकिन दो मरीजों की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है। इस पूरे घटना से नाराज परिजनों ने जम कर हंगामा किया। गैलेक्सी अस्पताल में कुल 65 कोविड संक्रमित भर्ती थे। इसमें 31 ऑक्सीजन पर थे और आईसीयू में ICU में कुल 34 मरीज भर्ती थे।

नेता कोरोना-दंगल बंद करें

ऑक्सीजन की कमी के कारण नाशिक के अस्पताल में हुई 24 लोगों की मौत दिल दहलानेवाली खबर है। ऑक्सीजन की कमी की खबरें देश के कई शहरों से आ रही हैं। कई अस्पतालों में मरीज़ सिर्फ इसी की वजह से दम तोड़ रहे हैं। कोरोना से रोज हताहत होनेवालों की संख्या इतनी बढ़ गई है कि कई देशों के नेताओं ने अपनी भारत-यात्रा स्थगित कर दी है। कुछ देशों ने भारतीय यात्रियों के आने पर प्रतिबंध लगा दिया है। लाखों लोग डर के मारे अपने गांवों की तरफ दुबारा भाग रहे हैं। नेता लोग भी डर गए हैं। वे तालाबंदी और रात्रि-कर्फ्यू की घोषणाएं कर रहे हैं लेकिन बंगाल में उनका चुनाव अभियान पूरी बेशर्मी से जारी है। ममता बेनर्जी ने बयान दिया है कि ‘‘कोविड तो मोदी ने पैदा किया है।’’ इससे बढ़कर गैर-जिम्मेदाराना बयान क्या हो सकता है ? यदि मोदी चुनावी लापरवाही के लिए जिम्मेदार है तो उससे ज्यादा खुद ममता जिम्मेदार है। ममता यदि हिम्मत करतीं तो मुख्यमंत्री के नाते चुनावी रैलियों पर प्रतिबंध लगा सकती थीं। उन्हें कौन रोक सकता था? यह ठीक है कि बंगाल में कोरोना का प्रकोप वैसा प्रचंड नहीं है, जैसा कि वह मुंबई और दिल्ली में है लेकिन उसकी चुनाव-रैलियों… Continue reading नेता कोरोना-दंगल बंद करें

इस साल ऑक्सीजन बड़ी चीज हो गई

सोचें, मेडिकल ऑक्सीजन को लेकर पूरे देश में हाहाकार मचा है। मेडिकल ऑक्सीजन कोई ऐसी चीज नहीं है, जिसका फॉर्मूला बहुत मुश्किल से मिलता है या जो लाइसेंस के तहत मिलता है या जिसका उत्पादन बहुत कठिन है या जिसके लिए कच्चे माल की कमी है। यह बहुत बेसिक चीज है। जिस तरह दवा की दुकान में पारासिटामोल का टैबलेट सहज रूप से होता है वैसे ही स्वास्थ्य सुविधाओं में या अस्पतालों में मेडिकल ऑक्सीजन की उपलब्धता होती है। लेकिन केंद्र से लेकर राज्यों की सरकारों के निकम्मेपन ने इसे भी दुर्लभ वस्तु बना दिया। कुछ अति ज्ञानी लोग इसी बहाने प्रकृति को बचाने की अपील करने लगे हैं। लेकिन उनको भी पता होना चाहिए कितने भी पेड़-पौधों हों, मेडिकल ऑक्सीजन उनसे नहीं निकाली जा सकती है। उसकी जरूरत अलग है। प्रकृति बचाने की अपील करें, लेकिन उससे पहले अभी अपनी सरकारों को कठघरे में खड़ा करें, जो मेडिकल ऑक्सीजन जैसी बुनियादी चीज की व्यवस्था करने में विफल रहे हैं। हैरानी की बात है कि यह बेसिक चीज की व्यवस्था के लिए प्रधानमंत्री ने खुद कमर कसी है। कैबिनेट सचिव भी राज्यों के मुख्य सचिवों को इस बारे में निर्देश दे रहे हैं। राज्यों के मुख्यमंत्री रेल मंत्री से अपील… Continue reading इस साल ऑक्सीजन बड़ी चीज हो गई

कोरोनाः तालाबंदी हल नहीं है

कोरोना महामारी इतना विकराल रुप आजकल धारण करती जा रही है कि उसने सारे देश में दहशत का माहौल खड़ा कर दिया है। भारत-पाकिस्तान युद्धों के समय भी इतना डर पैदा नहीं हुआ था, जैसा कि आजकल हो रहा है। प्रधानमंत्री को राष्ट्र के नाम संबोधन देना पड़ा है। उन्हें बताना पड़ा है कि सरकार इस महामारी से लड़ने के लिए क्या-क्या कर रही है। आॅक्सीजन, इंजेक्शन, पलंगों, दवाइयों की कमी को कैसे दूर किया जाएगा। विरोधी नेताओं ने सरकार पर लापरवाही और बेफिक्री के आरोप लगाए हैं। लेकिन उन्हीं नेताअेां को कोरोना ने दबोच लिया है। कोरोना किसी की जाति, हैसियत, मजहब, प्रांत आदि का भेद-भाव नहीं कर रहा है। सभी टीके के लिए दौड़े चले जा रहे हैं। रक्षा मंत्री राजनाथसिंह ने फौज से भी अपील की है कि वह त्रस्त लोगों की मदद करे। लेकिन यहां बड़ा सवाल यह है कि रोज़ लाखों नए लोगों में यह महामारी क्यों फैल रही है और इसका मुकाबला कैसे किया जाए ? इसका सीधा-सादा जवाब यह है कि लोगों में असवाधानी बहुत बढ़ गई थी। दिल्ली, मुंबई, कलकत्ता, पुणें जैसे शहरों को छोड़ दें तो छोटे शहरों, कस्बों और गांवों में आपको लोग बिना मुखपट्टी लगाए घूमते हुए मिल जाएंगे।… Continue reading कोरोनाः तालाबंदी हल नहीं है

दस राज्यों में संकट गहरा, 1,320 लोगों की मौत हुई

नई दिल्ली। कोरोना वायरस के संक्रमितों की संख्या परे देश में तेजी से बढ़ रही है और उसी अनुपात में मरने वालों की संख्या भी बढ़ रही है। लेकिन देश के 10 राज्यों का संकट बहुत गहरा है और इन राज्यों की वजह से ही देश में कोरोना की हालत बेकाबू दिख रही है। देश में हर दिन मिल रहे नए संक्रमितों में 10 राज्यों का हिस्सा 78 फीसदी से ज्यादा है। देश में सर्वाधिक संक्रमित महाराष्ट्र के अलावा उत्तर प्रदेश, दिल्ली, केरल, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, कर्नाटक और गुजरात ये 10 राज्य हैं, जहां 78 फीसदी से ज्यादा नए केसेज मिल रहे हैं। इन राज्यों में कोरोना की स्थिति बेकाबू हो गई है। सर्वाधिक संक्रमित इन 10 राज्यों में से पांच राज्यों- दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में लॉकडाउन लगा हुआ है फिर भी हालात काबू में नहीं आ रहे हैं। मंगलवार को खबर लिखे जाने तक पूरे देश में दो लाख 21 हजार से ज्यादा नए केसेज आए थे, जिसके बाद संक्रमितों की संख्या एक करोड़ 55 लाख, 28 हजार से ज्यादा हो गई और एक्टिव मरीजों की संख्या 21 लाख 18 हजार से ज्यादा हो गई। खबर लिखे जाने तक राजधानी दिल्ली, कर्नाटक, छत्तीसगढ़… Continue reading दस राज्यों में संकट गहरा, 1,320 लोगों की मौत हुई

Rajasthan CM Ashok Gehlot Corona Meeting : तीन सौ लोग मात्र सत्रह दिन में दम तोड़ चुके, भयावह हुआ कोरोना वायरस

जयपुर | राजस्थान में कोविड के मरीज 10 हजार का आंकड़ा (Rajasthan Corona Update) प्रतिदिन का पार कर गए हैं। अब प्रदेश के सामने सिर्फ लॉकडाउन (Lockdown in Rajasthan) का विकल्प ही बचा है। कोरोना वायरस (Corona Virus) की दूसरी लहर इतनी खतरनाक है कि राजस्थान में मात्र सत्रह दिन में तीन सौ लोग दम (People died in Rajasthan) तोड़ चुके हैं। अब अशोक गहलोत (Chief Minister Ashok Gehlot) सरकार भी सख्त कदम उठाने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में जयपुर में ओपन बैठकमें अधिकारी, राजनीतिक दल, धर्मगुरु, सामाजिक संगठनों के साथ सीएम ने कहा कि अब सरकार सोच विचारकर ही लॉकडाउन पर निर्णय करेगी। Rajasthan में कोरोना ने मचाया कोहराम, 24 घंटे में ही 17 मौतों से सहमा पूरा शहर, 9 हजार को पार कर नए संक्रमित चिकित्सा विभाग के प्रमुख सचिव सिद्धार्थ महाजन ने कहा कि प्रदेश में मात्र सत्रह दिन में तीन सौ लोग दम तोड़ गए हैं। आने वाले 13 दिन में कोरोना के 1.30 लाख केस होने की आशंका है। अब हमारी गति भारत के औसत से भी आगे निकल चुकी है। अभी प्रदेश में 67 हजार एक्टिव केस हैं। कोविड से मरने वालों में 30 फसदी ग्रामीण इलाकों के हैं। पहले यह… Continue reading Rajasthan CM Ashok Gehlot Corona Meeting : तीन सौ लोग मात्र सत्रह दिन में दम तोड़ चुके, भयावह हुआ कोरोना वायरस

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