Infograpics : ओमीक्रॉन ‘वैरिएंट ओफ कनर्सन’

डेल्टा वैरिएंट से कई गुना खतरनाक, डब्लुएचओ ने की इमरजेंसी मीटिंग।

जरा हटके : कोरोना मेडिकल टीम पर भारी पड़ी एक महिला, कहा- वैक्सीन लगाई तो सांप से डसा दूंगी – देखें VIDEO

एक महिला ने कोरोना वैक्सीन लगाने के लिए पहुंची टीम को सांप दिखाकर डरा दिया। महिला सपेरा है, जो वैक्सीन लगवाने के लिए तैयार नहीं थी।

20 हजार से कम केस

देश में कोरोना वायरस के संक्रमितों की संख्या में कमी आने का सिलसिला बुधवार को थम गया। बुधवार को संक्रमितों की संख्या में थोड़ी तेजी आई।

एक्टिव केस घट कर दो लाख

देश में कोरोना वायरस के संक्रमितों की संख्या में कमी आने का सिलसिला जारी है। मंगलवार को लगातार दूसरे दिन संक्रमितों की संख्या 15 हजार के आसपास रही।

2 साल तक के बच्चों के लिए कोवैक्सीन की मंजूरी के लिए सिफारिश, जल्द हो सकती है शुरूआत…

18 साल की उम्र के बच्चों एवं किशोरों को आपात स्थिति में भारत बायोटेक का ‘कोवैक्सीन’ टीका लगाने की अनुमति दिए जाने की सिफारिश की है….

वैज्ञानिक सवाल, खुफिया जांच!

रिपब्लिकन पार्टी पर डॉनल्ड ट्रंप की जारी पकड़ और देश में दक्षिणपंथी एजेंडे के हावी रहने के बीच बाइडेन जो चाहते हैं, वो करने के बजाय वह कर रहे हैं, जो ट्रंप समर्थकों का प्रभाव कम करने के लिए वे जरूरी समझते हैँ। यही संकेत कोरोना वायरस की उत्पत्ति की जांच कराने के उनके फैसले से मिला है। गुजरते दिनों के साथ ये धारणा गहराती जा रही है कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की विदेश नीति घरेलू दबाव में तय हो रही है। रिपब्लिकन पार्टी पर पूर्व राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की जारी पकड़ और देश में दक्षिणपंथी एजेंडे के हावी रहने के बीच बाइडेन जो चाहते हैं, वो करने के बजाय वह कर रहे हैं, जो ट्रंप समर्थकों का प्रभाव कम करने के लिए वे जरूरी समझते हैँ। बाइडेन जब राष्ट्रपति बने, तो उन्होंने ये जांच बंद करवा दी कि क्या कोरोना वायरस को चीन ने प्रयोगशाला में तैयार किया। अब उन्होंने ये जांच फिर शुरू करवाने का एलान किया है। वजह बनी एक अखबार में ऐसा शक जताते हुए छपी रिपोर्ट, जिसको लेकर रिपब्लिकन पार्टी ने वितंडा खड़ा कर दिया। तो राष्ट्रपति बाइडेन ने खुफिया एजेंसियों से कहा है कि वे कोरोना वायरस की उत्पत्ति की जांच को लेकर… Continue reading वैज्ञानिक सवाल, खुफिया जांच!

वुहान की लैब में वायरस बने होने के नए सबूत

नई दिल्ली। चीन के शहर वुहान की लैब में कोरोना वायरस के बने होने को लेकर हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। अमेरिका में मीडिया में रिपोर्ट सामने आने और राष्ट्रपति जो बाइडेन के तीन महीने में इसकी जांच करके रिपोर्ट देने के आदेश के बाद अब नया खुलासा ब्रिटेन और नार्वे के वैज्ञानिकों ने किया है। ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि कोरोना वायरस चीन की वुहान लैब से ही निकला और इसके प्राकृतिक तौर पर चमगादड़ों से फैलने के सबूत नहीं हैं। इस नए दावे से चीन की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने देश की खुफिया एजेंसियों से 90 दिन में इस बारे में रिपोर्ट तलब की है। इस बीच ब्रिटिश वैज्ञानिकों के खुलासे ने चीन पर शक और बढ़ा दिए हैं। ब्रिटेन के प्रोफेसर एंगस डेल्गलिश और नॉर्वे के डॉक्टर बर्गर सोरेनसेन ने यह नई स्टडी की है। इसके मुताबिक, सार्स-सीओवी-2 वायरस वास्तव में चीन के वुहान लैब से ही रिसर्च के दौरान लीक हुआ। जब यह गलती हो गई तो रिवर्स इंजीनियरिंग वर्जन के जरिए इसे छिपाने की कोशिश की गई। ब्रिटेन और नार्वे के वैज्ञानिकों का कहना है कि चीनी वैज्ञानिक दुनिया को यह दिखाना… Continue reading वुहान की लैब में वायरस बने होने के नए सबूत

लॉकडाउन ही भारत का अकेला तरीका!

हां, इसके अलावा भारत के पास दूसरा कोई तरीका नहीं है। लेकिन इस तरीके से भारत में संक्रमण कभी खत्म नहीं होगा। वायरस दबेगा, रूकेगा मगर मरेगा नहीं। तभी भारत लगातार (सन् 2022-23 में भी) सौ जूते-सौ प्याज खाने, बेइंतहां रोगी-बेइंतहां मौतों का वैश्विक रिकार्ड बनाएगा। भूल जाएं कि भारत में संक्रमण खत्म करने का फिलहाल कोई औजार है। भारत देश के पास वायरस पूर्व के सहज जीवन में लौटाने का न तरीका है, न साधन है और न समझ। बस, बार-बार लॉकडाउन और बार-बार अनलॉक में ही 140 करोड़ लोगों को सन् 2021, सन् 2022-23 के अगले दो-ढाई साल काटने हैं। दुनिया में सबके बाद (यहां अर्थ विकसित-बड़े-प्रमुख विकासशील देशों का) भारत सामान्य होगा। तब तक सांस बनवाए रखने का एकमेव तरीका बार-बार लॉकडाउन है। हमें जान लेना चाहिए कि कोविड-19 वायरस को बेकाबू होने से तभी रोका जा सकता है जब लोगों की आवाजाही, मेल-मुलाकात पर ताला लगे। लोगों का परस्पर संपर्क न्यूनतम हो। सब लोग घर में बैठें। वायरस को घर-घर ताला मिलेगा तभी संक्रमण थमेगा व मरीज और मौत संख्या घटेगी। यह भी पढ़ें: मेरे तो गिरधर गोपाल (मोदी), दूसरा न कोई! जाहिर है लॉकडाउन से भारत में वायरस वैसे खत्म नहीं हो सकता है जैसे… Continue reading लॉकडाउन ही भारत का अकेला तरीका!

अस्पताल मानों खत्म या बंद तो..

हमेशा देखा हैं कि कोई जब बीमार होता है तो लोग उसे लेकर अस्पताल भागते हैं। मगर इन दिनों आप कहां भगेंगे? प्राइवेट अस्पतालों के एक्जीक्यूटिव बाहर ही खड़े हैं और वहीं से लोगों को लौटा रहे हैं। अगर वे साठ-सत्तर लाख की या करोड़ से ऊपर की गाड़ियों में लाए गए मरीजों को बाहर से ही लौटा रहे हैं तो दूसरी गाड़ियों की क्या बिसात? मतलब यह कि केवल पैसे से सब कुछ मिलना इन दिनों थोड़ा मुश्किल हो गया है। पैसे के अलावा आजकल आपको आज भारी पहुंच की भी जरूरत पड़ेगी। और अस्पताल में आपका प्रवेश किसी भी तरीके से हुआ हो, इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि आपके साथ फीस का न्याय भी होगा। दूसरी तरफ, सरकारी अस्पताल आपको आने से नहीं रोक रहे, लेकिन वहां लंबी कतार है। पता नहीं कितने घंटे या कितने दिनों में आपका नंबर आएगा? वहां के डॉक्टर, नर्स या दूसरे कर्मचारी आपसे बस इतना कहेंगे कि जगह नहीं है, हम क्या करें? बस आप स्ट्रेचर पर लेटे लाइन में लगे रहिए और इंतजार कीजिए। मगर इससे क्या होगा, आप इमरजेंसी वार्ड तक में नहीं पहुंच पाएंगे। पहुंच भी गए तो बेड के अकाल के कारण भर्ती नहीं किए जा… Continue reading अस्पताल मानों खत्म या बंद तो..

कोरोना से लड़ें युद्ध स्तर पर

विदेशों से मिल रही जबर्दस्त मदद के बावजूद कोरोना मरीजों का जो हाल भारत में हो रहा है, उसने सारे देश को ऐसे हिलाकर रख दिया है, जैसे कि किसी युद्ध ने भी नहीं हिलाया था। लोग यह समझ नहीं पा रहे हैं कि हजारों ऑक्सीजन-यंत्र और हजारों टन ऑक्सीजन के जहाजों से भारत पहुंचने के बाद भी कई अस्पतालों में मरीज क्यों मर रहे हैं ? उन्हें ऑक्सीजन क्यों नहीं मिल रही है ? जो लापरवाही हमने बंगाल में चुनाव के दौरान देखी और कुंभ के मेले ने जैसे कोरोना को गांव-गांव तक पहुंचा दिया, उसे हम अभी भूल भी जाएं तो कम से कम इतना इंतजाम तो अभी तक हो जाना चाहिए था कि करोड़ों लोगों को टीका लग जाता। लेकिन अभी तक मुश्किल से तीन करोड़ लोगों को पूरे दो टीके लगे हैं। उन्हें भी 20-25 दिन बाद पूर्ण सुरक्षित माना जाएगा। यदि डाॅक्टरों और नर्सों की कमी है तो देश की फौज और पुलिस कब काम आएगी ? यदि हमारे 20 लाख फौजी और पुलिस के जवान भिड़ा दिए जाएं तो वे कोरोना मरीजों को क्यों नहीं सम्हाल सकते हैं ? फौज के पास तो अपने अस्पतालों और डाक्टरों की भरमार है। ऑक्सीजन सिलेंडरों को ढोने… Continue reading कोरोना से लड़ें युद्ध स्तर पर

क्या लिखूं, सब तो साल पहले लिखा

भारत मौत का कुंआ बना है! ऐसा कोई सैकेंड वेव, थर्ड, फोर्थ वेव से नहीं है जो है वह नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार की अंतहीन मूर्खताओं से है। इन मूर्खताओं में ब्रेक कभी नहीं था जो समझदार-सभ्य देशों की तरह यह सोचे कि वायरस रूक गया, फिर फैला, फिर रूका फिर फैला। भारत में वायरस लगातार फैलता हुआ है और यह कहीं सन् 1918 के स्पेनिश फ्लू जैसी महामारी की मौतों का मंजर न बने, इसके लक्षण पहले दिन से इसलिए दीवाल पर लिखे हुए थे क्योंकि नरेंद्र मोदी ने अपनी बुद्धी के घमंड में अकेले फैसले लिए। इनसे भारत मौत का कुंआ बनेगा, दुनिया का अछूत देश बनेगा, अगले तीन-चार भारत लगातार बरबाद होना है, यहमैंने इतना लिखा था कि अब तो बरबादी ही बरबादी है।  तो क्यों न आज गौर करें मेरे लिखे कॉलम के शीर्षक- पंक्तियों पर गौर रहें – वायरस वैश्विक व लापरवाह भारत!-‘भारत राष्ट्र-राज्य सावधान-सतर्क नहीं है। भारत को क्या सुध है कि ईरान, इटली, दक्षिण कोरिया, चीन के साथ हमारी आवाजाही खत्म करना जरूरी है या नहीं? (28 फरवरी 2020) यह भी पढ़ें:वायरस हुआ वैश्विक व लापरवाह भारत! मोदीजी विश्राम कीजिए, बुद्धी, हार्वड को मौका दीजिए!-वायरस से लड़ाई के मौजूदा सिनेरियों में भारत… Continue reading क्या लिखूं, सब तो साल पहले लिखा

सुई की नोक बराबर काम नहीं

दुर्भाग्य की बात है जो भारत में कोरोना वायरस की आपदा को अवसर बनाया गया और फिर आपदा के बीच उत्सव मनाया गया। जिससे जहां भी संभव हुआ उसने वहां कोरोना और दूसरी बीमारी के मरीजों को लूटना शुरू कर दिया। कोरोना की टेस्टिंग से लेकर अस्पतालों में इलाज तक हर जगह अभूतपूर्व लूट मची। वह लूट अभी तक जारी है। इसके बाद प्रधानमंत्री ने आपदा में उत्सव का ऐलान किया। उन्होंने पहले ताली-थाली बजवाई थी और बाद में दीये जलवाए थे। इस बार उत्सव में उन्होंने टीका उत्सव मनवाया है। लेकिन हकीकत यह है कि चार दिन के टीका उत्सव के दौरान कई राज्यों में टीकाकरण की रफ्तार कम हो गई क्योंकि वैक्सीन की डोज उपलब्ध नहीं थी। सोचें, देश में कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने वाले टीके ज्यादा से ज्यादा संख्या में बनें इसके लिए पूरे साल सरकार ने कुछ नहीं किया। दो निजी कंपनियों ने जैसे तैसे और बिना सरकारी मदद के अपने यहां टीका बनवाया तो प्रधानमंत्री ने जाकर उनकी लैब का ऐसा मुआयना किया, जैसे खुद अपनी देख-रेख में वैक्सीन बनवा रहे हों। उसके बाद केंद्र सरकार ने वैक्सीनेशन की पूरी प्रक्रिया को केंद्रीकृत किए रखा, जिसकी वजह से कई तरह की समस्याएं हुई हैं।… Continue reading सुई की नोक बराबर काम नहीं

कुछ भी नया नहीं हो रहा है

कोरोना वायरस की महामारी में जो कुछ हो रहा है उससे अनेक लोग हैरान हो रहे हैं, जैसे यह कुछ नया हो रहा है। इसमें कुछ भी नया नहीं हो रहा है। यह भारत की सनातन कथा है। हमेशा ऐसा ही होता रहा है। भारत में शासक कभी भी इतने दूरदर्शी नहीं हुए कि वे खतरे को समय रहते भांप लें और उससे निपटने के उपाय करें। चाहे बाहरी आक्रमण का मामला हो या बीमारी और महामारी का मामला हो, सब में भारत के शासकों की ऐसी ही प्रतिक्रिया रही है। जब तक खतरा एकदम सिर पर नहीं आ जाता है तब तक भारत के शासक न तो कोई तैयारी करते हैं और न कोई प्रतिक्रिया देते हैं। सामरिक मामलों के विशेषज्ञ ब्रह्म चैलानी ने इसे ‘पानीपत सिंड्रोम’ का नाम दिया है। यानी खतरा जब तक पानीपत नहीं पहुंचेगा तब तक दिल्ली का शासक उस पर प्रतिक्रिया नहीं देगा। जैसे चीन ने भारत की जमीन कब्जा कर ली लेकिन जब तक दुनिया ने बताया नहीं या यह दिखा नहीं कि चीन भारत की सीमा में घुस कर बैठा है, तब तक भारत की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई थी। वैसे ही जब तक महामारी भारत में आकर एक… Continue reading कुछ भी नया नहीं हो रहा है

आपात्काल से भी बड़ा आफतकाल

कोरोना महामारी ने इतना विकराल रुप धारण कर लिया है कि सर्वोच्च न्यायालय को वह काम करना पड़ गया है, जो किसी भी लोकतांत्रिक देश में संसद को करना होता है। सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को आदेश दिया है कि वह उसे एक राष्ट्रीय नीति तुरंत बनाकर दे, जो कोरोना से लड़ सके। मरीज़ों को ऑक्सीजन, इंजेक्शन, दवाइयाँ आदि समय पर उपलब्ध करवाने की वह व्यवस्था करे। न्यायपालिका को यह क्यों करना पड़ा ? इसीलिए कि लाखों लोग रोज़ बीमार पड़ रहे हैं और हजारों लोगों की जान जा रही है। रोगियों को न दवा मिल रही है, न ऑक्सीजन मिल रही है, न पलंग मिल रहे हैं। इनके अभाव में बेबस लोग दम तोड़ रहे हैं। टीवी चैनलों पर श्मशान घाटों और कब्रिस्तानों में लगी लाशों की भीड़ को देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। कोरोना की दवाइयों, इंजेक्शनों और अस्पताल के पलंगों के लिए जो कालाबाजारी चल रही है, वह मानवता के माथे पर कलंक का टीका है। अभी तक एक भी कालाबाजारी को चौराहे पर सरे-आम नहीं लटकाया गया है। क्या हमारी सरकार और हमारी अदालत के लिए यह शर्म की बात नहीं है? होना तो यह चाहिए कि इस आपात्काल में, जो भारत का आफतकाल… Continue reading आपात्काल से भी बड़ा आफतकाल

जबलपुर में पांच मरीजों की मौत

जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर भी ऑक्सीजन की कमी से पांच मरीजों की मौत हो गई। जबलपुर में पिछले आठ दिन में दूसरी बार ऐसी घटना हुई है। जिले के उखरी रोड पर स्थित गैलेक्सी अस्पताल में गुरुवार रात पांच कोविड मरीजों की ऑक्सीजन नहीं मिलने की वजह से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि ऑक्सीजन सप्लाई बंद होने पर जिस समय मरीज तड़प रहे थे उस समय ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर और स्टाफ अस्पताल छोड़ कर भाग गए। घटना की सूचना मिलने के तुरंत बाद पुलिस ने मौके पर पहुंच कर आनन-फानन में मोर्चा संभाला। तत्काल कुछ सिलेंडर की व्यवस्था कराई गई, लेकिन दो मरीजों की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है। इस पूरे घटना से नाराज परिजनों ने जम कर हंगामा किया। गैलेक्सी अस्पताल में कुल 65 कोविड संक्रमित भर्ती थे। इसमें 31 ऑक्सीजन पर थे और आईसीयू में ICU में कुल 34 मरीज भर्ती थे।

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