मोदीजी, बुद्धि उधार लीजिए, मानिए ये सुझाव

वैसे पहले आईटम से लगा होगा कि मैं आज व्यंग्य के मूड में हूं। लेकिन ‘हम’ मानवता के लिए इतनी बड़ी त्रासदी बन चुके है कि बार-बार सोचना होता है कि भारत के प्रधानमंत्री को कैसे गंभीर बनाया जाए? कैसे सवर्ज्ञ होने की उनकी गलतफहमी में जमीनी हकीकत के व्यवहारिक नुस्खे घुसाएं जाएं? तभी फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रार्थना के साथ अनुरोध है कि 140 करोड लोगों को सौ जूते और सौ प्याज खिलाने का पाप बार-बार न करें। मई 2021 से लेकर मई 2022 की समयबद्धता में ये फैसले हो- 1-  पूर्ण लॉकडाउन अभी नहीं लगाएं। किसी भी दबाव में केंद्र सरकार इसका फैसला नहीं करें। फिलहाल राज्य सरकारें जैसे हैंडल कर रही है वैसे करने दें। 2-  इसका अर्थ यह नहीं कि केंद्र सरकार को पूरे देश में सख्त लॉकडाउन नहीं लगाना है। लॉकडाउन लगाना है और वह सितंबर-अक्टूबर-नवंबर के तीन महिनों में सख्ती से लगे। उससे पहले सरकार हर वह संभव कोशिश करें जिससे 200 करोड़ वैक्सीन का स्टॉक-भंडारण बने। हां, इसे बीज मंत्र माने या दो टूक निर्णायक अंतिम लड़ाई कि दो सौ करोड़ टीकों का संग्रहण बना कर, उसके टीकाकरण के लिए कंपाडर, पैरा- मेडिकल-इंफास्ट्रक्चर- सप्लाई चैन की एक-एक चीज की तैयारी पहले की… Continue reading मोदीजी, बुद्धि उधार लीजिए, मानिए ये सुझाव

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