criminal law bills

  • कितने सार्थक होंगे नए आपराधिक क़ानून?

    इन नये क़ानूनों में भी 90 प्रतिशत क़ानून औपनिवेशिक काल के ही हैं जिनका केवल अंग्रेज़ी से हिन्दी में अनुवाद ही किया गया है। यानी कि जो बात अंग्रेजों ने नहीं की वो आज की मौजूदा सरकार द्वारा की जा रही है।...कपिल सिब्बल ने इन बिलों का विरोध करते हुए इन्हें “मानवाधिकार विरोधी” बताया।देश के पूर्व एएसजी अमन लेखी कहते हैं कि “इन नए क़ानूनों को बदलने की कोई ज़रूरत नहीं थी। .... सही है कि ये क़ानून ब्रिटिश सरकार द्वारा लाए ज़रूर गये थे परंतु समय के चलते इन्हीं क़ानूनों को हमारे द्वारा ही विकसित किया गया था। देश...

  • आपराधिक कानून की बहस से दूर रहे बेहतरीन वकील

    अंग्रेजों के जमाने के बने आपराधिक कानूनों को बदल दिया गया है। आईपीसी, सीआरपीसी और एविडेंस एक्ट की जगह भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम का विधेयक संसद के दोनों सदनों से पास हो गया है। लेकिन इन तीनों विधेयकों पर भारत के सबसे बेहतरीन वकीलों ने बहस में हिस्सा नहीं लिया। कायदे से सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले देश के सबसे बेहतरीन वकीलों को इसमें हिस्सा लेना चाहिए था। लेकिन दुर्भाग्य से ऐसे तीन वकील, जो राज्यसभा में हैं वे सभी विपक्ष में हैं और चूंकि संसद के दोनों सदनों...