इसें हिंदू-मुस्लिम मुद्दा न बनाएं

दिल्ली में कल जो हुआ, उसकी आशंका बिल्कुल नहीं थी। अब तक लगभग दर्जन भर लोग मारे जा चुके हैं और दर्जनों घायल पड़े हुए हैं। दो पुलिस के जवानों की मौत हो गई है। यह दंगा हुआ है, उन लोगों के बीच, जो नागरिकता संशोधन कानून के पक्ष और विरोध में हैं।जो लोग इस भेद-भाव करनेवाले कानून का विरोध कर रहे हैं, उन्हें मैं शाहीनबागी कहता हूं। शाहीनबाग में प्रदर्शन कर रही महिलाओं और पुरुषों ने अहिंसक प्रदर्शन की मिसाल कायम की है। वे नए नागरिकता कानून का विरोध जरुर कर रहे हैं लेकिन उनके विरोध में से गांधी की खुशबू आती है। न वे कोई तोड़-फोड़ कर रहे हैं, न मार-पीट कर रहे हैं, न गालियां बक रहे हैं और न ही राष्ट्रविरोधी नारे लगा रहे हैं। अचानक ऐसा क्या हुआ है कि उनमें से एक आदमी पुलिसवालों पर पिस्तौल ताने हुए दिखाई पड़ता है, कुछ लोग पत्थरबाजी पर उतारु हैं और कुछ लोग दुकानों-मकानों और वाहनों को फूंक रहे हैं ? उन्हें किसने भड़काया है ? कौनसी ऐसी घटना हुई है, जिसके कारण इतना सांप्रदायिक तनाव फैल गया है ? इसका मूल कारण तो यह लगता है कि जो लोग नए नागरिकता कानून के समर्थन में सड़क… Continue reading इसें हिंदू-मुस्लिम मुद्दा न बनाएं

घाव के नासूर में बदलने का इंतजार

दिल्ली में दंगे हो गए हैं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पहले भी दंगे होते रहे हैं पर उनकी तीव्रता बहुत कम रही है और दायरा भी बहुत सीमित होता है। कभी पुरानी दिल्ली यानी दीवारों से घिरे ‘शाहजहांनाबाद’ की गलियों में पथराव हो जाता है तो कभी सीलमपुर, जाफराबाद या जामिया के इलाकों में पत्थरबाजी हो जाती है। उत्तर-पूर्वी दिल्ली के जिन इलाकों में अभी हिंसा हो रही है उन इलाकों में भी पहले कई बार तनाव हो चुका है पर वह वक्ती तनाव होता है। किसी मामूली बात पर झड़प होती है और फिर सारी चीजें सामान्य हो जाती हैं। पर इस बार दिल्ली में हो रहे सांप्रदायिक दंगों की तीव्रता भी बहुत है और दायरा भी बहुत बड़ा है। लगभग आधी दिल्ली का इलाका किसी न किसी तरह से इसकी चपेट में है। यमुना पार का उत्तर-पूर्वी दिल्ली का इलाका सीधे इसकी जद में है। दक्षिण दिल्ली के जिस शाहीन बाग इलाके में 73 दिन से लोग संशोधित नागरिकता कानून के विरोध में धरने पर बैठे हैं वहां दंगा तो नहीं हो रहा है पर तनाव किसी दंगे से कम नहीं है। सवाल है कि क्या दिल्ली में सांप्रदायिक दंगा किसी तात्कालिक कारण से हुआ है या इसके… Continue reading घाव के नासूर में बदलने का इंतजार

दिल्ली की हिंसा में अब तक 10 की मौत!

नई दिल्ली। तमाम सुरक्षा बंदोबस्तों के बावजूद उत्तर-पूर्वी दिल्ली में शुरू हुई सांप्रदायिक हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। मंगलवार को कई और इलाकों में हालात और बिगड़े। रविवार से चल रही इस हिंसा में मरने वालों की संख्या बढ़ कर 10 हो गई है। अब तक करीब डेढ़ सौ लोग घायल हुए हैं, जिनको अलग अलग अस्पतालों में भरती कराया गया है। घायलों में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी भी हैं। मंगलवार को कई इलाकों में पथराव, आगजनी के साथ साथ गोली चलने की घटनाएं भी हुईं। संशोधित नागरिकता कानून, सीएए के विरोध और समर्थन के नाम पर हुई हिंसा मंगलवार को तीसरे दिन भी जारी रही। लगातार तीसरे दिन दो गुटों के बीच हिंसा हुई। दंगाइयों ने मंगलवार को मौजपुर, भजनपुरा, ब्रह्मपुरी और गोकलपुरी इलाके में पथराव किया। मौजपुर मेट्रो स्टेशन के पास दो गुटों में झड़प के दौरान गोलियां चलीं। जाफराबाद में भी पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी। बाद में करावल नगर रोड स्थित चांदबाग में हालात तब बिगड़ गए, जब उपद्रवियों ने पथराव शुरू कर दिया। मौके पर पुलिस की टुकड़ी बहुत देर सी पहुंची। इस बीच, निगम पार्षद ताहिर हसन के दफ्तर में दंगाइयों ने आग लगा दी। उनके दफ्तर पर पेट्रोल बम से… Continue reading दिल्ली की हिंसा में अब तक 10 की मौत!

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