kishori-yojna
दुनिया के देशों में फिर तबाही शुरू

भारत में जिस समय एक दिन में चार लाख केसेज आए थे उस दिन दुनिया में आठ लाख केस आ रहे थे यानी दुनिया में कितने केसेज आ रहे थे उनमें से आधे अकेले भारत में आ रहे थे।  लेकिन भारत में अब 40 हजार के आसपास केसेज रोज आ रहे हैं लेकिन दुनिया में चार लाख केस रोज आ रहे हैं। यानी भारत में जितने केस आ रहे हैं उससे दस गुना केसेज दुनिया में आ रहे हैं। इसका मतलब है कि भारत में पीक के मुकाबले केसेज की संख्या में दस गुना कमी आ गई है लेकिन दुनिया में अब भी उतने ही केस आ रहे हैं। यह चिंता की बात है। दुनिया में सर्वाधिक संक्रमित अमेरिका में अब केसेज काबू में हैं लेकिन ब्राजील, रूस, ब्रिटेन जैसे देशों में संकट कम नहीं हो रहा है। ब्रिटेन में तो बड़ी गिरावट के बाद फिर से संक्रमितों की संख्या में बेतहाशा बढ़ोतरी हो रही है। य​ह भी पढ़ें: यह अछूत होना नहीं तो क्या? सोचें, ब्रिटेन में 70 फीसदी लोगों को कम से कम एक डोज लग गई है और 50 फीसदी लोगों पूरी तरह से वैक्सीनेट हो चुके हैं इसके बावजूद वहां केसेज बढ़ रहे हैं। ब्रिटेन में… Continue reading दुनिया के देशों में फिर तबाही शुरू

ये विषमता कहां ले जाएगी?

inequality india rich poor : केंद्रीय बैंक बड़ी संख्या में नोट छाप कर ब्याज दरों को कम करना चाहते थे, ताकि लोन देकर उद्योगों को बढ़ावा दे सकें और अर्थव्यवस्था को नुकसान से निकाला जा सके। लेकिन ऐसा होने के बजाए यह पैसा शेयर बाजार में लगाया गया। नतीजतन वही लोग अमीर होते रहे, जो पहले से अमीर थे। कोरोना महामारी की मार पूरी दुनिया पर पड़ी। भारत सबसे बुरी तरह प्रभावित देशों में एक रहा। ये एक आपदा है, यह मानने में कोई हिचक नहीं हो सकती। लेकिन किसी परिवार में अगर किसी आपदा से सभी बराबर पीड़ित हों, तो सब यह मान लेते हैं कि बुरा वक्त आया, तो उसका नतीजा सबको भुगतना पड़ा। लेकिन अगर बुरा वक्त किसी एक तबके लिए चमकने का मौका मिल जाए, तो समाज में सवाल उठेंगे। न सिर्फ सवाल उठेंगे, बल्कि देर सबेर असंतोष भी पैदा होगा। आज हम उसी कगार पर हैँ। एक ताजा रिपोर्ट ने बताया है कि (डॉलर को मुद्रा का आधार मानें तो) 2020 में हर भारतीय परिवार की घरेलू संपत्ति 6.1 प्रतिशत कम हो गई है। रुपये को आधार माने तो यह कमी करीब 3.7 प्रतिशत है। संपत्ति में आई इस कमी की मुख्य वजह यहां जमीन… Continue reading ये विषमता कहां ले जाएगी?

Rajasthan : जब सरकार नाचना चाहे, तो सरकारी गाइडलाइन की छोड़िए जनाब ! सांसद और विधायक ने जमकर लगाए ठुमके

जयपुर | देशभर में अब कोरोना के नये मामलों में कमी देखने को मिल रही है. इसके बाद भी केंद्र और राज्य की सरकारें लोगों को अभी भी गाइडलाइन के पालन करने की अपील कर रही है. लेकिन देखा जा रहा है कि अब शायद नियम बनाने वाले ही नियमों से बोर हो गये हैं. यहीं कारण है कि देश के अलग-अलग हिस्सों से नेताओं के ही कोरोना गाइडलाइनों की धज्जियां उड़ती हुई दिखाई दे रहे हैं. ताजा मामला राजस्थान से जुड़ा हुआ है, सोशल मीडिया में इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. जानकारी के अनुसार वीडियों में नाचते ये राज्यसभा सदस्य डॉ. किरोड़ी लाल मीणा और कांग्रेस विधायक इंदिरा मीणा हैं. ये दोनों रविवार को सवाईमाधोपुर जिले के बड़ीला गांव में एक सगाई समारोह को अटैंड करने पहुंचे थे. मोड़ो (मुँह) देखे तो #Vasundhara लेजा कांच (मिरर) @DrKirodilalBJP को…गाने पर डांस किया सांसद किरोड़ी लाल मीणा ने…✍🏻 बामनवास के बड़ीला में शादी समारोह में महिलाओं, पुरूषों का बढ़ाया उत्साह.! 💓🙏pic.twitter.com/J5gzpdPxZg — रमेश मीना (@MeenaRamesh91) June 20, 2021 खुद को रोक नहीं सके और जमकर लगाए ठुमके सगाई समारोह में वहां महिलाओं द्वारा नृत्य का आयोजन बी किया गया . इसे देख डॉ. किरोड़ी लाल मीणा… Continue reading Rajasthan : जब सरकार नाचना चाहे, तो सरकारी गाइडलाइन की छोड़िए जनाब ! सांसद और विधायक ने जमकर लगाए ठुमके

वायरस जैसी बीमारी और प्रोबॉयोटिक्स

कोरोना महामारी से पहले हुई रिसर्च के मुताबिक प्रोबॉयोटिक हमें अल्सर, इन्टसटाइन कैंसर, डाइबिटीज टाइप-2, चर्म रोग और कई गम्भीर मानसिक बीमारियों से बचाते हैं लेकिन कोरोना के बचाव और इलाज में इनकी उपयोगिता सामने आने पर जरूरी हो जाता है कि लोगों को प्रोबॉयोटिक्स की सही जानकारी हो जिससे वे अपना खान-पान ठीक रखकर शरीर में इनकी जरूरी संख्या हमेशा बनाये रखें और रोग मुक्त रहें। यह भी पढ़ें: हरपीज सिंपलेक्स (कोरोना स्ट्रेन) की नई बला! कोविड-19 (कोरोना) वायरस का इलाज खोजते हुए वैज्ञानिकों ने जब प्रोबॉयोटिक्स पहलू पर रिसर्च शुरू की तो पता चला कि वायरस साइटोकाइन स्टार्म के जरिये पाचन तन्त्र में मौजूद गट फ्लोरा (गुड बैक्टीरिया) नष्ट करते हुए इम्युटी कम करता है। साथ ही आंतों और फेफड़ों के नेचुरल लिंक गट-लंग्स एक्सेस को तोड़कर फेफड़ों में खुद को तेजी से रिप्लीकेट करते हुए ऑक्सीजन लेवल गिराता है। ऐसे में वैज्ञानिकों का मत है कि अगर पाचन तन्त्र में मौजूद गुड बैक्टीरिया को कमजोर न पड़ने दें तो कोरोना से बचाव के साथ संक्रमित होने पर जल्द ठीक हो सकते हैं।   कोरोना महामारी से पहले हुई रिसर्च के मुताबिक प्रोबॉयोटिक हमें अल्सर, इन्टसटाइन कैंसर, डाइबिटीज टाइप-2, चर्म रोग और कई गम्भीर मानसिक बीमारियों से बचाते हैं… Continue reading वायरस जैसी बीमारी और प्रोबॉयोटिक्स

उत्तराखंड में छाया एस्परजिलस फंगस का साया, क्या है इसका कोरोना से संबंध..

Dehradoon: पूरे देश में कोरोना के बाद ब्लैक फंगस ने अपना असर दिखाया है। राज्यों ने इसे महामारी भी घोषित क दिया है। उत्तराखंड में ब्लैक फंगस ने अपना आतंक मचाया है। लेकिन कोरोना के कम होते मामले राहत तो दे रहे है लेकिन ब्लैक फंगस जैसी नई और अलग-अलग बीमारियां सामने आ रही है। हाल ही में उत्तराखंड में एस्परजिलस फंगस क मामना सुनने को मिला है। ब्लैक फंगस कोरोना से ठीक हो रहे मरीजों में पाया जा रहा है। और अब यह अनुमान लगाया जा रहा है कि एस्परजिलस फंगस भी कोरोना से ठीक हो रहे मरीजों में हो रहा है। इसके बाद से हड़कंप मच गया है। और लोगों के मन में भय का माहौल बन गया है। also read: Corona Vaccine: कोवैक्सीन की तुलना में कोविशील्ड टीके से बनती है ज्यादा एंटीबॉडी, अध्ययन में हुआ खुलासा कोरोना से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं अब तो कुछ भी नई बीमारी मिलने से ऐसा ही अनुमान लगाया जाता है कि जरूर यह कोरोना के कारण फैला होगा। लेकिन ऐसा होता नहीं है। इस बार भी ऐसा ही कुछ हुआ है। उत्तराखंड में एस्परजिलस के मरीज मिलने से ऐसा ही लगा कि इसका कोरोना से कोई कनेक्शन है। लेकिन इस… Continue reading उत्तराखंड में छाया एस्परजिलस फंगस का साया, क्या है इसका कोरोना से संबंध..

कोरोना का सबसे खराब महीना मई, एक महीने में दुनिया की सर्वाधिक मौतें भारत में..

DELHI: पिछले डेढ़ वर्ष से कोरोना भारत में तबाही मचा रहा है। हालत इतनी खराब हो गई कि एक दिन में 4 लाख मामले दर्ज होने लगे जो अभी तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। 54 दिन बाद मंगलवार को पिछले 24 घंटे में कोविड-19 के सबसे कम 1,27,510 नए मामले दर्ज किए गए हैं। यह पिछले 54 दिनों में सबसे कम आंकड़ा है। कोरोना संक्रमण ने मई महीने में लाखों जिंदगिया लील गया है। ऐसे-ऐसे मंजर दिखाये है जिसकी हमने कभी कल्पना भी नहीं की थी। जिनकी भयावहता याद कर आज भी रूह कांप जाती है। लेकिन अब कोरोना के मामले कम होने लगे है। मौतों का आंकड़ा भी धीरे-धीरे घटने लगा है। कोरोना की यह रफ्तार मई महीने में सर्वाधिक रही है। मई में भारत में किसी भी महीने में दुनिया के किसी भी देश से सर्वाधिक कोरोना केस और मौतें दर्ज की गई हैं। इसके साथ ही जबसे कोरोना महामारी की शुरुआत हुई है तबसे मई ही एक ऐसा महीना रहा, जिसमें सर्वाधिक मौतें हुई और सर्वाधिक केस दर्ज किए गए। कोरोना के आंकडे कम होते ही राज्य सरकार ने अनलॉक की प्रक्रिया शुरु कर दी है। लेकिन हमें यह ध्यान रखना है कि कोरोना का संक्रमण… Continue reading कोरोना का सबसे खराब महीना मई, एक महीने में दुनिया की सर्वाधिक मौतें भारत में..

क्या होगा अगर पहली डोज़ कोविशील्ड और दूसरी डोज़ कोवैक्सीन की लगाई जाए….विशेषज्ञों ने दिया इसका जवाब

New Delhi | पूरा देश कोरोना की दूसरी लहर से जूझ रहा है। महामारी का अभी सबसे बड़ा हथियार कोरोना की वैक्सीन है। जो हमारे वैज्ञानिकों ने हमें कोरोना की संजीनवी बूटी के रूप में दी है। लोगों के मन में यह सवाल आ रहे है कि वैक्सीन की कमी के कारण अगर एक डोज़ कोविशील्ड और दूसरा डोज़ कोवैक्सीन का लें तो क्या असर होगा? इस बारे में एक्सपर्ट ने जवाब दिया है।देश में अभी कोरोना वैक्सीन की कमी हो रही है जिस कारण से कुछ राज्यों में वैक्सीनेशन रोक दिया गया है। कुछ जगह पर कोवैक्सीन की किल्लत हो रही है तो कुछ जगहों पर कोविशील्ड की कमी देखी जा रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देशभर में अब तक कोरोना वैक्सीन19 करोड़ 85 लाख 38 हजार 999 डोज दी गई है। अब तक 15.52 करोड़ लोगों को वैक्सीन की पहली डोज दी गई है, जबकि 4.33 लाख लोग टीके की दोनों डोज ले चुके हैं। इसे भी पढ़ें क्या कल से ट्विटर, फेसबुक को कहना पड़ेगा अलविदा, आज खत्म हो रही सरकारी डेडलाइन.. क्या होगा अलग वैक्सीन लगाने पर वैक्सीन की कमी के बीच लगातार यह सवाल सामने आ रहा है कि… Continue reading क्या होगा अगर पहली डोज़ कोविशील्ड और दूसरी डोज़ कोवैक्सीन की लगाई जाए….विशेषज्ञों ने दिया इसका जवाब

एक थे शास्त्री, एक हैं मोदी: दो विपदा, दो प्रधानमंत्री!

हम हिंदू इतिहास-याद्दाश्त में कच्चे हैं। आंखें मोतियाबिंद की मारी व बुद्धि मंद! सिर्फ वर्तमान के कुएं में जीते हैं। कितनों को भान है कि 1947 में आजादी के बाद भूख और भूखे पेट की विपदा कब थी? तो जवाब है

कहीं इलाज ही तो मर्ज की वजह नहीं?

कोरोना वायरस के इलाज में देश के झोलाछाप विशेषज्ञों ने एक अभूतपूर्व संकट खड़ा कर दिया है। जिस दवा से मरीजों का इलाज किया जा रहा है वह दवा ही उनके लिए जानलेवा बन जा रही है। तभी कई विशेषज्ञों ने सरकारी झोलाछाप विशेषज्ञों की समझदारी पर सवाल उठाया है। यह कहा जा रहा है कि देश में ब्लैक फंगस की जो नई महामारी फैली है वह मरीजों के गलत इलाज और खराब चिकित्सा उपकरणों की वजह से है। हालांकि इस पर अभी शोध चल रहे हैं पर यह संकेत मिल रहा है कि इलाज ही बीमारी बढ़ाने का कारण है। कहा जा रहा है कि वायरस की दूसरी लहर शुरू होने और ऑक्सीजन के लिए हाहाकार मचने के बाद बहुत खराब क्वालिटी के ऑक्सीजन सिलेंडरों की आपूर्ति हुई। कायदे से ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखे गए मरीज को 95 फीसदी शुद्ध ऑक्सीजन मिलना चाहिए पर कहा जा रहा है कि खराब मशीनों से उन्हें प्रदूषित या कम क्वालिटी की ऑक्सीजन मिली। ऊपर से ऑक्सीजन की नमी बरकरार रखने के लिए जिस पानी का इस्तेमाल किया गया वह भी कई जगह प्रदूषित था और उसी की वजह से ज्यादातर लोगों में ब्लैक फंगस की बीमारी हुई है। इसी तरह स्टेरॉयड के… Continue reading कहीं इलाज ही तो मर्ज की वजह नहीं?

Black fungus: नौ हजार से ज्यादा मामले

देश में कोरोना वायरस की महामारी के साथ साथ Black fungus की महामारी भी तेजी से फैल रही है। देश के 11 राज्यों ने इसे महामारी घोषित कर दिया है और युद्धस्तर पर इसे रोकने के प्रयास हो रहे हैं।

कोरोना संक्रमण के बीच अब Black Fungus भी मचा रहा कहर, Telangana ने भी किया महामारी घोषित

हैदराबाद | कोरोना संक्रमण (Corona infection) के बीच अब ब्लैक फंगस (Black Fungus) ने भी कहर ढाना शुरू कर दिया है अब तेलंगाना सरकार (Telangana government) ने भी म्यूकोर्मिकोसिस (Black Fungus) को महामारी घोषित किया, तेलंगाना सरकार (Telangana government) ने महामारी रोग अधिनियम 1897 के तहत फंगल संक्रमण म्यूकोर्मिकोसिस को महामारी घोषित कर दिया है। सार्वजनिक स्वास्थ्य निदेशक द्वारा जारी एक अधिसूचना में कहा गया है कि सभी सरकारी और निजी स्वास्थ्य सुविधाएं स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद द्वारा जारी म्यूकोर्मिकोसिस (mucormycosis) की जांच, निदान और प्रबंधन के लिए दिशानिर्देशों का पालन करेंगे। सभी सरकारी और निजी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए म्यूकोर्मिकोसिस (जिसे ब्लैक फंगस भी कहा जाता है) के सभी संदिग्ध और पुष्ट मामलों की रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को देना अनिवार्य कर दिया गया है। इसे भी पढ़ें – इंसानी गिद्ध: कोरोना संक्रमित शवों के अंतिम संस्कार के दौरान शरीर से नोच लेते थे आभूषण और अन्य कीमती चीजें… सभी सरकारी और निजी अस्पतालों के चिकित्सा अधीक्षकों को दिशा-निर्देश का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने और दैनिक आधार पर रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं। ब्लैक फंगस के मामलों की बढ़ती संख्या के बीच यह कदम उठाया गया है, जो ज्यादातर कोविड -19 संक्रमित… Continue reading कोरोना संक्रमण के बीच अब Black Fungus भी मचा रहा कहर, Telangana ने भी किया महामारी घोषित

अब रास्ता किधर है?

इसके बाद दूरगामी योजना बनानी चाहिए। अगर फिर से आज जैसी मुसीबत को दोहराए जाने से रोकना है तो इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है कि भारत को अपनी जीडीपी का 5 से 6 प्रतिशत हिस्सा स्वास्थ्य के क्षेत्र में निवेश करे। साथ ही स्वस्थ्य प्रणाली को विकेंद्रित करना जरूरी है। ( coronavirus) आजादी के बाद महामारियों से निपटने में भारत का रिकॉर्ड बेहतर रहा है। कोरोना महामारी आने के पहले अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने इस बारे में एक चर्चा में कहा था कि जब एड्स आया, तो कहा गया था कि इसकी सबसे ज्यादा मार भारत पर पड़ेगी। लेकिन एहतियाती कदम उठाकर ऐसा होने से रोक दिया गया। आज भी ज्यादातर विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में सिलसिलेवार तरीके से और राष्ट्रीय स्तर पर योजना बना कर वायरस के प्रसार को नियंत्रित किया जा सकता है। उनके मुताबिक आज भारत की सबसे बड़ी विफलताओं में से एक सही संवाद की कमी है। ऐसा संवाद जो सच पर आधारित हो और जिसमें लोगों को गुमराह ना किया जाए। अब हम जहां पहुंच गए हैं, वहां तुरंत सरकारों को राजनीतिक रैलियों और धार्मिक समारोहों सहित शादियों और सामूहिक समारोहों में भाग लेने से हतोत्साहित करना चाहिए। लोगों को बताया जाना… Continue reading अब रास्ता किधर है?

सरकर समर्थकों की नाराजगी

कोरोना वायरस की महामारी की दूसरी लहर के पीक के समय ‘आएगा तो मोदी ही’ कहने वाले फिल्म अभिनेता अनुपम खेर ने सरकार की जिम्मेदारी तय करने की बात कही है। एक दूसरे फिल्म अभिनेता मुकेश खन्ना, जो सोशल मीडिया में भाजपा और नरेंद्र मोदी सरकार के समर्थन में शामिल रहते हैं, उन्होंने भी सरकार की जिम्मेदारी का मुद्दा उठाया है। मोदी समर्थक एक बहुत वरिष्ठ पत्रकार ने लेख लिख कर कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी की टीम ही उनके ब्रांड का भट्ठा बैठा रही है। सोचें, अचानक ऐसा क्या हो गया कि मोदी की भक्ति की हद तक उनका समर्थन करने वाले लोग सवाल उठाने लगे हैं? खबर है कि मुकेश खन्ना के एक करीबी रिश्तेदार का कोरोना वायरस से निधन हो गया। वे तमाम प्रयास के बावजूद अपने रिश्तेदार को अच्छे अस्पताल में दाखिला नहीं करा पाए और ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं करा पाए। क्या इस वजह से उन्होंने सरकार की जिम्मेदारी की सवाल उठाया है? सबसे हैरान करने वाला मामला अनुपम खेर का है, जिन्होंने बिना किसी अगर-मगर के कहा है कि सरकार फेल हुई है तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। क्या यह बदलाव लोगों की भावनाओं को समझ कर आया है या किसी बड़ी योजना का… Continue reading सरकर समर्थकों की नाराजगी

कांग्रेस, लेफ्ट दोनों को ममता की चिंता

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अभी अपनी मुश्किलों में घिरी हैं। उनका राज्य कोरोना वायरस के विस्फोट का नया एपीसेंटर बन रहा है। उन्होंने पिछले हफ्ते शपथ लेते समय कोरोना से लड़ाई को पहली प्राथमिकता बताया था। हालांकि राज्यपाल को लग रहा है कि नतीजों के बाद से हो रही हिंसा से निपटना भी उतनी ही बड़ी चुनौती है। उन्होंने कूचबिहार का दौरा करके मुख्यमंत्री पर दबाव बना दिया है। सो, अभी ममता के सामने कोरोना और राजनीतिक हिंसा से निपटने की चुनौती है। लेकिन जैसे ही वे इससे निकलेंगी वैसे ही देश में संघीय मोर्चा बनाने के प्रयास में जुटेंगी। इस बात से कांग्रेस और लेफ्ट दोनों चिंता में हैं। पिछले दिनों कोरोना वायरस की महामारी से मुकाबले के लिए 12 पार्टियों ने प्रधानमंत्री को साझा चिट्ठी लिखी। इसमें ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस का भी नाम था। लेकिन इसका यह कतई मतलब नहीं है कि ममता बनर्जी इस साझा मोर्चे का स्थायी हिस्सा बन गई हैं। उनको पता है कि इस समय उनका राज्य कोरोना से सर्वाधिक प्रभावित राज्यों में से है और अगर केंद्र सरकार से कोई मदद लेनी है तो वह साझा विपक्ष की राजनीति के दबाव से ही मिल पाएगा। इसलिए वे उस… Continue reading कांग्रेस, लेफ्ट दोनों को ममता की चिंता

बुद्धि जब कलियुग से पैदल हो!

मेरे तो गिरधर गोपाल (मोदी) दूसरा न कोई-2:  हम हिंदू मानते है कि हम कलियुग में रह रहे है। कलियुग के उसके क्या त्रास, क्या कष्ट, क्या व्यथा है? भूख, भय और गुलामी। भूख कलियुग में लगातार लूटे जाने से। भय लगातार विधर्मियों, मुस्लिम हमलों से। गुलामी लगभग डेढ़ हजार साल से गुलाम बनवाए रखने वाले तलवारी-हाकिमी तंत्र-सिस्टम से। उस नाते कलियुग में हिंदुओं की क्या चाह है? वही चाह है जो कलियुग में हिंदुओं ने भगवानजी का कहा समझा है। मतलब श्रीकृष्ण का भगवद्गीता में अर्जुन से कहना कि- यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत, अभ्युत्थानमधर्मस्य तदाऽऽत्मानं सृजाम्यहम्। जब-जब धर्म की हानि और अधर्म बढ़ेगा, मैं अवतार लूंगा। अवतारी भगवान, राजा रूप लिए होता है। सतयुग में मत्स्य, वाराह, नरसिंह अवतार हुए। त्रेतायुग में परशुराम व राम अवतरित हुए। द्वापर युग में श्री कृष्ण अवतार। तो कलियुग में भी अवतार होगा। मान्यता भगवान कल्कि के अवतार की है। यही चाहना है, यही इंतजार है हिंदुओं का। फिर श्रीकृष्ण के कहे की कलियुगी समझ में भक्त हिंदू जन यह गांठ बांधे हुए हैं- सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज, अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः। मतलब तू सब कुछ छोड़ मेरी शरण रह। सब धर्म-कर्म-पुरुषार्थ-बुद्धि-विवेक-ज्ञान-विज्ञान सब (सर्वधर्मान्) परित्यज्य (छोड़) कर माम् (मेरी)… Continue reading बुद्धि जब कलियुग से पैदल हो!

और लोड करें