‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ पर यह दोहरा मापदंड!

कई वर्षों से देश में बार-बार ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ और ‘असहमति के अधिकार’ का मुद्दा विपक्ष द्वारा उठाया जा रहा है। क्या मोदी सरकार में देश के भीतर ऐसा वातावरण बन गया है, जिसमें अन्य विचारों के प्रति असहिष्णुता बढ़ गई है? नववर्ष 2020 के मेरे पहले कॉलम में इस प्रश्न का जन्म केरल की उस घटना के गर्भ से हुआ है,