भृतक-मीडिया के भुक्खड़ उचक्के और किसान

यह दिसंबर 2020 के तीसरे शनिवार की बात है। भारत के किसान आंदोलन के समर्थन की आड़ में वाशिंगटन में भारतीय दूतावास के पास लगी महात्मा गांधी की प्रतिमा को कुछ तत्वों ने नुक़सान पहुंचाया

अब सरदार वीएम सिंह महान हो गए!

ऑल इंडिया किसान संघर्ष कोऑर्डिनेशन कमेटी यानी एआईकेएसएससी के नेता सरदार वीएम सिंह ने संगठन को किसान आंदोलन से अलग करने का ऐलान किया है।

भानु के हटने से भी नुकसान नहीं!

भारतीय किसान यूनियन के भानु गुट से किसान आंदोलन से अपने को अलग कर लिया है। इस गुट ने दिल्ली-नोएडा की सीमा पर कमान संभाली थी।

सब अहिंसा की बात कर रहे हैं!

अच्छा है, जो सब लोग अहिंसा की बात कर रहे हैं। जिनको महात्मा गांधी फूटी आंख पसंद नहीं हैं, वे भी गांधी के अहिंसा सिद्धांत के सहारे किसानों को समझा रहे हैं कि ट्रैक्टर रैली के दिन हिंसा नहीं होनी चाहिए थी।

किसान और सरकारः अब आगे क्या ?

26 जनवरी की घटनाओं ने सिद्ध किया कि सरकार और किसान दोनों अपनी-अपनी कसौटी पर खरे नहीं उतर पाए लेकिन अब असली सवाल यह है कि आगे क्या किया जाए

दीप सिद्धू पर मुकदमे में देरी क्यों हुई?

क्या दिल्ली पुलिस पंजाबी फिल्मों के अभिनेता और 26 जनवरी को लाल किले पर हुई घटना को अंजाम देने वाले दीप सिद्धू को बचाने की कोशिश कर रही थी

किसानों को हटा रही पुलिस

केंद्र सरकार वार्ता के जरिए किसान आंदोलन को खत्म नहीं करा सकी है और सुप्रीम कोर्ट की अपील पर भी किसानों का आंदोलन खत्म नहीं हुआ है

किसानों को मारने की साजिश: टिकैत

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के विरोध में पिछले 64 दिन से चल रहे आंदोलन का एक प्रमुख चेहरा और भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार के ऊपर बड़ा आरोप लगाया है।

लाल किला तो ‘लीज’ पर है!

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों की ट्रैक्टर रैली में मंगलवार को कुछ जगहों पर उपद्रव होने की खबरों के बीच सबसे ज्यादा फोकस इस बात पर रहा कि कुछ लोगों ने लाल किले पर तिरंगे की बजाय दूसरा झंडा फहरा दिया।

पुलिस और एजेंसियों की विफलता!

दिल्ली पुलिस ने आंदोलन कर रहे किसानों के साथ तीन दिन वार्ता की थी। तीन दिन की वार्ता के बाद पुलिस ने किसानों को ट्रैक्टर परेड निकालने की अनुमति दी थी।

गलत सूचनाओं से बना मुगालता

जिस तरह से केंद्र सरकार शुरू में किसान आंदोलन को लेकर भ्रम में रही उसी तरह ट्रैक्टर रैली को लेकर भी सरकार मुगालते में थी।

मोदीजी, ईश्वर के लिए सिख भावना से न खेलो, कृषि कानून खत्म करो!

मोदीजी, मुझे पता है आप किसी की नहीं सुनते मगर जरा याद करें इमरजेंसी के उस वक्त को जब आपने सरदार की वेशभूषा धारण कर अपने आपको भूमिगत रखा था।

शर्मिंदा तो मीडिया को होना चाहिए!

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन कर रहे किसान संगठनों के नेता शर्मिंदा हो रहे हैं। वे गणतंत्र दिवस ट्रैक्टर परेड को लेकर न्यूज चैनलों की ओर से बनाए गए छद्म और समानांतर विमर्श के कारण शर्मिंदा हैं

लोगों का गुबार है मुद्दा

कहा जाता है कि लोकतंत्र प्रेसर कुकर की तरह एक सेफ्टी वॉल्व है, जिसमें जब गुबार पैदा होता है, तो उसे निकल जाने का स्वतः मौका मिल जाता है

ये और वेः दोनों अराजक

इस बार का गणतंत्र-दिवस गनतंत्र-दिवस न बन जाए, इसकी आशंका मैंने पहले ही व्यक्त की थी। मुझे खुशी है कि किसानों के प्रदर्शनों में किसी ने भी बंदूके नहीं चलाईं।

पुलिस और सरकार से अदालत पूछे सवाल

मंगलवार को किसानों की ट्रैक्टर रैली के मीडिया में यह भी खबर आई कि सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को चिट्ठी लिखी गई है और आंदोलनकारी किसानों पर कार्रवाई की मांग की गई है।

26 किसान नेताओं पर मुकदमा

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के विरोध में पिछले 63 दिन से आंदोलन कर रहे किसान संगठनों के 26 नेताओं के ऊपर दिल्ली पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है।

किसानों ने लगाया साजिश का आरोप

केंद्रीय कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन कर रहे किसानों की ट्रैक्टर रैली में पुलिस और आंदोलनकारी किसानों के बीच हुई झड़प के एक दिन बाद बुधवार को किसान संगठनों ने प्रेस कांफ्रेंस करके अपना पक्ष रखा।

कांग्रेस ने सरकार पर किया हमला

किसान आंदोलनकारियों और पुलिस के साथ हुई झड़प के एक दिन बाद बुधवार को कांग्रेस पार्टी ने प्रेस कांफ्रेंस करके केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया।

किसान आंदोलन का दायरा बढ़ा

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली की सीमा पर चल रहे किसान आंदोलन का दायरा बढ़ता जा रहा है। राजस्थान के कई इलाकों से लेकर पंजाब के अंदर और हरियाणा के कुछ इलाकों में भी किसानों का आंदोलन तेज हो गया है।

नई चिट्ठी, दोहराई बाते!

देश के कई राज्यों के किसान दिल्ली की कड़ाके की ठंड में दिल्ली की सीमा पर 29 दिन से प्रदर्शन कर रहे हैं और केंद्र सरकार उनकी मांगें सुनने की बजाय उनको चिट्ठी लिख रही है।

ठोस प्रस्ताव के बगैर वार्ता नहीं

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों ने सरकार पर टालमटोल का रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए अपना रुख सख्त कर लिया है।

बदलाव नहीं कानूनों की वापसी हो

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों का विरोध में 27 दिन से दिल्ली की सीमा पर और देश के कई हिस्सों में आंदोलन कर रहे किसान सरकार से वार्ता के बारे में बुधवार को फैसला करेंगे।

खुद्दार किसान और अय्यार सरकार!

एक तरफ अपने खून-पसीने से धरती का सीना चीर कर अनाज उपजाने वाले खुद्दार और मेहनतकश किसान हैं तो दूसरी ओर बाबू देवकीनंदन खत्री के उपन्यास ‘चंद्रकांता संतति’ के अय्यारों की तरह की सरकार है।

किसानों की भूख हड़ताल शुरू

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के विरोध में किसानों ने क्रमिक भूख हड़ताल शुरू कर दी है। दिल्ली की सीमा पर जहां-जहां किसान आंदोलन कर रहे हैं वहां 11-11 किसानों की टीम भूख हड़ताल पर बैठी।

मानों ‘ब्रेन डेड’ अवस्था और जीवन!

इस पृथ्वी पर भारत वह दास्तां है, जहां लोग लूट, गुलामी में होते हुए भी उसकी सुध में जीते हुए नहीं हैं। वजह गुलामी-लूट के चौदह सौ साल के झटकों से बनी ब्रेन डेड याकि मृत मष्तिष्क अवस्था है।

अब थाली बजवाएंगे किसान

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों ने अगले रविवार को रेडियो पर प्रसारित होने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम के विरोध का ऐलान किया है।

सरकार से चाहिए समाधान

दिल्ली और आसपास के इलाकों में पारा तीन डिग्री तक गिर जाने के बावजूद दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर खुले आसमान के नीचे 24 दिन से प्रदर्शन कर रहे किसानों ने कहा है कि जब तक सरकार तीनों कृषि कानूनों को वापस नहीं लेती है वे अपने घर वापस नहीं लौटने वाले हैं।

किसानों को नए कानूनों का फायदा: मोदी

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन के 24 दिन हो गए हैं। एक तरफ केंद्र सरकार उनसे कह रही है कि बातचीत से समाधान निकालना है तो दूसरी ओर प्रधानमंत्री लगभग रोज इन कानूनों के फायदे समझा रहे हैं।

बस, किसी तरह लौटे किसान!

यही केंद्र सरकार का फिलहाल नंबर एक मिशन है लेकिन बिना कृषि बिल को वापिस लिए या रद्द किए। सरकार को 20 जनवरी तक हर हाल में दिल्ली-हरियाणा सीमा से किसानों की भीड़ खत्म करानी है।