कांग्रेस ने सरकार पर किया हमला

किसान आंदोलनकारियों और पुलिस के साथ हुई झड़प के एक दिन बाद बुधवार को कांग्रेस पार्टी ने प्रेस कांफ्रेंस करके केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया।

खुद्दार सिख, इतिहासजन्य लोहड़ी!

पता नहीं हम हिंदुओं के भाग्य में क्या बदा है! पर पिछले साढ़े छह साला हिंदू राज में भारत के जैसे-जो फोटो बने हैं उसके क्रम में वर्ष 2021 की लोहड़ी का फोटो कभी भूलाए नहीं भूलेगा

किसान आंदोलन का दायरा बढ़ा

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली की सीमा पर चल रहे किसान आंदोलन का दायरा बढ़ता जा रहा है। राजस्थान के कई इलाकों से लेकर पंजाब के अंदर और हरियाणा के कुछ इलाकों में भी किसानों का आंदोलन तेज हो गया है।

नई चिट्ठी, दोहराई बाते!

देश के कई राज्यों के किसान दिल्ली की कड़ाके की ठंड में दिल्ली की सीमा पर 29 दिन से प्रदर्शन कर रहे हैं और केंद्र सरकार उनकी मांगें सुनने की बजाय उनको चिट्ठी लिख रही है।

ठोस प्रस्ताव के बगैर वार्ता नहीं

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों ने सरकार पर टालमटोल का रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए अपना रुख सख्त कर लिया है।

बदलाव नहीं कानूनों की वापसी हो

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों का विरोध में 27 दिन से दिल्ली की सीमा पर और देश के कई हिस्सों में आंदोलन कर रहे किसान सरकार से वार्ता के बारे में बुधवार को फैसला करेंगे।

खुद्दार किसान और अय्यार सरकार!

एक तरफ अपने खून-पसीने से धरती का सीना चीर कर अनाज उपजाने वाले खुद्दार और मेहनतकश किसान हैं तो दूसरी ओर बाबू देवकीनंदन खत्री के उपन्यास ‘चंद्रकांता संतति’ के अय्यारों की तरह की सरकार है।

किसानों की भूख हड़ताल शुरू

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के विरोध में किसानों ने क्रमिक भूख हड़ताल शुरू कर दी है। दिल्ली की सीमा पर जहां-जहां किसान आंदोलन कर रहे हैं वहां 11-11 किसानों की टीम भूख हड़ताल पर बैठी।

मानों ‘ब्रेन डेड’ अवस्था और जीवन!

इस पृथ्वी पर भारत वह दास्तां है, जहां लोग लूट, गुलामी में होते हुए भी उसकी सुध में जीते हुए नहीं हैं। वजह गुलामी-लूट के चौदह सौ साल के झटकों से बनी ब्रेन डेड याकि मृत मष्तिष्क अवस्था है।

ये सुप्रीम कोर्ट का काम है?

सुप्रीम कोर्ट ने किसान आंदोलन खत्म कराने की पहल करते हुए मध्यस्थ की भूमिका अपना ली है। ये हैरतअंगेज है। अधिकारों के अलगाव पर आधारित किसी संवैधानिक व्यवस्था में कोर्ट ऑफ जस्टिस और कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन में फर्क होता है।

अब थाली बजवाएंगे किसान

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों ने अगले रविवार को रेडियो पर प्रसारित होने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम के विरोध का ऐलान किया है।

सरकार से चाहिए समाधान

दिल्ली और आसपास के इलाकों में पारा तीन डिग्री तक गिर जाने के बावजूद दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर खुले आसमान के नीचे 24 दिन से प्रदर्शन कर रहे किसानों ने कहा है कि जब तक सरकार तीनों कृषि कानूनों को वापस नहीं लेती है वे अपने घर वापस नहीं लौटने वाले हैं।

किसानों को नए कानूनों का फायदा: मोदी

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन के 24 दिन हो गए हैं। एक तरफ केंद्र सरकार उनसे कह रही है कि बातचीत से समाधान निकालना है तो दूसरी ओर प्रधानमंत्री लगभग रोज इन कानूनों के फायदे समझा रहे हैं।

बस, किसी तरह लौटे किसान!

यही केंद्र सरकार का फिलहाल नंबर एक मिशन है लेकिन बिना कृषि बिल को वापिस लिए या रद्द किए। सरकार को 20 जनवरी तक हर हाल में दिल्ली-हरियाणा सीमा से किसानों की भीड़ खत्म करानी है।

पंजाबी किसान शहीदी मिजाज का!

हां, पंजाब के सिक्ख किसानों का इन शहीदी महिना है। इसी महिने सिक्खों के दसवें गुरू के दो बेटे दिल्ली दरबार के औरंगजेब से लड़ते हुए शहीद हुए थे और दो बेटे सरहिंद में दीवाल में चीने गए।

किसानों की ‘अमीरी’ देखी नहीं जा रही!

प्रचार हो रहा है कि ये कैसे किसान हैं, जो जिंस की पैंट-जैकेट पहनते हैं, पिज्जा खाते हैं, मसाज कराते हैं, बड़ी गाड़ियों से आते हैं और ट्रैक्टर पर डीजे बजा कर डांस करते हैं।

कैसे संचालित हो रहा आंदोलन?

यह यक्ष प्रश्न की तरह है कि आखिर इतना लंबा चलने वाला, इतना बड़ा और प्रभावी किसान आंदोलन कैसे संचालित हो रहा है

आंदोलन को बदनाम करने का प्रयास

क्या भारत की सर्वशक्तिमान सरकार और उसके मुखिया किसान आंदोलन के सामने मजबूर हो गए हैं

किसान चाहते हैं, पीएम बात करें

कैंद्र सरकार के बनाए तीन कानूनों के विरोध में दिल्ली की सीमा पर पिछले 23 दिन से आंदोलन कर रहे किसान चाहते हैं कि उनकी मांगों को समझने और उसे पूरा करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सीधे उनसे बात करें

ईस्ट इंडिया कंपनी व अंबानी-अडानी में क्या फर्क?

अहम फर्क यह कि ईस्ट इंडिया कंपनी के मालिक गोरे अंग्रेज थे तो अंबानी-अडानी हिंदुस्तानी अश्वेत चेहरों वाले हैं। अन्यथा दोनों धंधे-मुनाफे के लिए किसी भी सीमा तक जाने वाले।

किसान आंदोलन अंबानी के दरवाजे पहुंचेगा

केंद्र सरकार के बनाए तीन केंद्रीय कानूनों के विरोध में लाखों किसान कड़ाके की ठंड के बीच राजधानी दिल्ली की सीमा पर डटे हैं तो उनके समर्थन में देश भर के किसान अपने अपने राज्यों में प्रदर्शन कर रहे हैं।

तीनों कृषि कानूनों हो रद्द

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान संगठनों ने कहा है कि अगर सरकार उनकी मांगें नहीं मानती है और तीनों कानूनों को रद्द नहीं करती है तो आर-पार की लड़ाई होगी।

सरकार ने मंशा साफ कर दी

केंद्र सरकार ने तीनों कृषि कानूनों पर अपनी मंशा साफ कर दी है। प्रधानमंत्री के गुजरात के कच्छ में दिए भाषण, केंद्रीय कृषि मंत्री के अंग्रेजी के एक अखबार को दिए इंटरव्यू और किसानों के साथ वार्ता में शामिल केंद्रीय मंत्री और दूसरे केंद्रीय मंत्रियों के बयानों से साफ हो गया है कि सरकार न तो कृषि विधेयकों को रद्द करेगी और न उनमें कोई बड़ा बदलाव करेगी

‘उत्तम खेती’ होगी चाकरी में कन्वर्ट!

किसान मौत का वारंट लटका बूझ रहा है तो मोदी सरकार किसानों के उड़ने की ‘एक नई आजादी’ के सपने में है। कौन सही-कौन गलत? पहले सरकार की दलीलों पर गौर करें।

किसानों ने जवाब और चेतावनी दी

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों ने ठीक एक हफ्ते बाद केंद्र सरकार की ओर से दिए गए प्रस्ताव पर अपना जवाब भेजा है। किसान संगठनों ने कहा है कि उन्होंने केंद्र सरकार के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट खत्म कराएगा आंदोलन!

केंद्र सरकार जो काम नहीं कर सकी है वह काम अब सुप्रीम कोर्ट करेगा। केंद्र सरकार ने किसान संगठनों के साथ बातचीत में कहा था कि वह कृषि विशेषज्ञों, किसान संगठनों के नेताओं और सरकार के लोगों को मिला कर एक कमेटी बना देगी, जो कृषि कानूनों से जुड़े सभी मुद्दों पर विचार करेगी।

खेती पर अंबानी-अडानी की पुरानी नजर!

अंबानी-अडानी के धंधे का रामबाण नुस्खा भारत की 138 करोड़ आबादी पर कंट्रोल है। धीरूभाई अंबानी ने साठ के दशक में इंदिरा दरबार से धागे के आयात का लाइसेंस ले कर कपड़े याकि टेक्सटाइल क्षेत्र पर कब्जे के बिजनेस प्लान में काम किया तो वह भीड़ की सस्ते कपड़े की जरूरत से था।

आंदोलनकारियों की कौन सुन रहा है?

केंद्र सरकार के बनाए तीन केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों को आंदोलन करते 20 दिन हो गए। शुरू में सरकार ने किसानों से बातचीत भी की पर पिछले एक हफ्ते से कोई वार्ता नहीं हुई है।

कानून वापसी तक चलेगा आंदोलन

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारी किसानों ने कहा है कि कानून वापस होने तक उनका आंदोलन चलेगा।

वैक्सीन के लिए अभी इंतजार करना होगा

अमेरिका और ब्रिटेन सहित दुनिया के कई देशों में कोरोना वायरस की वैक्सीन लगाई जाने लगी है पर भारत में वैक्सीन के लिए लोगों को अभी इंतजार करना होगा।