किसान विरोधी माहौल को और तेज किया जा रहा!

हमारा मध्यम वर्ग बड़ा पाखंडी है। सात साल पहले तक या दो साल पहले तक भी कई मामलों में यह अपने विचार कुछ और बताता था लेकिन आज ज्यादा मुखर होकर कुछ और।

जी भर कर खा लें प्याज, आने वाले 3 महीने काटने में ही नहीं खरीदनें में भी आने वाले हैं आंसू…

प्याज विक्रेताओं का मानना है कि इस साल भी सितंबर से लेकर नवंबर तक प्याज के दाम काफी बढ़ जाएंगे. जानकारों का मानना है कि मानसून में देरी के कारण…

लाठी चार्ज के बाद

इससे टकराव का माहौल और गहरा गया है। लेकिन यह भी साफ है कि भाजपा ऐसे टकराव की फिक्र नहीं करती।

किसानों ने दी चेतावनी, छह सितंबर तक का समय दिया

हरियाणा के करनाल में किसानों पर हुए लाठीचार्ज के खिलाफ किसानों ने सोमवार को घरौंडा अनाज मंडी में बड़ी पंचायत की।

किसान आंदोलन: खट्टर और कैप्टेन आमने-सामने

हरियाणा के करनाल में किसानों पर पुलिस के लाठी चलाने की घटना को लेकर हरियाण और पंजाब के मुख्यमंत्री आमने सामने आ गए हैं।

INSO के स्थापना दिवस पर हरियाणा के रोहतक में किसानों ने किया विरोध प्रदर्शन, ट्रैक्टरों से लगाए बैरिकेड्स

सत्तारूढ़ जजपा की छात्र इकाई इंडियन नेशनल स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (INSO) के यहां गुरुवार को स्थापना दिवस समारोह मनाया गया। इस  दौरान किसानों के एक समूह ने विरोध प्रदर्शन किया। स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए पुलिस के लिए कठिन समय था क्योंकि ट्रैक्टर पर सवार किसानों ने कार्यक्रम स्थल के पास लगाए गए बैरिकेड्स को धक्का दे दिया।

महंगाई के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन

farmers protest against inflation : चंडीगढ़/नई दिल्ली। केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ सात महीने से ज्यादा समय से आंदोलन कर रहे किसानों ने गुरुवार को महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन किया। पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दामों में बढ़ोतरी और दूसरी चीजों की बढ़ती कीमतों के खिलाफ दिल्ली की सीमा से लेकर पंजाब और हरियाणा में कई जगह किसानों ने प्रदर्शन किया। किसान आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा ने इस प्रदर्शन का ऐलान किया था। संयुक्त किसान मोर्चा की अपील पर किसानों ने सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक प्रदर्शन का किया। प्रदर्शनकारियों ने अपने ट्रैक्टर और दूसरी गाड़ियों को सड़क के किनारे खड़ा कर दिया और पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कई जगहों पर विरोध के लिए किसान एलपीजी के खाली सिलिंडर भी लेकर पहुंचे थे। कुछ जगहों पर किसान बैलगाड़ी और ऊंटगाड़ी से आंदोलन में पहुंचे। आंदोलनकारी किसानों ने 12 बजे कुछ मिनटों के लिए अपनी गाड़ियों के हॉर्न बजाए और कहा कि यह सरकार को नींद से जगाने के लिए किया गया है। पंजाब और हरियाणा में कई जगह प्रदर्शन कर रहे किसानों ने जरूरी वस्तुओं की… Continue reading महंगाई के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन

यूपी में किसान वोट बांटने का खेल

UP Farmers Vote | उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले किसानों का वोट बांटने का खेल शुरू हो गया है। कहने की जरूरत नहीं है कि इस खेल के पीछे कौन है लेकिन एक तीर से दो शिकार करने का प्रयास हो रहा है। इसमें कितनी सफलता मिलेगी, यह नहीं कहा जा सकता है लेकिन प्रयास गंभीरता से हो रहा है। तभी शेखर दीक्षित की अध्यक्षता में एक राष्ट्रीय किसान मंच बनाया गया है। एक ब्राह्मण का किसान राजनीति करना मामूली बात नहीं है। ध्यान रहे इस समय किसान केंद्र व राज्य सरकार दोनों से नाराज हैं तो ब्राह्मण उत्तर प्रदेश सरकार से नाराज हैं। इस दोनों की नाराजगी को आवाज देगा राष्ट्रीय किसान मंच। भागवत का डीएनए बयान गलत, जगद्गुरू राम भद्राचार्य ने की आलोचना इस मंच ने अपना काम शुरू भी कर दिया है। शेखर दीक्षित ने ऐलान किया है कि अगले कुछ दिन में संगठन में एक करोड़ सदस्य जोड़े जाएंगे। उन्होंने यह भी ऐलान किया है कि ये मंच राजनीतिक होगा और इसके सदस्य चुनाव लड़ेंगे। उनका कहना है कि जब तक किसान के प्रतिनिधि खुद संसद और विधानसभाओं में नहीं पहुंचेंगे तब तक किसानों की बात नहीं सुनी जाएगी। उन्होंने भाजपा को भी निशाना… Continue reading यूपी में किसान वोट बांटने का खेल

किसान इमरजेंसी का विरोध क्यों कर रहे हैं?

केंद्रीय कृषि कानूनों के विरोध में करीब सात महीने से आंदोलन कर रहे किसान 26 जून को इमरजेंसी की बरसी के मौके पर देश भर में विरोध प्रदर्शन करेंगे। कांग्रेस पार्टी के नेता इससे परेशान हुए हैं। उनको लग रहा है कि उन्होंने किसानों के आंदोलन का समर्थन किया और अब किसान कांग्रेस को ही शर्मिंदा करने का काम कर रहे हैं। सवाल है कि किसान क्यों ऐसा कर रहे हैं? क्या संयुक्त किसान मोर्चा में राकेश टिकैत, गुरनाम सिंह चढूनी और योगेंद्र यादव के बीच सब कुछ ठीक नहीं है और उनके आपसी विवाद की वजह से ऐसा हो रहा है? या केंद्र सरकार किसानों से बातचीत की पहल करने जा रही है और सरकार के साथ किसी किस्म की सहमति बनी है, जिसके बाद किसान कांग्रेस को शर्मिंदा करने वाला काम कर रहे हैं? यह भी पढ़ें: कांग्रेस ने अपना नुकसान किया देर-सबेर इसका पता चल जाएगा कि किसान क्यों ऐसा कर रहे हैं लेकिन बड़ा सवाल यह है कि अगर किसानों की मंशा कांग्रेस को शर्मिंदा करने की है तो उन्होंने जून के पहले हफ्ते में ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी पर प्रदर्शन क्यों नहीं किया? ध्यान रहे आंदोलन कर रहे किसानों में ज्यादातर पंजाब और हरियाणा… Continue reading किसान इमरजेंसी का विरोध क्यों कर रहे हैं?

इमरजेंसी विरोधी दिवस मनाएंगे किसान नेता

चंडीगढ़। केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ करीब सात महीने से आंदोलन कर रहे किसानों ने 26 जून को इमरजेंसी विरोधी दिवस मनाने का ऐलान किया है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संयुक्त किसान मोर्चे की इस घोषणा से कांग्रेस पार्टी के नेता खासे खफा और निराश हुए हैं। गौरतलब है कि कांग्रेस पार्टी ने किसानों के इस आंदोलन का जम कर समर्थन किया है। भाजपा भी आरोप लगाती रही है कि आंदोलन कांग्रेस का खड़ा किया हुआ है। पर अब किसानों ने कांग्रेस के खिलाफ ही प्रदर्शन की योजना बनाई है। किसान आंदोलन को कांग्रेस का समर्थन होने के बावजूद संयुक्त किसान मोर्चा ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को तानाशाह शासक बताते हुए 26 जून को इमरजेंसी की बरसी पर पूरे देश में प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। हालांकि इसको किसान आंदोलन के नेताओं की आपसी खींचतान का नतीजा भी बताया जा रहा है। यह भी कहा जा रहा है कि किसानों ने अपने आंदोलन को अराजनीतिक दिखाने के लिए यह पैंतरा चला है। इस बीच यह भी खबर है कि सरकार किसानों से बातचीत करके आंदोलन खत्म कराने का रास्ता निकालना चाहती है। बहरहाल, किसानों के इस ऐलान का हरियाणा के कांग्रेस नेताओं ने… Continue reading इमरजेंसी विरोधी दिवस मनाएंगे किसान नेता

Kisan Andolan: किसानों ने मनाया काला दिवस

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानून के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों ने बुधवार को काला दिवस मनाया। बुधवार यानी 26 मई को किसान आंदोलन के छह महीने पूरे हुए। इस मौके पर किसानों ने काला दिवस मनाया और इस दौरान उन्होंने काले झंडे फहराए, सरकार विरोधी नारे लगाए, पुतले जलाए और प्रदर्शन किया। गाजीपुर में प्रदर्शन स्थल पर थोड़ी अराजकता भी हुई, जहां किसानों ने भारी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती के बीच प्रधानमंत्री का पुतला जलाया। इस दौरान हल्की झड़प हुई। काला दिवस मनाने के दौरान किसानों ने दिल्ली के तीन सीमा क्षेत्रों सिंघू, गाजीपुर और टिकरी पर काले झंडे लहराए और नेताओं के पुतले जलाए। दिल्ली पुलिस ने लोगों से कोरोना वायरस संक्रमण से हालात और लागू लॉकडाउन को देखते हुए इकट्ठा नहीं होने की अपील की थी। हालांकि इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए थे। किसान नेताओं ने बताया कि प्रदर्शन की जगह पर ही नहीं, बल्कि हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश के गांवों में भी काले झंडे लगाए गए हैं। नेताओं ने कहा कि ग्रामीणों ने अपने घरों और गाड़ियों पर भी काले झंडे लगाए। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने बुधवार की सुबह कहा था- हम… Continue reading Kisan Andolan: किसानों ने मनाया काला दिवस

सरकार और किसान बात करें

किसान आंदोलन को चलते-चलते आज छह महिने पूरे हो गए हैं। ऐसा लगता था कि शाहीन बाग आंदोलन की तरह यह भी कोरोना के रेले में बह जाएगा लेकिन पंजाब, हरयाणा और पश्चिम उत्तरप्रदेश के किसानों का हौसला है कि अब तक वे अपनी टेक पर टिके हुए हैं। उन्होंने आंदोलन के छह महिने पूरे होने पर विरोध-दिवस आयोजित किया है। अभी तक जो खबरें आई हैं, उनसे ऐसा लगता है कि यह आंदोलन सिर्फ ढाई प्रांतों में सिकुड़कर रह गया है। पंजाब, हरयाणा और आधा उत्तरप्रदेश। इन प्रदेशों के भी सारे किसानों में भी यह फैल पाया है नहीं, यह भी नहीं कहा जा सकता। यह आंदोलन तो चौधरी चरणसिंह के प्रदर्शन के मुकाबले भी फीका ही रहा है। उनके आहवान पर दिल्ली में लाखों किसान इंडिया गेट पर जमा हो गए थे। यह भी पढ़ें: ये बादशाहत जरुरी नहीं दूसरे शब्दों में शक पैदा होता है कि यह आंदोलन सिर्फ खाते-पीते या मालदार किसानों तक ही तो सीमित नहीं है ? यह आंदोलन जिन तीन नए कृषि-कानूनों का विरोध कर रहा है, यदि देश के सारे किसान उसके साथ होते तो अभी तक सरकार घुटने टेक चुकी होती लेकिन सरकार ने काफी संयम से काम लिया है। उसने… Continue reading सरकार और किसान बात करें

राजस्थान : राज्यपाल कलराज मिश्र ने उद्योगपतियों और फैक्ट्री मालिकों से श्रमिकों के प्रति मानवीय व्यवहार रखने की अपील की..

पिछले लॉकडाउन में श्रमिकों और मजदूरों की हालत और हालात दोनो ही  बहुत खराब हो गये थे। सड़कों पर मीलों चलते मजदूर और फैक्ट्रियों के बाहर भूख की हालत में रोटी तलाशते मजदूर..वो दृश्य इस देश को और देशवासियों को भूलने में बहुत समय लगेगा। और अब जबकि कोरोना की दूसरी लहर दूसरी तबाही का मंजर लिये सामने खड़ी है। ऐसे में सबको डर है कि वह जख्म वापस हरे ना हो जाए। क्योंकि कोविड का इलाज तो अस्पतालों में मौजूद डॉक्टर कर लेंगे। लेकिन इन मजदूरों और श्रमिकों के ज़ख्मों का इलाज किसी डॉक्टर के पास नहीं होगा। ऐसे में राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने इस पर चिंता जताते हुए उद्योगपतियों और फैक्ट्री मालिकों से अनुरोध किया है कि वे श्रमिकों के प्रति मानवीय व्यवहार रखें। उन्होंने कहा कि कोविड से बचाव नियमों की पालना के साथ रोजगार से जुड़ी गतिविधियां बाधित नहीं हों, श्रमिकों का पलायन नहीं हो, किसानों को किसी प्रकार की तकलीफ नहीं हो, इसका भी सभी स्तरों पर विशेष रूप से ध्यान रखा जाए। इसे भी पढ़ें Corona in MP : मजदूरों की घर वापसी से कोरोना बढ़ने का खतरा, गांवों में बनाए जा रहे Quarantine Center राज्यपाल ने कोरोना से बचाव के निर्देश दिए… Continue reading राजस्थान : राज्यपाल कलराज मिश्र ने उद्योगपतियों और फैक्ट्री मालिकों से श्रमिकों के प्रति मानवीय व्यवहार रखने की अपील की..

किसानों पर सुप्रीम कोर्ट भी चुप

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के विरोध में 145 दिन से आंदोलन कर रहे किसानों के बारे में जल्दी किसी फैसले की जरूरत है। अगर केंद्र सरकार कोई फैसला नहीं करती है तो उसका कारण समझ में आता है। उसका राजनीतिक मकसद है और जिस कारोबारी मकसद के लिए उसने ये कानून बनाए हैं उसे भी पूरा करना है। कुछ चुनिंदा कारोबारियों के हितों के सामने किसानों के हित उसके लिए ज्यादा मायने नहीं रखते हैं। लेकिन क्या सुप्रीम कोर्ट के सामने भी ऐसी ही मजबूरी है, जो वह फैसला नहीं कर रही है। आखिर सुप्रीम कोर्ट ने तीन सदस्यों की एक कमेटी बनाई थी, जिसने अपनी रिपोर्ट अदालत को सौंप दी है पर अदालत उस पर कोई विचार क्यों नहीं कर रही है? यह सही है कि इन दिनों कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण की वजह से अदालत का काम पूरी रफ्तार से नहीं हो रहा है और वर्चुअल सुनवाई करनी पड़ रही है। लेकिन सर्वोच्च अदालत को प्राथमिकता तय करनी होगी। उसकी बनाई तीन सदस्यों की कमेटी ने कोई दस दिन पहले अपनी रिपोर्ट अदालत को सौंप दी है। अदालत ने इस कमेटी को आठ हफ्ते का ही समय दिया था। हालांकि रिपोर्ट सौंपने में उससे… Continue reading किसानों पर सुप्रीम कोर्ट भी चुप

किसानों से बात करे सरकार

केंद्र सरकार को अपने बनाए कानूनों का विरोध कर रहे किसानों के प्रति दुश्मनी का भाव छोड़ देना चाहिए और उनके साथ तत्काल बातचीत करनी चाहिए। राजधानी दिल्ली में जिस तेजी से कोरोना वायरस का संक्रमण फैल रहा है उसे देखते हुए यह आशंका निराधार नहीं है कि किसानों के बीच महामारी फैल सकती है। किसान 144 दिन से धरने पर बैठे हैं। वे थक भी गए हैं और खेती-किसानी का उनका काम भी प्रभावित हो रहा है। कोरोना का खतरा अलग से बढ़ रहा है। ऐसे में सरकार उनसे बातचीत की शुरुआत करे और जिस शर्त पर होता है उनका आंदोलन खत्म कराने का प्रयास करे। भाजपा के सहयोगी और हरियाणा के उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वह आंदोलन कर रहे किसानों से बातचीत शुरू करे। भाजपा के अपने सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुब्रह्मण्यम स्वामी ने ट्विट करके कहा कि सरकार किसानों से बात करे और आंदोलन खत्म कराए। उन्होंने तो अपनी पार्टी की सरकार को सुझाव भी दिया कि कैसे आंदोलन खत्म कराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों से वादा करे कि जो भी राज्य इस कानून को लागू नहीं करना चाहता है वह इसे लागू नहीं… Continue reading किसानों से बात करे सरकार

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