डर सबसे बड़ी बाधा है : वाणी कपूर

अभिनेत्री वाणी कपूर का कहना है कि वह डर को खत्म करने की दिशा में काम कर रही हैं। वाणी ने बताया, “मैं डर में नहीं जीने के लिए अपने आप पर बहुत मेहनत कर रही हूं,

झारखंड के कांग्रेसियों को भी सताने लगा है विधायक टूटने का ‘डर’!

मध्य प्रदेश और राजस्थान के बाद अब कांग्रेस के नेताओं को झारखंड में भी विधायकों के टूटने का डर सताने लगा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और झारखंड के मंत्री रामेश्वर उरांव कहते भी हैं

एक नवागंतुक कलाकार होने के नाते अनिश्चितताएं मुझे डराती हैं : अन्या सिंह

नवागंतुक अभिनेत्री अन्या सिंह का कहना है कि कोविड-19 की यह अनिश्चित घड़ी उन्हें डरा रही है, लेकिन वह सकारात्मक बनी हुई हैं।

असफलता के विचार ने नियाल होरान को किया प्रेरित

वन डायरेक्शन पूर्व बैंडमेट नियाल होरान का कहना है कि असफल होने का डर उन्हें अपने काम में प्रेरित करता रहता है। 26 वर्षीय गायक ने बताया कि किस तरह असफल होने के डर ने उन्हें उनके नए एल्बम ‘हर्टब्रेक वेदर’ के लिए प्रेरित किया।

कलाकारों को सताने लगा कोरोना का डर

नई दिल्ली। कोरोनावायरस के डर से मनोरंजन की दुनिया भी अछूती नहीं रही। दुनियाभर में तेजी से फैल रहे संक्रमण को देखते हुए कई सितारों ने अपनी फिल्मों की शूटिंग को रीशेड्यूल कराने के अलावा, कई शहरों की यात्राओं और फिल्मों के प्रमोशन को भी रद्द कर दिया है। कोरोनावायरस के कारण दुनियाभर की फिल्म इंडस्ट्री को 500 करोड़ डॉलर के घाटे का सामना करना पड़ रहा है। संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए लोग सार्वजनिक जगहों पर या भीड़भाड़ वाले जगहों पर जाने से बच रहे हैं। इससे सिनेमा हॉल और लाइव शो पर भी स्वाभाविक प्रभाव पड़ रहा है। हालांकि बॉलीवुड के कई निर्माता भी फिल्मों की रिलीज पर रोक लगाने को लेकर इंतजार करने के साथ ही परिस्थिति देख रहे हैं। वहीं वे कई शहरों में अपने फिल्म के प्रमोशनल टूर को रद्द कर रहे हैं। व्यापार विश्लेषक राजेश थडानी ने कहा फिलहाल भारत में अभी विकट परिस्थिति नहीं है, लेकिन लोग घबरा रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि इस पर जल्द नियंत्रण पा लिया जाएगा। अगर यह और फैलता है तो इससे सिनेमा और व्यापार पर काफी असर पड़ेगा। मेरा मानना है कि इस समय वितरकों और निर्माताओं को अपनी फिल्मों का बीमा करा लेना… Continue reading कलाकारों को सताने लगा कोरोना का डर

जड़ कारण है भूख, भय और मंद बुद्धि!

नामुमकिन, असाध्य सा है भारत और भारत की भीड़, हिंदुओं के दिमाग को समझ सकना! जितनी कोशिश करेंगे उलझते और भटकते जाएंगे! हमें अपनी सुध नहीं है और दुनिया ने जैसे हमें समझा हुआ है उसका हमें भान नहीं है! सोचें, विदेशियों की निगाह में हम हिंदू क्या अर्थ लिए हुए थे या हैं?

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