भारत डटे, लड़े चीन से!

यह मैं कई बार लिख चुका हूं। लेकिन पिछले दस दिनों में अंतरराष्ट्रीय राजनीति में चीन को घेरने की जितनी कार्रवाईयां हुई हैं, चीन जितना बदनाम हुआ है उनके चलते भारत के लिए वक्त है चीन को आंखे दिखाने का।

भारत कैसे करे सीमा रक्षा?

भारत लड़े या न लड़े? भारत को अपनी अखंडता- सार्वभौमता की रक्षा में लड़ना चाहिए या नहीं? वह कैसे लड़े?  कौन है दुश्मन? वह चीन से लड़े या पाकिस्तान से? क्या दोनो से  उसकी लड़ाई नहीं है? दोनों क्या उसके दुश्मन नहीं है

क्या किसी नेता में इतना दम है ?

गलवान घाटी में भारत की मुठभेड़ चीन से हुई लेकिन देखिए कि आजकल दंगल किनके बीच हो रहा है। यह दंगल हो रहा है– भाजपा और कांग्रेस के बीच।

पीटीआई को सरकारी धमकी

प्रेस ट्रस्ट आॅफ इंडिया (पीटीआई) देश की सबसे पुरानी और सबसे प्रामाणिक समाचार समिति है। मैं दस वर्ष तक इसकी हिंदी शाखा ‘पीटीआई—भाषा’ का संस्थापक संपादक रहा हूं।

कूटनीति नहीं है सैन्य ताकत का विकल्प

यह बात चीन के संबंध में भी सही है और नेपाल जैसे छोटे से छोटे देश से लेकर पाकिस्तान जैसे जन्म जन्मांतर के दुश्मन देश के बारे में भी सही है कि कूटनीति कभी भी सैन्य ताकत का विकल्प नहीं हो सकती है।

ममता की समर्थन करने की मजबूरी

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भारत-चीन सीमा विवाद के मसले पर सरकार का साथ दिया। कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सरकार से तीखे सवाल पूछे।

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