हिंदू उड़ा और मुसलमान पिंजरे में!

नंबर एक मसला, हिंदू-मुस्लिम-2: बूझें-सोचें आप कि सन 1947 में आजादी के बाद भारत का क्या आइडिया था? वह क्या विचार, क्या संकल्प था, जो नागरिकों के लिए था या जिसमें लोगों को ढलना था? भारत को बनना था? अपनी राय में पहला, मूल विचार यह बोध था कि अब हम आजाद हैं। मैं अब आजाद हूं। पुरानी बेड़ियों, अंधविश्वासों और गुलामी से मुक्ति। अब आधुनिक, विकसित होना है। आजादी के पंख से दिमाग-बुद्धि के खिड़की-दरवाजे खुलने हैं। ज्ञान, समझ, विवेक और सत्य में जीना है। इस भाव, इस विचार, इस आइडिया में पंडित नेहरू थे तो दूसरे नेता भी थे। ध्यान रहे 1947 की आजादी के वक्त कोई तीस करोड़ लोग थे। इसमें मुसलमानों की संख्या कोई साढ़े चार करोड़ थी। अब इस संख्या में इस सवाल पर जरा सोचें कि पंडित नेहरू ने 15 अगस्त की आधी रात में भारत का जो आइडिया दिया, सपना दिखाया तो उसे हिंदू ने कैसे लिया और मुसलमान ने कैसे लिया? अपना मानना है कि अगली सुबह जब हिंदू उठा तो वह आजाद पंछी माफिक उड़ता हुआ था। वक्त में उड़ने का जोश था जबकि मुसलमान की सुबह ठहरी, ठिठकी, रूकी हुई थी। वह इस चिंता में था कि कैसे वह रहेगा… Continue reading हिंदू उड़ा और मुसलमान पिंजरे में!

तब भी हिंदू अवचेतन और अब भी…

नरेंद्र मोदी और अमित शाह के भारत और गांधी-नेहरू के भारत का क्या फर्क है? इस पर लोग मोटा जवाब देंगे कि तब भारत हिंदू, हिंदुवादी नहीं था लेकिन अब है। मैं यहां ‘हिंदू, हिंदुवादी’ शब्द इस्तेमाल कर रहा हूं न कि हिंदू राष्ट्र! लेकिन हिंदू, हिंदुवादी होना भी हिंदू राष्ट्र की छाया है।

और लोड करें