Hijab controversy : उच्च न्यायालय ने कक्षा में हिजाब, भगवा शॉल, गमच्छा ले जाने पर लगाई पाबंदी…

कोर्ट ने कहा है कि विद्यार्थियों को कक्षा के भीतर भगवा शॉल, गमछा, हिजाब या किसी तरह का धार्मिक झंडा लेकर आने की रोक रहेगी…

Hijab Vs Bhagwa Court : सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा- देश कानून और संविधान से चलता है भावनाओं और जुनून से नहीं…

उडुपी | Hijab Vs Bhagwa Court : कर्नाटक के उडुपी के सरकारी पीयू महिला कॉलेज से शुरू हुआ हिजाब का मामला अब देश भर में सुर्खियां बटोर रहा है. सोशल मीडिया से लेकर मेनस्ट्रीम मीडिया में यह मुद्दा खूब चर्चा में है. ऐसे में हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान इस मामले में कड़ी टिप्पणी की गई है. राज्य में लगातार खिजाब और भगवा शॉल पर चल रहे विवाद पर अब अदालत ने कहा है कि हमारा देश भावनाओं और जुनून से नहीं चलता बल्कि कानून और संविधान से चलता है. कोर्ट ने कहा कि हमारे लिए हमारा संविधान ही गीता और कुरान है. हाई कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि हम तर्कों और कानूनों से चलेंगे ना कि भावनाओं और धार्मिक जुनून के हिसाब से. संवैधानिक व्यवस्था होगी मान्य… Hijab Vs Bhagwa Court : कर्नाटक हाईकोर्ट में यह साफ तौर पर कहा गया कि विवाद के लिए कोई स्थान ही नहीं बचता क्योंकि देश का संविधान सर्वोपरि है. कोर्ट ने कहा कि ना सिर्फ हम बल्कि पूरा देश संविधान के हिसाब से ही चलेगा. सुनवाई के दौरान कर्नाटक सरकार के एडवोकेट ने दिल्ली उदीकी यूनिफॉर्म के बारे में फैसला लेने की स्वतंत्रता छात्रों को दे दी गई है. उन्होंने… Continue reading Hijab Vs Bhagwa Court : सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा- देश कानून और संविधान से चलता है भावनाओं और जुनून से नहीं…

हाईकोर्ट का आदेश, देश में इस राज्य में बसों में स्पीकर पर चलाए गाने तो होगी कार्रवाई…

कर्नाटक कोटे ने सख्त आदेश जारी करते हुए सरकारी बसों में स्पीकर पर मोबाइल के प्रयोग को गलत माना है और इसकी मनाही कर दी गई है…

वैक्सीनेशन से भी अविश्वास!

दुनिया भारत को देख रही है। जिस समय कोरोना का दूसरी लहर फैली उस समय भी दुनिया देख रही थी कि कैसे भारत ने झूठे-सच्चे आंकड़ों से संक्रमितों और मरने वालों की संख्या छिपाई और अब जबकि देश में बहुत तेज रफ्तार से वैक्सीनेशन हो रहा है तो उसे भी दुनिया बहुत ध्यान से देख रही है कि आखिर भारत में क्या हो रहा है। ऐसा नहीं है कि यह पहली बार हो रहा है। पिछले कई बरसों से दुनिया भारत के आंकड़ों को संदेह की नजर से देख रही है। कोरोना तो बाद में आया है उससे पहले आर्थिक विकास और दूसरी कई सरकारी योजनाओं के बारे में बताए जा रहे आंकड़ों पर भी दुनिया को अविश्वास रहा है। कोरोना वैक्सीनेशन को लेकर अविश्वास उसी की एक कड़ी है। यह कहने का मतलब यह नहीं है कि भारत में जिन वैक्सीन को मंजूरी मिली है उनकी क्वालिटी खराब है या वे असरदार नहीं हैं। उसकी बजाय जिस तरह से वैक्सीनेशन हो रहा है, देश भर से फर्जी वैक्सीन लगाने की खबरें आ रही हैं, खाली सीरिंज लोगों को भोंकी जा रही है या आंकड़े बढ़ा-चढ़ा कर बताने की खबरें आ रही हैं, उससे दुनिया में अविश्वास हो रहा है।… Continue reading वैक्सीनेशन से भी अविश्वास!

Vaccination: वैक्सीनेशन में भारत नंबर दो, चीन अव्वल 119 करोड़ डोज लगाकर

नई दिल्ली। कोरोना वायरस की वैक्सीन लगाने के मामले में भारत दूसरे स्थान ( India number two vaccination ) पर पहुंच गया है। सोमवार को अमेरिका को पीछे छोड़ कर भारत दूसरे स्थान पर पहुंचा। 33 करोड़ की आबादी वाले अमेरिका में कुल 32.33 करोड़ डोज लगाई गई है। सोमवार की शाम तक भारत में 32.36 करोड़ से ज्यादा डोज लगा दी गई थी। वैक्सीनेशन के मामले में चीन अव्वल है, जहां अब तक 119 करोड़ डोज लगाई जा चुकी है। हालांकि आबादी के लिहाज से अमेरिका और भारत में जमीन आसमान का अंतर है। अमेरिका की आबादी 33 करोड़ है, जबकि भारत की आबादी 138 करोड़ है। फिर भी टीकाकरण में अमेरिका से आगे निकलने की आधिकारिक घोषणा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसके लिए सबको बधाई भी दी। बहरहाल, अमेरिका में आधी से ज्यादा आबादी को टीका लगाया जा चुका है, जबकि भारत में 20 फीसदी के करीब ही लोगों को पहली डोज लग पाई है। दोनों डोज लगाने वाली आबादी चार फीसदी से थोड़ी ज्यादा है। चीन में 22 करोड़ से ज्यादा लोगों को दोनों डोज लग चुकी है। ( India number two vaccination ) यह भी पढ़ें: सरकार वैक्सीन का अपना… Continue reading Vaccination: वैक्सीनेशन में भारत नंबर दो, चीन अव्वल 119 करोड़ डोज लगाकर

सरकार वैक्सीन का अपना कोटा बढ़ाए

increase quota of vaccine : केंद्र सरकार के पास यह आंकड़ा है कि लोग निजी अस्पतालों में जाकर वैक्सीन नहीं लगवा रहे हैं। मई के महीने में निजी अस्पतालों के पास एक करोड़ 29 लाख डोज उपलब्ध थी, जबकि सिर्फ 22 लाख लोगों ने निजी अस्पतालों में वैक्सीन लगवाई। अब वैक्सीन की कीमत पहले के मुकाबले और ज्यादा हो गई है। निजी अस्पतालों में सबसे सस्ती वैक्सीन यानी कोवीशील्ड की वैक्सीन भी 780 रुपए की है और सबसे महंगी कोवैक्सीन 1,430 रुपए की है। जबकि सरकारी सेंटर्स पर मुफ्त में वैक्सीन लगाई जा रही है। फिर क्यों लोग निजी अस्पतालों में वैक्सीन लगवाने जाएंगे? सरकार को भी यह बात समझ में आ रही होगी फिर भी यह समझ में नहीं आने वाली बात है कि निजी अस्पतालों के लिए कुछ वैक्सीन उत्पादन का 25 फीसदी हिस्सा क्यों उपलब्ध कराया जा रहा है? यह भी पढ़ें: मई की मौत जून में बता रहे हैं राज्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ जून को देश को संबोधित करते हुए कहा था कि केंद्र सरकार कुल उत्पादन का 75 फीसदी हिस्सा खरीदेगी और बाकी निजी अस्पताल खरीदेंगे। जब निजी अस्पतालों में लोग वैक्सीन ही नहीं लगवा रहे हैं तो वे 25 फीसदी वैक्सीन क्या… Continue reading सरकार वैक्सीन का अपना कोटा बढ़ाए

Vaccination in India: साल अंत तक 188 करोड़ डोज मिलेगी

Vaccination in India 188 crore : नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कोरोना वायरस के टीके की उपलब्धता का अपना अनुमान कम कर दिया है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा है कि साल के अंत तक 188 करोड़ डोज उपलब्ध होगी। इससे पहले मई में सरकार ने कहा था कि साल के अंत तक 215 करोड़ डोज उपलब्ध होगी। हालांकि सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि साल के अंत तक सभी व्यस्कों को टीका लगाने के लिए 188 करोड़ डोज की ही जरूरत होगी। इसमें से जुलाई अंत तक राज्यों को 51 करोड़ डोज उपलब्ध करा दी जाएगी और बाकी 135 करोड़ डोज दिसंबर तक मिलेगी। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा है कि साल के अंत तक देश की पूरी वयस्क आबादी को टीका लगाने के लिए कम से कम पांच निर्माताओं से करीब 188 करोड़ डोज मिलने की उम्मीद है। केंद्र सरकार के मुताबिक अभी तक भारत की लगभग 5.6 फीसदी वयस्क आबादी को कोरोना टीके की दो डोज मिली है, जबकि 20 फीसदी आबादी को कम से कम एक डोज लग चुकी है। दिमाग में फैले ब्लैक फंगस को समाप्त करने के लिये देश में पहली बार बिना चीर-फाड़… Continue reading Vaccination in India: साल अंत तक 188 करोड़ डोज मिलेगी

mann ki baat pm modi : मोदी ने वैक्सीन लगवाने की अपील की

mann ki baat pm modi : नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के लोगों से कोरोना वायरस की वैक्सीन लगाने की अपील की है। उन्होंने वैक्सीन पर लोगों का भ्रम दूर करने के लिए अपनी मां का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि उनकी मां एक सौ साल की है और उन्होंने वैक्सीन की दोनों डोज लगवाई है। उन्होंने लोगों का भ्रम दूर करने के लिए यह भी कहा कि देश में 20 करोड़ से ज्यादा लोगों ने वैक्सीन लगवा ली है। प्रधानमंत्री मोदी ने रेडियो पर प्रसारित होने वाले मन की बात कार्यक्रम में रविवार को वैक्सीन से लेकर खेल तक के बारे में बात की। उन्होंने महान धावक मिल्खा सिंह को भी याद किया, जिनका हाल में निधन हुआ है। उन्होंने देश के लोगों से अपील करते हुए कहा कि वे टोक्यो ओलंपिक में हिस्सा लेने के लिए जाने वाली टीम का हौसला बढ़ाएं। दिमाग में फैले ब्लैक फंगस को समाप्त करने के लिये देश में पहली बार बिना चीर-फाड़ ब्रेन सर्जरी! प्रधानमंत्री ने मन की बात कार्यक्रम के दौरान मध्य प्रदेश के बैतूल के एक गांव के लोगों से बात की। लोगों ने उन्हें बताया कि उनके यहां कोरोना वैक्सीन को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है।… Continue reading mann ki baat pm modi : मोदी ने वैक्सीन लगवाने की अपील की

दिसंबर से पहले ही सबको वैक्सीन लगेगी, PM ने समीक्षा की

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को सरकारी अधिकारियों के साथ वैक्सीनेशन अभियान और कोरोना की स्थिति की समीक्षा की। इसमें प्रधानमंत्री कार्यालय, स्वास्थ्य मंत्रालय और नीति आयोग के लोग शामिल हुए। जानकार सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा है कि इस साल दिसंबर तक ( vaccination before december ) 18 साल से ऊपर की पूरी आबादी को वैक्सीन लगाई जाए। उन्होंने इसका लक्ष्य तय किया। दिमाग में फैले ब्लैक फंगस को समाप्त करने के लिये देश में पहली बार बिना चीर-फाड़ ब्रेन सर्जरी! बताया जा रहा है कि कई उत्साही अधिकारियों ने प्रधानमंत्री के सामने कहा कि वे इस लक्ष्य को समय से पहले ही पूरा कर लेंगे। यानी दिसंबर से पहले ही देश के सभी व्यस्कों को वैक्सीन लगा दी जाएगी। यह भी पढ़ें: आप के रास्ते पर तृणमूल कांग्रेस हालांकि प्रधानमंत्री ने उनसे पूछा नहीं कि ऐसा कैसे होगा पर अब उत्साही अधिकारियों के सामने इसे पूरा करने की चुनौती है। दिसंबर से पहले अगर पूरी व्यस्क आबादी को टीका लगाना है तो उनके पास पांच महीने का समय है। अभी 32 करोड़ लोगों को पहली डोज लगी है। इसका मतलब है कि 110 करोड़ के करीब व्यस्क आबादी में से 80 करोड़… Continue reading दिसंबर से पहले ही सबको वैक्सीन लगेगी, PM ने समीक्षा की

टीके पर अंध-अविश्वास क्यों ?

Vaccination in India : भारत में कोरोना की दूसरी लहर उतार पर दिखाई दे रही है लेकिन तीसरी लहर की आशंका तो बनी ही हुई है, उसके साथ डेल्टा और डेल्टा प्लस जीवाणु के फैलने का खतरा भी दिखाई पड़ने लगा है। डेल्टा प्लस जीवाणु काफी खतरनाक है। इसने अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों में दुबारा कोहराम मचा दिया है। भारत के 174 जिलों में यह पाया गया है। अभी दूसरी लहर का असर देश के 75 जिलों में 10 प्रतिशत और 92 जिलों में 5 प्रतिशत तक बना हुआ है। यदि लोगों ने सावधानी नहीं बरती तो अन्य सैकड़ों जिलों में फैलते हुए इसे देर नहीं लगेगी। भारत के विभिन्न प्रांतों में अभी तक वैसे तो 48 मरीज़ इस नए जीवाणु के पाए गए हैं लेकिन यदि अमेरिका और ब्रिटेन जैसे सतर्क देशों में यह फैल सकता है तो भारत में तो इसके संक्रमण की गुंजाइश बहुत ज्यादा है। अमेरिका के ट्रंप-प्रशासन ने शुरु में काफी लापरवाही बरती, जिसके फलस्वरुप छह लाख से ज्यादा अमेरिकियों की जानें चली गईं लेकिन बाइडन-प्रशासन काफी सतर्कता का परिचय दे रहा है। स्वयं राष्ट्रपति बाइडन कई शहरों में जाकर टीकाकरण अभियान का शुभारंभ करवा रहे हैं। उनकी सरकार अब हर घर तक पहुंचकर… Continue reading टीके पर अंध-अविश्वास क्यों ?

Vaccination Records : टेस्टिंग और वैक्सीनेशन का रिकार्ड

Vaccination records : नई दिल्ली। देश में कोरोना वायरस के संक्रमितों की संख्या कम होने और संक्रमण दर में गिरावट के साथ साथ देश में टेस्टिंग और वैक्सीनेशन की रफ्तार में तेजी आ रही है। भारत में पिछले छह दिन में साढ़े तीन करोड़ के करीब लोगों को वैक्सीन लगाई गई है। शनिवार को खबर लिखे जाने तक देश में साढ़े 31 करोड़ से ज्यादा लोगों को टीका लगाया जा चुका था। शनिवार को देर रात तक 62 लाख लोगों को टीके लगे थे। बहरहाल, भारत में शनिवार तक संक्रमण की दर गिर कर 2.2 फीसदी रह गई थी और एक्टिव केसेज की संख्या पांच लाख 85 हजार के करीब पहुंच गई थी। टेस्टिंग में भी भारत में नए रिकार्ड बने हैं। पिछले 25 दिन में देश में पांच करोड़ टेस्ट हुए हैं। यानी हर दिन औसतन 20 लाख टेस्ट किए गए हैं। ज्यादा टेस्टिंग से कोरोना केसेज पर नजर रखना आसान हुआ है। शनिवार तक देश में कुल 40 करोड़ से ज्यादा टेस्टिंग हो चुकी है। कोरोना टेस्टिंग के मामले में अमेरिका सबसे आगे है, जहां 50 करोड़ से ज्यादा टेस्टिंग हो चुकी है। गौरतलब है कि अमेरिका की आबादी 33 करोड़ है। अपनी आबादी के डेढ़ गुने के… Continue reading Vaccination Records : टेस्टिंग और वैक्सीनेशन का रिकार्ड

वैक्सीन के जरिए राजनीति की कोशिश

भारत में हर चीज पर राजनीति होती है। कोरोना वायरस पर भी हुई है और वैक्सीन पर भी शुरू हो गई है। कम से कम वैक्सीन को लेकर बन रहे राजनीतिक नारों से तो ऐसा लग रहा है कि पार्टियां इसका अपने हक में इस्तेमाल करने लगी हैं। भाजपा और आम आदमी पार्टी ने वैक्सीन को लेकर जो नारा बनाया है वह शुद्ध रूप से राजनीतिक है। आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार ने वैक्सीनेशन की रफ्तार तेज करने के लिए राजधानी में एक अभियान शुरू किया, जिसका नाम दिया- जहां वोट, वहां वैक्सीनेशन! इसका मतलब यह है कि जहां लोगों ने वोट डाले वहां पर यानी पोलिंग बूथ पर वैक्सीन लगेगी। लेकिन इसके साथ ही इस नारे ने स्पष्ट रूप से वैक्सीन को वोट से जोड़ दिया। यह अलग बात है कि अभी तक यह सिर्फ नारा ही है क्योंकि हर पोलिंग बूथ पर वैक्सीन लगने की बात तो छोड़ें, वैक्सीन की कमी के कारण पहले से बनाए गए वैक्सीनेशन सेंटर भी बंद हो रहे हैं। यह भी पढ़ें: बिहार से बनेंगे सबसे ज्यादा मंत्री! बहरहाल, केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने भी सेवा की संगठन योजना के तहत वैक्सीन की रफ्तार बढ़ाने के लिए एक नारा गढ़ा-… Continue reading वैक्सीन के जरिए राजनीति की कोशिश

कोवीशील्ड पर केंद्र ने दी सफाई

नई दिल्ली। ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की कोवीशील्ड वैक्सीन की दो खुराकों के बीच का अंतर बढ़ाने के मसले पर केंद्र सरकार ने सफाई दी है। केंद्र सरकार ने कहा कि कोवीशील्ड की दो डोज के बीच का अंतराल छह से आठ हफ्ते की जगह 12 से 16 हफ्ते करने का फैसला वैज्ञानिक सबूतों और तथ्यों पर आधारित है। सरकार ने 13 मई को कहा था कि उसने कोविड-19 के लिए बनाए गए कार्य समूह की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए ऐसा किया है। इस बीच नेशनल टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप ऑन इम्यूनाइजेशन के अध्यक्ष एनके अरोड़ा ने भी मंगलवार को स्पष्ट किया किया कि दो खुराक के बीच अंतराल बढ़ाने का फैसला वैज्ञानिक सबूतों पर आधारित है और पूरी तरह पारदर्शी है। अरोड़ा ने यह भी कहा कि समूह की बैठक के दौरान इस फैसले को लेकर कोई मतभेद नहीं था और आम  सहमति से यह सिफारिश की गई।  केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक ट्विट करके बुधवार को इसकी जानकारी दी। सरकार ने समूह की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए सभी केंद्र शासित प्रदेश और राज्यों को नए दिशा-निर्देश जारी किए थे। इसी आधार पर कोवीशील्ड की दो खुराक के बीच समय अंतराल को बढ़ा कर 12 से 16 हफ्ते किया गया। केंद्रीय… Continue reading कोवीशील्ड पर केंद्र ने दी सफाई

25 फीसदी आबादी का क्या कसूर?

भारत सरकार ने वैक्सीनेशन नीति में एक बार फिर भेदभाव कर दिया है, जबकि सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने इसी पर सवाल उठाया था। केंद्र सरकार देश में बनने वाली वैक्सीन डोज में से सिर्फ 75 फीसदी डोज खरीदेगी। बाकी 25 फीसदी डोज निजी अस्पताल खरीदेंगे। निजी अस्पतालों के लिए वैक्सीन की कीमत भी तय कर दी गई है। भारत की स्वदेशी वैक्सीन भारत बायोटेक की कोवैक्सीन उनको 1,410 रुपए प्रति डोज के हिसाब से मिलेगी। रूसी वैक्सीन स्पुतनिक-वी की कीमत 1,145 रुपए होगी और कोवीशील्ड उनको 780 रुपए में मिलेगी। इसके ऊपर वे डेढ़ सौ रुपया सर्विस चार्ज लेंगे। सवाल है कि जब केंद्र सरकार ने सबको मुफ्त वैक्सीन लगाने की नीति बनाई है तो फिर उसमें इतनी महंगी वैक्सीन लगाने का स्कोप कहां से बचता है? जब उच्च वर्ग के लिए भी प्रधानमंत्री ने मुफ्त वैक्सीन की घोषणा की है तो सरकार किन लोगों से उम्मीद कर रही है कि वे इतनी महंगी वैक्सीन लगवाने निजी अस्पताल में जाएंगे? अगर सरकारी अस्पतालों में या सरकारों के बनवाए केंद्रों पर मुफ्त में वैक्सीन लगेगी तो दो हजार रुपए या उससे ज्यादा वैक्सीन पर कौन खर्च करेगा? ध्यान रहे केंद्र सरकार 75 फीसदी ही वैक्सीन खरीदेगी, इसका… Continue reading 25 फीसदी आबादी का क्या कसूर?

सरकार की कथा निराली

भारत सरकार को इस बात का श्रेय देना होगा कि वह घोर अंधकार में भी सकारात्मक पहलू ढूंढ लेती है। मसलन, अगर देश में कोरना टीकाकरण में प्रगति की बात की जाए, तो सरकारी पक्ष बताएगा कि 20 करोड़ लोगों का टीकाकरण हो चुका है। इतनी बड़ी संख्या में दुनिया के कुछ ही देशों में टीकाकरण हुआ है। यानी वह इस बात को छिपा लेगी कि भारत में दोनों टीके सवा तीन प्रतिशत लोगों को ही लगे हैं या एक टीका भी अभी कुल आबादी के पांचवें हिस्से तक को नहीं लग पाया है। पॉजिटिव ढूंढने की भारत सरकार की ये क्षमता पूरे कोरोना काल में दिखती रही है। वैसे ये कहानी उससे भी पुरानी है। सबसे पहले तो डेटा मैनेजमेंट के जरिए सुर्खियां और उनके जरिए जनमत संभालने की क्षमता उसने अर्थव्यवस्था में दिखाई। बहराहल, भारत सरकार की ये कुशलता भारत के लोगों को बहुत महंगी पड़ी है। वैश्विक मीडिया पर खुल कर ये बात कह रहा है। कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान प्रिंट मीडिया के एक हिस्से को भी यह समझ में आया कि सरकार की झूठी कहानियां फैलाने से सच नहीं बदल जाता। बल्कि इसमें सहभागी बन कर मीडिया भी भारत की मुसीबत बढ़ाने में… Continue reading सरकार की कथा निराली

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