Corona Update: एक्टिव केस 20 लाख से नीचे, मौतों की संख्या में भी आने लगी कमी

नई दिल्ली। कोरोना वायरस की दूसरी लहर में संक्रमण के नए केसेज का तेजी से नीचे आने का सिलसिला जारी है। हालांकि अब भी नए केसेज की संख्या पहली लहर के मुकाबले ज्यादा है लेकिन चार लाख 14 हजार के पीक के मुकाबले अब केसेज की संख्या एक तिहाई रह गई है। इसके साथ ही एक्टिव केसेज की संख्या में भी बड़ी तेजी से कमी आई है। सोमवार को एक्टिव केसेज की संख्या 20 लाख से नीचे आ गई। पिछले दो हफ्ते से औसतन एक लाख एक्टिव केस हर दिन कम हुए हैं। देश में कोरोना वायरस के संक्रमण से ठीक होने वालों की संख्या दो करोड़ 60 लाख से ज्यादा हो गई है। भारत के लिए अच्छी और राहत की खबर यह है कि सोमवार को नए केसेज की संख्या में बड़ी गिरावट आने के साथ साथ संक्रमण से होने वाली मौतों की संख्या में भी कमी आई। पिछले एक महीने से ज्यादा समय से लगातार साढ़े तीन हजार के आसपास मौतें हो रही थीं। कोरोना संक्रमण के पीक के समय एक दिन में मरने वालों की संख्या चार हजार से ऊपर पहुंच गई थी। सोमवार को खबर लिखे जाने तक 2,479 लोगों के मरने की खबर आई थी।… Continue reading Corona Update: एक्टिव केस 20 लाख से नीचे, मौतों की संख्या में भी आने लगी कमी

Corona Update: रिकार्ड रफ्तार से घटे केस, लेकिन मरने वालों की संख्या कम नहीं

नई दिल्ली। कोरोना वायरस की दूसरी लहर जिस तेजी से ऊंचाई पर गई थी उसी तेजी से इसमें कमी आ रही है। पहली लहर के मुकाबले में दूसरी लहर में केसेज ज्यादा तेजी से कम हो रहे हैं। भारत में दूसरी लहर का पीक छह मई को था, जिस दिन देश में चार लाख 14 हजार से कुछ ज्यादा केसेज आए थे। उसके बाद से लगातार केसेज में गिरावट आ रही है, 29 मई को पूरे देश में एक लाख 65 हजार नए केस मिले। यानी 23 दिन में नए केसेज 40 फीसदी रह गई। उनमें 60 फीसदी की कमी आ गई है। अगर एक हफ्ते के औसत के हिसाब से देखें तो दूसरी लहर के पीक वाले हफ्ते में आठ मई को तीन लाख 89 हजार का औसत था और 29 मई के हफ्ते में सात दिन का औसत एक लाख 95 हजार का है। इसका मतलब है कि तीन हफ्ते में 50 फीसदी की कमी आई। इसकी तुलना अगर पहली लहर के पीक से करें तो उस समय पीक से केस नीचे आने में बहुत समय लगा था। उस समय का पीक 17 सितंबर 2020 को आया था और उस दिन सात दिन के केस का औसत 93,735… Continue reading Corona Update: रिकार्ड रफ्तार से घटे केस, लेकिन मरने वालों की संख्या कम नहीं

Corona Update: एक्टिव केसेज 30 फीसदी घटे, 10 दिन में नौ लाख से ज्यादा कमी

कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से कम हो रहा है। पिछले 10 दिन में देश में एक्टिव केसेज की संख्या 30 फीसदी से ज्यादा कम हो गई है।

कमान हाथ में लेने की नाकाम कोशिश!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर कोरोना महामारी से मुकाबले की कमान अपने हाथ में लेने की कोशिश कर रहे हैं। वे मुख्यमंत्रियों से बात कर रहे हैं। अधिकारियों के साथ बैठकें कर रहे हैं। यहां तक कि जिलों के कलेक्टरों से सीधी बात कर रहे हैं। इन सबका मकसद यह दिखाना है कि कोरोना से लड़ाई असल में प्रधानमंत्री ही लड़ रहे हैं और उन्होंने एक बार फिर अपनी दिव्य शक्तियों से कोरोना पर देशवासियों को विजय दिला दी। परंतु मुश्किल यह है कि इस बार उनकी कोशिशें कामयाब होती नहीं दिख रही हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि कोरोना कंट्रोल करने की कमान उन्होंने खुद अपने हाथ से निकल जाने दी थी और एक बार जब कमान हाथ से निकल गई और उनके खुद के बनवाए यह धारणा बन गई कि स्वास्थ्य राज्यों का मामला है और राज्य सरकारों को ही इस वायरस से निपटना है तो अब लाख चाह कर भी वे इस धारणा को नहीं बदल सकते हैं और न कोरोना के कम होते केसेज का श्रेय ले सकते हैं। यह भी पढ़ें: केरल में सीपीएम का जनादेश के साथ धोखा ! याद करें कोरोना वायरस की पहली लहर में प्रधानमंत्री मोदी ने कैसे पूरा कंट्रोल अपने हाथ… Continue reading कमान हाथ में लेने की नाकाम कोशिश!

Corona update: सात राज्यों में बढ़ा संक्रमण, संक्रमण दर 25 फीसदी से ऊपर

नई दिल्ली। देश के ज्यादातर राज्यों में कोरोना वायरस के केसेज कम होने लगे हैं और एक्टिव केसेज की संख्या में रिकार्ड रफ्तार से कमी हो रही है। लेकिन सात राज्यों में कोरोना वायरस की संक्रमण की दर और हर दिन आने वाले नए केसेज सरकार की चिंता बढ़ा रहे हैं। इन सात राज्यों में संक्रमण की दर अब भी 25 फीसदी है। यानी टेस्ट कराने वाले सौ लोगों में 25 लोग संक्रमित मिल रहे हैं। यह कोरोना के खतरनाक ढंग से बेकाबू होने का संकेत है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से बताया गया है कि पूर्वोत्तर में असम को छोड़ कर बाकी सभी छह राज्यों- त्रिपुरा, मेघालय, मणिपुर, सिक्किम, मिजोरम और नगालैंड में नए केसेज की संख्या बढ रही है। ज्यादातर में संक्रमण की दर 25 फीसदी से ऊपर है। इनके अलावा 22 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश ऐसे हैं, जहां संक्रमण की दर अब भी 15 फीसदी से ऊपर है। ध्यान रहे विश्व स्वास्थ्य संगठन, डब्लुएचओ के मुताबिक पांच फीसदी से ऊपर संक्रमण दर होने का मतलब है कि कोरोना बेकाबू है। बहरहाल, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से बताया गया है कि लगातार 10 हफ्ते तक बढ़ोतरी के बाद पिछले दो हफ्ते से केसेज कम हो… Continue reading Corona update: सात राज्यों में बढ़ा संक्रमण, संक्रमण दर 25 फीसदी से ऊपर

कोरोनाः आशा की किरणें

भारत जबसे आजाद हुआ है, कोरोना-जैसा संकट उस पर कभी नहीं आया। इस संकट ने राजा-रंक, करोड़पति-कौड़ीपति, औरत-मर्द, शहरी-ग्रामीण, डाक्टर-मरीज़– किसी को नहीं छोड़ा। सबको यह निगल गया। श्मशानों और कब्रिस्तानों में लाशों के इतने ढेर देश में पहले किसी ने नहीं देखे। भारत में यों तो बीमारियों, दुर्घटनाओं और वृद्धावस्था के कारण मरने वालों की संख्या 25 हजार रोज़ की है। उसमें यदि चार-पांच हजार ज्यादा जुड़ जाएं तो यह दुखद तो है लेकिन कोई भूकंप-जैसे बात नहीं है लेकिन सरकारी आंकड़ों पर हर प्रांत में सवाल उठ रहे हैं। ये भी पढ़ें: मलेरकोटलाः एक बेमिसाल मिसाल देश में ऐसे लोग अब मिलना मुश्किल है, जिनका कोई न कोई रिश्तेदार या मित्र कोरोना का शिकार न हुआ हो। यों तो भारत के दो प्रतिशत लोगों को यह बीमारी हुई है लेकिन सौ प्रतिशत लोग इससे डर गए हैं। इस डर ने भी कोरोना को बढ़ा दिया है। मृतकों की संख्या अब भी रोजाना 4 हजार के आस-पास है लेकिन मरीजों की संख्या तेजी से घट रही है। संक्रमण घट रहा है और संक्रमित बड़ी संख्या में ठीक हो रहे हैं। ये भी पढ़ें: पोस्टरबाजों की हास्यास्पद गिरफ्तारी यदि यही रफ्तार अगले एक-दो हफ्ते चलती रही तो आशा है कि… Continue reading कोरोनाः आशा की किरणें

Corona संक्रमण की दर घट रही है, दिल्ली में संक्रमण दर 36 फीसदी से घट 6 फीसदी

नई दिल्ली। देश में कोराना वायरस की संक्रमण दर कम होने का सिलसिला जारी है। हर दिन संक्रमण की दर में औसतन एक फीसदी से ज्यादा की कमी आ रही है। पिछले एक हफ्ते में 19 फीसदी से ऊपर पहुंचने के बाद अब संक्रमण की दर घट कर 13 फीसदी पर आ गई है। देश के सर्वाधिक प्रभावित राज्यों में से एक दिल्ली में संक्रमण की दर घट कर छह फीसदी से नीचे आ गई है, जो 22 अप्रैल को 36 फीसदी पहुंच गई थी। संक्रमण दर में कमी आने का एक कारण लॉकडाउन है तो दूसरा कारण यह बताया जा रहा है कि लगातार टेस्टिंग बढ़ाने से कोरोना को काबू करने में आसानी हुई है। भारत में 18 मई को 20 लाख आठ हजार लोगों का कोरोना टेस्ट हुआ। दुनिया के किसी देश ने एक दिन में इतने लोगों की टेस्टिंग नहीं की है। संक्रमण दर में कमी की वजह से ही रिकार्ड संख्या में टेस्टिंग के बावजूद मरीजों की संख्या में लगातार कमी हो रही है और एक्टिव केसेज भी लगातार कम हो रहे हैं। मंगलवार को एक दिन में एक लाख 27 हजार एक्टिव केस कम हुए। यह सिलसिला पिछले कई दिनों से चल रहा है कि… Continue reading Corona संक्रमण की दर घट रही है, दिल्ली में संक्रमण दर 36 फीसदी से घट 6 फीसदी

Corona update चार हजार से ज्यादा मौतें, ज्यादातर राज्यों में मौतों की बढ़ती संख्या

नई दिल्ली। देश में कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या लगातार कम हो रही है, एक्टिव केसेज भी कम हो रहे हैं और संक्रमण की दर भी कम हो रही है। भारत सरकार ने मंगलवार को फीलगुड फैक्टर बताते हुए कहा कि देश में सिर्फ 1.8 फीसदी आबादी ही संक्रमित हुई है। साथ ही सरकार ने बताया कि संक्रमण दर कम होकर 14 फीसदी हो गई है और अब देश के आठ राज्यों में ही एक लाख से ज्यादा एक्टिव केस हैं। इसके बावजूद यह हकीकत है कि मौतों की संख्या कम नहीं हो रही है। कोरोना वायरस के संक्रमण से मरने वालों की संख्या लगातार चार हजार से ऊपर बनी हुई है। मंगलवार को खबर लिखे जाने तक 4,218 लोगों की मौत हुई। कोरोना से ज्यादा संक्रमित राज्यों में से एक-दो को छोड़ कर ज्यादातर राज्यों में मौतों की संख्या कम नहीं हो रही है। कर्नाटक में सोमवार को 467 लोगों की मौत हुई, जबकि मंगलवार को यह बढ़ कर 525 हो गई। महाराष्ट्र में रिकार्ड संख्या में 1,291 लोगों की मौत हुई। पंजाब में 231 लोगों की मौत हुई तो छोटे-छोटे राज्यों में भी रिकार्ड संख्या में मौतें दर्ज की गईं। उत्तराखंड में 98, जम्मू कश्मीर में 71,… Continue reading Corona update चार हजार से ज्यादा मौतें, ज्यादातर राज्यों में मौतों की बढ़ती संख्या

सारी गफलतें एक बराबर!

राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के सर संघचालक मोहन भागवत ने कोरोना वायरस की दूसरी लहर को  लेकर एक छायावादी टिप्पणी में कहा है कि ‘पहली लहर जाने के बाद हम सब जरा गफलत में आ गए। क्या जनता, क्या शासन, क्या प्रशासन। डॉक्टर लोग इशारा दे रहे थे। फिर भी थोड़ी गफलत में आ गए। इसलिए ये संकट खड़ा हुआ’। सवाल है कि क्या ‘जनता, शासन और प्रशासन’ सबकी गफलतें एक बराबर हैं? या प्रशासन और उससे भी ऊपर शासन की गफलत को ज्यादा बड़ा और कुछ हद तक अक्षम्य माना जाना चाहिए? जनता के लिए तो हमारे नीतिश्लोकों में कहा गया है- महाजनो येन गतः स पंथा। इसका मतलब है कि महाजन यानी समाज के अग्रणी लोग जिस रास्ते से जाएं जनता को उसी रास्ते जाना चाहिए। सो, जनता की लापरवाही या गफलत तो महाजन यानी अग्रणी लोगों को देख कर हुई। जब देश के प्रधानमंत्री ने कोरोना के खिलाफ जंग मे जीत का ऐलान कर दिया, जब प्रधानमंत्री और गृह मंत्री बड़ी बड़ी चुनावी रैलियां करने लगे, धर्मगुरुओं ने कुंभ की तैयारियां शुरू कर दीं, प्रशासन ने सिनेमा हॉल से लेकर होटल, रेस्तरां, बार सब कुछ खोल दिए तो फिर जनता की गफलत का क्या मतलब! जनता तो वही… Continue reading सारी गफलतें एक बराबर!

संक्रमण घटा पर मौतें बढ़ीं, लगभग हर राज्य की यह स्थिति

नई दिल्ली। देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर में एक अजीब परिघटना देखने को मिल रही है। देश के ज्यादातर राज्यों में कोरोना वायरस के संक्रमण के केसेज कम होने लगे हैं और संक्रमण की दर भी कम हो रही है लेकिन मरने वालों की संख्या में कमी नहीं हो रही है। यह लगभग देश के हर राज्य की स्थिति है। जिन राज्यों में संक्रमण के केसेज रिकार्ड रफ्तार से कम हो रहे हैं वहां भी मरने वालों की संख्या नहीं घट रही है। महाराष्ट्र में रविवार को संक्रमितों की संख्या 32 हजार पहुंच गई पर मरने वालों की संख्या बढ़ कर शनिवार को 960 के मुकाबले बढ़ कर 974 हो गई। इसी तरह उत्तर प्रदेश में केसेज घट कर 10 हजार हो गए पर मरने वालों की संख्या शनिवार के 281 के मुकाबले बढ़ कर 311 हो गई। कर्नाटक में रविवार को शनिवार के मुकाबले 10 हजार केस कम मिले पर मरने वालों की संख्या 349 से बढ़ कर 403 हो गई। राजस्थान में रविवार को नए केसेज की संख्या शनिवार के मुकाबले चार हजार कम रही पर मरने वालों की संख्या कम होने की बजाय बढ़ गई। इसी तरह पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, उत्तराखंड आदि राज्यों में… Continue reading संक्रमण घटा पर मौतें बढ़ीं, लगभग हर राज्य की यह स्थिति

कोरोना का तीसरा हमला ?

अमेरिका-जैसे कुछ देशों में लोग मुखपट्टी लगाए बिना इस मस्ती में घूम रहे हैं, जैसे कि कोरोना की महामारी खत्म हो चुकी है। उन्होंने दो टीके क्या लगवा लिये, वे सोचते हैं कि अब उन्हें कोई खतरा नहीं है लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टी.ए. ग्रेब्रोसिस ने सारी दुनिया को अभी से चेता दिया है। उनका कहना है कि यह दूसरा साल, कोविड-19 का, पिछले साल से भी ज्यादा खतरनाक हो सकता है। उसने तो सिर्फ एक खतरा बताया है। वह यह कि कोरोना की इस महामारी के सिर पर अब एक नया सींग उग आया है। वह है- बी.1.617.2. यह बहुत तेजी से फैलता है। यह तो फैल ही सकता है लेकिन मुझे यह डर भी लगता है कि भारत की तरह अफ्रीका ओर एशिया के गांवों में यह नया संक्रमण फैल गया तो क्या होगा ? हमारे गांवों में रहनेवाले करोड़ों लोग भगवान भरोसे हो जाएंगे। न उनके पास दवा है, न डाॅक्टर है और न ही अस्पताल। उनके पास इतने पैसे भी नहीं हैं कि वे शहरों में आकर अपना इलाज करवा सकें। इस समय भारत में 18 करोड़ से ज्यादा लोगों को कोरोना का टीका लग चुका है, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है लेकिन… Continue reading कोरोना का तीसरा हमला ?

प्रतिदिन 4 हजार मौतें या 25 हजार या….?

सन् इक्कीस की मई में भारत झूठ में नरक है। दुनिया का ‘मानवीय संकट’ है! इस संकट का एक पहलू लोगों का मरना है! इसका भी भयावह-नरसंहारक रूप लावारिश, गुमनाम मौत है। नदियों में लाशे बह रही है, श्मशान में कतार में अर्थियां है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार लाउडस्पीकर से जिंदा जीव को सुना रहे है कि रोते-रोते हंसना सीखों!….यह पोजिटिवीटी बनाओं कि तुम तो जिंदा हो! उफ! घिन और नीचता वाला यह नैरेटिव! … लेकिन हम सदा-सर्वदा ऐसे ही मरते है। सन् 1918-19-20 में हिंदू ऐसे ही करोडों की तादाद में मरे थे। तब साहित्यकार सुर्यकांत निराला ने इलाहाबाद में अपने गांव में अपने परिजनो की एक के बाद एक मौतों और गंगा किनारे की दशा में लिखा था – लाशे ही लाशे! .. पर वे भी न समझ पाएं, न गिनती कर पाएं, न लिख पाएं कि मृतकों की कितनी संख्या! न अंग्रेज सरकार की गिनती, न गंगा किनारे हिंदू मठो-मंदिरों के धर्माचार्यों द्वारा बहती अर्थियों की चिंता और न जनता को सुध कि कितने लाख-करोड मर रहे है। वह वक्त हूबहू 2021 में अपने को दोहराता हुआ। … बस एक फर्क.. तब अंग्रेज हिंदुओं को यह बहलाते हुए नहीं थे कि महामारी में भी… Continue reading प्रतिदिन 4 हजार मौतें या 25 हजार या….?

खैर, खून, खांसी छिपती नहीं है

रहीम का एक दोहा है- खैर, खून, खांसी, खुशी, बैर, प्रीति, मदपान। रहिमन दाबै न दबै जानत सकल जहान। यानी सात चीजें ऐसी हैं, जिन्हें कितना भी छिपाया जा, छिप नहीं सकती हैं। इनमें एक चीज खून यानी मौत है। कोरोना वायरस की महामारी में भी यही हो रहा है। सरकारें कितनी भी कोशिश कर रही हैं पर मौत के आंकड़े छिप नहीं पा रहे हैं। किसी न किसी तरह से सच जाहिर हो जा रहा है। असल में जिन लोगों के परिजनों का निधन हो रहा है वे तो सरकार का लिहाज करके झूठ नहीं बोल सकते या चुप नहीं रह सकते हैं। सो, कहीं मरने वालों के परिजन पोल पट्टी खोल रहे हैं, कहीं गंगा में बहती लाशें या जमीन फाड़ कर घाटों पर निकल गई लाशें पोल खोल रही हैं, कहीं श्मशान से उठता धुआं तो कहीं चिता सजाने के लिए खरीदी जा रही लकड़ी पोल खोल रही है। कुल मिला कर किसी न किसी तरह से पोल खुल जा रही है। असली संख्या भले सामने न आए लेकिन यह पता चल रहा है कि हर जगह मौतें बेहिसाब हो रही हैं। गुजरात के चार अखबारों- दिव्य भास्कर, गुजरात समाचार, सौराष्ट्र समाचार और संदेश ने कोरोना से… Continue reading खैर, खून, खांसी छिपती नहीं है

लॉकडाउन का असर दिखना शुरू, संक्रमितों की संख्या और एक्टिव केसेज में कमी

नई दिल्ली। देश के अनेक राज्यों में लगाए गए पूर्ण लॉकडाउन और कुछ राज्यों में लागू आंशिक लॉकडाउन का असर अब दिखना शुरू हो गया है। कोरोना वायरस की तीसरी लहर का कहर भी थमता दिख रहा है। शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन संक्रमितों की संख्या में कमी हुई और एक्टिव केसेज में भी कमी आई। एक्टिव केसेज की संख्या साढ़े 37 लाख से घट कर 36 लाख 90 हजार हो गई है। सर्वाधिक संक्रमित राज्य महाराष्ट्र में एक्टिव केसेज की संख्या छह लाख से घट कर पांच लाख 17 हजार हो गई है। राजधानी दिल्ली में भी 99 हजार से घट कर 71 हजार एक्टिव केस रह गए हैं। पिछले हफ्ते देश के 13 राज्यों में एक लाख से ज्यादा एक्टिव केस थे, जबकि शुक्रवार को इनकी संख्या 11 हो गई। शुक्रवार को खबर लिखे जाने तक देश में दो लाख 95 हजार से कुछ ज्यादा केसेज आए थे और 3,222 लोगों की मौत हुई थी। देर रात तक छत्तीसगढ़, पंजाब, झारखंड और असम सहित पूर्वोत्तर के कई राज्यों के आंकड़े अपडेट नहीं हुए थे। इनके आंकड़े आने के बाद संक्रमितों की संख्या में और बढ़ोतरी होगी। इससे पहले गुरुवार को तीन लाख 43 हजार नए संक्रमित मिले थे।… Continue reading लॉकडाउन का असर दिखना शुरू, संक्रमितों की संख्या और एक्टिव केसेज में कमी

परदे से बाहर आए सरकार

ऐसा लग रहा है जैसे कोरोना वायरस की महामारी के बीच भारत सरकार सात परदों के पीछे छिप कर बैठ गई है। अभी पिछले महीने तक तो भाजपा और भारत सरकार ने पश्चिम बंगाल में कारपेट बॉम्बिंग की हुई थी। दर्जनों मंत्री, सैकड़ों विधायक, सांसद और हजारों नेता प्रचार कर रहे थे। बंगाल के गली-कूचों में भाजपा के देश भर के नेताओं की भरमार थी। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने दिल्ली से कोलकाता की उड़ान का रिकार्ड बनाया। अब अचानक सब गायब हैं। पिछले 12 दिन से केंद्रीय गृह मंत्री के बारे में कुछ पता नहीं है कि वे क्या कर रहे हैं, जबकि उनका मंत्रालय कोरोना महामारी से मुकाबले का नोडल मंत्रालय है। क्या कायदे से ऐसा नहीं होना चाहिए कि बंगाल चुनाव खत्म होते ही पूरी पार्टी उतनी ही ताकत से कोरोना से लड़ने में उतरती और सड़क पर वैसे ही काम करती दिखती, जैसे बंगाल में कर रही थी? पर इसके उलट ऐसा लग रहा है कि सरकार अब भी बंगाल में ही काम करती दिख रही है। केंद्रीय मंत्री बंगाल जा रहे हैं, केंद्रीय टीम बंगाल जा रही है, गवर्नर कूचबिहार जाने पर अड़े हैं और ये सब लोग कोरोना के हालात देखने नहीं जा रहे… Continue reading परदे से बाहर आए सरकार

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