चीन का नाम लेने से क्यों परहेज?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर इस सरकार के शीर्ष पांच मंत्रियों में से कोई भी चीन का नाम लेकर उसके ऊपर हमला नहीं कर रहा है। दूसरे मंत्री चीन को निशाना बना रहे हैं। जैसे अमेरिका के साथ टू प्लस टू वार्ता के दिन ही नितिन गडकरी ने चीन पर निशाना साधा।

राजनाथ ने की शस्त्र पूजा, सेना को सराहा

भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में चल रही तनातनी के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत शांति चाहता है लेकिन साथ ही वह देश को आश्वस्त करना चाहते हैं

चीन की युद्ध की तैयारी

खबर है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनफिंग ने अपनी सेना को युद्ध के लिए तैयार रहने को कहा है। शी चीन के गुआंगडोंग प्रांत के एक सैन्य बेस का दौरा करने गए थे। वहां उन्होंने सैनिकों से देश के प्रति एकनिष्ठ, शुद्ध और भरोसेमंद बने रहने को कहा और साथ ही उनको हिदायत देते हुए कहा कि वे दिल-दिमाग से युद्ध के लिए तैयार रहें।

चीन के साथ क्या करे भारत?

चीन के साथ भारत को क्या करना चाहिए, यह ऐसा सवाल है, जिस पर लग रहा है कि सरकार भी विचार नहीं करना चाहती है। सरकार ने भी सब कुछ हालात पर छोड़ा हुआ है। यह माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच सैन्य अधिकारियों की जो बैठकें हो रही हैं और पारंपरिक कूटनीतिक चैनल से जो बातें हो रही हैं, उनसे अपने आप विवाद सुलझ जाएगा।

सीमा पर चीन के 60 हजार सैनिक

लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा, एलएसी पर भारत और चीन के बीच पिछले कुछ दिन से तनाव कम होने की संभावना जताई जा रही थी पर अमेरिका ने एलएसी पर चीन के सैनिक जमावड़े को लेकर बड़ा दावा किया है।

भारत-चीन में हुई बैठक

लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा, एलएसी के पास कई जगह पिछले कई महीने से चल रहे गतिरोध को दूर करने के लिए भारत और चीन ने गुरुवार को एक अहम बैठक की।

एलएसी पर चीन का दावा मंजूर नहीं

भारत ने लद्दाख को लेकर किए गए चीन के दावे को खारिज कर दिया है। भारत ने मंगलवार को दो टूक अंदाज में चीन को बता दिया कि उसने कभी की 1959 में चीन की ओर से एकतरफा तरीके से तय की गई वास्तविक नियंत्रण रेखा, एलएसी को नहीं माना है।

भारत, चीन से कैसे निपटे?

भारत आखिर चीन से कैसे निपटे? एक तरीका तो यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने 13 पूर्ववर्तियों का अनुसरण करते रहे, जिन नीतियों का  परिणाम है कि आज भी 38 हजार वर्ग कि.मी. भारतीय भूखंड पर चीनी कब्जा है।

भारत ने चीन से जल्दी पीछे हटने को कहा

भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख में सीमा विवाद सुलझाने के लिए मोल्डो में 14 घंटे लंबी कूटनीतिक-सैन्य वार्ता की। दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच हुई वार्ता, विचार-विमर्श

उम्मीद तो नहीं बंधती

भारत और चीन की सेनाओं के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा पर लद्दाख में चल रहे गंभीर तनाव के बीच दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने मॉस्को में बातचीत की। पहले खबर आई कि दोनों देश एलएसी पर आमना-सामना खत्म करने के लिए सहमत हो गए हैं।

चीन से लौटे अगवा भारतीय नागरिक

अरुणाचल प्रदेश से अगवा किए गए पांच भारतीय नागरिकों को चीन ने वापस लौटा दिया है। पांचों भारतीय नागरिकों को चीन की सेना ने शनिवार को भारतीय सेना को सौंप दिए। इन पांचों नागरिकों की 12 दिन बाद वापसी हुई।

सेना पूरी तरह से तैयार

पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा, एलएसी पर चीन के साथ पिछले कुछ दिनों लगातार हो रही झड़पों के बीच चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत ने कहा है कि भारतीय सेना हर स्थिति का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार है

भारत-चीन तनाव घटाने पर सहमत

भारत और चीन सीमा पर जल्द से जल्द तनाव घटाने तथा विश्वास बहाली के उपायों पर तेजी से काम करने पर सहमत हो गये हैं।

चीन से इतना डरना क्यों?

दुनिया का हर जानकार मानता है कि चीन ने सीमा पर यथास्थिति तोड़ी। वह आक्रामक है। मई 2020 से पहले भारतीय सेना का जो गश्ती इलाका था उसमें चीनी सेना घुसी है। सीमा पर वह लड़ाई का इंफ्रास्ट्रक्चर बना रहा है।

चीन बढ़ा रहा है सैनिक

पूर्वी लद्दाख की पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर भारतीय जवानों के साथ झड़प में कामयाब नहीं होने के बाद चीन अब उत्तरी इलाके में अपनी सैनिक तैनाती बढ़ा रहा है।

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