हर घोषणा पर सफाई की जरूरत क्यों है?

ऐसा क्यों होता है कि सरकार कोई भी बड़ा फैसला करती है या प्रधानमंत्री कोई बड़ी घोषणा करते हैं तो उसके बाद सफाइयों का सिलसिला शुरू हो जाता है? क्या घोषणा करने से पहले सारे पहलुओं पर विचार नहीं किया जाता है? इसी कई मिसालें पिछले 15 दिन में देखने को मिली। सबसे ताजा मिसाल पांच मार्च को रात नौ बजे, नौ मिनट तक सारी लाइट्स बंद करने और दीया जलाने की प्रधानमंत्री की घोषणा है। इस घोषणा के बाद खबर आई कि पावर ग्रिड्स में चिंता पैदा हो गई है कि अचानक सारी लाइटें बंद होंगी तो बिजली बचेगी, उससे ग्रिड्स फेल हो सकते हैं। बाद में इस पर कई किस्म की सफाई आई। अंत में कहा गया कि लोग घर के बाकी बिजली के उपकरण चालू रखें। इससे ठीक पहले सरकार ने जम्मू कश्मीर में नौकरियों को लेकर एक बड़ा आदेश दिया। स्थानीय नागरिकता की परिभाषा बदलते हुए कुछ नौकरियों में बाहरी लोगों की भरती का ऐलान हुआ पर दो दिन के बाद ही सरकार को यह फैसला वापस लेना पड़ा और सारी नौकरियों स्थानीय लोगों को लिए आरक्षित रखने की नीति को बहाल करना पड़ा। उससे भी पहले लॉकडाउन की घोषणा होने के बाद से लगातार सरकार… Continue reading हर घोषणा पर सफाई की जरूरत क्यों है?

जो हो रहा, सब पहले हो चुका है

देश में इस समय एक अजीब सी स्थिति है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोरोन वायरस से लड़ने के लिए लागू लॉकडाउन के बीच देश के लोगों की सामूहिकता का प्रदर्शन करने के लिए कुछ-कुछ ‘टास्क’ दे रहे हैं। लोग उसे कर भी रहे हैं। इसे लेकर खूब बहस भी हो रही है। एक समूह ऐसा है, जो ताली और थाली बजाने से लेकर लाइट बंद करके दीया जलाने के विचार को बिल्कुल मौलिक, अनोखा और वैज्ञानिक-ज्योतिषीय गणना के आधार पर देश के हित में बता रहा है तो दूसरी वर्ग इस पर सवाल उठा कर इसे तमाशा बता रहा है। जैसे ही विरोधी लोग इसे तमाशा बताते हैं वैसे ही समर्थक कहने लगते हैं कि यह तो पहले भी हुआ है। सवाल है कि जब पहले हुआ है तो अनोखा और मौलिक कैसे हुआ? जैसे बताया जा रहा है कि 1971 की लड़ाई के दौरान उससे पहले भी ऐसा होता था कि सरकार के आदेश से सायरन बजते थे और लोग घरों की लाइट्स बंद कर देते थे। ऐसा भी हुआ है कि एक प्रधानमंत्री की अपील पर देश के लोगों ने एक समय खाना बंद कर दिया था। चुनावों के बाद थाली बजा कर प्रचार तो सबने देखा हुआ है।… Continue reading जो हो रहा, सब पहले हो चुका है

लॉकडाउन पर अमल की समस्या

कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिए पूरे देश में लागू लॉकडाउन के 12 दिन हो गए हैं। 24 मार्च की आधी रात से यानी 25 मार्च से पूरे देश में लॉकडाउन है। पर उससे पहले ही लोगों की आवाजाही काफी कम हो गई थी और कई राज्यों ने एक दिन पहले ही सब कुछ बंद करने का ऐलान कर दिया था। उससे पहले 22 मार्च को एक दिन का जनता कर्फ्यू था। इस लिहाज से कह सकते हैं कि 21 मार्च की आधी रात से ही देश में लगभग सारी चीजें ठप्प हैं। अब इसका आकलन किया जाना है कि यह बंदी कितनी सफल रही है यानी इससे संक्रमण रोकने में कितनी मदद मिली है। उस आकलन से पहले ऐसा लग रहा है कि लॉकडाउन पर अमल कराना एक बड़ी समस्या के रूप में सामने आया है। इससे पहले भी भारत में किसी भी फैसले पर अमल कराना बहुत आसान नहीं रहा है। चाहे फैसला अच्छा हो या बुरा उस पर अमल हमेशा बुरे तरीके से ही हुआ। जैसे देश में सर्व शिक्षा अभियान शुरू हुआ और मिड डे मील की सुविधा शुरू हुई तो उससे देश में शिक्षा का स्तर, गुणवत्ता आदि बढ़ने की बजाय पढ़े-लिखे निरक्षरों की… Continue reading लॉकडाउन पर अमल की समस्या

राज्यों में कामकाज शुरू करने की तैयारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुख्यमंत्रियों की वीडियो कांफ्रेंसिंग के बाद से कई राज्यों की सरकार लॉकडाउन के बाद कामकाज शुरू करने की तैयारी में लग गई है। राजस्थान सरकार ने एक टास्क फोर्स का गठन किया है, जो इस बात पर विचार कर रही है कि किस तरह से चरणबद्ध तरीके से लॉकडाउन को खत्म किया जाए और प्राथमिकता के आधार पर कौन से काम शुरू कराए जाएं। अगले कुछ दिन में इस टास्क फोर्स की सलाह के आधार पर सरकार सीमित कामकाज शुरू कर देगी। इसी तरह महाराष्ट्र सरकार भी लॉकडाउन के बाद यानी 14 अप्रैल के बाद कामकाज शुरू कराने वाली है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा है कि लॉकडाउन के असर से अगले कुछ दिन में संक्रमण कम हो जाएगा और इसलिए सरकार कामकाज शुरू कराने की तैयारी कर रही है। असल में महाराष्ट्र ढेर सारी आर्थिक गतिविधियों का केंद्र है। इसलिए वहा ज्यादा समय के लॉकडाउन से बड़ा आर्थिक नुकसान होगा और बड़ी संख्या में लोगों की नौकरी भी जाएगी। उधर कर्नाटक सरकार ने भी कहा है कि वह 14 अप्रैल के बाद कामकाज शुरू करा सकती है। हालांकि ये राज्य सरकारें चरणबद्ध तरीके से लॉकडाउन को खत्म करने के उपायों को… Continue reading राज्यों में कामकाज शुरू करने की तैयारी

15 अप्रैल को खुलेगा लॉकडाउन: योगी

लखनऊ। कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए पूरे देश में लागू 21 दिन के लॉकडाउन के 15 अप्रैल से खत्म होने को लेकर चल रही अटकलों के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को कहा कि लॉकडाउन 15 अप्रैल को खुल जाएगा। उन्होंने प्रदेश के सभी सांसदों और मंत्रियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान यह बात कही और लॉकडाउन खुलने के बाद के हालात को लेकर उनसे सुझाव भी मांगे। उन्होंने कहा- 15 अप्रैल से बंद समाप्त होगा तो दो काम करने होंगे। जब 15 अप्रैल को हम बंद खोलेंगे तो जमावड़ा न होने पाए, इसमें आपकी सहभागिता और सहयोग चाहिए होगा। उन्होंने कहा- क्योंकि 15 अप्रैल को हम जैसे ही बंद खोलेंगे और एकाएक भीड़ जुट जाएगी तो सारी मेहनत पर पानी फिर जाएगा। मैं चाहूंगा कि इसके लिए हम लोग एक व्यवस्था बनाएं। मैं इसके लिए आप लोगों से सुझाव भी चाहूंगा। आप अपना सुझाव लिख कर भेजें कि क्या होना चाहिए।वीडियो कांफ्रेंसिंग में शामिल हुए केंद्रीय कौशल विकास व उद्यमिता मंत्री महेंद्र नाथ पांडे ने बताया- हमने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बात की और उन्होंने हमें राज्य सरकार द्वारा किए गए कामों और उठाए गए कदमों के बारे में… Continue reading 15 अप्रैल को खुलेगा लॉकडाउन: योगी

दूसरी बीमारियों का क्या होगा?

पूरे देश में लागू लॉकडाउन से कोरोना वायरस के संक्रमण पर कितना असर होगा है इसका आकलन अगले कुछ हफ्तों में होगा। भारत में लॉकडाउन 25 मार्च को शुरू हुआ है और पहले छह दिन के आधार पर नहीं कहा जा सकता है कि यह सफल हो रहा है या नहीं। लॉकडाउन तीन हफ्ते का है और अगले दो हफ्ते में ही तस्वीर साफ होगी कि संक्रमण को रोकने या इससे लड़ाई में यह उपाय कितना कारगर हुआ। पर यह जरूर तय लग रहा है कि अगर इसी तरह लॉकडाउन चलता रहा तो दूसरी और ज्यादा बड़ी समस्या पैदा हो सकती हैं। एक समस्या तो अर्थव्यवस्था की है। वह पूरी तरह से आईसीयू में चली जाएगी। भारत पहले से आर्थिक मंदी की चपेट में था और अब इस लॉकडाउन के बाद उसकी दशा और बुरी होने वाली है। देश की अर्थव्यवस्था पर इसका क्या असर होगा, इसे लेकर कई तरह के आकलन हो रहे हैं और आर्थिकी के जानकार अपनी राय दे रहे हैं। पर आर्थिकी से अलग लॉकडाउन का बड़ा असर होना तय है। सरकार और उसके साथ साथ आम लोग भी उम्मीद कर रही है कि पूरे देश को बंद कर देने, लोगों को उनके घरों में रख… Continue reading दूसरी बीमारियों का क्या होगा?

सभी तरफ बढ़ रहे संक्रमित

नई दिल्ली। कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिए पूरे देश में लागू लॉकडाउन के छठे दिन सोमवार को इस वायरस से संक्रमण के 124 नए मामले सामने आए, जिसके बाद संक्रमितों की संख्या बढ़ कर 1306 हो गई। सोमवार को छह संक्रमितों की मौत हो गई, जिससे इस संक्रमण से मरने वालों की संख्या बढ़ कर 37 हो गई। सोमवार को केरल में सबसे ज्यादा 32 मामले सामने आए। वहां संक्रमितों की संख्या बढ़ कर 234 हो गई। महाराष्ट्र में सोमवार को दो संक्रमितों की मौत हुई। पुणे में 52 साल के एक व्यक्ति की और मुंबई में 80 साल के बुजुर्ग की जान गई। राज्य में अब तक 10 मौतें हो चुकी हैं। गुजरात के भावनगर में 45 साल की एक महिला की मौत हो गई। उसके कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि सोमवार को हुई। वहां अब तक छह लोगों मौत इस वायरस से हो चुकी है। मध्य प्रदेश के इंदौर में 41 साल के एक मरीज ने दम तोड़ा। राज्य में अब तक इस वायरस से चार लोगों की मौत हुई है। इनमें दो इंदौर और दो उज्जैन के रहने वाले थे। पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में रहने वाली 54 साल की एक महिला की मौत… Continue reading सभी तरफ बढ़ रहे संक्रमित

लॉकडाउन बढ़ाने की योजना नहीं

सरकार ने सोमवार को कहा कि पिछले हफ्ते मंगलवार को मध्यरात्रि से प्रभावी हुए 21 दिन के लॉकडाउन की अवधि बढ़ाने की उसकी कोई योजना नहीं है।

लाकडाउन बाद की भगदड़ के लिए कौन जिम्मेदार?

देश भर में 21 दिन का लाकडाउन लागू होने के तीसरे दिन ही दिल्ली में अफरा तफरी मच गई। एक तरफ ऐसी अफवाहों का बाज़ार गर्म था कि लाकडाउन अवधि आगे भी बढ़ेगी तो दूसरी तरफ दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल उन लाखों मजदूरों के खाने-पीने का इंतजाम करने में पूरी तह विफल साबित हो रहे थे। पहले दिन तो उन्होंने सिर्फ 20 हजार दिहाड़ी मजदूरों के लिए खाने की व्यवस्था की थी जबकि जरूरत कम से कम चार लाख लोगों के लिए भोजन की थी। यह अहसास उन्हें दुसरे दिन हुआ तो उन्होंने 2 लाख लोगों के भोजन की व्यवस्था करने का एलान किया लेकिन तीसरे दिन उस मे भी विफल हो गए। नतीजा यह निकला कि यूपी, बिहार, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान से आ कर दिल्ली में काम करने वाले लोगों में बेचेनी बढ़ गई। ख़ास कर यूपी –बिहार के मजदूरों का दिल्ली में बिना काम के दिल्ली में रहना मुश्किल हो गया। इधर व्यवस्था में नाकाम आम आदमी पार्टी के विधायकों और कार्यकर्ताओं ने यह कर कर उन का होंसला तोड़ा कि लाकआउट तो 21 दिन से भी ज्यादा चलेगा , यह सच भी हो, तो भी उन्हें उन के रहने खाने की व्यवस्था करनी चाहिए थी ,… Continue reading लाकडाउन बाद की भगदड़ के लिए कौन जिम्मेदार?

भारत में लॉकडाउन है सिर्फ जुगाड़!

वह जुगाड़, जिसमें वायरस के साथ घर बैठ कर मौत का इंतजार है। बिना टेस्ट, बिना मेडिकल तैयारी के 21 दिनका ‘भारत बंद’ घर में वायरस को बैठा कर है। भारत में वायरस का पहला केस वुहान से 31 जनवरी को केरल में आया था। तब से मध्य मार्च तक पूरे भारत में वायरस प्रदेश-दर-प्रदेश पसरा और अचानक एक दिन जब ‘भारत बंद’ का फैसला हुआ तो वह युद्ध मैदान में वायरस से लड़ने के लिए मेडिकल फोर्स, हथियारों, टेस्ट-अस्पतालों से धावा बोल हमले का बिगुल बजा कर नहीं था बल्कि इस जुगाड़सोच में है किघरों में बंद होने से वायरस मर जाएगा। जुगाड़ कामयाब हुआ तो वाह और नहीं तो श्मशान घाट पर बैठ कर लोग सोचेंगे कि इससे ज्यादा भला क्या हो सकता था! मौत नहीं टाल सकते! हां, यही हैं आने वाले वक्त में कोरोना से भारत के लड़ने की तस्वीर!पूरा देश मुगालते में है कि मोदीजी के साहस से, मोदीजी की सख्ती से भारत बच जाएगा। वायरस को गर्मी खा जाएगी। घर में बैठ कर रामायण, महाभारत देखेंगे, नरेंद्र मोदी का सत्संग सुनेंगेऔर हाथ साफ करते रहेंगे तो 21 दिनों में भारत के लोगों के शरीर का इम्यून सिस्टम वायरस को घोल कर नाली में बहा… Continue reading भारत में लॉकडाउन है सिर्फ जुगाड़!

प्रमोद की मां का देहांत और तालाबंदी

एक समय था जब हमारी पूरी जिंदगी ही कहावतों व मुहावरों से भरी हुई थी या कहा जाए कि जिंदगी उन्हीं के सहारे चलती थी। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे देश में तालाबंदी लागू करने का ऐलान किया तो एक पुरानी कहावत याद आ गई कि ‘जाके पांव न फटी बिवाई वो क्या जाने पीर परायी’। आज कल की पीढ़ी को तो शायद बिवाई के बारे में भी नहीं पता होगा। जब हम लोग छोटे थे व अक्सर चप्पल पहन कर घूमते थे तो जाड़ों के मौसम व धूल के कारण हमारे पैरों के तलवे के चारो ओर की खाल फट जाती थी। काफी दर्द देती थी। इसे बिवाई कहते थे। अब कि यह समस्या कम हो गई अथवा लोगों ने चप्पलों की जगह जूते पहन कर घूमना शुरु कर दिया है। यह कहावत आज भी कई बार खरी उतरती है जिस पर बीतती है। इस दिनों सबका घर से आना जाना एकदम बंद सा है। हुआ यह कि घर के पुराने सेवक प्रमोद के घर से खबर आयी कि उसकी मां का देहांत हो गया है। वह दशकों से परिवार के सदस्य की तरह हमारे साथ ही रह रहा था। वह उत्तराखंड के टिहरी गड़वाल का रहने वाला है।… Continue reading प्रमोद की मां का देहांत और तालाबंदी

लॉकडाउन फेल हुआ तो कयामत आएगी!

कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिए लागू 21 दिन के लॉकडाउन का हस्र क्या तीन साल पहले हुई नोटबंदी की तरह होगा? यह कल्पना बहुत भयावह है। क्योंकि नोटबंदी फेल हुई थी तो उससे आर्थिक गतिविधियों पर असर हुआ था और काले धन से छिड़ी लड़ाई फेल हुई थी। पर अगर लॉकडाउन फेल हुआ तो यह लाखों लोगों की जान लेने वाला होगा। यह सही है कि वायरस के संक्रमण को रोकने, इसे खत्म करने या इसके मरीजों को बचाने के लिए लॉकडाउन इकलौता समाधान नहीं है पर यह भी हकीकत है कि इस समय भारत की एकमात्र उम्मीद यहीं है। क्योंकि भारत व्यापक संक्रमण से मुकाबले के लिए तैयार नहीं है। कुल एक हजार मरीज और 26 मौतों के बीच तो पूरे देश में अफरातफरी मची है। अगर मरीजों की संख्या हजारों-लाखों में पहुंची और मरने वालों की संख्या सैकड़ों में तब क्या होगा, इसकी कल्पना ही  परेशान कर देने वाली है। दुनिया के जिन देशों में लॉकडाउन कारगर नहीं हुआ या संक्रमण फैल गया, उनके हालात देख कर लग रहा है कि भारत में बचाव का एकमात्र उपाय यह है कि लॉकडाउन सफल हो। इसे एक मिसाल से समझा जा सकता है। दुनिया की सबसे बेहतरीन स्वास्थ्य… Continue reading लॉकडाउन फेल हुआ तो कयामत आएगी!

मेडिकल पैकेज की घोषणा कब होगी?

इस समय सबसे ज्यादा जरूरी मेडिकल सेवाओं के लिए पैकेज की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले मंगलवार को जब 21 दिन के लॉकडाउन का ऐलान किया तो उन्होंने बताया कि सरकार ने चिकित्सा उपकरणों और मेडिकल सेवा से जुड़े दूसरे मद में 15 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। पर संकट की जैसी तीव्रता है, जितना बड़ा इसका दायरा है और जैसा खतरा दिख रहा है उसके हिसाब से 15 हजार करोड़ रुपए की रकम कुछ नहीं है। भारत की स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत बहुत भयावह है। राज्यों से खबरें आ रही हैं कि डॉक्टर, नर्सें, कंपाउंडर और दूसरे स्वास्थ्यकर्मी कोरोना के मरीजों का इलाज नहीं कर रहे हैं क्योंकि उनके पास पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंट यानी पीपीई नहीं हैं। यहां तक कि अच्छी क्वालिटी के मास्क भी नहीं हैं। डर है कि अगर ऐसी ही स्थिति रही तो हजारों डॉक्टर व स्वास्थ्यकर्मी खुद ही संक्रमित हो जाएंगे। इसलिए तत्काल भारत को बड़ी संख्या में पीपीई, मास्क आदि की व्यवस्था करनी है। इसके बाद जरूरत आती है वेंटिलेटर और आईसीयू के उपकरणों की। अस्पतालों में सकी भारी कमी है। तभी अगर देश भर में अस्थायी अस्पताल बनाए जा रहे हैं तो वहां के लिए उपकरण कहां से आएंगे? सो,… Continue reading मेडिकल पैकेज की घोषणा कब होगी?

अभूतपूर्व संकट का आईना

दुनिया अभूतपूर्व आर्थिक संकट में है। वास्तविक अर्थव्यवस्था और वित्तीय पूंजी- दोनों मुश्किल में हैं। शेयर बाजारों में भारी गिरावट आई है। इससे फैली घबराहट के बीच निवेशक फिर अपना भरोसा सोना में जता रहे हैं। यह कोई नई बात नहीं है। दरअसल, सोने में निवेशकों का हमेशा भरोसा रहता है। संकट के समय यह और गहरा जाता है। नतीजतन, कोरोना महामारी के बीच इस समय सोने की मांग में भारी उछाल देखने को मिली है। थोक व्यापारी और खुदरा ग्राहक दोनों ही सोना खरीदने की होड़ में लगे हैं। मार्च में कमोडिटी बाजारों में सोने के दाम सात साल में अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गए थे। ऐसा इसलिए हुआ कि व्यापारियों ने कोविड-19 और उसके हानिकारक आर्थिक असर से बचने के लिए सोने की शरण ली। सोने के दाम इस वजह से भी ऊपर गए हैं, क्योंकि निवेशक बढ़ती हुई महंगाई दर से भी बचने की कोशिश कर रहे हैं। कई केंद्रीय बैंकों ने वायरस के असर का मुकाबला करने के लिए वित्तीय सिस्टम में भारी मात्रा में पैसा डाला है। इससे मुद्रास्फीति में भारी इजाफे की आशंका जताई जा रही है। गौरतलब है कि लंदन के सोना-चांदी के बाजार में सोने के दाम पहले ही ऊपर… Continue reading अभूतपूर्व संकट का आईना

राज्यों के लिए पैकेज की जरूरत

कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच केंद्र सरकार ने एक लाख 70 हजार करोड़ रुपए के राहत पैकेज की घोषणा की। इसका नाम प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना रखा गया। हालांकि इस पैकेज को लेकर भी कई तरह के सवाल उठ रहे हैं और आर्थिक जानकार मान रहे हैं यह असल में एक लाख करोड़ रुपए का पैकेज है। इसमें पहले से चल रही योजनाओं जैसे मरनेगा या किसान सम्मान निधि का भी पैसा जोड़ कर इसे एक लाख 70 हजार करोड़ रुपए कर दिया गया है। तभी ज्यादातर जानकार इस पैकेज को और बढ़ा करने की मांग कर रहे हैं। इस पैकेज को बढ़ाने के साथ ही अभी तत्काल राज्यों को आर्थिक पैकेज देने की जरूरत है। जिस तरह प्राकृतिक आपदा के समय केंद्र सरकार की ओर से राज्यों को पैकेज दिए जाते हैं उस तरह का पैकेज तत्काल दिया जाना चाहिए। इसकी वजह ये है कि राज्यों की हालत बहुत खराब है। उनकी स्वास्थ्य सुविधाओं की हालत तो बहुत खराब है साथ ही लॉकडाउन की वजह से जो आर्थिक संकट आ रहा है ज्यादातर राज्य उसका मुकाबला करने में सक्षम नहीं हैं। राज्यों ने अपने यहां आर्थिक राहत के पैकेज की घोषणा की है पर सबको पता है… Continue reading राज्यों के लिए पैकेज की जरूरत

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