कोरोना के इस काल में हम क्या करें?

हमारे केंद्र और राज्यों की सरकारें कोरोना से लड़ने में कसर नहीं छोड़ रही हैं लेकिन हम एक अरब 38 करोड़ लोग घरों में बैठे-बैठे क्या कर रहे हैं ? यदि हम डाक्टरों, नर्सों, पुलिसवालों, ड्राइवरों, भोजन बनाने और बांटनेवालों को छोड़ दें तो बाकी करोड़ों लोग क्या कर रहे हैं ?वे उदासी के समुद्र में डूब रहे हैं। उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि वे अपना दिन कैसे काटें ? नेता लोग उन्हें ताली और थाली बजाने और दीया जलाने की राह दिखा रहे हैं ? लेकिन यह नौटंकी तो सिर्फ 9 मिनिट की है। बाकी 9 दिन वे क्या करेंगे ?मेरे कुछ सुझाव। पहला, उदासी भगाइए। डरिए मत। कोरोना से मरनेवालों की संख्या भारत में पिछले तीन महिने में अभी तक सौ भी नहीं हुई है जबकि विभिन्न रोगों से रोजाना मरनेवालों की संख्या 22 हजार से 25 हजार तक होती है। दूसरा, शारीरिक दूरी, नाक-पट्टी और बार-बार हाथ धोना आदि का ध्यान रखते रहिए लेकिन एक नया प्रयोग भी कीजिए। अपने आप को ढील दे दीजिए। हर काम में देरी लगाइए। आप दिन में जितने काम जितने समय में करते हैं, उन्हें दुगुने या चौगुने समय में कीजिए। जैसे आप रोटी का एक ग्रास दो… Continue reading कोरोना के इस काल में हम क्या करें?

लॉकडाउन पर अमल की समस्या

कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिए पूरे देश में लागू लॉकडाउन के 12 दिन हो गए हैं। 24 मार्च की आधी रात से यानी 25 मार्च से पूरे देश में लॉकडाउन है। पर उससे पहले ही लोगों की आवाजाही काफी कम हो गई थी और कई राज्यों ने एक दिन पहले ही सब कुछ बंद करने का ऐलान कर दिया था। उससे पहले 22 मार्च को एक दिन का जनता कर्फ्यू था। इस लिहाज से कह सकते हैं कि 21 मार्च की आधी रात से ही देश में लगभग सारी चीजें ठप्प हैं। अब इसका आकलन किया जाना है कि यह बंदी कितनी सफल रही है यानी इससे संक्रमण रोकने में कितनी मदद मिली है। उस आकलन से पहले ऐसा लग रहा है कि लॉकडाउन पर अमल कराना एक बड़ी समस्या के रूप में सामने आया है। इससे पहले भी भारत में किसी भी फैसले पर अमल कराना बहुत आसान नहीं रहा है। चाहे फैसला अच्छा हो या बुरा उस पर अमल हमेशा बुरे तरीके से ही हुआ। जैसे देश में सर्व शिक्षा अभियान शुरू हुआ और मिड डे मील की सुविधा शुरू हुई तो उससे देश में शिक्षा का स्तर, गुणवत्ता आदि बढ़ने की बजाय पढ़े-लिखे निरक्षरों की… Continue reading लॉकडाउन पर अमल की समस्या

राज्यों में कामकाज शुरू करने की तैयारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुख्यमंत्रियों की वीडियो कांफ्रेंसिंग के बाद से कई राज्यों की सरकार लॉकडाउन के बाद कामकाज शुरू करने की तैयारी में लग गई है। राजस्थान सरकार ने एक टास्क फोर्स का गठन किया है, जो इस बात पर विचार कर रही है कि किस तरह से चरणबद्ध तरीके से लॉकडाउन को खत्म किया जाए और प्राथमिकता के आधार पर कौन से काम शुरू कराए जाएं। अगले कुछ दिन में इस टास्क फोर्स की सलाह के आधार पर सरकार सीमित कामकाज शुरू कर देगी। इसी तरह महाराष्ट्र सरकार भी लॉकडाउन के बाद यानी 14 अप्रैल के बाद कामकाज शुरू कराने वाली है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा है कि लॉकडाउन के असर से अगले कुछ दिन में संक्रमण कम हो जाएगा और इसलिए सरकार कामकाज शुरू कराने की तैयारी कर रही है। असल में महाराष्ट्र ढेर सारी आर्थिक गतिविधियों का केंद्र है। इसलिए वहा ज्यादा समय के लॉकडाउन से बड़ा आर्थिक नुकसान होगा और बड़ी संख्या में लोगों की नौकरी भी जाएगी। उधर कर्नाटक सरकार ने भी कहा है कि वह 14 अप्रैल के बाद कामकाज शुरू करा सकती है। हालांकि ये राज्य सरकारें चरणबद्ध तरीके से लॉकडाउन को खत्म करने के उपायों को… Continue reading राज्यों में कामकाज शुरू करने की तैयारी

15 अप्रैल को खुलेगा लॉकडाउन: योगी

लखनऊ। कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए पूरे देश में लागू 21 दिन के लॉकडाउन के 15 अप्रैल से खत्म होने को लेकर चल रही अटकलों के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को कहा कि लॉकडाउन 15 अप्रैल को खुल जाएगा। उन्होंने प्रदेश के सभी सांसदों और मंत्रियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान यह बात कही और लॉकडाउन खुलने के बाद के हालात को लेकर उनसे सुझाव भी मांगे। उन्होंने कहा- 15 अप्रैल से बंद समाप्त होगा तो दो काम करने होंगे। जब 15 अप्रैल को हम बंद खोलेंगे तो जमावड़ा न होने पाए, इसमें आपकी सहभागिता और सहयोग चाहिए होगा। उन्होंने कहा- क्योंकि 15 अप्रैल को हम जैसे ही बंद खोलेंगे और एकाएक भीड़ जुट जाएगी तो सारी मेहनत पर पानी फिर जाएगा। मैं चाहूंगा कि इसके लिए हम लोग एक व्यवस्था बनाएं। मैं इसके लिए आप लोगों से सुझाव भी चाहूंगा। आप अपना सुझाव लिख कर भेजें कि क्या होना चाहिए।वीडियो कांफ्रेंसिंग में शामिल हुए केंद्रीय कौशल विकास व उद्यमिता मंत्री महेंद्र नाथ पांडे ने बताया- हमने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बात की और उन्होंने हमें राज्य सरकार द्वारा किए गए कामों और उठाए गए कदमों के बारे में… Continue reading 15 अप्रैल को खुलेगा लॉकडाउन: योगी

भारत का दावा कितना सही है?

विदेश मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय और इंडियन कौंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च, आईसीएमआर की मंगलवार की साझा प्रेस कांफ्रेंस में कई अहम बातें कही गईं। भारत में कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने की स्पीड कम कर देने के दावे के साथ-साथ यह भी कहा गया कि भारत और दुनिया के दूसरे देशों की तुलना नहीं की जा सकती है। खासतौर से अमेरिका से तुलना से अधिकारियों ने इनकार कर दिया। यह सही है कि किसी भी देश की तुलना दूसरे देश से नहीं की जा सकती है। क्योंकि अलग अलग देशों में वायरस अलग-अलग तरीके से फैला है। हर देश की सामाजिक संस्कृति अलग है, लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अलग है, देश का जलवायु अलग है और इसके संक्रमण को रोकने के तरीके भी अलग हैं। इसलिए तुलना करना ठीक नहीं है। पर सवाल है कि जब दूसरे देशों से तुलना नहीं हो सकती है तो फिर उनके मुकाबले अपने यहां इस वायरस के कम संक्रामक होने, कम घातक होने या कम फैलने का दावा कैसे किया जा सकता है? भारत की ओर से दावा किया गया कि पिछले एक हफ्ते में भारत में इस वायरस का संक्रमण तेजी से फैला है इसके बावजूद दुनिया के दूसरे देशों के मुकाबले भारत में… Continue reading भारत का दावा कितना सही है?

कम्युनिटी संक्रमण शुरू नहीं

नई दिल्ली। भारत सरकार ने देश में कोरोना वायरस का कम्युनिटी संक्रमण शुरू होने की खबरों का खंडन किया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि देश में कोरोना वायरस का संक्रमण अभी कम्युनिटी लेवल पर नहीं पहुंचा है, यह लोकल लेवल पर ही फैल हो रहा है। मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने लॉकडाउन को सफल बनाने की अपील करते हुए कहा कि समाज के हर एक व्यक्ति को सहयोग करना होगा, वरना अब तक संक्रमण को रोकने के जो भी नतीजे सामने आए हैं, वह सब बेकार हो जाएंगे। उन्होने देश में हो रही जांच के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि कोरोना की जांच के लिए 115 सरकारी और 47 निजी लैब हैं। नेशनल इंस्टीट्यूट आफ मेंटल हेल्थ के की ओर से डॉक्टरों की ट्रेनिंग करवाई जा रही है। इंडियन कौंसिल मेडिकल रिसर्च, आईसीएमआर ने बताया- अब तक 38,442 टेस्ट किए गए हैं। इनमें से 3,501 टेस्ट रविवार को किए गए थे। आईसीएमआर ने कहा- हम अभी भी अपनी परीक्षण क्षमता के 30 फीसदी से कम हैं। पिछले तीन दिनों में 1,334 परीक्षण निजी लैब्स में किए गए हैं। उन्होंने देश के लोगों से कहा कि सौ फीसदी फीसदी अलर्ट रहें और देश को… Continue reading कम्युनिटी संक्रमण शुरू नहीं

लाकडाउन बाद की भगदड़ के लिए कौन जिम्मेदार?

देश भर में 21 दिन का लाकडाउन लागू होने के तीसरे दिन ही दिल्ली में अफरा तफरी मच गई। एक तरफ ऐसी अफवाहों का बाज़ार गर्म था कि लाकडाउन अवधि आगे भी बढ़ेगी तो दूसरी तरफ दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल उन लाखों मजदूरों के खाने-पीने का इंतजाम करने में पूरी तह विफल साबित हो रहे थे। पहले दिन तो उन्होंने सिर्फ 20 हजार दिहाड़ी मजदूरों के लिए खाने की व्यवस्था की थी जबकि जरूरत कम से कम चार लाख लोगों के लिए भोजन की थी। यह अहसास उन्हें दुसरे दिन हुआ तो उन्होंने 2 लाख लोगों के भोजन की व्यवस्था करने का एलान किया लेकिन तीसरे दिन उस मे भी विफल हो गए। नतीजा यह निकला कि यूपी, बिहार, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान से आ कर दिल्ली में काम करने वाले लोगों में बेचेनी बढ़ गई। ख़ास कर यूपी –बिहार के मजदूरों का दिल्ली में बिना काम के दिल्ली में रहना मुश्किल हो गया। इधर व्यवस्था में नाकाम आम आदमी पार्टी के विधायकों और कार्यकर्ताओं ने यह कर कर उन का होंसला तोड़ा कि लाकआउट तो 21 दिन से भी ज्यादा चलेगा , यह सच भी हो, तो भी उन्हें उन के रहने खाने की व्यवस्था करनी चाहिए थी ,… Continue reading लाकडाउन बाद की भगदड़ के लिए कौन जिम्मेदार?

भारत में लॉकडाउन है सिर्फ जुगाड़!

वह जुगाड़, जिसमें वायरस के साथ घर बैठ कर मौत का इंतजार है। बिना टेस्ट, बिना मेडिकल तैयारी के 21 दिनका ‘भारत बंद’ घर में वायरस को बैठा कर है। भारत में वायरस का पहला केस वुहान से 31 जनवरी को केरल में आया था। तब से मध्य मार्च तक पूरे भारत में वायरस प्रदेश-दर-प्रदेश पसरा और अचानक एक दिन जब ‘भारत बंद’ का फैसला हुआ तो वह युद्ध मैदान में वायरस से लड़ने के लिए मेडिकल फोर्स, हथियारों, टेस्ट-अस्पतालों से धावा बोल हमले का बिगुल बजा कर नहीं था बल्कि इस जुगाड़सोच में है किघरों में बंद होने से वायरस मर जाएगा। जुगाड़ कामयाब हुआ तो वाह और नहीं तो श्मशान घाट पर बैठ कर लोग सोचेंगे कि इससे ज्यादा भला क्या हो सकता था! मौत नहीं टाल सकते! हां, यही हैं आने वाले वक्त में कोरोना से भारत के लड़ने की तस्वीर!पूरा देश मुगालते में है कि मोदीजी के साहस से, मोदीजी की सख्ती से भारत बच जाएगा। वायरस को गर्मी खा जाएगी। घर में बैठ कर रामायण, महाभारत देखेंगे, नरेंद्र मोदी का सत्संग सुनेंगेऔर हाथ साफ करते रहेंगे तो 21 दिनों में भारत के लोगों के शरीर का इम्यून सिस्टम वायरस को घोल कर नाली में बहा… Continue reading भारत में लॉकडाउन है सिर्फ जुगाड़!

प्रमोद की मां का देहांत और तालाबंदी

एक समय था जब हमारी पूरी जिंदगी ही कहावतों व मुहावरों से भरी हुई थी या कहा जाए कि जिंदगी उन्हीं के सहारे चलती थी। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे देश में तालाबंदी लागू करने का ऐलान किया तो एक पुरानी कहावत याद आ गई कि ‘जाके पांव न फटी बिवाई वो क्या जाने पीर परायी’। आज कल की पीढ़ी को तो शायद बिवाई के बारे में भी नहीं पता होगा। जब हम लोग छोटे थे व अक्सर चप्पल पहन कर घूमते थे तो जाड़ों के मौसम व धूल के कारण हमारे पैरों के तलवे के चारो ओर की खाल फट जाती थी। काफी दर्द देती थी। इसे बिवाई कहते थे। अब कि यह समस्या कम हो गई अथवा लोगों ने चप्पलों की जगह जूते पहन कर घूमना शुरु कर दिया है। यह कहावत आज भी कई बार खरी उतरती है जिस पर बीतती है। इस दिनों सबका घर से आना जाना एकदम बंद सा है। हुआ यह कि घर के पुराने सेवक प्रमोद के घर से खबर आयी कि उसकी मां का देहांत हो गया है। वह दशकों से परिवार के सदस्य की तरह हमारे साथ ही रह रहा था। वह उत्तराखंड के टिहरी गड़वाल का रहने वाला है।… Continue reading प्रमोद की मां का देहांत और तालाबंदी

लॉकडाउन फेल हुआ तो कयामत आएगी!

कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिए लागू 21 दिन के लॉकडाउन का हस्र क्या तीन साल पहले हुई नोटबंदी की तरह होगा? यह कल्पना बहुत भयावह है। क्योंकि नोटबंदी फेल हुई थी तो उससे आर्थिक गतिविधियों पर असर हुआ था और काले धन से छिड़ी लड़ाई फेल हुई थी। पर अगर लॉकडाउन फेल हुआ तो यह लाखों लोगों की जान लेने वाला होगा। यह सही है कि वायरस के संक्रमण को रोकने, इसे खत्म करने या इसके मरीजों को बचाने के लिए लॉकडाउन इकलौता समाधान नहीं है पर यह भी हकीकत है कि इस समय भारत की एकमात्र उम्मीद यहीं है। क्योंकि भारत व्यापक संक्रमण से मुकाबले के लिए तैयार नहीं है। कुल एक हजार मरीज और 26 मौतों के बीच तो पूरे देश में अफरातफरी मची है। अगर मरीजों की संख्या हजारों-लाखों में पहुंची और मरने वालों की संख्या सैकड़ों में तब क्या होगा, इसकी कल्पना ही  परेशान कर देने वाली है। दुनिया के जिन देशों में लॉकडाउन कारगर नहीं हुआ या संक्रमण फैल गया, उनके हालात देख कर लग रहा है कि भारत में बचाव का एकमात्र उपाय यह है कि लॉकडाउन सफल हो। इसे एक मिसाल से समझा जा सकता है। दुनिया की सबसे बेहतरीन स्वास्थ्य… Continue reading लॉकडाउन फेल हुआ तो कयामत आएगी!

राज्यों के लिए पैकेज की जरूरत

कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच केंद्र सरकार ने एक लाख 70 हजार करोड़ रुपए के राहत पैकेज की घोषणा की। इसका नाम प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना रखा गया। हालांकि इस पैकेज को लेकर भी कई तरह के सवाल उठ रहे हैं और आर्थिक जानकार मान रहे हैं यह असल में एक लाख करोड़ रुपए का पैकेज है। इसमें पहले से चल रही योजनाओं जैसे मरनेगा या किसान सम्मान निधि का भी पैसा जोड़ कर इसे एक लाख 70 हजार करोड़ रुपए कर दिया गया है। तभी ज्यादातर जानकार इस पैकेज को और बढ़ा करने की मांग कर रहे हैं। इस पैकेज को बढ़ाने के साथ ही अभी तत्काल राज्यों को आर्थिक पैकेज देने की जरूरत है। जिस तरह प्राकृतिक आपदा के समय केंद्र सरकार की ओर से राज्यों को पैकेज दिए जाते हैं उस तरह का पैकेज तत्काल दिया जाना चाहिए। इसकी वजह ये है कि राज्यों की हालत बहुत खराब है। उनकी स्वास्थ्य सुविधाओं की हालत तो बहुत खराब है साथ ही लॉकडाउन की वजह से जो आर्थिक संकट आ रहा है ज्यादातर राज्य उसका मुकाबला करने में सक्षम नहीं हैं। राज्यों ने अपने यहां आर्थिक राहत के पैकेज की घोषणा की है पर सबको पता है… Continue reading राज्यों के लिए पैकेज की जरूरत

लॉकडाउन या पुलिस स्टेट!

भारत में आपातकाल नहीं लगा है। न आंतरिक, न बाहरी, न वित्तीय और न मेडिकल आपातकाल है। फिर भी देश एक पुलिस स्टेट में बदल गया दिख रहा है। सड़कों पर सिर्फ पुलिस दिख रही है। लोगों में कोरोना वायरस से ज्यादा पुलिस का खौफ हो गया है। इस बीच तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने यह कह कर खौफ और बढ़ा दिया है कि अगर किसी ने लॉकडाउन का उल्लंघन किया तो पुलिस मौके पर गोली मार सकती है। सोचें, एक मुख्यमंत्री का यह कहना क्या मायने रखता है और ऐसे हालात में लोकतंत्र, नागरिक स्वतंत्रता, बुनियादी अधिकार जैसी चीजों का क्या मतलब रह जाता है? तेलंगाना के मुख्यमंत्री अकेले नहीं हैं, जिन्होंने कोरोना वायरस से लोगों की ‘जान बचाने’ के नाम पर लोगों की जान लेने का संकल्प जाहिर किया है। बेंगलुरू में कई दिन से पुलिस लोगों की पिटाई कर रही है। किसी भी काम से बाहर निकले लोगों पर लाठियां बरसाई जा रही हैं। महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार ने कहा है कि पुलिस को खुली छूट दी गई है कि वह  लोगों को काबू में करे। इसी से मिलती जुलती बात तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री ने कही है। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन का… Continue reading लॉकडाउन या पुलिस स्टेट!

कोरोना पर व्यासजी का कहा ही सही

मैं ब्राह्मणों व ज्योतिष में काफी विश्वास रखता हूं व दोनों को ही काफी पसंद करता हूं। मेरे फोन में करीब दर्जन भर पंडितों व ज्योतिषियों के फोन नंबर हैं। मैं उनसे हर छोटी-सी-छोटी बात पर सलाह लेता रहता हूं। भीलवाड़ा के लोकेश व्यास के संपर्क में लगातार रहता हूं और उनसे खुलकर चर्चा होती है। कुछ साल पहले जब मैं घूमने के लिए राजस्थान गया था व सपरिवार व्यासजी के घर भीलवाड़ा में ठहरा तो वहां लोकेश व्यास मुझे रात का खाना खिलाने सपरिवार ले गए व उन्होंने मेरी वहां के एक बुजुर्ग ज्योतिषी से भी मुलाकात करवाई। यह संयोग ही है कि अपने व्यासजी ब्राह्मण व ज्योतिषी दोनों ही हैं। हालांकि उन्हें कर्मकांड, ज्योतिष आदि में विश्वास नहीं है। ये सारी चीजे उन्होंने हमारी भाभीजी को ही सौंप रखी है और वे खुद उन पर ज्यादा विश्वास नहीं करते हैं। मगर मैं अपने अनुभवों के आधार पर कह सकता हूं कि व्यासजी तो देश के सामाजिक व राजनीतिक तालाब में बैरोमीटर है। वे अक्सर काफी पहले ही किसी दल, नेता या हालात के बारे में बता देते हैं कि उसका क्या हश्र होने वाला है। मेरी गृह मंत्रालय व गृह मंत्रियों में हमेशा काफी रूचि रही है। गृह… Continue reading कोरोना पर व्यासजी का कहा ही सही

अहम हैं लॉकडाउन के 21 दिन

केंद्र सरकार ने 21 दिन के लॉकडाउन का ऐलान किया है। इसके पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने एक संवाद कार्यक्रम में लोगों से कहा कि कोरोना वायरस के संकट से लड़ने का यह सबसे अच्छा और जरूरी उपाय है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह एक जरूरी और अच्छा उपाय है पर इस हकीकत को हमेशा ध्यान में रखना चाहिए कि सिर्फ लॉकडाउन से कोरोना वायरस खत्म नहीं होने वाला है। प्रधानमंत्री ने महाभारत का उद्धरण देते हुए कहा कि महाभारत की लड़ाई 18 दिन में जीती गई थी और कोरोना के खिलाफ युद्ध 21 दिन में जीता जाएगा। एक मिसाल के जरिए युद्ध जीतने की बात कहना और देश के लोगों को भरोसा दिलाना, उनका उत्साह बढ़ाना एक बात है। पर अगर सचमुच सरकार ऐसा मान रही होगी कि 21 दिन के लॉकडाउन से वायरस के खिलाफ युद्ध जीता जाएगा तो बड़ा धोखा हो सकता है। सबसे पहले इस बात को समझने की जरूरत है कि लॉकडाउन से असल में क्या हासिल होगा? लॉकडाउन के जरिए सोशल डिस्टेंसिंग कराना का पहला हासिल तो यह है कि कोरोना वायरस के संक्रमण की स्पीड कम हो जाती है। यह स्पीड कितनी कम होगी, इसका पता पांचवें दिन लगेगा।… Continue reading अहम हैं लॉकडाउन के 21 दिन

कम्युनिटी ट्रांसमिशन की बात गलत

नई दिल्ली। भारत में कोरोना वायरस के स्टेज तीन में पहुंच जाने और इस वायरस का कम्युनिटी ट्रांसमिशन शुरू हो जाने की खबरों को अफवाह बताते हुए केंद्र सरकार ने इसका खंडन किया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि अभी तक भारत में कोरोना संक्रमण के कम्युनिटी ट्रांसमिशन के जरिए फैलने के ठोस प्रमाण नहीं मिले हैं। गौरतलब है कि कोरोना संक्रमित वस्तु या किसी और माध्यम से संक्रमण जब आम लोगों के बीच फैलता है तो उसे कम्युनिटी संक्रमण कहा जाता है। इस बीच केंद्र सरकार ने लॉकडाउन से लोगों को हो रही परेशानियों को देखते हुए दवाओं की होम डिलीवरी को मंजूरी दे दी है। जल्दी ही इसकी अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। गुरुवार को स्वास्थ्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने इस वायरस के संक्रमण की जानकारी देते हुए कहा- सोशल डिस्टेंसिंग जरूरी है। इससे चेन ऑफ ट्रांसमिशन को तोड़ सकते हैं। अभी भी सतर्कता बरतने की जरूरत है। लापरवाही न करें। उन्होंने कहा कि राज्यों और जिलों में लॉकडाउन सौ फीसदी फॉलो किया जाए। सारे लोग नैतिक जिम्मेदारी दिखाते हुए इसमें सहयोग करें। उन्होंने आगे कहा- पॉजिटिव केस में नंबर बढ़ रहे हैं, मौतें भी हो रही हैं। कोरोना संक्रमण की दर में कमी… Continue reading कम्युनिटी ट्रांसमिशन की बात गलत

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