समय से पहले अयोध्या पर फैसला

अयोध्या में राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद की विवादित जमीन का फैसला 14 या 15 नवंबर को आने वाला था। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई 17 नवंबर को रिटायर होने वाले थे। लेकिन उस दिन रविवार था।

सरकार व संघ को क्या पहले से पता था?

केंद्र और उत्तर प्रदेश की सरकार और राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ को क्या पहले से पता था कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला महीने के दूसरे शनिवार को यानी नौ नवंबर को आना है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि सरकार, संघ और भारतीय जनता पार्टी की ओर से फैसले के बाद के हालात से निपटने की तैयारी एक हफ्ते से शुरू हो गई थी।

अगले हफ्ते समीक्षा पर भी फैसला हो जाएगा!

सुप्रीम कोर्ट ने तय समय से पहले अयोध्या मामले पर फैसला सुना दिया। पांचों जजों ने एक राय से इस बारे में फैसला सुनाया है। इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा हैरानी इस बात को लेकर हुई कि अदालत ने एक महीने से कम समय में फैसला लिख लिया और सुना दिया।

कांग्रेस फिर बैकफुट पर पकड़ी गई

ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस पार्टी को सिर्फ भाजपा और केंद्र सरकार ही नहीं पछाड़ रही है। सुप्रीम कोर्ट ने भी उसे पछाड़ दिया है। कांग्रेस पार्टी ने तय किया था कि रविवार को कांग्रेस कार्यसमिति, सीडब्लुसी की बैठक होगी और उसमें तय किया जाएगा

उद्धव ने आडवाणी को याद किया

सुप्रीम कोर्ट ने सुन्नी वक्फ बोर्ड के दावे को खारिज कर के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के पक्ष में सर्वसम्मत फैसला दिया है| पांच सदस्यीय पीठ में चार हिन्दू और एक मुस्लिम जज था| फैसले का आधार पुरातत्व विभाग की वही रिपोर्ट है, जिस के आधार पर हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया था|

हिंदू व मुस्लिमः दोनों जीत गए

अयोध्या के राम मंदिर विवाद पर सर्वोच्च न्यायालय का जो फैसला आया है, उससे मैं बहुत प्रसन्न हूं। पहली बात तो यह कि यह फैसला सर्वसम्मति से आया है और फिर बड़ी बात यह कि देश के हिंदुओं और मुसलमानों के सम्मान की रक्षा करता है।

अयोध्या झांकी, मथुरा-काशी बाकी

अयोध्या आंदोलन के समय भाजपा का नारा होता था- अयोध्या तो झांकी है, मथुरा-काशी बाकी है। सो, संभव है कि अयोध्या के बाद मथुरा और काशी का मुद्दा उठे। ध्यान रहे सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मसले पर सुनवाई के आखिरी चरण में मध्यस्थता का एक और प्रस्ताव आय़ा था,

अयोध्या के बाद आगे क्या?

अयोध्या पर फैसले के साथ ही भाजपा के दो ऐतिहासिक वादे पूरे हो जाएंगे। पहले उसने जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को हटा दिया। इसके बाद भाजपा के नेताओं ने दावा किया कि अब जाकर कश्मीर का भारत में पूरी तरह से विलय हुआ है।

फैसले का कैसे होगा इस्तेमाल?

सोचें, फैसला यदि मंदिर के पक्ष में आता है तो भाजपा, आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद इसका कैसा इस्तेमाल करेंगे, इसकी फिलहाल कल्पना ही की जा सकती है। कहने को सबको संयम बरतने की सलाह दी जा रही है पर सबको पता है कि फैसले के बाद कोई संयम नहीं बरतने वाला है।

अयोध्या बाद के चुनाव!

झारखंड में विधानसभा चुनाव की शुरुआत हो गई है। 30 नवंबर को पहले चरण का मतदान होना है और उसके लिए नामांकन प्रक्रिया चल रही है। इस चुनाव के ऐन बीच में अयोध्या में राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद की भूमि विवाद का अंतिम और निर्णायक फैसला आना है।

अयोध्या का सत्य कयामत तक

मुस्लिम समाज के प्रतिनिधि संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना सैय्यद अरशद मदनी ने एक वाक्य में सबकुछ कह दिया। उनका कहा हिंदू का भी सत्य है और मुसलमान का भी तो भारत राष्ट्र-राज्य, भारतीय समाज-संस्कृति का सत्व भी है।

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