जनता का पैसा और कार्वी कंपनी का खेल

एक बहुत पुरानी कहावत है कि दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंक कर पीता है। इसका सीधा सादा अर्थ है कि एक बार धोखा खाने के बाद इंसान बहुत होशियार व जागरूक हो जाता है।