कश्मीर पर बात से करें परहेज!

क्या‍ हम कश्मीर को कभी समझ सकते हैं? इससे भी बड़ी बात यह कि क्या हम कभी कश्मीर समस्या को हल कर पाएंगे? ये सवाल इसलिए मस्तिष्क में कौंध रहे हैं क्योंकि अब साल खत्म होने को है और कश्मीर में इंटरनेट पर पाबंदी लगे और घाटी के इलाके को देश से कटे डेढ़ सौ दिन होने वाले हैं।

हम शिकार हैं शिकारी नहीं!

जरा पिछले 72 सालों के इतिहास में भारत-पाकिस्तान के रिश्तों पर गौर करें। सोचिए, इन रिश्तों में शिकारी और शिकार की प्रवृत्ति, डीएनए लिए कौन देश है? किसने शिकार करने की फितरत में तीर ताना हुआ और निशाना साधा हुआ है? किसने बार-बार तीर छोड़ कर दूसरे को घायल करना या मारना चाहा?