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Sunday, April 11, 2021
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lalu prashad yadav

चुनाव से नेता बने तेजस्वी

गैर-कांग्रेसवाद या समाजवाद की राजनीति करने वाले नेताओं में संभवतः लालू प्रसाद इकलौते नेता हैं, जिनको अपनी राजनीतिक कमान अगली पीढ़ी को ट्रांसफर करने में सबसे ज्यादा समय लगा है।

लालू, नीतीश, मोदी में फर्क क्या?

बहुत गजब बात है लेकिन भारत राष्ट्र-राज्य का यथार्थ समझना है तो सोचें! हम हिंदुओं के भगवानजी ने कैसे-कैसे को क्या-क्या अवसर दिया और बदले में भारत माता को क्या प्राप्त हुआ

नीतीश क्या फेल हुए?

मैं नहीं मानता और न ही मैं लालू यादव और नरेंद्र मोदी को फेल मानता हूं। बिहार के लोग याकि हम हिंदू जो चाहते रहे हैं और हम हिंदुओं का जो डीएनए है तो उसी अनुसार हमें लालू यादव, नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी का नेतृत्व प्राप्त है।

भारत के सफल नेताओं की त्रासदी

भारत में जैसे नरेंद्र मोदी सफल हैं वैसे ही नीतीश कुमार भी सफल हैं और लालू प्रसाद भी। ज्योति बसु सफल थे तो नवीन पटनायक भी सफल हैं। इनकी सफलता का पैमाना यह है कि इन्होंने लंबे समय तक शासन किया।

विधानसभा तो हर बार त्रिशंकु होती है

तमाम मीडिया समूह और राजनीतिक जानकार ज्ञान दे रहे हैं कि बिहार में इस बार त्रिशंकु विधानसभा बनेगी। लेकिन असल में इसमें कोई नई बात नहीं है। बिहार में हर बार त्रिशंकु विधानसभा ही बनती है। पिछले 30 साल के इतिहास में एक बार 1995 के चुनाव को छोड़ दें कभी किसी को बहुमत नहीं मिला।

चुनाव तो मोदी के चेहरे पर है

बिहार का विधानसभा भारतीय जनता पार्टी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के चेहरे पर लड़ तो रही है लेकिन ऐसा लग रहा है कि पार्टी के नेता इससे अलग भी एक लड़ाई लड़ रहे हैं। एनडीए से अलग भाजपा की अपनी लड़ाई है और वह नीतीश कुमार के चेहरे पर नही है

नड्डा की कमान में पांचवां चुनाव

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा के पार्टी की कमान संभालने के बाद विधानसभा का तीसरा चुनाव हो रहा है। वे इस साल जनवरी में पार्टी अध्यक्ष बने थे। नड्डा ने 20 जनवरी को विधिवत पार्टी अध्यक्ष का कार्यभार संभाला था।

लालू परिवार में विरासत का विवाद खत्म

लालू प्रसाद के परिवार में विरासत का विवाद खत्म हो गया है और उत्तराधिकार का मामला भी तय हो गया है। यह इस बार के चुनाव की खास बात है। पिछले साल लोकसभा चुनाव तक यह विवाद चल रहा था।

तेजस्वी यादव के नवरत्न!

लालू प्रसाद की चलती के दिन में उनके आसपास नेताओं का जमावड़ा लगा रहता था। धीरे धीरे नेताओं की संख्या कम होती गई। लालू प्रसाद के साथ हमेशा साये की तरह रहने वाले भोला यादव अब भी परिवार का हिस्सा हैं और तेजस्वी ने पार्टी की पूरी कमान अपने हाथ में रखने के बावजूद उनको अपने साथ जोड़े रखा।

रांची से राजनीति कर रहे हैं लालू

झारखंड में पिछले साल के विधानसभा चुनाव में सत्ता बदलने का लालू प्रसाद को बड़ा फायदा मिला है। लालू प्रसाद की पार्टी से भले झारखंड में एक ही विधायक जीता पर उनका इकलौता विधायक सरकार में मंत्री है।
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