चार हजार से ज्यादा मौतें, दुनिया में हर तीसरी मौत भारत में

नई दिल्ली। कोरोना वायरस की दूसरी लहर में तेजी से बढ़ती संक्रमितों की संख्या के बीच संक्रमण से होने वाली मौतें, चिंताजनक रफ्तार से बढ़ रही हैं। शनिवार को लगातार दूसरे दिन संक्रमण से मरने वालों की संख्या चार हजार से ऊपर रही। शुक्रवार को 4,191 लोगों की मौत हुई थी और शनिवार को खबर लिखे जाने तक 4,048 लोगों की मौत की सूचना मिली थी। खबर लिखे जाने तक कर्नाटक, छत्तीसगढ़, झारखंड और असम सहित पूर्वोत्तर के कई राज्यों का आंकड़ा अपडेट नहीं हुआ था। इन राज्यों का आंकड़ा अपडेट होने के बाद देर रात तक संक्रमण से मरने वालों की संख्या पांच हजार तक पहुंच सकती है। महाराष्ट्र से लेकर उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, दिल्ली आदि राज्यों में मरने वालों की संख्या में बड़ा इजाफा हुआ है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में शनिवार को लगातार 17वें दिन मरने वालों की संख्या तीन सौ से ऊपर रही। अब पूरी दुनिया में हो रही मौतों में हर तीसरी मौत भारत मे हो रही है और हर दूसरा संक्रमित भारत में मिल रहा है। शनिवार को खबर लिखे जाने तक पूरे देश में तीन लाख 28 हजार 266 नए केसेज आए, जिसके बाद कुल संक्रमितों की संख्या दो करोड़ 22 लाख 21 हजार… Continue reading चार हजार से ज्यादा मौतें, दुनिया में हर तीसरी मौत भारत में

अपने मोदीजी अब गिरधर गमांग!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज किस मनोदशा में होंगे? अपना मानना है गिरधर गमांग की मनोदशा में। सन् 1999 में ओडिसा में आदिवासी गिरधर गमांग मुख्यमंत्री थे। वे भाग्य से सीएम बने लेकिन बुद्धी, समझ में उनका भगवान मालिक! अक्टूबर 1999 में ओडिसा परजबसुपर साइक्लोन की विपदा आई तो उनका उस वक्त इसी उधेडबुन में वक्त गुजरा की करें तो क्या? जैसा राजा वैसे ही उसके चुने हुए अफसर।  तभी साईक्लोन के वक्त जिस किंकर्तव्यमूढता में, बेचारगी में गमांग और उनके अफसर एक दूसरे का मुंह देख दिमाग खंपाते हुए थे।  . मुख्यमंत्री अफसरों को देखते थे और अफसर उनको। मतलब, जी हुजूर साईक्लोन गुजर जाएगा, कुछ ही समय की बात है। आज नरेंद्र मोदी और उनके अफसर एक-दूसरे को देखते-मूढ भांपते क्या दिमाग लगाते होंगे? …हुजूर हाईकोर्ट-सुप्रीम कोर्ट में झाड पड रही है..हेडलाईने बन रही है… तो क्या हो सकंट का प्रबंधन?…बोल दो वायरस की तीसरी वेव की तैयारी कर रहे है..बनवा दो आज हैडिंग तीसरी वेव आएगी…डराओं। अभी भले लाशे यमुना में बहती मिले लेकिन तीसरी वेव में कहीं बंगाल की खाडी-हिंद महासागर में बहती न मिले। इसलिए जजों-संपादकों को कहों-समझाओं कि गमांग सरकार अगले सुपर साइक्लोन की चिंता में है… लोग मर रहे है तो क्या हुआ दूसरे… Continue reading अपने मोदीजी अब गिरधर गमांग!

मोदीजी, बुद्धि उधार लीजिए, मानिए ये सुझाव

वैसे पहले आईटम से लगा होगा कि मैं आज व्यंग्य के मूड में हूं। लेकिन ‘हम’ मानवता के लिए इतनी बड़ी त्रासदी बन चुके है कि बार-बार सोचना होता है कि भारत के प्रधानमंत्री को कैसे गंभीर बनाया जाए? कैसे सवर्ज्ञ होने की उनकी गलतफहमी में जमीनी हकीकत के व्यवहारिक नुस्खे घुसाएं जाएं? तभी फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रार्थना के साथ अनुरोध है कि 140 करोड लोगों को सौ जूते और सौ प्याज खिलाने का पाप बार-बार न करें। मई 2021 से लेकर मई 2022 की समयबद्धता में ये फैसले हो- 1-  पूर्ण लॉकडाउन अभी नहीं लगाएं। किसी भी दबाव में केंद्र सरकार इसका फैसला नहीं करें। फिलहाल राज्य सरकारें जैसे हैंडल कर रही है वैसे करने दें। 2-  इसका अर्थ यह नहीं कि केंद्र सरकार को पूरे देश में सख्त लॉकडाउन नहीं लगाना है। लॉकडाउन लगाना है और वह सितंबर-अक्टूबर-नवंबर के तीन महिनों में सख्ती से लगे। उससे पहले सरकार हर वह संभव कोशिश करें जिससे 200 करोड़ वैक्सीन का स्टॉक-भंडारण बने। हां, इसे बीज मंत्र माने या दो टूक निर्णायक अंतिम लड़ाई कि दो सौ करोड़ टीकों का संग्रहण बना कर, उसके टीकाकरण के लिए कंपाडर, पैरा- मेडिकल-इंफास्ट्रक्चर- सप्लाई चैन की एक-एक चीज की तैयारी पहले की… Continue reading मोदीजी, बुद्धि उधार लीजिए, मानिए ये सुझाव

दूसरी लहर से सबक लें

दुनिया के सभी सभ्य और विकसित देशों ने कोरोना वायरस की पहली लहर से सबक लिया था और दूसरी लहर से निपटने की तैयारी की थी। सभ्य देशों ने इतिहास से भी सबक लिया था और उनको पता था कि दूसरी लहर ज्यादा भयानक होती है। आखिर ठीक एक सौ साल पहले आए स्पेनिश फ्लू की दूसरी लहर ने ही करोड़ों लोगों की जान ली थी। सो, महामारी के इतिहास और पहली लहर की चुनौतियों से सबक लेकर दुनिया के सभ्य और विकसित देशों ने ऐसी तैयारी की थी कि वे दूसरी लहर आसानी से झेल गए। इटली, स्पेन और फ्रांस में पहली लहर के मुकाबले दूसरी लहर में 10 फीसदी भी हाहाकार नहीं मचा। पहली लहर ने उनको अनजाने में पकड़ा था इसलिए वे लाचार थे, लेकिन दूसरी लहर में वह लाचारगी नहीं दिखी। इसके उलट भारत में दूसरी लहर में वही लाचारगी और बेबसी दिख रही है, जो पहली लहर में दिखी थी। जैसे पहली लहर में लोग अस्पतालों में बेड्स के लिए भाग रहे थे, दवा की तलाश  कर रहे थे, अस्पतालों के बाहर दम तोड़ रहे थे और अंतिम संस्कार के लिए श्मशानों के बाहर कतार लग रही थी, ठीक वैसी ही स्थिति दूसरी लहर में… Continue reading दूसरी लहर से सबक लें

और लोड करें