सैनिक बलों में जवानो की आत्महत्याएं और..

कुछ समय पहले सरकार द्वारा संसद में दी गई यह जानकारी अभी ठंडी भी नहीं हो पाई थी कि हर साल हमारे अर्ध-सैनिक बलो व सेना के जवान व दूसरे कर्मी दुश्मन के साथ युद्ध, माओवादी, आतंकवाद या दूसरी घुसपैठी घटनाओं में जितने मारे जाते हैं उससे कहीं ज्यादा लोग अपने साथियो की गोलियो का शिकार बनते हैं।