राफेल पर विपक्ष हमलावर

rafale fighter plane deal : नई दिल्ली। लड़ाकू विमान राफेल को लेकर विपक्षी पार्टियां एक बार फिर हमलावर हो गई हैं। कांग्रेस के साथ साथ कम्युनिस्ट पार्टियों ने भी इसका मुद्दा उठाया है और सौदे में कथित गड़बड़ियों की संयुक्त संसदीय समिति से जांच कराने की मांग की है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्विट करके कहा है कि केंद्र सरकार इस मामले की संसदीय समिति से जांच क्यों नहीं कराना चाह रही है। मोदी की नई कैबिनेट के 90 प्रतिशत मंत्री करोड़पति हैं, 42% पर आपराधिक मामले : ADR की रिपोर्ट राहुल गांधी ने रविवार को एक ट्विट किया, जिसमें उन्होंने पूछा कि rafale fighter plane deal संयुक्त संसदीय समिति यानी जेपीसी की जांच से मोदी क्यों बचना चाहते हैं? उन्होंने ट्विटर पर सर्वे करने के बाद यह सवाल पूछते हुए लोगों को जवाब के चार विकल्प भी दिए। उन्होंने लिखा- मोदी को अपराध बोध है। वो अपने मित्रों को बचाना चाहते हैं। जेपीसी को राज्यसभा सीट नहीं चाहिए। ये सभी विकल्प सही हैं। राहुल गांधी ने इंस्टाग्राम पर भी एक पोस्ट की है। इसमें उन्होंने एक फोटो पोस्ट की है, जिसमें एक व्यक्ति का आधा चेहरा है और जिसकी दाढ़ी में राफेल की फोटो है। राहुल… Continue reading राफेल पर विपक्ष हमलावर

राफेल पर फ्रांस में जांच

लड़ाकू विमान राफेल का मामला खत्म नहीं हो रहा है। जब भी लगता है कि यह मामला अब ठंडा पड़ गया, तब कोई नई कोई धमाका हो जाता है। इस बार भी धमाका फ्रांस में ही हुआ है। फ्रांस के एक जज ने इस मामले में भ्रष्टाचार की जांच शुरू कर दी है। फ्रांस के पब्लिक प्रॉसीक्यूशन सर्विस ने पहले इस मामले की सुनवाई और जांच से इनकार कर दिया था। लेकिन एक गैर-सरकारी संगठन की अपील पर इस बार पब्लिक प्रॉसीक्यूशन सर्विस ने जांच की इजाजत दे दी है और फ्रेंच जज इसकी जांच कर रहे हैं। फ्रांस की कंपनी दासो एविएशन और भारत सरकार के बीच हुए राफेल सौदे की जांच भ्रष्टाचार के पहलू से तो होगी ही साथ ही पक्षपात के पहलू से भी होगी। ध्यान रहे भारत में इस बात के आरोप लगते रहे हैं कि अनिल अंबानी की नई बनी कंपनी को पक्षपात के तहत ही ठेका दिया गया। बहरहाल, इसकी जांच से बहुत सी बातें खुलेंगी। बताया जा रहा है कि फ्रेंच जज इस मामले में पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद से पूछताछ करेंगे। उनके समय ही यह सौदा हुआ था। उनकी सरकार में वित्त मंत्री रहे इमैनुएल मैक्रों से भी पूछताछ होगी। मैक्रों अभी… Continue reading राफेल पर फ्रांस में जांच

तीन विधायक, केंद्रीय मंत्री के दावेदार!

देश के अलग अलग राज्यों के कम से कम तीन विधायक केंद्र सरकार में मंत्री बनने के दावेदार बताए जा रहे हैं। जानकार सूत्रों के मुताबिक असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल को केंद्र में मंत्री बनना है। यह भी कहा जा रहा है कि पार्टी आलाकमान की ओर से उनको हरी झंडी मिली हुई है। यह भी पढ़ें: मोदी मंत्रिमंडलः फेरबदल कब? ध्यान रहे वे नरेंद्र मोदी की पहली सरकार में मंत्री थे और 2016 का विधानसभा चुनाव जीतने के बाद पार्टी ने उनको असम का मुख्यमंत्री बनाया था। इस बार भी उनके मुख्यमंत्री रहते पार्टी जीती है पर उनकी बजाय हिमंता बिस्वा सरमा को सीएम बनाया गया है। तभी से सोनोवाल को एक बार फिर दिल्ली लाने की चर्चा तेज हो गई है। वैसे भी प्रदेश की राजनीति में उनके लिए करने को कुछ नहीं बचा है। हिमंता सरमा के मुख्यमंत्री बनने के बाद किसी के पास करने को कुछ नहीं बचा है। यह भी पढ़ें: सिंधिया, सुशील मोदी का लंबा इंतजार बहरहाल, सोनोवाल के अलावा एक और पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत हैं, जिनको पिछले दिनों ही हटाया गया था। वे एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं और कहा जा रहा है कि केंद्र में मंत्री… Continue reading तीन विधायक, केंद्रीय मंत्री के दावेदार!

सहयोगी पार्टियों को मिलेगी जगह

इस बार केंद्र सरकार में सहयोगी पार्टियों को जगह मिल सकती है। ध्यान रहे नरेंद्र मोदी की मौजूदा सरकार में सिर्फ एक ही सहयोगी पार्टी का मंत्री है। रामदास अठावले अकेले मंत्री हैं, जो गैर भाजपाई हैं। वे भी ऐसी पार्टी के नेता हैं, जिसका कोई भी लोकसभा सदस्य नहीं है। उनके अलावा अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर बादल मोदी सरकार में मंत्री थीं पर केंद्रीय कृषि कानूनों पर किसान आंदोलन शुरू होने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया। उससे पहले 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद के लेकर हुए तकरार की वजह से शिवसेना अलग हो गई थी और उसके मंत्री अरविंद सावंत ने सरकार से इस्तीफा दे दिया था। यह भी पढ़ें: मोदी मंत्रिमंडलः फेरबदल कब? सरकार गठन के समय मई 2019 में उत्तर प्रदेश की सहयोगी अपना दल की नेता अनुप्रिया पटेल को सरकार में शामिल नहीं किया गया था और बिहार की सहयोगी जनता दल यू ने प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व लेने यानी एक मंत्री बनाने के ऑफर को ठुकरा दिया था। इस बार कहा जा रहा है कि कम से कम इन दोनों सहयोगी पार्टियों को केंद्र सरकार में जगह मिल सकती है। यह भी पढ़ें: सिंधिया, सुशील मोदी का लंबा इंतजार उत्तर… Continue reading सहयोगी पार्टियों को मिलेगी जगह

धीरज धरें, विध्वंस से बनेगी ‘भारत’ चिंता!

थाली बजाओ, मोदी भगाओ-3: भारत पहले या मोदी पहले? हिंदू पहले या मोदी पहले? सत्य पहले या झूठ पहले? मुर्दा कौम पहले या जिंदा कौम?.. इन सबमें फिलहाल हम मोदी पहले, मुर्दा कौम पहले वाली मनोदशा में जीते हुए हैं। इसलिए अंधेरी गुफा का अंत दिखाई नहीं देता। लोग झूठ, मुगालतों की संतुष्टि से अंधेरी गुफा में मजे से हैं। किसी को तबाही, महामारी, दिवालिया आर्थिकी, दुश्मन की घात, अंदरूनी बिखराव, टकराव, जर्जरता, बंगाल-तमिलनाडु जैसी उप राष्ट्रीयताओं का सुलगना, देशद्रोहियों बनाम देशभक्तों की पानीपत लड़ाई के मैदान का सिनेरियो नहीं दिख रहा है। भारत, भारत माता नहीं, बल्कि मोदी प्रथम हैं तो जाहिर है उनके बनवाए प्रोपेगेंडा से स्वभाविक तौर पर सब ठीक है। ताली-थाली-दीये, गोबर, गोमूत्र, रामदेव से हम कोरोना पर विजयी हैं। इसी झूठ में हम लगातार संक्रमित रहेंगे, मरेंगे। सवाल है कब तक ऐसा रहेगा? पता नहीं। सचमुच यह किसी को अहसास नहीं है कि अंधकार, झूठ का सफर करते-करते भारत अब कगार के उस बिंदु पर खड़ा है, जिससे ज्योंहि पांव फिसला कि हम वेनेजुएला जैसे दिवालिया होंगे और उसके आगे के साये में कथित देशभक्तों बनाम कथित देशद्रोहियों की लड़ाई में भारत सीरियाई गृहयुद्ध से कम दुर्दशा लिए हुए नहीं होगा। भारत प्रथम की सोच… Continue reading धीरज धरें, विध्वंस से बनेगी ‘भारत’ चिंता!

हिंदू जब मोदी से रोशन तो थाली…?

थाली बजाओ, मोदी भगाओ!-2: हां, बहुत हुआ मोदी और छोड़ो गद्दी की चाहना वाले लोग भूल रहे हैं कि बरबादी के खंडहर, लाशों के ढेर के बावजूद भक्त हिंदू प्रधानमंत्री मोदी से वह सुरक्षा, वह संतोष लिए हुए हैं, जो विकास-आधुनिकता, मानवीयता, राष्ट्र-राज्य की कसौटियों में भले पांवों पर कुल्हाड़ी है लेकिन मुर्दा कौम के लिए दर्प व गौरव की बात है। समझें कि संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने महामारी में लोगों की मौत को मुक्ति बता कर मोदी की लीडरशीप के सौ खून माफ की जैसी जो एप्रोच दर्शाई है वही पढ़े-लिखे, डॉक्टर, हिंदुओं का गोबर कैंप में शरीर पर गोबर लेप से कोरोना पर विजय के हुंकारे में भी भाव है। सब मोदी काल में हिंदू संस्कृति के रोशन होने, उसकी गौरव गाथा से इतने  गद्गद् कि सौ खून माफ! हैं। मोदी और मोदीकाल मतलब गाय, गोबर, गोमूत्र और हिंदू संस्कृति की वैश्विक कीर्ति। यह भक्तों का भाव है। दूसरे भले इसे विकार मानें। मसला क्या सही और क्या गलत का नहीं है, बल्कि कौम-नस्ल के मनोविज्ञान का है। यह भी पढ़ें: थाली बजाओ, मोदी भगाओ! मुर्दा कौम का मुर्दा ख्याल! यह भी पढ़ें: कलियुगी वज्रमूर्खता, गधेड़ापन! भक्त लोग मानते हैं कि गोबर, रामदेव, नरेंद्र मोदी आदि… Continue reading हिंदू जब मोदी से रोशन तो थाली…?

नहीं रूके CM केजरीवाल, Modi सरकार पर जमकर बरसे, कहा- केंद्र सरकार का काम हम कैसे करें

नई दिल्ली। कोरोना महामारी (COVID-19) की दूसरी लहर ने पूरे देश में कोहराम तो मचा ही रखा है साथ ही केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों में भी आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला दिया है. सरकारें इस दौर में साथ काम करने के बजाए एक दूसरे पर लापहरवाही का ठिकरा फोड़ती नजर आ रही हैं. देश में पहले ऑक्सीजन और अब वैक्सीन को लेकर एक-दूसरे पर हमले बोले जा रहे हैं. अब दिल्ली की केजरीवाल सरकार (Kejriwal Govt) ने वैक्सीन को लेकर केन्द्र पर फिर से निशाना साधा है. आज बुधवार को दिल्ली में ड्राइव थ्रू वैक्सीनेशन (Drive Through Vaccination) अभियान की शुरुआत हुई. जिसमें दिल्ली के लोग अब गाड़ी में बैठे-बैठे भी कोरोना वैक्सीन लगवा सकेंगे. ड्राइव थ्रू वैक्सीनेशन प्रोग्राम को सीएम अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) लॉन्च करने के बाद केन्द्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि अगर मार्च में ही वैक्सीन लग जाती तो कोरोना की दूसरी लहर नहीं आती. उन्होंने कहा कि जो काम केंद्र सरकार का है उसे हम कैसे करें. ये भी पढ़ें:- टीके के लिए तरस रही है देश की बड़ी आबादी, उसी देश में हो रही टीके की बर्बादी नहीं रूके केजरीवाल, जमकर बरसे दिल्ली सीएम केजरीवाल ने कई बार मोदी सरकार को निशाना बनाया… Continue reading नहीं रूके CM केजरीवाल, Modi सरकार पर जमकर बरसे, कहा- केंद्र सरकार का काम हम कैसे करें

थाली बजाओ, मोदी भगाओ! मुर्दा कौम का मुर्दा ख्याल!

सवेरे-सवेरे सुनने को मिला- देशवासियों 30 मई 2021, रविवार का दिन। सब सुबह 11 बजे थाली बजा कर प्रधानमंत्री ‘गो बैक,’ ‘गो प्रधानमंत्री गो’, बोलो। मोदी की दुबारा शपथ के दो साल पूरे होने के दिन थाली बजाओ और हैशटेग चलाओ- मोदी भगाओ। जो कि झूठा है, झूठी बातें करता है! कोरोना से मरना है तो मर जाएंगे लेकिन आपकी कमान में नहीं।…..जाहिर है सोशल मीडिया का यह वीडियो दुखी नागरिक का है। उसके दुख-पीड़ा-गुस्से के दसियों कारण हो सकते हैं। लेकिन मुझे इस नागरिक की समझ पर वैसी ही तरस आई जैसे पिछले साल नरेंद्र मोदी के इस आह्वान पर कि थाली, ताली बजाओ, कोरोना भगाओ!…. माना कि कवि दुष्यंत कुमार ने कहां है कि ‘कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों’।  तो बेचारा दुखी नागरिक लोगों से तबियत से थाली बजाने के लिए कहे तो क्या मीनमेख निकालना! यह भी पढ़ें: एक थे शास्त्री, एक हैं मोदी: दो विपदा, दो प्रधानमंत्री ! यह भी पढ़ें: कलियुगी वज्रमूर्खता, गधेड़ापन! दिक्कत यह कि वह किससे कह रहा है और वह खुद क्या है? वह भी तो उस मुर्दा कौम का अंश है, जिस पर झुंझला कर दुष्यंत कुमार ने लिखा होगा… Continue reading थाली बजाओ, मोदी भगाओ! मुर्दा कौम का मुर्दा ख्याल!

कमान हाथ में लेने की नाकाम कोशिश!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर कोरोना महामारी से मुकाबले की कमान अपने हाथ में लेने की कोशिश कर रहे हैं। वे मुख्यमंत्रियों से बात कर रहे हैं। अधिकारियों के साथ बैठकें कर रहे हैं। यहां तक कि जिलों के कलेक्टरों से सीधी बात कर रहे हैं। इन सबका मकसद यह दिखाना है कि कोरोना से लड़ाई असल में प्रधानमंत्री ही लड़ रहे हैं और उन्होंने एक बार फिर अपनी दिव्य शक्तियों से कोरोना पर देशवासियों को विजय दिला दी। परंतु मुश्किल यह है कि इस बार उनकी कोशिशें कामयाब होती नहीं दिख रही हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि कोरोना कंट्रोल करने की कमान उन्होंने खुद अपने हाथ से निकल जाने दी थी और एक बार जब कमान हाथ से निकल गई और उनके खुद के बनवाए यह धारणा बन गई कि स्वास्थ्य राज्यों का मामला है और राज्य सरकारों को ही इस वायरस से निपटना है तो अब लाख चाह कर भी वे इस धारणा को नहीं बदल सकते हैं और न कोरोना के कम होते केसेज का श्रेय ले सकते हैं। यह भी पढ़ें: केरल में सीपीएम का जनादेश के साथ धोखा ! याद करें कोरोना वायरस की पहली लहर में प्रधानमंत्री मोदी ने कैसे पूरा कंट्रोल अपने हाथ… Continue reading कमान हाथ में लेने की नाकाम कोशिश!

वैक्सीन को लेकर राहुल ने उठाए सवाल

कांग्रेस सांसद और पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कोरोना वैक्सीन की भारत सरकार की रणनीति को लेकर सवाल उठाया है। उन्होंने सीरम इंस्टीच्यूट ऑफ इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, सीईओ अदार पूनावाला की बात का समर्थन करते हुए कहा कि उनका सवाल जायज है।

नगा-समझौता खटाई में क्यों ?

नगालैंड की समस्या हल होते-होते फिर उलझ गई है। 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद नगा नेताओं से जो समझौता करवाया था, वह आजकल खटाई में पड़ गया है।

आरक्षण का आइडिया क्या खतरे में है?

आरक्षण समर्थक अनेक सामाजिक कार्यकर्ता, कई राजनीतिक समूह और कुछ सार्वजनिक बुद्धिजीवियों का कहना है कि आरक्षण का पूरा आइडिया खतरे में है और ऐसा केंद्र की मौजूदा सरकार की वजह से है।

जम्मू-कश्मीर में नया विवाद

केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में एक नई डोमिसाइल नीति लागू कर दी है। माना जा रहा है कि इसका इस केंद्र शासित प्रदेश के भविष्य पर गहरा असर पड़ेगा। नए डोमिसाइल के नियमों के तहत प्रदेश में कम-से-कम 15 सालों तक रहने वाला हर व्यक्ति डोमिसाइल के लिए योग्य होगा। इसके अलावा डोमिसाइल की परिभाषा बदल कर और भी कुछ श्रेणियों के व्यक्तियों को इसके योग्य बनाया गया है। इनमें शामिल हैं, वो लोग जिन्होंने सात साल तक जम्मू और कश्मीर में पढ़ाई की हो, दसवीं और बारहवीं कक्षा की परीक्षा प्रदेश के ही किसी स्कूल या कॉलेज से दी हो, वो बच्चे जिनके माता-पिता प्रदेश में 10 सालों तक केंद्र सरकार के किसी भी पद पर काम कर चुके हों, और वो व्यक्ति जिन्हें प्रदेश के रिलीफ एंड रिहैबिलिटेशन कमिश्नर ने बतौर प्रवासी पंजीकृत किया हो। इन सभी श्रेणियों के व्यक्ति अब जम्मू- कश्मीर में स्थानीय नौकरियों के लिए आवेदन कर पाएंगे और प्रदेश में जमीन या मकान खरीद पाएंगे। इसके पहले ये अधिकार सिर्फ उन लोगों को प्राप्त थे, जो पूर्व जम्मू-कश्मीर राज्य की विधान सभा से निर्धारित परिभाषा के तहत स्थानीय निवासी माने जाते थे। जम्मू- कश्मीर की राजनीतिक शक्तियों में डोमिसाइल नीति में लाए गए इन… Continue reading जम्मू-कश्मीर में नया विवाद

कश्मीर की नई डोमिसाइल नीति पर विवाद

श्रीनगर। देश भर में कोरोना वायरस की वजह से चल रहे लॉकडाउन के बीच केंद्र सरकार ने नई डोमिसाइल नीति जारी कर दी। नई डोमिसाइल नीति में कहा गया है कि जम्मू कश्मीर में पिछले 15 साल से रह रहे लोगों को ही डोमिसाइल मिलेगी यानी वहां का नागरिक माना जाएगा। साथ ही जिन बच्चे ने वहां के स्कूलों में सात साल पढ़ाई की है या दसवीं-बारहवीं कक्षा की परीक्षा पास की है उन्हें ही डोमिसाइल और सरकारी नौकरियां भी मिलेगी। इस नीति के मुताबिक केंद्र सरकार के विभिन्न पदों पर काम करने वाले अधिकारी जो पिछले दस साल से सेवा में है उन्हें भी डोमिसाइल दिया जाएगा। राज्य में इस नई नीति का विरोध शुरू हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला बुधवार को केंद्र की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह पहले से पीड़ित लोगों का अपमान है, क्योंकि वादे के मुताबिक कोई संरक्षण नहीं दिया जा रहा है। उमर ने सिलसिलेवार ट्विट में कहा- जब हमारे सभी प्रयास और पूरा ध्यान कोविड-19 के संक्रमण को फैलने से रोकने पर होना चाहिए, तब सरकार जम्मू कश्मीर में नया डोमिसाइल कानून लेकर आई है। उमर ने कहा कि नया कानून इतना खोखला है कि… Continue reading कश्मीर की नई डोमिसाइल नीति पर विवाद

कृषि हितों की अनदेखी

क्या केंद्र सरकार ने किसानों और कृषि क्षेत्र की जरूरतों की अनदेखी की है? ये सवाल हाल में आई ताजा जानकारियों से उठा है। आरटीआई के तहत हासिल दस्तावेजों के मुताबिक कृषि मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2020-21 के लिए एमआईएस-पीएसएस योजना का बजट 14,337 करोड़ रुपये तय करने की सिफारिश की थी। लेकिन पिछले साल के बजट में ये राशि 3,000 करोड़ रुपए ही थी। यानी 11,337 करोड़ रुपए कम। वित्त वर्ष 2019-20 के लिए योजना के बजट को बढ़ाकर 8301.55 करोड़ रुपये करने की मांग की गई थी। इसके अलावा पीएम-आशा योजना का बजट 1,500 करोड़ रु. तय करने की मांग की गई थी। लेकिन वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग ने इन मांगों को खारिज कर दिया और वित्त वर्ष 2020-21 के लिए एमआईएस-पीएसएस योजना का बजट मात्र 2000 करोड़ रुपए और पीएम-आशा का बजट सिर्फ 500 करोड़ रुपएये ही रखा। एमआईएस-पीएसएस के लिए मौजूदा वित्त वर्ष का संशोधित बजट कृषि विभाग की मांग के उलट 2010.20 करोड़ रुपए ही रखा है। ये बजट पिछले साल दी गई राशि से भी काफी कम है। वित्त वर्ष 2019-20 में एमआईएस-पीएसएस के तहत 3,000 करोड़ रु. और पीएम-आशा के तहत 1500 करोड़ रु. आवंटित किए गए थे। गौरतलब है कि… Continue reading कृषि हितों की अनदेखी

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