ताकि किसान व देश दोनों का संकट खत्म हो!

संसद द्वारा पारित कृषि सुधार संबंधित विधेयकों पर राजनीतिक संग्राम जारी है। झूठ और भ्रामक प्रचारों से किसानों को भड़काने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे में स्वाभाविक हो जाता है कि देश में किसान और कृषि की स्थिति का वस्तुनिष्ठ आकलन किया जाएं।

किसान आंदोलन कहां तक पहुंचेगा?

केंद्र सरकार तीन विवादित कृषि कानूनों के खिलाफ देश के कई हिस्सों में चल रहे किसान आंदोलनों को लेकर चिंता में है। तभी प्रधानमंत्री लगभग रोज इस बारे में बोल रहे हैं।

कृषि-कानूनः कांग्रेस का शीर्षासन

संसद द्वारा पारित कृषि-कानूनों के बारे में कांग्रेस पार्टी ने अपने आप को एक मज़ाक बना लिया है। इस मुद्दे पर कांग्रेस शीर्षासन की मुद्रा में आ गई है, क्योंकि उसने अपने 2019 के चुनाव घोषणा-पत्र में खेती और किसानों के बारे में जो कुछ वायदे किए थे, वह आज उनसे एकदम उल्टी बात कह रही है।

समर्थन मूल्य के झमेले का सत्य

बचपन में एक किस्सा सुना करते थे कि कुछ लोग बेहद बचकाना हरकते करते हैं जैसे कि अगर कोई यह कहे कि कौव्वा कान ले गया तो अपने कान को छुए बिना ही कौव्वे के पीछे दौड़ पड़ते हैं।