एक उम्मीद तो जगी

म्यांमार की हालत के बारे में दुनिया में एक तरह का असहाय होने का भाव रहा है। म्यांमार के सैनिक शासक बेरहमी से लोकतंत्र समर्थक आंदोलनकारियों की जान लेते रहे हैं, लेकिन बाहरी दुनिया से वहां किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं हुआ है। पश्चिमी देशों ने जो पहल की उसे चीन और रूस ने नाकाम… Continue reading एक उम्मीद तो जगी

क्या बदलेगी भारत की म्यांमार नीति?

अब क्या म्यांमार के प्रति भारत की नीति बदलेगी? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि अमेरिका के एसएंडपी डाउ जोंस के इंडेक्स से अडानी पोर्ट एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन को हटाने का फैसला किया गया है। डाउ जोंस की ओर से कहा गया है कि 15 अप्रैल को एपीएसईजेड को इंडेक्स से हटा दिया… Continue reading क्या बदलेगी भारत की म्यांमार नीति?

शरणार्थियों से बेरुखी क्यों?

म्यांमार के शरणार्थियों के मामले में भारत सरकार ने क्यों निर्मम रुख अपना रखा है, इसे समझना मुश्किल है। रोहिंग्या शरणार्थियों के बारे में सरकार के ऐसे रुख पर समझा गया था कि चूंकि रोहिंग्या मुसलमान हैं, इसलिए ये मौजूदा भाजपा सरकार की हिंदुत्व की नीति से मेल नहीं खाते। सरकार किसी रूप में मुस्लिम… Continue reading शरणार्थियों से बेरुखी क्यों?

म्यांमारः भारत दृढ़ता दिखाए

म्यांमार में सेना का दमन जारी है। 600 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। आजादी के बाद भारत के पड़ौसी देशों— पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, नेपाल, मालदीव— आदि में कई बार फौजी और राजनीतिक तख्ता-पलट हुए और उनके खिलाफ इन देशों की जनता भड़की भी लेकिन म्यांमार में जिस तरह से 600 लोग पिछले 60-70 दिनों… Continue reading म्यांमारः भारत दृढ़ता दिखाए

म्यांमार पर कूटनीति अब ठीक

मैने चार-पांच दिन पहले लिखा था कि म्यांमार (बर्मा) में चल रहे नर-संहार पर भारत चुप क्यों है ? उसका 56 इंच का सीना कहां गया लेकिन अब मुझे संतोष है कि भारत सरकार ने संयुक्त राष्ट्र संघ और दिल्ली, दोनों स्थानों से म्यांमार में चल रहे फौजी रक्तपात पर अपना मुंह खोलना शुरु कर… Continue reading म्यांमार पर कूटनीति अब ठीक

56 इंची छाती और पिचकी कूटनीति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 56 इंची छाती वाले हैं और वे इसी अकड़ के साथ घरेलू राजनीति करते हैं। घरेलू राजनीति में उन्होंने केंद्रीय एजेंसियों के सहारे सभी राजनीतिक दलों के नेताओं, गैर सरकारी संगठनों, मीडिया समूहों आदि को उनकी हैसियत दिखा कर रखी है। लेकिन जब अंतरराष्ट्रीय राजनीति की बात आती है तो 56 इंची… Continue reading 56 इंची छाती और पिचकी कूटनीति

कहानी से संभलेगी बात?

म्यांमार के सैनिक शासक अपनी छवि सुधारना चाहते हैं। यानी वे चाहते हैं कि जिस तरह का दमन कर रहे हैं, दुनिया उस पर ध्यान ना दे। या ध्यान दे तो यह समझे कि आखिर वे क्यों ऐसा कर रहे हैं।

जहां चाह, वहां राह

म्यांमार में इस बार सैनिक शासकों के लिए पहले जैसी आसानी नहीं है। इस बार वहां की जनता ने साफ कर दिया है कि उन्हें लोकतंत्र का गला घोंटा जाना मंजूर नहीं है

म्यांमार में गजब का जज्बा

म्यांमार में सैनिक तख्ता पलट के बाद इस बार वहां की जनता ने गजब का जज्बा दिखाया है। सैनिक शासकों की तमाम ज्यादतियों का विरोध करते हुए लगभग रोज ही दसियों हजार लोग शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में भाग ले रहे हैं।

म्यांमार में सैन्य शासन के खिलाफ प्रदर्शन

म्यांमार के सबसे बड़े शहर यंगून में सैन्य तख्तापलट के खिलाफ रविवार को हजारों लोगों ने प्रदर्शन किया और देश की सर्वोच्च नेता आंग सान सू ची की रिहाई की मांग की।

जो अंदेशा था, वो हुआ

तो आखिरकार म्यांमार में सेना ने तख्ता पलट दी। नव निर्वाचित संसद की बैठक से ठीक पहले वाली रात में वहां एक दशक पहले वाली हालत बहाल कर दी गई। आंग सान सू ची सहित तमाम राजनेता जेल में डाल दिए गए।

म्यांमार में तख्ता—पलट

भारत के पड़ौसी देश म्यांमार (बर्मा या ब्रह्मदेश) में आज सुबह-सुबह तख्ता-पलट हो गया। उसके राष्ट्रपति बिन मिन्त और सर्वोच्च नेता श्रीमती आंग सान सू की को नजरबंद कर दिया गया है