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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 :  BJP में सीएम पद के दावेदारों की भरमार, कई चौंकाने वाले नाम भी शामिल

भारतीय जनता पार्टी पश्चिम बंगाल के चुनाव में कितनी सीटें जीतेगी यह तय नहीं है। यानी विधायक कितने होंगे यह पता नहीं है पर उससे पहले ही मुख्यमंत्री के दर्जनों दावेदार हो गए हैं।

Khatu Mela 2021 : कोरोना ने बदली ये व्यवस्थाएं, जानिए खाटूश्यामजी मंदिर के शिखर पर सिर्फ सूरजगढ़ का ही निशान क्यों?

खाटूश्यामजी (सीकर)। राजस्थान के सीकर जिले के गांव खाटू में ‘हारे का सहारा’ बाबा श्याम का फाल्गुनी लक्खी मेला 2021 बुधवार से शुरू होगा। खाटू मेले 2021 की अवधि दस दिन की होगी। कोरोना काल में 17 से 26 मार्च तक चलने वाले खाटूश्यामजी मेले के लिए इस बार कई नई व्यवस्थाएं की गई हैं। श्री श्याम मन्दिर कमेटी खाटूश्यामजी, सीकर जिला प्रशासन व पुलिस अधिकारी मंगलवार को खाटू मेला 2021 की व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुटे रहे। सीकर एसपी कुंवर राष्ट्रदीप ने बताया कि खाटूश्यामजी मेले में करीब 3 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। पिछली बार के मेले से तीन सौ पुलिसकर्मी अधिक लगाए हैं। खाटूश्यामजी मेला स्थल के मुख्य रास्तों पर चार जगहों पर पुलिस प्वाइंटस बनाए गए हैं, जहां 15—15 टीमें श्याम भक्तों के कोरोना जांच संबंधी मेडिकल दस्तावेजों की जांच की जाएगी। इस बार श्याम भक्तों को कोरोना महामारी के ​कारण 72 घंटे के भीतर की कोविड जांच की निगेटिव रिपोर्ट साथ लानी होगी। खाटूश्यामजी मेला 2021 की नई व्यवस्थाएं 1.ऑनलाइन पंजीयन करने वाले भक्त ही इस बार बाबा श्याम के दर्शन कर सकेंगे। 2. खाटू फाल्गुनी मेला 2021 में रोजाना करीब 35 हजार श्याम भक्तों को दर्शन करवाएंगे, जो हर साल की… Continue reading Khatu Mela 2021 : कोरोना ने बदली ये व्यवस्थाएं, जानिए खाटूश्यामजी मंदिर के शिखर पर सिर्फ सूरजगढ़ का ही निशान क्यों?

अगला ‘इंडिया’ और आंसू

‘नया इंडिया’ अंतिम सांसें ले रहा है। उसके फेफड़े वायरस के शिकार हैं। वायरस भी कई प्रकार का! वह आजादी से जीने देने का दुश्मन है। जन, गण, मन का हत्यारा है। जिसे चाहेगा बीमार करेगा और मारेगा। उसने कौम की, देश की, लोकतंत्र की, आर्थिकी, समाज सबकी प्रतिरोध, प्रतिकार, विरोध की शक्ति छीन ली है। यह वायरस नहीं यमराज है। वह मुंह, वाणी, छींक, हवा से घुसेगा और किसी को भान नहीं होगा कि वह कैसे इंसान को, नस्ल, कौम, देश को मूर्ख बना कर उससे ऑक्सीजन छीन ले रहा है। वह मृत्युशैय्या पर लेटा देगा देश को! वह मारेगा आदमी व खत्म करेगा इंसानी रिश्तों को। तब भला इस ‘नया इंडिया’ की क्या बिसात। मैंने गलती की थी सन 2010 की 16 मई की अक्षय तृतीया के दिन, जो सुनहरा ‘नया इंडिया’ सोचा। क्या पता था कि अक्षत, चिरंतन, सनातनी ‘इंडिया’ नया नहीं बनने वाला है, बल्कि 1947 में बनी उसकी जन्मपत्री में वायरस के राहु-केतु काल का वह योग है, जिससे बुद्धिहीनता, मूर्खता व झूठ के वायरस के विषाणु इंसान में ट्रांसमिट होंगे और नागरिक कंप-कंपाए रहेंगे। यह भी पढ़ें : बुद्धि जब कलियुग से पैदल हो! हां, मैं खेद, शर्म के साथ पाठकों से क्षमा मांगता… Continue reading अगला ‘इंडिया’ और आंसू

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