कोरोना और विश्व-परिवार

ऐसा लगता है कि भारत और दक्षिण अफ्रीका की पहल अब शायद परवान चढ़ जाएगी। पिछले साल अक्तूबर में इन दोनों देशों ने मांग की थी कि कोरोना के टीके का एकाधिकार खत्म किया जाए और दुनिया का जो भी देश यह टीका बना सके, उसे यह छूट दे दी जाए। विश्व व्यापार संगठन के नियम के अनुसार कोई भी किसी कंपनी की दवाई की नकल तैयार नहीं कर सकता है। प्रत्येक कंपनी किसी भी दवा पर अपना पेटेंट करवाने के पहले उसकी खोज में लाखों-करोड़ों डाॅलर खर्च करती है। दवा तैयार होने पर उसे बेचकर वह मोटा फायदा कमाती है। यह फायदा वह दूसरों को क्यों उठाने दें ? इसीलिए पिछले साल भारत और द. अफ्रीका की इस मांग के विरोध में अमेरिका, यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, जापान, स्विट्जरलैंड जैसे देश उठ खड़े हुए। ये समृद्ध देश अपनी गाढ़ी कमाई को लुटते हुए कैसे देख सकते थे लेकिन पाकिस्तान, मंगोलिया, केन्या, बोलिविया और वेनेजुएला- जैसे देशों ने इस मांग का समर्थन किया। अब खुशी की बात यह है कि अमेरिका के बाइडन प्रशासन ने ट्रंप की नीति को उलट दिया है। अमेरिका यदि अपना पेटेंट छोड़ने को तैयार है तो अन्य राष्ट्र भी उसका अनुसरण क्यों नहीं करेंगे? अब ब्रिटेन… Continue reading कोरोना और विश्व-परिवार

वैक्सीन के इंतजाम पर ध्यान हो

भारत सरकार ने वायरस की पहली लहर में एक बड़ी गलती यह की थी वैक्सीन की जरूरत पर ध्यान नहीं दिया। भारत सरकार इस मुगालते में रही कि पिछले 75 साल में भारत दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन उत्पादक देश बना है इसलिए भारत में वैक्सीन की दिक्कत नहीं होगी। तभी जिस समय दुनिया भर के सभ्य और विकसित देशों की सरकारें वैक्सीन के ऑर्डर दे रही थीं, एंडवांस बुकिंग करा रही थीं और दुनिया भर में वैक्सीन पर चल रहे शोध में पैसा लगा रही थीं उस समय भारत सरकार इस मुगालते में रही कि भारत ने कोरोना पर विजय पा ली। यह पिछले साल अगस्त-सितंबर का समय था, जब दुनिया भर से यह खबर आने लगी थी कि वैज्ञानिक वैक्सीन बना रहे हैं और साल के अंत तक वैक्सीन आ जाएगी। साल का अंत आने से पहले ही वैक्सीन आ भी गई और दुनिया के देशों में लगने भी लगी। लेकिन भारत सरकार पता नहीं किस शुभ मुहूर्त का इंतजार करती रही! अमेरिका में 14 दिसंबर से वैक्सीन लगनी शुरू हो गई थी। उससे ठीक पहले अमेरिका ने फाइजर की वैक्सीन को मंजूरी दी थी और मंजूरी दिए जाने से पहले ही अमेरिका के 50 राज्यों में हर… Continue reading वैक्सीन के इंतजाम पर ध्यान हो

अमेरिका पेटेंट हटाने के पक्ष में

नई दिल्ली। कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिए बनाई जा रही वैक्सीन को लेकर बड़ी खबर है। भारत और दक्षिण अफ्रीका के साथ साथ अब अमेरिका भी वैक्सीन के पेटेंट पर से रोक हटवाने के लिए पक्ष में आ गया। अब अमेरिका विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्लुएचओ में इसके लिए दबाव बनाएगा। विश्व व्यापार संगठन, डब्लुटीओ पहले ही कह चुका है कि वैक्सीन पर से पेटेंट हटाना चाहिए ताकि ज्यादा से ज्यादा कंपनियां इसका उत्पादन कर सकें और गरीब देशों को पर्याप्त मात्रा में सस्ती वैक्सीन मिल सके। हालांकि वैक्सीन के शोध और उत्पादन से जुड़े बिल गेट्स ने पेटेंट हटाने का विरोध किया है। बहरहाल, अब अमेरिका ने भारत और दक्षिण अफ्रीका की कोरोना वैक्सीन पर अस्थायी तौर पर पेटेंट हटाने की मांग का समर्थन किया है। अमेरिका ने कहा है कि वो बौद्धिक संपत्ति की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन महामारी से निपटने के लिए वैक्सीन पर से पेटेंट खत्म करने की मांग का समर्थन करता है। अमेरिका के इस कदम को भारत और अन्य देशों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अगर कोरोना वैक्सीन पर से पेटेंट हटता है तो इससे न केवल वैक्सीन का उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि कीमतों में भी कमी आएगी। पेटेंट… Continue reading अमेरिका पेटेंट हटाने के पक्ष में

उदारता काफी नहीं है

ये अच्छी खबर है कि फाइजर कंपनी ने अपने कोरोना वैक्सीन के सात करोड़ डोज भारत को देने का फैसला किया है। कंपनियां ऐसी उदारता दिखाएं, तो कम से कम उन देशों को तुरंत राहत मिल सकती है, जहां कोरोना वायरस ने तबाही मचा रखी है। लेकिन यह समस्या का समाधान नहीं है। विशेषज्ञों ने अपनी ये राय बार-बार दोहराई है कि कोरोना वायरस पर काबू पाने का एकमात्र उपाय पूरी दुनिया में सबका टीकाकरण है। सवाल है कि ये कैसे संभव होगा? क्या बड़े पैमाने पर वैक्सीन का उत्पादन हुए बिना दुनिया में सबको टीका लगाना संभव है? ऐसा नहीं हुआ, जिन्होंने टीका लगवाया है, वायरस के लगातार हो रहे म्यूटेशन के कारण उनकी सुरक्षा भी जाती रहेगी। असल मुद्दा विश्व व्यापार संगठन (डब्लूटीओ) के तहत कोरोना वैक्सीन पर से पेटेंट हटाने या स्थगित करने का है। अगर पेटेंट यानी बौद्धिक संपदा अधिकार को हटा दिया जाए, तो जिस फॉर्मूले से कंपनियों ने वैक्सीन तैयार किए हैं, उसकी तकनीक और उन वैक्सीन को बनाने का ज्ञान उन्हें अलग-अलग देशों की वैक्सीन निर्माता कंपनियों से साझा करना होगा। उससे इन वैक्सीन के डोज ज्यादा बड़ी संख्या में और सस्ती दरों तैयार किए जा सकेंगे। ले किन कंपनियां इस मांग का… Continue reading उदारता काफी नहीं है

अब विदेशी वैक्सीन का इंतजार

भारत ने सारी दुनिया में करीब सात करोड़ वैक्सीन बांट दिए या बेच दिए और अब दुनिया के दूसरे देशों से वैक्सीन आने के इंतजार में बैठा है। भारत का वैक्सीनेशन अभियान लगभग ठप्प पड़ गया है या तेजी से दौड़ने की बजाय रेंग रहा है क्योंकि भारत के पास वैक्सीन नहीं है। 18 साल से उपर की उम्र के नौजवानों को वैक्सीन लगाने की मंजूरी तो सरकार ने दे दी लेकिन यह सोचा ही नहीं कि उनके लिए वैक्सीन कहां से आएगी। सो, पहले दिन एक करोड़ से ज्यादा लोगों ने वैक्सीन के लिए रजिस्ट्रेशन कराया पर वे समय हासिल नहीं कर पाए। कई राज्यों ने वैक्सीनेशन का चौथा चरण यानी 18 साल से ऊपर की उम्र के लोगों को वैक्सीन लगाने का अभियान रोक दिया है। वैक्सीन की कमी से उनके यहां वैक्सीनेशन केंद्र बंद हो रहे हैं। सोचें, भारत ने सात करोड़ वैक्सीन बांटी है या बेची है और अब एक करोड़ डोज के लिए अमेरिका का मुंह देखा जा रहा है। अमेरिका ने अभी तक वैक्सीन की एक भी डोज किसी देश को नहीं दी है। वह एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन का इस्तेमाल नहीं कर रहा है फिर भी करोड़ों डोज उसने स्टोर करके रखी है। अब… Continue reading अब विदेशी वैक्सीन का इंतजार

सरकार का दावा और वैक्सीन के दाम

पिछले हफ्ते 21 अप्रैल को दो बड़े दावे किए गए। एक दावा केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने किया और दूसरा इंडियन कौंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च यानी आईसीएमआर ने किया। दोनों दावे भारत में इस्तेमाल हो रही दो वैक्सीन के बारे में थीं। एक में वैक्सीन को 99 फीसदी से ज्यादा कारगर बताया गया तो दूसरे में कहा गया कि वैक्सीन डबल म्यूटेंट वैरिएंट पर भी कारगर है। यह संयोग है कि इन दोनों दावों के तुरंत बाद दोनों कंपनियों ने अपनी कीमतों का ऐलान किया, जो मौजूदा कीमत से कई गुना ज्यादा है। क्या इन दोनों बातों का आपस में कोई संबंध है? भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपने एक कथित अध्ययन के आधार पर बताया कि भारत में वैक्सीन 99 फीसदी से भी ज्यादा असरदार है। हालांकि दोनों वैक्सीन के तीसरे चरण के परीक्षण के नतीजों के मुताबिक यह किसी हाल में 80 फीसदी से ज्यादा असरदार नहीं है। पर भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि 13 करोड़ लोगों को टीका लगा है और उसमें से 17 हजार से कुछ ज्यादा लोग ही संक्रमित हुए हैं। इस आधार पर सरकार ने दावा किया कि सिर्फ टीका लगवाने वालों में 0.2 से 0.4 फीसदी ही संक्रमित… Continue reading सरकार का दावा और वैक्सीन के दाम

वैक्सीन सर्टिफिकेट पर फोटो किसकी लगेगी?

केंद्र सरकार ने राज्यों को और देश की स्वास्थ्य सुविधा की रीढ़ यानी निजी अस्पतालों को उनके हाल पर छोड़ दिया है। वे कैसे वैक्सीन खरीदें, किस कीमत पर खरीदें, कब वैक्सीन मिलेगी और कैसे लगेगी आदि वे जानें। अब केंद्र सरकार का इससे कोई लेना-देना नहीं है। उसने वैक्सीन का प्रचार कर दिया है और नीति बना दी है। सो, केंद्र सरकार की घोषणा के बाद से राज्य सरकारें हैरान-परेशान घूम रही हैं। हालांकि सबकी मजबूरी है इसलिए सब ऐलान कर रहे हैं कि वे अपने नागरिकों को मुफ्त में वैक्सीन लगवाएंगे। निजी अस्पताल वाले क्या करेंगे, वे भी अभी तय नहीं कर पाए हैं। केंद्र सरकार की नई वैक्सीन नीति के बाद अब यह सवाल है कि वैक्सीनेशन के बाद मिलने वाले सर्टिफिकेट पर किसकी तस्वीर लगेगी? अब तक तो कोविन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करा कर वैक्सीनेशन करा रहे लोगों को जो सर्टिफिकेट मिलती है उस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर लगी होती है। लेकिन जब राज्य सरकारें अपने पैसे से वैक्सीन खरीद कर लोगों को लगवाएंगी तो उन लोगों को मिलने वाली सर्टिफिकेट पर किसकी तस्वीर लगेगी? क्या राज्यों के मुख्यमंत्री अपनी तस्वीर लगवाएंगे? या कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री अपनी पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष की… Continue reading वैक्सीन सर्टिफिकेट पर फोटो किसकी लगेगी?

वैक्सीन की कीमत पर केंद्र ने की बात

नई दिल्ली। कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिए भारत में इस्तेमाल हो रही दोनों वैक्सीन की कीमतों को लेकर केंद्र सरकार ने वैक्सीन कंपनियों से बात की है। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक केंद्र सरकार ने वैक्सीन बनाने वाली दोनों कंपनियों- भारत बायोटेक और सीरम इंस्टीच्यूट ऑफ इंडिया से बात की है और उनसे वैक्सीन की कीमत कम करने को कहा है। ध्यान रहे भारत की नई वैक्सीनेशन नीति के बाद दोनों कंपनियों ने पिछले हफ्ते अपनी वैक्सीन की कीमतों की घोषणा की थी। भारत सरकार ने एक मई से 18 साल से ज्यादा उम्र के हर व्यक्ति को वैक्सीन लगाने की इजाजत दे दी है। लेकिन कई राज्यों में वैक्सीन की कमी हो गई है और कई राज्यों का कहना है कि वे बहुत ज्यादा कीमत पर वैक्सीन खरीद कर लोगों को लगवाने में समर्थ नहीं हैं। कांग्रेस शासित राज्‍यों ने टीके की कीमतों में असमानता का आरोप लगाते हुए इसे कम दाम पर उपलब्‍ध कराने को कही है। तभी खबर है कि सरकार ने सीरम इंस्‍टीट्यूट और भारत बायोटेक से भारत में अपनी कोविड वैक्‍सीन की कीमतें कम करने को कहा है ताकि पहली मई से टीकाकरण के तीसरे चरण में 18 से 45 साल की उम्र… Continue reading वैक्सीन की कीमत पर केंद्र ने की बात

वैक्सीन में लूट के खेल की मंजूरी

जिस दिन भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने गर्व के साथ इस बात का ऐलान किया कि भारत सबसे तेज 14 करोड़ वैक्सीन लगाने वाला देश बना उसी दिन वैक्सीन बनाने वाली भारत की स्वदेशी कंपनी भारत बायोटेक ने अपनी वैक्सीन की नई कीमतों का ऐलान किया। भारत सरकार की नई वैक्सीन नीति के अनुरूप कंपनी ने अपनी कीमतों के घोषणा की। उसने कहा है कि वह राज्य सरकारों को छह सौ रुपए प्रति डोज के हिसाब से वैक्सीन देगी और निजी कंपनियों को 12 सौ रुपए में देगी। इससे पहले सीरम इंस्टीच्यूट ने ऐलान किया था कि वह राज्य सरकारों को चार सौ रुपए में और निजी अस्पतालों को छह सौ रुपए में वैक्सीन देगा। एक तरफ वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों की कीमतों की यह नीति है और दूसरी ओर एक के बाद एक राज्य सरकारों द्वारा यह घोषणा है कि वे अपने यहां मुफ्त में वैक्सीन लगवाएंगे। आधा दर्जन से ज्यादा राज्यों ने मुफ्त वैक्सीन का ऐलान कर दिया है। अगले साल सात राज्यों में विधानसभा के चुनाव हैं। सो, यह तय है कि चुनाव वाले सभी राज्य अपने यहां मुफ्त वैक्सीन का ऐलान करेंगे। इसका अर्थ है कि अब होड़ लगा कर राज्य सरकारें वैक्सीन खरीदेंगी और… Continue reading वैक्सीन में लूट के खेल की मंजूरी

वैक्सीन कंपनियों ने आपदा को अवसर बनाया

भारत में जिस तरह से कोरोना संकट के बीच केंद्र सरकार के साथ अनेक दवा कंपनियों, अस्पतालों, स्वास्थ्य सेवा देने वालों, स्वास्थ्य उपकरण बनाने वालों, जरूरी वस्तुओं का उत्पादन करने वालों ने आपदा को अवसर बना तक देश के आम नागरिक की खाल खींचनी शुरू की है उसी तरह वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों ने भी आपदा को अव़सर बना लिया। उन्होंने भी बहती गंगा में हाथ धोने के लिए लूट का धंधा चालू कर दिया। अब तक अपनी देशभक्ति दिखा रही कंपनियों का असली चेहरा भी सामने आ गया है। ये कंपनियां दुनिया के देशों को कम कीमत पर वैक्सीन बेच रही हैं और भारत में उसकी कीमत बढ़ाती जा रही हैं। ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनका की कोवीशील्ड वैक्सीन का भारत में उत्पादन कर रहे सीरम इंस्टीच्यूट ने भारत की राज्य सरकारों के लिए वैक्सीन की एक डोज की कीमत चार सौ रुपए और निजी अस्पतालों के लिए छह सौ रुपए रखी है। लेकिन उसी वैक्सीन को कंपनी को पड़ोसी देश बांग्लादेश में तीन सौ रुपए से भी कम कीमत पर बेच रही है। बांग्लादेश के लिए कंपनी ने वैक्सीन की कीमत 296 रुपए के करीब रखी है। भारत से बहुत दूर लैटिन अमेरिकी देश ब्राजील में तो इसकी कीमत सवा दो सौ… Continue reading वैक्सीन कंपनियों ने आपदा को अवसर बनाया

बेसिर पैर की वैक्सीन नीति!

केंद्र सरकार को अपनी नई वैक्सीन नीति में तत्काल बदलाव करना चाहिए क्योंकि यह नीति तमाम किस्म के तर्क और विचार से परे या उसके विरूद्ध है। सरकार की वैक्सीन नीति  संघवाद की धारणा के विरूद्ध है। यह आपदा की स्थिति में सबके लिए समान अवसर मुहैया कराने की नीति के भी असंगत है और आम बजट में केंद्र की अपनी घोषित नीति के भी विरूद्ध है। यह समझ से परे है कि जब केंद्र सरकार ने आम बजट में वैक्सीन के लिए 35 हजार करोड़ आवंटित किए हैं तो वह क्यों इधर-उधर की नीति घोषित कर रही है? सरकार की वैक्सीन नीति में तो कई चीजें ऐसी बेसिर पैर की हैं, जिन्हें देख कर यह सवाल उठता है कि आपदा के इस भयावह समय में वैक्सीन की राष्ट्रीय नीति बनाते समय दिमाग का जरा सा भी इस्तेमाल हुआ था या नहीं? जैसे केंद्र सरकार ने नई वैक्सीन नीति जारी करते हुए कहा अब से वैक्सीन के उत्पादन का 50 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार रखेगी और बाकी 50 फीसदी हिस्सा राज्यों और निजी अस्पतालों को बेचा जाएगा। सवाल है कि केंद्र सरकार जो 50 फीसदी वैक्सीन अपने पास रखेगी, उसका करेगी क्या? जब सारे राज्य अपने अपने फंड से वैक्सीन… Continue reading बेसिर पैर की वैक्सीन नीति!

वैक्सीन पर संशय दूर करने की जरूरत

केंद्र सरकार ने वैक्सीनेशन की नई नीति घोषित कर दी है। अब वैक्सीन बनाने वाली कंपनियां अपने उत्पादन का 50 फीसदी केंद्र सरकार को देंगी और बारी 50 फीसदी राज्य सरकारों को या खुले बाजार में बेचेंगी। इसके साथ ही सरकार ने 18 साल से ज्यादा उम्र के सभी लोगों को वैक्सीन लगाने की भी इजाजत दे दी है। इस पॉलिसी में कुछ बुनियादी कमियां हैं, जिनकी ओर विपक्षी पार्टियों ने भी ध्यान दिलाया है। सरकार को आगे बढ़ कर उन खामियों को दूर करना चाहिए या राज्यों और आम लोगों को भरोसा दिलाना चाहिए कि उन्हें इससे परेशानी नहीं होगी। दूसरे कुछ संशय़ भी हैं, जिन्हें सरकार को दूर करना चाहिए। जैसे भारत सरकार ने केंद्रीय बजट में वैक्सीन के लिए 35 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। अगर राज्य सरकारें वैक्सीन अपने पैसे से खरीदेंगी और आम लोग भी अपने पैसे से वैक्सीन खरीदेंगे को केंद्रीय बजट का पैसा क्या होगा? अभी जिस दर पर सरकार को वैक्सीन मिल रही है इस हिसाब से सरकार 35 हजार करोड़ रुपए में पूरी आबादी को एक डोज लगाने लायक वैक्सीन खरीद सकती है। लेकिन अब भी बड़ी संख्या में लोग निजी अस्पतालों में ढाई सौ रुपए देकर वैक्सीन लगवा… Continue reading वैक्सीन पर संशय दूर करने की जरूरत

एक वैक्सीन के तीन दाम!

नई दिल्ली। केंद्र की नई वैक्सीनेशन नीति की घोषणा के बाद विपक्ष ने निजी कंपनियों को मनमाने दाम वसूलने की छूट देने का जो आरोप लगाया था वह सही साबित हो रहा है। नई वैक्सीन नीति की घोषणा के एक दिन बाद सीरम इंस्टीच्यूट ने अपनी वैक्सीन की कीमतों का ऐलान किया। कंपनी  की घोषणा के मुताबिक उसकी वैक्सीन कोवीशील्ड की तीन अलग अलग कीमतें होंगी। भारत सरकार को वह कम कीमत पर वैक्सीन देगी, राज्य सरकारों को उससे ज्यादा कीमत पर और निजी कंपनियों को उससे भी ज्यादा कीमत पर। सीरम इंस्टीच्यूट ने कहा कि निजी अस्पतालों को कोवीशील्ड वैक्सीन छह सौ रुपए में दी जाएगी। राज्य सरकारें खरीदेंगी तो उनके लिए वैक्सीन के दाम चार सौ रुपए होंगे और केंद्र को पहले की ही तरह ये वैक्सीन डेढ़ सौ रुपए में मिलती रहेगी। सीरम ने कहा कि अगले दो महीने में वैक्सीन का उत्पादन बढ़ाया जाएगा। अभी जितनी वैक्सीन उत्पादन होता है, उसमें 50 फीसदी वैक्सीन केंद्र के वैक्सीनेशन प्रोग्राम के लिए भेजी जाती हैं। बची हुई 50 फीसदी वैक्सीन राज्यों और प्राइवेट अस्पतालों को भेजी जाती है। इस बीच केंद्र सरकार ने भी कह दिया है कि अब निजी अस्पतालों को सरकार की ओर से वैक्सीन नहीं… Continue reading एक वैक्सीन के तीन दाम!

वैक्सीन की कीमत का क्या होगा?

भारत सरकार तीन और वैक्सीन को मंजूरी देने जा रही है। तीन वैक्सीन को पहले मंजूरी मिल चुकी है, जिनमें से दो का इस्तेमाल अभी हो रहा है। कोवीशील्ड और कोवैक्सीन का टीका निजी अस्पतालों में ढाई सौ रुपए में और सरकारी अस्पतालों में मुफ्त में लगाया जा रहा है। तीसरी वैक्सीन रूस की स्पुतनिक-वी है, जिसे मंजूरी मिल गई है और जल्दी ही इसके टीके लगने लगेंगे। इसी महीने स्पुतनिक के टीके भारत में लोगों को लगने लगेंगे। इस बीच भारत सरकार तीन और वैक्सीन- फाइजर, मॉडर्ना और जॉनसन एंड जॉनसन को मंजूरी दे रही है। इन तीनों वैक्सीन को अमेरिका, यूरोपीय संघ, ब्रिटेन और विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्लुएचओ ने मंजूरी दी हुई है। सो, अब सवाल है कि ये जो चार नई वैक्सीन भारत में आ रही है इनकी कीमत क्या होगी? क्या स्पुतनिक-वी की वैक्सीन, जिसके आयात या उत्पादन का करार डॉक्टर रेड्डीज लैब के साथ हुआ है वह भी ढाई सौ रुपए की कीमत पर लगेगी? भारत में कोवैक्सीन और कोवीशील्ड निजी अस्पतालों में ढाई सौ रुपए में इसलिए लग रहा है क्योंकि वैक्सीन की डोज उनको डेढ़ सौ रुपए में मिल रही है। इनका उत्पादन भारत में हो रहा है, इसलिए डेढ़ सौ रुपए… Continue reading वैक्सीन की कीमत का क्या होगा?

विदेशी टीकों की मंजूरी पर बोले राहुल

नई दिल्ली। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने महात्मा गांधी के शब्दों में भाजपा नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों को जवाब दिया है। अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ और डब्लुएचओ से मान्यता प्राप्त वैक्सीन को भारत में इस्तेमाल की मंजूरी दिए जाने के बाद राहुल ने तंज करते हुए कहा कि आखिरकार वे सही साबित हुए। गौरतलब है कि राहुल कई दिनों से इसकी मांग कर रहे थे कि विदेशी वैक्सीन को मंजूरी दी जाए। नौ अप्रैल को जब उन्होंने यह बात कही थी तब केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद और स्मृति ईरानी ने उनको दवा कंपनियों का दलाल कहा था। लेकिन 13 अप्रैल को भारत सरकार ने विदेशी वैक्सीन के भारत में इस्तेमाल की मंजूरी दे दी। केंद्र के इस फैसले के बाद राहुल गांधी ने केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा नेताओं पर तंज किया। उन्होंने महात्मा गांधी के एक चर्चित कथन को उद्धृत करते हुए ट्विट किया- पहले वे तुम्हारी अनदेखी करेंगे, फिर तुम्हारा मजाक उड़ाएंगे, फिर वे तुमसे लड़ेंगे, फिर तुम जीत जाओगे। इसके साथ राहुल गांधी ने विदेशी वैक्सीन को मंजूरी देने की प्रक्रिया की खबर भी ट्विट के साथ शेयर की है।

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