साहेब तुम्हारे रामराज में..

सन् इक्कीस का राजा… महाबली, महा भाग्यवान। पर क्या सचमुच? राजा का भाग्य तो प्रजा का सुख होता है। राजा भाग्यवान होता तो भला वह हेडलाइन बनवाने में क्यों खपा होता?  क्यों राजा को लंगूरों की फौज की जरूरत होती? क्यों वह आंकड़े बनवाते हुए होता? राजा का भाग्य प्रजा से है, प्रजा का भाग्य… Continue reading साहेब तुम्हारे रामराज में..