उफ! हिंदुओं की जासूसी, उन्हें भयाकुल बनाना

आप दुनिया में ढूंढे भी तो ऐसे किसी प्रजातंत्र को नहीं खोज पाएंगे, जहां बहुसंख्यक आबादी इतनी भयाकुल और डरी हुई बना दी गई है, जैसे भारत के हिंदुओं को बनाया गया है। भारत का हर समझदार, मायने रखने वाला भारतीय आज इस भय से जीता हुआ है कि फोन बदलते रहो।

इतनी जासूसी भला क्यों जरूरी है?

ऐसा क्यों है कि सरकार के वरिष्ठ मंत्री, अधिकारी, पत्रकार, वकील आपस में फोन पर बात करने से कतरा रहे हैं? क्यों जिससे फोन करें वह सिगनल या टेलीग्राम ऐप पर बात करना चाहता है? जिससे पता चलता है कि समभाव से सबकी जासूसी कराई गई है।

जांच तो निश्चित होनी चाहिए

यह मान कर शुरू करते हैं कि भारत सरकार ने इजराइल की संस्था एनएसओ से जासूसी का सॉफ्टवेयर पेगासस नहीं खरीदा है। भारत की किसी खुफिया या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी एजेंसी ने भी यह सॉफ्टवेयर नहीं खरीदा है।

पेगासस टिप ऑफ आइसबर्ग है

भारत में फोन टेप कराने, सहयोगियों-विरोधियों की जासूसी कराने, अधिकारियों-पत्रकारों पर निगरानी कराने का पुराना इतिहास है। दशकों से सरकारें यह काम करती आ रही हैं।

Pegasus Spyware: संसदीय समिति में उठेगा पेगासस का मामला

संसद की सूचना प्रद्योगिकी मंत्रालय की संसदीय समिति में यह मुद्दा उठाया जाएगा और अधिकारियों से पूछताछ की जाएगी। इस संसदीय समिति के प्रमुख कांग्रेस नेता शशि थरूर हैं। थरूर ने 28 जुलाई को संसदीय समिति की बैठक बुलाई है, जिसमें इस मसले पर बातचीत होगी।