आंसुओं को संभालिए साहेब!

अगर आपके आंसू दूसरों के लिए नहीं हैं तो फिर माफ कीजिएगा उन आंसुओं का कोई मतलब नहीं है। अपनी तकलीफ में तो जानवर भी आंसू बहाते हैं और दिखावे के लिए आंसू बहाने का कारोबार बहुत से लोग करते हैं। प्रधानमंत्री के ऐसे भाषण भी हैं, जिनमें वे रोते रहने वालों का मजाक उड़ाते… Continue reading आंसुओं को संभालिए साहेब!