महापुरुषों का चुनावी मुद्दों में बदलना

यह भारत का दुर्भाग्य है कि देश के सारे महापुरुष अब एक पार्टी के राजनीतिक एजेंडे को पूरा करने का माध्यम बन गए हैं।