स्टालिन ने रजनीकांत पर साधा निशाना

द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम अध्यक्ष एम. के. स्टालिन ने रविवार को अभिनेता रजनीकांत के राजनीति में प्रवेश करने के फैसले पर टिप्पणी की और कहा कि कुछ लोगों ने राज्य में चार-पांच महीने बाद

राजस्थान में माकपा का जनाधार खिसका

राजस्थान में सीकर से जयपुर तक की राजनीति में माक्र्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी (माकपा) को काॅमरेड़ अमराराम ने एक अहम मुकाम पर पहुंचाया लेकिन धीरे-धीरे माकपा का जनाधार खिसकता ही गया।

क्या राजनीति में रजनीकांत चलेगें?

नेताओं व अभिनेताओं का शुरु से गहरा संबंध रहा है। जब दक्षिण भारत की बात आती है तो पूछना ही क्या। पहले नेताओं का आम तौर पर प्रचार कर खबरों में आने वाले अभिनेता थे।

बिहार की राजनीति से ‘गायब’ हुए तेजस्वी, विरोधियों ने साधा निशाना

बिहार की सियासत से कुछ दिनों से अनुपस्थित रहने के कारण राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव एक बार फिर से विरोधियों के निशाने पर आ गए हैं।

ओवैसी सपा के लिए खड़ी कर सकते है मुश्किलें!

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अभी करीब 15 माह का समय है। लेकिन प्रदेश के अलावा दूसरे राज्यों के सियासी दल यहां की राजनीति में अपने भविष्य की संभावनाओं पर सक्रिय हो गए हैं।

कमलनाथ की संन्यास की इच्छा क्यों जगी?

हाल तक तो पार्टी आलाकमान के सामने इस बात की लॉबिंग करते घूम रहे थे कि उनको ही विधायक दल का नेता रहने दिया जाए और प्रदेश अध्यक्ष भी उन्हें ही रहने दिया।

क्या रजनीकांत से राजनीति बदलेगी?

दक्षिण भारत की राजनीति में क्या अब परिवर्तन आएगा? अभी तक कर्नाटक को छोड़कर भारतीय जनता पार्टी की आंधप्रदेश, तेलंगाना, केरल और तमिलनाडु में उपस्थिति अभी बहुत सीमित है

नेहरू से आगे निकल गए आखिर मोदी!

जैसे अमेरिका के हर राष्ट्रपति की ख्वाहिश अब्राहम लिंकन बनने की होती है उसी तरह भारत के हर प्रधानमंत्री की इच्छा होती है कि वह पंडित जवाहर लाल नेहरू के जैसा हो जाए

तीसरे मोर्चे की राजनीति संभव नहीं!

क्या भारत में अब भी तीसरे मोर्चे की राजनीति की संभावना है और अगर है तो वह राजनीति कैसे होगी? भारत में इससे पहले जब भी तीसरे मोर्चे की सफल राजनीति हुई है तो वह अनायास हुई है।

पार्टी बना कर राजनीति में उतरेंगे रजनीकांत

तमिल फिल्मों के सुपरस्टार रजनीकांत ने अंतत: तमाम अटकलों को विराम देते हुए आज कहा कि वह आगामी जनवरी में अपनी स्वयं की पार्टी के जरिए सक्रिय राजनीति में आयेंगे और अगला विधानसभा चुनाव लड़ेंगे।

पृथक पहचान की राजनीति घातक

एआईएमआईएम के जीतकर आए विधायकों ने शुरुआत में ही अपने रंग दिखाने प्रारंभ कर दिए हैं। उन्हें वंदे मातरम बोलने और गाने से तो परहेज़ था ही, अब विधानसभा के शपथ-ग्रहण-समारोह में हिंदुस्तान बोलने से भी है

वैक्सीन पर राजनीति कौन कर रहा है?

यह कमाल भारत के प्रधानमंत्री ही कर सकते हैं। उनकी पार्टी ने सबसे पहले कोरोना वैक्सीन को राजनीति का मुद्दा बनाया।

मोदी ने गांधी-नेहरू परिवार पर निशाना साधा

लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने बुधवार को परोक्ष रूप से गांधी-नेहरू परिवार पर निशाना साधते हुए कहा कि रायबरेली स्थित रेल कोच कारखाने में तो निवेश वर्षों पहले हुआ था लेकिन बड़ी-बड़ी घोषणाओं के बाद भी वहां कई वर्षों तक सिर्फ डेंटिंग-पेंटिंग का ही काम होता था जबकि वहां पहला कोच बनकर 2014 के बाद… Continue reading मोदी ने गांधी-नेहरू परिवार पर निशाना साधा

महाराष्ट्र में भाजपा का क्या दांव ?

महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी क्या ऑपरेशन कमल की तैयारी कर रही है? ठीक एक साल पहले मुंबई में गजब खेल हुआ था।

धर्म की राजनीति करना देश के लिये खतरा: हार्दिक

गुजरात कांग्रेस के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष हार्दिक पटेल ने कहा है कि हिन्दू- मुसलमान के नाम पर राजनीति करना देश के लिये खतरा है।

मुकुल राय काम पर लगे हैं

भारतीय जनता पार्टी ने कई साल पहले जिस काम के लिए मुकुल राय को पार्टी में शामिल कराया था, वह काम करने का समय आ गया है।

नीतीश की ताकत घटी, सुशील मोदी बाहर

भाजपा ने पहला मौका मिलते ही बिहार की राजनीति से सुशील कुमार मोदी को बाहर कर दिया। असल में प्रदेश भाजपा के कई ऐसे नेता तो पार्टी आलाकमान के करीबी माने जाते हैं वे बरसों से इस समय के इंतजार में थे

मोदी ने क्यों किया इतना बड़ा शो?

बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चुनावी जीत पर बड़ा शो नहीं कर रहे हैं। उन्होंने शपथ समारोह भी बहुत छोटा रखा। उससे पहले भी कोई विजय रैली या जुलूस नहीं निकाला गया।

नड्डा की चौतरफा जय जयकार

बिहार विधानसभा के चुनाव और 11 राज्यों में हुए उपचुनावों के नतीजों से पहले जेपी नड्डा की प्रतिष्ठा और उनकी राजनीतिक काबिलियत दांव पर लगी थी।

भाजपा की इस जीत के क्या मायने?

बिहार में अधिकांश एग्जिट/ओपीनियन पोल के अनुमानों को धता बताकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने बिहार में पूर्ण बहुमत प्राप्त कर लिया।

मंडल के साए में आखिरी चुनाव?

तो क्या यह माना जाए कि बिहार में इस बार हुआ विधानसभा का चुनाव मंडल राजनीति के साए में हुआ आखिरी चुनाव है और पोस्ट मंडल राजनीति शुरू हो गई है

बिहार में आसान नहीं होगा सरकार बनाना!

बिहार में एनडीए चुनाव जीत तो गया है और सरकार भी बन जाएगी पर इस बार यह काम आसान नहीं होगा। इसके कई कारण हैं। पहला कारण यह है कि भाजपा और जदयू दोनों को मिला कर 117 सीटें हैं

राजद हार मानने को तैयार नहीं

बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के तीसरे दिन गुरुवार को राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव मीडिया से मुखातिब हुए और दावा किया कि उनकी पार्टी चुनाव हारी नहीं है, बल्कि उसे हरवाया गया है।

बिहार की छोटी पार्टियों का भविष्य दांव पर

बिहार में दर्जनों की संख्या में छोटी पार्टियां हैं। बिहार प्रदेश के तमाम छोटे-बड़े नेताओं ने अपनी पार्टी बना ली है और कोई न कोई बड़ा दल उनको अपने साथ जोड़ कर उनको इतने वोट या सीटें दिलवा देता है कि उनकी राजनीति चलती रहती है।

कांग्रेस की उपयोगिता कम नहीं होगी!

बिहार विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा नुकसान जनता दल यू को हुआ है पर कांग्रेस भी कम घाटे में नहीं रही है। उसकी परफारमेंस इस बार बहुत खराब हुई है।

अमेरिका पर सोचे या बिहार पर?

वक्त ने बुद्धी की कुल्फी जमा दी है। दुनिया का हर विवेकशील, समझदार, अक्लमंद, बुद्धीमान यह सोचते हुए मानसिक रोडब्लॉक, फुलस्टॉप पर होगा कि और सोचने को क्या

अच्छा हुआ जो सीएम नहीं बने तेजस्वी!

सबसे कम उम्र का मुख्यमंत्री बनने का रिकार्ड बनाने की उम्मीद लगाए तेजस्वी यादव को यह बात सुनने में अच्छी नहीं लगेगी, कि कोई उनसे कहे कि अच्छा हुआ जो वे सीएम नहीं बने।

बिहार: फिर से नीतीशे कुमार!

बिहार के चुनाव नतीजों में हेरफेर के राष्ट्रीय जनता दल के आरोपों में कितनी सच्चाई है, यह तो अब शायद ही कभी पता चलेगा। लेकिन अनेक सीटों पर संदिग्ध परिस्थितियों में चुनाव परिणाम घोषित किए गए, यह बात बहुत साफ है।

भाजपा के लिए आसान नहीं होगा बिहार

बिहार चुनाव में पहली बार ऐसा हुआ है कि कंट्रोल भारतीय जनता पार्टी के हाथ में रहा। चुनाव का एजेंडा भले तेजस्वी यादव ने सेट किया पर भाजपा ने उस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया।

बिहार में सामाजिक सुधार का एजेंडा चला!

इस बात की कई तरह की व्याख्या होगी कि आखिर बिहार में कौन सा मुद्दा चला, क्या हिट रहा और क्या फ्लॉप हुआ। सोशल मीडिया में मजाक चल रहा है कि बिहार के लोगों ने नौकरी से ऊपर कोरोना की वैक्सीन को चुना।