केंद्र सरकार ने कोरोना में जान गंवाने वाले पत्रकारों के 67 परिवारों को पांच—पांच लाख देने का अभियान शुरू किया

नई दिल्ली | केंद्र सरकार ने कोरोना में जान गंवाने वाले पत्रकारों के 67 परिवारों को पांच—पांच लाख देने का अभियान शुरू किया. प्रत्येक परिवार को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की पत्रकार कल्याण योजना के तहत 5 लाख रुपये मिलेंगे। समिति ने आवेदनों की मंजूरी जल्‍द सुनिश्चित करने के लिए हर सप्ताह जेडब्ल्यूएस की बैठकें आयोजित करने का निर्णय लिया। सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के मार्गदर्शन में सूचना और प्रसारण मंत्रालय एवं पत्र सूचना कार्यालय ने स्वत: संज्ञान लेते हुए वर्ष 2020 और वर्ष 2021 में महामारी के कारण अपनी जान गंवाने वाले पत्रकारों के विवरणों को संकलित व एकत्रित किया था और पत्रकार कल्याण योजना के तहत उनके परिवारों को सहायता प्रदान करने के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया। इसके तहत कोविड-19 के कारण अपनी जान गंवाने वाले 26 पत्रकारों के परिवारों में से प्रत्येक परिवार को 5 लाख रुपये की वित्तीय राहत प्रदान की जाएगी। ये भी पढ़ें:- अमेरिकी सरकार का अनोखा ऑफर, कोरोना वैक्सीन लगवाइये और करोड़ों के मालिक बन जाइये.. केंद्र सरकार ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में सचिव अमित खरे की अध्यक्षता में पत्रकार कल्याण योजना समिति के एक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। वित्त वर्ष 2020-21 में केंद्र सरकार ने कोविड के कारण… Continue reading केंद्र सरकार ने कोरोना में जान गंवाने वाले पत्रकारों के 67 परिवारों को पांच—पांच लाख देने का अभियान शुरू किया

अनपढ़ बनाए रखने की साजिश!

नई शिक्षा नीति में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हुई है कि कक्षा पांच तक मातृभाषा या स्थानीय भाषा में बच्चों को पढ़ाया जाए। यानी शिक्षा की माध्यम भाषा बच्चों की मातृभाषा हो या स्थानीय भाषा हो। यह कोई नई बात नहीं है।

नीति से नहीं नीयत से सुधरेगी शिक्षा

लंबे इंतजार के बाद नई शिक्षा नीति का मसौदा सरकार ने मंजूर किया। अब इस नीति के आधार पर सरकार कानून बनाएगी और जहां जरूरी होगा वहां पुराने कानूनों को बदला जाएगा।

इरादे अच्छे हैं, मगर…

नई शिक्षा नीति की जरूरत थी, इस पर कोई मतभेद नहीं हो सकता। 34 साल में देश की स्थिति और जरूरतें बदल जाती हैं, यह आम समझ है।

राज्यों में नई शिक्षा नीति का विरोध

कई राज्य सरकारों ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का विरोध शुरू कर दिया है। जैसा कि हिंदी या भाषा का मामला आते ही सबसे पहले तमिलनाडु में विरोध होता है, वैसा ही इस शिक्षा नीति का पहला विरोध तमिलनाडु में हुआ है

दोमुंही शिक्षाः इंडिया और भारत

नई शिक्षा नीति बनाकर सरकार ने सराहनीय कार्य किया है लेकिन ऐसा करने में उसने छह साल क्यों लगा दिए ? उसके छह साल लग गए याने शिक्षा के मामले में उसका दिमाग बिल्कुल खाली था ? शून्य था ?

नई शिक्षा नीतिः कुछ नई शंकाएं

नई शिक्षा नीति में मातृभाषाओं को जो महत्व दिया गया है, कल मैंने उसकी तारीफ की थी लेकिन उसमें भी मुझे चार व्यावहारिक कठिनाइयां दिखाई पड़ रही हैं।

नई शिक्षा नीतिः कुछ प्रश्न

नई शिक्षा नीति का सबसे पहले तो इसलिए स्वागत है कि उसमें मानव-संसाधन मंत्रालय को शिक्षा मंत्रालय नाम दे दिया गया।

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