यह संविधान ताक पर रखना

इस्लामी देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में प्रताड़ित हिन्दू, जैन, सिख, ईसाई, बौद्ध और पारसियों को भारत में शरण देने तथा नागरिकता प्रदान करने के लिए लागू किए गए नागरिकता संशोधन कानून 2019 के विरोध में राजनीतिक दलों और मुस्लिम संगठनों ने संविधान को भी ताक पर रख दिया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने तो असम में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) लागू करने से पहले ही होहल्ला मचाना शुरु कर दिया था। अपने नेताओं को असम में अशांति फैलाने के लिए भेजा। इतना ही नहीं ममता बनर्जी ने तो नागरिकता संशोधन कानून पर जनमत संग्रह कराने के लिए विदेशी हस्तक्षेप को भी आमंत्रण दे दिया। ममता ने कहा था कि संयुक्त राष्ट्र नागरिकता संशोधन कानून पर जनमत संग्रह कराए। यह अलग बात है कि संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने एंटोनियो गुतेरस ने ममता की मांग को नकारते हुए कहा कि केवल राष्ट्रीय सरकार के अनुरोध पर ही जनमत संग्रह कराया जाता है। अपनी मांग खारिज होने पर ममता बनर्जी ने भी बयान पर पलटी मार ली। अब वे कह रही है कि उन्होंने तो ओपिनियन पोल कराने की बात कही थी। ममता के पलटी मारने के बाद संसद और बाहर अपने अनाप-शनाप… Continue reading यह संविधान ताक पर रखना

नागरिकताः मोदी थोड़ी हिम्मत करें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज रामलीला मैदान में जो भाषण दिया, यदि वे उसकी भावना पर ठीक से अमल करें तो आज देश में जो उपद्रव हो रहा है वह बंद हो जाएगा। वह होता ही नहीं। आज भी वह बंद हो सकता है, बशर्ते कि वे नागरिकता संशोधन विधेयक को अपने भाषण के अनुरुप बना लें।उन्होंने कहा कि हम देश की किसी भी जाति, मजहब, संप्रदाय और वर्ग के विरुद्ध नहीं हैं। हमने दिल्ली की सैकड़ों कालोनियां वैध कीं, करोड़ों लोगों को गैस कनेक्शन दिए और सार्वजनिक हित के जितने भी काम किए, क्या कभी उससे उसकी जाति या धर्म पूछा ? इसमें शक नहीं कि यह बात ठीक है लेकिन क्या भारत की कोई सरकार जाति या धर्म के आधार पर भेदभाव करे तो उसका कुर्सी पर टिके रहना असंभव नहीं हो जाएगा? यह जो नागरिकता संशोधन कानून सरकार ने बनाया है, इसका दोष यही है कि इसमें धार्मिक आधार पर स्पष्ट भेदभाव है। यह तो बहुत अच्छा है कि कुछ पड़ौसी मुस्लिम देशों के हिंदू, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध और पारसी लोगों को, यदि वे उत्पीड़ित हैं तो उन्हें शरण देने की घोषणा भारत सरकार ने की है।ऐसा करके सरकार ने गांधी, नेहरु, मनमोहनसिंह और अशोक गहलौत… Continue reading नागरिकताः मोदी थोड़ी हिम्मत करें

क्या झुक रही है सरकार?

इस बीच सरकार और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी आम-जन के आक्रोश को शांत करने के लिए कुछ कदम उठा रही हैं। 19 दिसंबर को केंद्र सरकार ने अखबारों में नागरिकता संशोधन अधिनियम के बारे में कथित गलत सूचना पर बड़े बड़े विज्ञापन निकाले। 20 दिसंबर को सरकार की तरफ से एक ऐसा बयान आया, जिस से लगा कि सरकार कम से कम नागरिकों के रजिस्टर को लेकर थोड़ी नरम हो रही है। गृह राज्य मंत्री जीके रेड्डी ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर यह रजिस्टर बनाने की अभी कोई योजना नहीं है। सरकार की नरमी का एक और संकेत असम से भी आया, जहां मुख्यमंत्री सर्बानंदा सोनोवाल ने प्रदर्शनकारियों को बातचीत के लिए आमंत्रण दिया। भाजपा के 12 विधायकों के उनसे मिलने की भी खबर आई। विधायकों ने उनसे कहा कि वे इस संकट को समाप्त करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मनाएं। एक मीडिया हाउस की खबर के मुताबिक कर्नाटक सरकार ने एनआरसी लागू ना करने का फैसला किया है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार पहले ही ऐसा एलान कर चुके हैं। पश्चिम बंगाल और केरल जैसी विपक्षी सरकारें एनआरसी और नागरिकता संशोधन कानून के मामले में ऐसा इरादा पहले ही जता चुकी हैं। राजस्थान और छत्तीसगढ़ के… Continue reading क्या झुक रही है सरकार?

देखो, बूझो भावी भारत की फोटो!

पता नहीं नरेंद्र मोदी-अमित शाह, भाजपा, संघ ने गुजरे सप्ताह भावी भारत की तस्वीरों को बूझा या नहीं? हां, पांच-दस-बीस साल बाद भारत के जिलों, शहरों में वहीं लगातार हुआ करेगा जैसा हाल में दिल्ली, लखनऊ, मुंबई, कोलकाता, आदि उन दर्जनों जगह दिखा है, जहां नमाजी टोपी- दाढ़ी याकि वह विशेष पहनावे वाली आबादी है, जिसका संकेत देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक जनसभा में कहा था कि नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करने वालों को उनके पहनावे से जानो। तभी संभव है कि गुरुवार की तस्वीरों में खास पहनावे की भीड़ देख मोदी-शाह मन ही मन उछले हों कि वाह, मुसलमान अब सड़कों पर है तो हमारे हिंदू वोट और पक्के। बन रहा है 2024 में जीत का पक्का रोडमैप! बावजूद इसके संभव है कि मोदी-शाह-योगी के दिमाग में भी ख्याल आया हो कि ऐसा यदि भारत में नियमितता से होने लगा, विरोध-प्रदर्शनों ने यदि कश्मीर घाटी वाली दशा को भारत के महानगरों में लाइव बनवा दिया तो आगे क्या होगा? दिल्ली में मंगलवार-बुधवार को जो हुआ और जामिया नगर सीलमपुर, जाफराबाद आदि में पत्थरबाजी, उपद्रव, पुलिस ठुकाई की श्रीनगर जैसी जो तस्वीरें बनीं तो सोचना जरूरी है कि दिल्ली के तुर्कमान गेट के अंदर की पुरानी दिल्ली… Continue reading देखो, बूझो भावी भारत की फोटो!

नागरिकता कानून और संघवाद का संकट

शशांक राय– प्रधानमंत्री बनने के बाद से नरेंद्र मोदी ने सबसे ज्यादा बार सहकारी संघवाद का जिक्र किया होगा। जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री होते थे तब भी वे देश के संघीय ढांचे को लेकर सबसे ज्यादा चिंतित रहते थे। तब की मनमोहन सिंह की सरकार जब भी कोई नई नीति लाती थी तो नरेंद्र मोदी उसे भारत के संघीय ढांचे की कसौटी पर कसते थे। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने इसी कसौटी पर जीएसटी से लेकर एनसीटीसी तक की व्यवस्था का विरोध किया था। वे उस समय के तमाम विपक्षी मुख्यमंत्रियों को एकजुट करते थे और केंद्र के ऊपर दबाव बनाते थे। पर अफसोस की बात है कि जब से वे खुद प्रधानमंत्री बने हैं तब से यह संघीय ढांचा ही सबसे ज्यादा चुनौतियां झेल रहा है। अभी केंद्र सरकार ने नागरिकता कानून को संशोधित किया है। यह केंद्र के अधिकार का विषय था और संसद में केंद्र सरकार के पास बहुमत का आंकड़ा है। इसलिए उसने संशोधन बिल पास करा कर नागरिकता कानून को बदल दिया। अब एक एक करके राज्यों की सरकारों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। पहले पश्चिम बंगाल सरकार ने कहा कि वह इस कानून को लागू नहीं करेगी। इसके बाद केरल सरकार ने… Continue reading नागरिकता कानून और संघवाद का संकट

मुस्लिमों को मोदी ने दिया भरोसा

नई दिल्ली। संशोधित नागरिकता कानून पर देश भर में चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार चुप्पी तोड़ी। उन्होंने देश भर के मुसलमानों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि उनको किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि एनआरसी का कोई प्रस्ताव अभी सरकार के सामने नहीं है और न इस पर कोई चर्चा हुई है। मोदी ने प्रदर्शन कर रहे नौजवानों से कहा कि वे उनका जितना विरोध करना चाहें, करें पर सरकारी संपत्ति को नुकसान न पहुंचाएं और गरीब आदमी का ऑटो न चलाएं। उन्होंने कांग्रेस पर भी निशाना साधा और कहा कि मुस्लिम देशों से मिल रहे समर्थन की वजह से कांग्रेस परेशान है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा- नागरिकता कानून से कोई प्रभावित नहीं हो रहा है। उन्होंने विरोध करने वालों को शहरी नक्सली बताते हुए कहा- कुछ अर्बन नक्सल झूठ फैला रहे हैं। आप लोग पढ़े-लिखे हो, पहले इसे पढ़ तो लो। इस कानून से किसी भी मुस्लिम को डिटेंशन सेंटर में नहीं रहना होगा। भारत में डिटेंशन सेंटर हैं कहां? ये लोग झूठ बोल कर देश को गुमराह कर रहे हैं। आप लोग इनके बहकावे में न आओ। दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित… Continue reading मुस्लिमों को मोदी ने दिया भरोसा

मुसलमानों से नाइंसाफी नहीं: गडकरी

नागपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को नई दिल्ली में भाजपा की रैली में नागरिकता कानून को लेकर देश के मुसलमानों को भरोसा दिलाया तो केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने नागपुर में एक रैली में उसी अंदाज में मुसलमानों को भरोसा दिलाया। गडकरी ने शनिवार को हुई रैली में कहा कि नागरिकता कानून भारत के मुसलमानों के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि नया कानून लाकर एनडीए सरकार मुसलमानों के साथ कोई नाइंसाफी नहीं कर रही है। गडकरी ने कांग्रेस पर वोट बैंक की राजनीति के लिए दुष्प्रचार करने का भी आरोप लगाया। नागरिकता कानून के समर्थन में निकाली गई रैली को संबोधित करते हुए गडकरी ने मुसलमानों को भरोसा दिलाया। इस रैली का आयोजन एक स्थानीय संगठन ने किया, जिसे भाजपा और राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ का समर्थन प्राप्त है। गडकरी ने कहा- अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के धार्मिक अल्पसंख्यकों को इंसाफ देने के लिए सरकार द्वारा लिया गया यह फैसला भारत के मुसलमानों के खिलाफ नहीं है। हम मुसलमानों को देश से बाहर भेजने की बात नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की एकमात्र चिंता देश में रह रहे विदेशी घुसपैठियों की है। मंत्री ने कहा कि मुसलमानों को समझना चाहिए कि कांग्रेस उनके विकास में मदद… Continue reading मुसलमानों से नाइंसाफी नहीं: गडकरी

इस आंदोलन से मोदी-शाह के मजे!

उन्नीस जनवरी को नागरिकता कानून के खिलाफ उत्तर प्रदेश के शहरों, देश के विभिन्न महानगरों में जो विरोध, प्रदर्शन, आंदोलन हुआ वह विपक्ष के लिए आत्मघाती है। बतौर प्रमाण उस शाम योगी आदित्यनाथ का हुंकारा था कि उपद्रवियों को देख लेंगे। उनके चेहरे वीडियो में रिकार्डेड हैं। जो नुकसान हुआ है वह उनसे वसूलेंगे। मतलब मुख्यमंत्री के चेहरे पर घबराहट, परेशानी, कानून-व्यवस्था बिगड़ने का गम नहीं था, पुलिस पर गुस्सा नहीं था, बल्कि उपद्रवियों को मजा चखाने का निश्चय था। अब यह बताने की जरूरत नहीं है कि लखनऊ या संभल जैसे शहरों में उस दिन जो उपद्रव हुआ तो भीड़ का इलाका और चेहरे कौन थे? और ध्यान रहे योगी की तरह टीवी पर ऐसे असम के मुख्यमंत्री सोनोवाल ने कड़ा रूख नहीं दर्शाया जबकि असम में हिंसा भी हुई, लोग भी मरे, भाजपा विधायकों-मंत्रियों के घर पत्थर फेंके गए और कई इलाकों में सब कुछ ठप्प है! सो, नागरिकता कानून पर अखाड़ा सज गया है। एक तरफ सेकुलर, उसका झंडाबरदबार विपक्ष और मुसलमान है तो दूसरी और वे मोदी-शाह-योगी हैं, जिनसे हिंदू घरों में मैसेज गया है कि देखो-देखो विरोध-प्रदर्शन करने वालों के चेहरों को, उनके पहनावे को। ये मुसलमान हैं, जिहादी, अलगाववादी-माओवादी हैं। जाहिर है जो है… Continue reading इस आंदोलन से मोदी-शाह के मजे!

उफ! विपक्ष का रूमानीपना

तमाम सेकुलर खुश हैं। विपक्ष के सभी नेता विरोध-आंदोलन की फुटेज, नैरेटिव से बम-बम हैं। ये सब मुगालते में हैं कि मोदी-शाह के खिलाफ माहौल बन रहा है। जाहिर है विपक्ष में यह तनिक भी विचार नहीं हुआ है कि गृह मंत्री अमित शाह तीन तलाक, अनुच्छेद 370, अयोध्या में मंदिर, नागरिकता कानून में संशोधन और एनआरसी के काम को एक-एक कर आगे बढ़ा रहे है तो ऐसा किसी रोडमैप, सियासी शतरंज में ही हो रहा होगा और इसका राजनैतिक अर्थ क्या है? क्या यह नहीं सोचा जाना चाहिए कि क्यों अमित शाह लगातार वह कर रहे हैं, जिसमें प्रत्यक्ष-परोक्ष हिंदू बनाम मुसलमान बहस, विवाद, नैरेटिव और चिंता सतत पकती जाए! हिसाब से यह सब ढर्रे में है। यहीं मोदी-शाह की मूल पूंजी है। कांग्रेस-लेफ्ट-सेकुलर सबको सन् 2014 से पहले के अनुभव से समझा हुआ होना था कि नरेंद्र मोदी का ग्राफ तब बनता जाता है जब हिंदू बनाम मुस्लिम चलता रहता है। जब दंगा, झगड़ा और मुसलमानों के साथ भेदभाव का हल्ला हो। इसे न समझ पाना विपक्ष का वह रूमानीपना है, जिसमें आज के भारत को वह सन् 2014 से पहले वाला समझे हुए है। मतलब हम सन् 2014 से पहले वाले लोकतंत्र में, उसकी सेकुलर तासीर में… Continue reading उफ! विपक्ष का रूमानीपना

संविधान की लड़ाई का मुगालता

कांग्रेस पार्टी ने अपने मुख्यमंत्रियों से कहा है कि वे नागरिकता कानून के विरोध में सड़क पर उतरें और प्रदर्शन करें। सो, उसके मुख्यमंत्री 28 दिसंबर को संविधान बचाओ मार्च कर रहे हैं। यह सिर्फ कांग्रेस पार्टी नहीं है, जिसको यह मुगालता है कि केंद्र सरकार के हिंदुवादी राष्ट्रवाद के एजेंडे को वह संविधान बचाने के नाम पर काउंटर कर लेगी। कांग्रेस की तरह समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, वामपंथी पार्टियां, डीएमके आदि सबको यह भ्रम है कि संविधान बचाने के नाम पर देश की जनता उनके साथ खड़ी होगी और भाजपा के एजेंडे को फेल कर देगी। इससे जाहिर हो रहा है कि देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी से लेकर तमाम प्रादेशिक क्षत्रपों की नजदीकी और दूर की नजर दोनों खराब हो गए हैं। वे न तो निकट भविष्य का खतरा बूझ पा रहे हैं और भविष्य में आने वाली चुनौती को देख पा रहे हैं। यहीं कारण है कि ऐसे समय में भी बहुजन समाज पार्टी को लग रहा है कि उसे कांग्रेस के साथ नहीं जाना चाहिए। सपा को लग रहा है कि उसको बसपा के साथ नहीं जाना चाहिए। सीपीएम और सीपीआई को लग रहा है कि उन्हें तृणमूल कांग्रेस के साथ… Continue reading संविधान की लड़ाई का मुगालता

सवाल पुलिस के रवैये का

नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों में पुलिस और सुरक्षा बलों की भूमिका पर कई गहरे सवाल उठे हैं। दिल्ली के जामिया मिल्लिया में विशेष रूप से दिल्ली पुलिस के खिलाफ जरूरत से ज्यादा बल इस्तेमाल करने और सख्ती से पेश आने के आरोप लगे। अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय में जामिया से भी पहले विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे। वहां से भी पुलिस के लाठीचार्ज करने और आंसू गैस का प्रयोग करने की खबरें आई थीं। बताया जा रहा है कि वहां पुलिस कार्रवाई में कम से कम 60 लोग घायल हुए। पूर्वोत्तर के राज्यों में भी प्रदर्शनों को खत्म करने के लिए पुलिस की ओर से अत्यधिक बल-प्रयोग किया गया। बताया जाता है कि वहां पुलिस ने गोलियां भी चलाईं। दिल्ली के ही सफदरजंग अस्पताल के अधिकारियों ने कहा कि जामिया में पुलिस की कार्रवाई में घायल हुए जिन छात्रों को लाया गया, उनमें से दो के शरीर पर गोली लगने के घाव हैं। दिल्ली पुलिस ने इससे पहले गोली चलाने के आरोपों से साफ इंकार कर दिया था। उधर दिल्ली पुलिस ने 10 लोगों को हिरासत में भी लिया, पर उनमें से एक भी छात्र नहीं निकला। इस से सवाल यह उठ रहा है कि… Continue reading सवाल पुलिस के रवैये का

पीड़ित कौन, अल्पसंख्यक कौन?

जैसा असम, त्रिपुरा और बंगाल की घटनाओं ने फिर दिखाया – भारत में हिन्दू समाज बहुसंख्यक की तरह न रहता है, न सोचता है। नागरिकता कानून पर सब से पहला विरोध उन्होंने ही किया। यह कोई अपवाद घटना नहीं है। महाराष्ट्र में शिव सेना ने भी इस का विरोध किया, जो भाजपा से भी प्रखर हिन्दूवादी मानी जाती रही है। यह भी नोट करना चाहिए कि कांग्रेस, सपा, बसपा, कम्युनिस्ट पार्टियाँ भी मूलतः हिन्दुओं से भरी पार्टियाँ हैं। उन में कहने को इक्का-दुक्का मुसलमान हैं। मजे की बात कि इस विडंबना को एक बार स्वयं सुप्रीम कोर्ट ने भी नोट किया। बाल पाटिल तथा अन्य बनाम भारत सरकार (2005) मामले में निर्णय देते हुए न्यायाधीशों ने स्पष्ट लिखा, “ ‘हिन्दू’ शब्द से भारत में रहने वाले विभिन्न प्रकार के समुदायों का बोध होता है। यदि आप हिन्दू कहलाने वाला कोई व्यक्ति ढूँढना चाहें तो वह नहीं मिलेगा। … भारतीय समाज में लोगों का कोई हिस्सा या समूह बहुसंख्यक होने का दावा नहीं कर सकता। हिन्दुओं में सभी अल्पसंख्यक हैं।”  मगर दुर्भाग्य! सुप्रीम कोर्ट ने भी इस अल्पसंख्यक के लिए कुछ न किया। यह कोई बढ़ा-चढ़ा कर कही बात नहीं। बल्कि गंभीर सचाई है हिन्दू न केवल दुनिया में, बल्कि भारत… Continue reading पीड़ित कौन, अल्पसंख्यक कौन?

दिल्ली में कश्मीर जैसे हालात

नई दिल्ली। गुरुवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के हालात कश्मीर जैसे बन गए। कई इलाकों में इंटरनेट बंद करना पड़ा और 20 से ज्यादा मेट्रो स्टेशन करीब पूरे दिन बंद रहे। कई इलाकों में सड़कें बंद रहीं और लोग जाम में फंसे रहे। दिल्ली-गुड़गांव हाईवे पर गुरुवार को दस किलोमीटर लंबा जाम लगा रहा। नागरिकता कानून के विरोध में उतरे लोगों की जगह जगह पर पुलिस के साथ झड़प हुई और लोगों को हिरासत में लिया गया। दिल्ली में लाल किला, जामिया नगर, मंडी हाउस सहित कई इलाकों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुआ। इसकी वजह से राजीव चौक, मंडी हाउस सहित 20 से ज्यादा मेट्रो स्टेशन बंद करने पड़े। कई इलाकों में फोन, एसएमएस और इंटरनेट सेवाएं भी बंद करवा दी गईं। मोबाइल सेवा देने वाली कंपनियों ने बताया कि सरकार के निर्देश पर उन्होंने सेवा स्थगित की है। हाल के दिनों में यह संभवतः पहली बार हुआ है कि राष्ट्रीय राजधानी में संचार सेवाओं पर पाबंदी लगानी पड़ी। इससे पहले कश्मीर, असम, त्रिपुरा आदि जगहों पर संचार सेवाओं पर पाबंदी की खबरें थीं। गुरुवार को होने वाले प्रदर्शनों की वजह से दिल्ली में लाल किला क्षेत्र के आसपास धारा 144 लागू कर दी गई थी। निषेधाज्ञा का… Continue reading दिल्ली में कश्मीर जैसे हालात

अमित शाह ने बुलाई आपात बैठक

नई दिल्ली। संशोधित नागरिकता कानून के विरोध में देश भर में हिंसक विरोध प्रदर्शन के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार की शाम को एक आपात बैठक बुलाई। गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि अमित शाह के अलावा इस बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल भी शामिल हुए। इनके अलावा बैठक में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी और नित्यानंद राय भी शामिल हुए। केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला भी बैठक में शामिल हुए। उन्होंने और दूसरे अधिकारियों ने गुरुवार को देश भर में हुए विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा हालात के बारे में गृह मंत्री को जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि मौजूदा सुरक्षा स्थितियों की समीक्षा के लिए यह बैठक बुलाई गई थी। गौरतलब है कि नागरिकता कानून के विरोध में देश के हर हिस्से में गुरुवार को आंदोल हुए। वामपंथी पार्टियों ने गुरुवार को पूरे देश में विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया था। बहरहाल, इससे पहले, बुधवार शाम को प्रशासन ने दिल्ली, लखनऊ और बेंगलुरू में प्रदर्शन की इजाज़त देने से इनकार कर दिया था, जबकि मुंबई, चेन्नई, पुणे, हैदराबाद, नागपुर, भुवनेश्वर, कोलकाता और भोपाल में प्रदर्शनों पर कोई रोक नहीं लगाई गई थी। वहीं, मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में नागरिकता… Continue reading अमित शाह ने बुलाई आपात बैठक

अगस्त क्रांति मैदान में जुटे हजारों लोग

मुंबई। नागरिकता कानून के विरोध में देश की वित्तीय राजधानी मुंबई में गुरुवार की शाम को हजारों लोग सड़क पर उतरे। करीब 70 संगठनों के लोगों ने विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। मुंबई के ऐतिहासिक अगस्त क्रांति मैदान में हुए इस प्रदर्शन में कई फिल्मी सितारों और फिल्मकारों ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने पूरे प्रदर्शन को अराजनीतिक बनाए रखा। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने शिक्षण संस्थानों में और छात्रों के ऊपर हुई पुलिस कार्रवाई का भी विरोध किया। इस प्रदर्शन को कांग्रेस, एनसीपी, समाजवादी पार्टी आदि ने समर्थन दिया था। नागरिकता कानून के खिलाफ सोशल मीडिया में अभियान चला रहे अभिनेता खुले में विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। फिल्म अभिनेता फरहान अख्तर, अभिनेत्री स्वरा भास्कर, फिल्मकार अनुराग कश्यप, कबीर खान जैसी फिल्मी हस्तियां गुरुवार के प्रदर्शन में शामिल हुईं। इससे पहले फरहान अख्तर ने कहा था कि वे संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए सड़क पर उतरेंगे, क्योंकि सिर्फ सोशल मीडिया पर गुस्सा जाहिर करने का वक्त अब निकल चुका है। इसके आयोजकों ने मैदान में लगे सभी राजनीतिक झंडों को हटवा दिया था। प्रदर्शन को देखते हुए अगस्त क्रांति मैदान के आसपास की सभी दुकानों को बंद करवाया गया, ट्रैफिक भी डाइवर्ट कर दिया गया। मुंबई… Continue reading अगस्त क्रांति मैदान में जुटे हजारों लोग

और लोड करें