गाय, गोबर और गोरुत्वकवच

बचपन से ही गाय के साथ मेरा ही नहीं मेरी आयु के हर व्यक्ति का बहुत करीबी संबंध रहा है। जब छोटे थे तो रात को सोते समय मेरी मेरी मां ‘आई श्यामा गाय हमारी तू मुझको लगती है प्यारी’ लोरी सुनाया करती थी।