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शर्म और संवेदना दोनों खत्म!

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दिवंगत नेता डीपी त्रिपाठी ने एक बार कहा था कि नेता होने के लिए दो अनिवार्य गुणों की जरूरत है- अकल्पनीय चापलूसी और असीमित बेशर्मी! पहला गुण नेता होने की निजी जरूरत है, लेकिन दूसरा...

हमारे गांवः भगवान भरोसे?

हमारे टीवी चैनल और अंग्रेजी अखबार शहरों की दुर्दशा तो हमें काफी मुस्तैदी से बता रहे हैं लेकिन देश के एक-दो प्रमुख राष्ट्रीय स्तर के हिंदी अखबार हमें गांवों की भयंकर हालत से भी परिचित करवा रहे हैं। मैं...

कोरोना: घटे टेस्ट, कम हुए केस!

नई दिल्ली। देश में लगातार चार दिन तक चार लाख से ज्यादा केसेज आने के बाद ऐसा लग रहा है कि राज्यों ने अचानक टेस्टिंग में कमी कर दी, जिससे कोरोना संक्रमण के केसेज कम हो गए। रविवार को...

अपने मोदीजी अब गिरधर गमांग!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज किस मनोदशा में होंगे? अपना मानना है गिरधर गमांग की मनोदशा में। सन् 1999 में ओडिसा में आदिवासी गिरधर गमांग मुख्यमंत्री थे। वे भाग्य से सीएम बने लेकिन बुद्धी, समझ में उनका भगवान मालिक! अक्टूबर...

मोदीजी, बुद्धि उधार लीजिए, मानिए ये सुझाव

वैसे पहले आईटम से लगा होगा कि मैं आज व्यंग्य के मूड में हूं। लेकिन ‘हम’ मानवता के लिए इतनी बड़ी त्रासदी बन चुके है कि बार-बार सोचना होता है कि भारत के प्रधानमंत्री को कैसे गंभीर बनाया जाए?...
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बड़े दिमाग की छोटी खोपड़ी!

कलियुग ने बुद्धि-ब्रेन को छोटा बनाया है। वह गुलामी में घिस कर छोटी हुई है। गुलामी और भक्ति से...
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